Tuesday, October 27, 2020
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BHU: 10-12 आज़ादी गैंग सदस्यों की खुली पोल, CAA-NRC के समर्थन में दिखी बड़ी भीड़

चंद छात्रों को छोड़कर ज़्यादातर BHU के छात्र CAA के समर्थन में हैं। आज भी छात्रों ने CAA के समर्थन में जुलुस निकाला, जिसे प्रशासन ने मुख्य द्वार बंद कर रोक दिया लेकिन छात्रों ने कैंपस में ही महिला महाविद्यालय से मुख्य द्वार तक...

अब मीडिया गिरोह द्वारा ‘शीरोज’ के रूप में उछाली गई लड़कियों की सच्चाई सामने आ चुकी है। जिहाद और आतंकवाद समर्थक केरल की लदीदा और आयशा रेना की पोल खुल चुकी है और उनकी भी जिन्होंने बाकायदा इसकी प्लानिंग की थी। जिन जामिया और अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के समर्थन में देश के अन्य छात्रों को ये मीडिया गिरोह खड़ा कर, उनके कन्धों पर बंदूक रखकर हिंसा और सत्ता विरोध का नाटक करने वाला था, उसकी भी हवा निकल चुकी है लेकिन वामपंथी और कॉन्ग्रेसी तंत्र ने हार नहीं मानी है। आखिरी जोर आजमाइस जारी है और देश के खासतौर से गुमराह मजहबी लोग और छात्र इनके द्वारा फैलाए झूठ का शिकार होकर खुद को ही नुकसान पहुँचा रहे हैं।

इसे समझने के लिए आपको कल काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के बाहर का नज़ारा दिखाना चाहता हूँ। सोमवार (16 दिसंबर) को BHU के सिंहद्वार पर जॉइंट एक्शन कमिटी के बैनर तले कुछ वामपंथी संगठनों के लोग थे जो CAA के विरोध में जुलुस निकाल रहे थे। उसी समय बहुत से BHU के छात्र ऐसे भी थे, जो देश के इस कानून के साथ थे। ऐसे समर्थक छात्रों ने एक बड़ी सभा की, कानून के समर्थन में अपनी बात रखी लेकिन दूसरों को गोदी मीडिया कहने वाली यह वामपंथी-कॉन्ग्रेसी विचारधारा से पोषित गिरोह ऐसे छात्रों को नजरअंदाज करती है और कल भी यही किया। उन्हें जो करना था, वही किया। वामपंथी-कॉन्ग्रेसी एजेंडे के तहत उस विरोध के आंदोलन को उन्होंने हाईलाइट किया, जिसे वामपंथी छात्रों द्वारा आयोजित किया गया था। छात्रों ने ही ऑपइंडिया को बताया कि यह पूरा विरोध प्रदर्शन वामपंथी संगठन जॉइंट एक्शन कमिटी के द्वारा चलाया गया।

CAA और NRC के समर्थन में BHU के छात्र

जॉइंट एक्शन कमिटी सिर्फ BHU में ही नहीं बल्कि कई और विश्वविद्यालयों में भी है। जिसका काम ही है देशविरोधी गतिविधियों को संचालित करते हुए विरोध प्रदर्शन करना। इस जॉइंट एक्शन कमिटी में वामपंथी संगठन भगत सिंह छात्र मोर्चा, आइसा और कॉन्ग्रेस का छात्र संगठन जो अब BHU में पूरी तरह बिखरा हुआ है, के लोग शामिल हैं। BHU के ही विभिन्न विभागों के CAA समर्थक छात्रों ने बताया कि इनका सपोर्ट कर रहे विश्विद्यालय के ही कुछ वामपंथी और JNU के प्रोफ़ेसर हैं, जो ऐसे विरोध प्रदर्शनों को अक्सर हवा देते हैं।

जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय और अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में छात्रों पर हुए लाठीचार्ज के विरोध में बीएचयू के सिंहद्वार पर सोमवार को जिन संगठनों ने विरोध प्रदर्शन किया, उनके नाम से ही आप काफी कुछ समझ जाएँगे, ये नाम हैं- आइसा, भगत सिंह छात्र मोर्चा आदि। इनसे जुड़े छात्रों ने कहा कि छात्रों पर पुलिसिया कार्रवाई पूरी तरह गलत है। इस दौरान ‘हमें चाहिए आजादी’ के चिर-परिचित नारे भी लगाए गए। किससे-किसको आजादी चाहिए, ये आप कई और मंचों से भी सुन चुके हैं।

