Homeदेश-समाजअयोध्या पर फैसले के बाद 8275 भड़काऊ पोस्ट, यूपी पुलिस ने 77 को किया...

अयोध्या पर फैसले के बाद 8275 भड़काऊ पोस्ट, यूपी पुलिस ने 77 को किया गिरफ्तार

उत्तर प्रदेश पुलिस की तरफ से जारी बयान में कहा गया कि दो दिन में 8275 सोशल मीडिया पोस्ट के ख़िलाफ़ कार्रवाई की गई है। इनमें से 4563 पोस्ट पर रविवार (10 नवंबर) को ही कार्रवाई की गई।

अयोध्या भूमि विवाद मामले पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद उत्तर प्रदेश पुलिस ने अब तक विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफार्मों पर आपत्तिजनक पोस्ट करने के 34 मामले दर्ज किए हैं। इस संबंध में 77 लोगों को गिरफ्तार किया है।

जानकारी के अनुसार, उत्तर प्रदेश पुलिस की तरफ से जारी बयान में कहा गया कि दो दिन में 8275 सोशल मीडिया पोस्ट के ख़िलाफ़ कार्रवाई की गई है। इनमें से 4563 पोस्ट पर रविवार (10 नवंबर) को ही कार्रवाई की गई। पुलिस विभाग की सोशल मीडिया निगरानी शाखा ने रविवार को 22 मुक़दमे दर्ज किए और 40 लोगों को हिरासत में लिया। एडीजी लखनऊ जोन पीवी रामाशास्त्री के मुताबिक, शनिवार देर रात तक ही 37 लोगों को हिरासत में लिया गया था। इसके अलावा फैसले पर खुशी जताने के लिए आतिशबाजी करने को लेकर भी सात लोगों को हिरासत में लिया गया है।

ख़बर के अनुसार, फ़ैसले के अगले दिन यानी रविवार (10 नवंबर) को 5 हज़ार से अधिक बारावफात जुलूस निकलनी थी। इस चुनौती से भी यूपी पुलिस ने बगैर किसी विवाद के पार पा लिया। बीते 48 घंटों ने यूपी पुलिस की साइबर पेट्रोलिंग के प्लान पर सफलता की मुहर लगा दी, जिसके चलते प्रदेश में शांति और सुरक्षा बनी रही।

बता दें कि सीएम योगी आदित्यनाथ तड़के उठ जाते हैं, लेकिन शनिवार (9 नवंबर) को योगी आदित्यनाथ काफ़ी पहले उठे और अपना पूजा-पाठ संपन्न कर राज्य की क़ानून-व्यवस्था की समीक्षा में लग गए। शनिवार सुबह एक बार फिर से योगी आदित्यनाथ ने डीजीपी ओपी सिंह से फोन पर बात की और पूरे राज्य के हालात का जायजा लिया।

गौरतलब है कि करीब 500 साल पुराना अयोध्या विवाद शनिवार को आए सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले से समाप्त हो गया है। सुप्रीम कोर्ट की पॉंच जजों की पीठ ने 1045 पन्नों के अपने फैसले में विवादित जमीन रामलला को सौंप दी है। साथ ही मुस्लिम पक्ष को मस्जिद बनाने के लिए 5 एकड़ जमीन उपलब्ध कराने का निर्देश भी सरकार को दिया है।

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

अखिलेश सरकार में हुए 62+ हत्याओं को याद करा रहा ‘न भूले थे, न भूले हैं, न भूलेंगे’ पोस्टर: मुजफ्फरनगर दंगों की बरसी पर...

मुजफ्फरनगर दंगों की बरसी पर उत्तर प्रदेश के कई शहरों में ‘न भूले थे, न भूले हैं, न भूलेंगे’ लिखे पोस्टर लगा गए हैं। इन पोस्टर्स ने 2013 की उस भयावह हिंसा की याद फिर ताजा कर दी है।

हैशटैग लगाओ, दुनिया बदलो… कितना आसान है न? क्या सोशल मीडिया लोकतंत्र को बर्बाद कर रहा है?

लोकतंत्र इंसान की कमियों को स्वीकार कर समझौतों से चलता है। लेकिन सोशल मीडिया का अनियंत्रित दौर हर छोटी कमी को भ्रष्टाचार बताकर लोकतंत्र की बुनियाद पर चोट कर रहा है। कैसे आज का सोशल मीडिया और डिजिटल यूटोपियनवाद हमारी लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए सबसे बड़ा खतरा बन चुका है।
- विज्ञापन -