Homeदेश-समाजउत्तर प्रदेश: ग्राम प्रधानी जीतने वाले रकमुद्दीन समेत 5 गौहत्या में गिरफ्तार, चुनावी जीत...

उत्तर प्रदेश: ग्राम प्रधानी जीतने वाले रकमुद्दीन समेत 5 गौहत्या में गिरफ्तार, चुनावी जीत पर ‘बीफ’ पार्टी का किया था वादा

इससे पहले उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव के नतीजे आने के बाद दो जगहों से कथित तौर पर खुलेआम पाकिस्तान के समर्थन में नारे सुनाई देने का मामला सामने आया था।

उत्तर प्रदेश में हाल ही में पंचायत चुनाव संपन्न हुए हैं। इन चुनावों में जीत हासिल करने वाले सोनभद्र जिले के बरवाखड़ गाँव के नवनिर्वाचित प्रधान रकमुद्दीन को शुक्रवार को गिरफ्तार किया गया। एक अधिकारी के अनुसार रकमुद्दीन के अलावा चार अन्य लोग भी गौहत्या के आरोप में गिरफ्तार किए गए हैं।

स्थानीय नागरिकों के मुताबिक, उसने कथित तौर पर चुनाव जीतने पर मतदाताओं को बीफ पार्टी देने का वादा किया था। गुरुवार (6 मई 2021) की देर रात बीफ पार्टी और गौहत्या की खबर जैसे ही ग्रामीणों को लगी तो उन्होंने इसकी सूचना पुलिस को दी। एक पुलिस अधिकारी ने बताया है कि गौहत्या के आरोप में ग्राम प्रधान को चार अन्य लोगों के साथ गिरफ्तार किया गया।

जिले के एसपी अमरेन्द्र प्रसाद सिंह ने बताया कि पुलिस ने घटनास्थल से संदिग्ध माँस, जानवरों की खाल और कत्ल के सामानों को बरामद किया गया है। पाँच लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। ग्राम प्रधान के अलावा अकरम अली, साहेब जान, नजमुल और रहीस चार अन्य आरोपित हैं।

इस घटना के बाद से ग्रामीणों में काफी आक्रोश है। वहीं गौहत्या की जानकारी मिलने के बाद भाजपा कार्यकर्ताओं सहित बजरंग दल, विश्व हिंदू महासंघ और विश्व हिंदू परिषद के कुछ नेता भी अपना विरोध दर्ज कराने के लिए मौके पर पहुँचे थे। जानकारी के मुताबिक, गाँव का माहौल काफी तनावपूर्ण बना हुआ है।

गौरतलब है कि इससे पहले उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव के नतीजे आने के बाद दो जगहों से कथित तौर पर खुलेआम पाकिस्तान के समर्थन में नारे सुनाई देने का मामला सामने आया था। रिपोर्टों के मुताबिक एक मामला सीतापुर के थानगाँव के बेलौता का है। वहीं अमेठी के रामगंज के मंगरा से एक वीडियो सामने आया था जिसमें देशविरोधी गाने तेज आवाज में बजते सुनाई दिए। इन दोनों घटनाओं का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पुलिस ने केस दर्ज करके पड़ताल शुरू की थी।

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

अखिलेश सरकार में हुए 62+ हत्याओं को याद करा रहा ‘न भूले थे, न भूले हैं, न भूलेंगे’ पोस्टर: मुजफ्फरनगर दंगों की बरसी पर...

मुजफ्फरनगर दंगों की बरसी पर उत्तर प्रदेश के कई शहरों में ‘न भूले थे, न भूले हैं, न भूलेंगे’ लिखे पोस्टर लगा गए हैं। इन पोस्टर्स ने 2013 की उस भयावह हिंसा की याद फिर ताजा कर दी है।

हैशटैग लगाओ, दुनिया बदलो… कितना आसान है न? क्या सोशल मीडिया लोकतंत्र को बर्बाद कर रहा है?

लोकतंत्र इंसान की कमियों को स्वीकार कर समझौतों से चलता है। लेकिन सोशल मीडिया का अनियंत्रित दौर हर छोटी कमी को भ्रष्टाचार बताकर लोकतंत्र की बुनियाद पर चोट कर रहा है। कैसे आज का सोशल मीडिया और डिजिटल यूटोपियनवाद हमारी लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए सबसे बड़ा खतरा बन चुका है।
- विज्ञापन -