जॉइंट एक्शन कमिटी के बैनर तले प्रदर्शन करते वामपंथी संगठन

जॉइंट एक्शन कमिटी के तहत ये वही लोग हैं, जो कुछ दिन पहले ही डॉ. फिरोज खान के संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान संकाय में नियुक्ति के समर्थन में भी जुलुस निकाल रहे थे। जिसे तब भी मीडिया के एक धड़े ने भारी समर्थन देते हुए लाइव दिखाया था और जो खान की नियुक्ति का विरोध कर रहे थे; उन्हें धर्मान्ध, ब्राह्मणवाद समर्थक से लेकर, छात्र के नाम पर कलंक भी कहा गया था।

कल शाम को फिर से ‘प्रोफेशनल’ धरना-विरोध-प्रदर्शन करने वाले छात्रों द्वारा नागरिकता संशोधन कानून के विरोध में ब्राह्मणवाद से लेकर आजादी और कई तरह की डिमांड की जा रही थी। इन 10-12 ‘प्रोफेशनल’ प्रदर्शनकारियों का साथ किसने दिया, वो भी मुख्यद्वार पर? इन्हें साथ मिला ऐसे छात्रों का, जो मुख्यद्वार पर खड़े थे और जो मुद्दे और सच से ही अनजान थे।

जॉइंट एक्शन कमिटी के सदस्य

ज़्यादातर छात्र कल जामिया में पुलिस के द्वारा किए गए लाठीचार्ज के कारण इस आशंका में बुलाए गए थे कि कल आपको भी पुलिस पिटेगी तो आप क्या करेंगे? और तो और, विरोध करने वाले अधिकांश छात्र-छात्राएँ, BHU के न होकर बाहरी थे। ऐसा BHU के छात्रों ने ही ऑपइंडिया को बताया और कइयों के नाम भी गिनाए जैसे- इस विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व करने वालों में आम आदमी पार्टी से जुड़े हुए संदीप पांडेय, आइसा के आशुतोष कुमार, प्रियांक मणि, अनुपम कुमार, आदर्श पांडेय और शुभम सुभाष राव से लेकर आयुषी जैसे जॉइंट एक्शन कमिटी के कई लोग थे।

विरोध कर रहे वामपंथी संगठन के सदस्य

विरोध कर रहे जॉइंट एक्शन कमिटी के सदस्यों ने वहाँ मौजूद छात्रों को भी अधूरा सच बताया। उन्होंने कहा, “कई दिनों से छात्र जामिया मिलिया, अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी समेत देश भर में आंदोलन चला रहे हैं। इस क्रम में पुलिस ने जामिया के अंदर घुसकर लाइब्रेरी, हॉस्टल और बाथरूम में भी लाठी चार्ज किया। गोलियाँ चलाई गई। भारत जैसे लोकतांत्रिक देश में पुलिस द्वारा इस तरह की गुंडागर्दी बहुत ही शर्मनाक है।” जबकि इसका सच कल ही सामने आ गया था कि तोड़फोड़, आगजनी और हिंसा की शुरुआत किसने की। किसने देशविरोधी और जिहादी नारे लगाए। लेकिन वामपंथी मीडिया गिरोह को सच बोलना कहाँ हैं!

आइसा के नेतृत्व में भी यही लोग प्रदर्शन करते हैं , तस्वीर हाल ही की है , यहाँ भी इन्हें ब्राह्मणवाद से आजादी चाहिए

इनके पूरे विरोध-प्रदर्शन को मीडिया ने इस तरह से चलाया मानो दिल्ली की जामिया मिलिया इस्लामिया और जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के बाद अब बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के छात्र भी नागरिकता संशोधन अधिनियम और राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर (एनआरसी) के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। जबकि पूरा सच यह नहीं है। पूरा सच यह है कि इसी कानून के समर्थन में विरोध वालों के मुकाबले ज्यादा छात्र थे।

दूसरी सच्चाई यह है कि कल इस विरोध प्रदर्शन की स्पीच सुनेंगे तो सच की कई और परतें भी खुलेंगी। विरोध करने वालों ने जो कहा वो भी पढ़िए, “पुलिस ने जामिया के छात्राओं के साथ दुर्व्यवहार भी किया है। यह लड़ाई देश बचाने की लड़ाई है, जिसमें सभी को साथ आना चाहिए। देश को हिटलर की जर्मनी की तरह बनाया जा रहा है। आज मुस्लिमों के साथ ऐसा व्यवहार किया जा रहा है, सरकार उन्हें आतंकवादी बता रही है और उन पर गोलियाँ चलाई जा रही है। अगर आज हम खड़े न हुए तो कल देश बर्बाद हो जाएगा। यह सरकार जब तक साम्प्रदायिक फासीवादी नागरिकता संसोधन कानून को वापस नहीं लेती है, तब तक यह लड़ाई जारी रहेगी।” अब इस स्पीच को पढ़कर आप अंदाजा लगा सकते हैं कि ये कौन लोग हैं। और ऐसा कब से करते आ रहे हैं और क्यों?

