Monday, July 22, 2024
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‘नमाज़ पढ़ने के लिए समय क्यों नहीं दिया?’: यूपी सरकार ने बढ़ाए मदरसों में पढ़ाई के घंटे तो भड़के मुल्ला-मौलवी, अब राष्ट्रगान भी हुआ अनिवार्य

राज्य सरकार द्वारा तय किए गए इस शेड्यूल पर उत्तर प्रदेश मदरसा बोर्ड के अध्यक्ष डॉ इफ्तिखार जावेद ने कहा है कि राज्य सरकार ने मदरसा शिक्षा की गुणवत्ता को बढ़ाने के लिए यह निर्णय लिया है।

शनिवार (1 अक्टूबर, 2022) से उत्तर प्रदेश के मदरसों में होने वाली पढ़ाई का शेड्यूल बदल गया है। अब राज्य के सभी मदरसों में एक घंटे अधिक यानी 6 घण्टे पढ़ाई होगी। उत्तर प्रदेश मदरसा बोर्ड द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार, अब मदरसों में पढ़ाई के लिए सुबह 9 बजे से दोपहर 3 बजे तक का समय तय हुआ है। मदरसों में पढ़ाई के इस नए शेड्यूल को लेकर जहाँ एक ओर योगी सरकार की वाहवाही हो रही है। वहीं, इस शेड्यूल में नमाज का वक्त नहीं होने के कारण विरोध के स्वर भी सुनाई दे रहे हैं।

दरअसल, उत्तर प्रदेश राज्य मदरसा शिक्षा परिषद की ओर से जारी दिशानिर्देशों के अनुसार अब सभी मदरसों में 6 घण्टे पढ़ाई होना अनिवार्य है। अब तक मदरसों में 5 घण्टे ही पढ़ाई होती थी। नए निर्देशों के अनुसार, मदरसों में पढ़ाई शुरू होने से प्रतिदिन दुआ के साथ ही राष्ट्रगान को भी अनिवार्य किया गया है। इस शेड्यूल के अनुसार, मदरसों में सभी कक्षाएँ सुबह 9 बजे से दोपहर 12 बजे तक चलेगीं। इसके बाद 30 मिनट का लंच ब्रेक होगा और फिर कक्षाएँ 12:30 से शुरू होकर दोपहर 3 बजे तक चलेंगी।

राज्य सरकार द्वारा तय किए गए इस शेड्यूल पर उत्तर प्रदेश मदरसा बोर्ड के अध्यक्ष डॉ इफ्तिखार जावेद ने कहा है कि राज्य सरकार ने मदरसा शिक्षा की गुणवत्ता को बढ़ाने के लिए यह निर्णय लिया है। मदरसा शिक्षा को बेहतर बनाने के लिए लगातार कदम उठाए जा रहे हैं।

हालाँकि, मौलवियों का कहना है कि इस शेड्यूल में मदरसा में पढ़ने वाले छात्रों को नमाज के लिए टाइम नहीं दिया गया है। मुस्लिम समाज का एक तबका, खासकर कुछ मौलाना इसका विरोध कर रहे हैं। मौलाना सुफियान निजामी ने मदरसों में एक घंटा ज्यादा पढ़ाई कराने के निर्देश पर एतराज जताया है।

मौलाना सुफियान निजामी ने कहा है कि पढ़ाई के समय में बढ़ोतरी करने से समस्याएँ उत्पन्न होंगी। उन्होंने कहा कि मदरसों में पढ़ने और पढ़ाने वाले नमाज भी पढ़ते हैं और मदरसों के समय में जो बदलाव किया गया है, उससे मदरसों से जुड़े लोगों की नमाज पर असर पड़ेगा। मौलाना निजामी ने यह भी कहा है कि मदरसा बोर्ड और उसमें काम कर रहे लोगों को इस फैसले पर दोबारा विचार करना चाहिए।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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