BHU में विरोध प्रदर्शन के उलट दूसरी तस्वीर भी देखी जाए। विरोध प्रदर्शन के दौरान ही नागरिकता संशोधन कानून के समर्थन में भी BHU के तमाम दूसरे छात्र भी आ गए। इन्होंने इस कानून के समर्थन में और वामपंथी संगठन जॉइंट एक्शन कमिटी के विरोध में प्रदर्शन किया। मामला बढ़ते-बढ़ते दोनों ग्रुप में नोकझोंक तक पहुँच गई। हालाँकि, किसी तरह पुलिस ने स्थिति को काबू में किया। CAA कानून के समर्थन में भी BHU के बड़े ग्रुप ने मार्च निकाला। उन्होंने कहा, “CAA देशहित में है और इसका स्वागत होना चाहिए। विरोध करने वाले संविधान का विरोध कर रहे हैं और इन्हें ब्राह्मणवाद से आजादी चाहिए, इन्हें हिंदुत्व से आजादी चाहिए। ऐसे लोगों को देशहित से कोई मतलब नहीं है। हर अच्छी चीज का विरोध करना ही इनका काम है।”

अब बात मीडिया की। फिरोज खान के समर्थन में निकले जुलुस को मीडिया के एक धड़े ने महान आंदोलन के रूप में प्रस्तुत किया था। उसी मीडिया गिरोह ने CAA विरोध के जुलूस को कवर भी किया और यह भी कहा कि विरोध करने वाले सभी BHU के छात्र हैं। जबकि सच यह है कि जॉइंट एक्शन कमिटी में ज़्यादातर प्रोफेशनल विरोध प्रदर्शन करने वाले वामपंथी छात्र थे। उनमें से BHU के कुछ ही गिने-चुने। सच्चाई यह भी है कि ज़्यादातर विरोध करने वाले महात्मा गाँधी काशी विद्यापीठ और हरिश्चंद पीजी कॉलेज के वामपंथी संगठनों के छात्र थे, जो BHU गेट पर मौजूद थे।

मीडिया गिरोह को ये नैरेटिव शूट करता है। इसलिए पहले पूरा तंत्र मिलकर अफवाह उड़ाता है। लोगों को भरमाता है। जब झूठ अपनी जड़ें जमा लेता है तो उसे इस तरह से पेश करता है, जैसे ये उन्हीं की आवाज हो, जो खुद शिकार हुए हैं।

कल शाम विरोध-प्रदर्शन में जो भी थे, उनमें उन सभी अफवाहों के बैनर-पोस्टर लहरा रहे थे, जो दरअसल हुआ ही नहीं। न जामिया में कोई मरा और न ही पुलिस के लाइब्रेरी में घूसकर तोड़फोड़ और बस के आगजनी की बात सच थी। मनीष सिसोदिया, अमानतुल्लाह जैसे लोग जो भ्रम और झूठ फैलाए थे, उन पर FIR दर्ज हुआ है। लेकिन वामपंथी तंत्र की तरह सच सामने आने पर भी इन नेताओं ने माफ़ी नहीं माँगी है। बाकी मीडिया गिरोह भी भ्रमित छात्रों के विरोध को जनता की आवाज बता चुका है। लेकिन किसी ने भी छात्रों को सच बताना ज़रूरी नहीं समझा। स्टूडियो से रैली वाले दौर में मीडिया गिरोह खुद ही नफ़रत और झूठ को हवा देने में लगा है और दूसरों से ये अपील करता है कि टीवी मत देखिए, अखबार मत पढ़िए। हालाँकि इसमें भी उनका प्रोपेगेंडा है। प्रोपेगेंडा यह है कि अगर आप TV देखेंगे, पेपर या वेबसाइट पढ़ेंगे तो उन्हें सच पता चल जाएगा और फिर वो गिरोह के झूठ और अर्धसत्य की दुकान से मुँह फेर लेंगे, जो यह नहीं चाहते।

ये पूरा वामपंथी तंत्र इतना मजबूत है कि पूरे देश में आसानी से मैनेज कर लेता है कि कब विरोध होगा और कब हिंसा और तोड़फोड़। क्या दिखाना है और क्या छिपाना है, ये भी बड़ी चालाकी से तय हो जाता है फिर बाकी लोग इस झूठ का पूरे जी-जान से प्रचार करते हैं।

ये पूरा गिरोह आपको कभी ये नहीं बताएगा कि ये खुद ही मजहब विशेष में डर पैदा कर रहे हैं। ये नहीं बताएँगे कि उन जेहादी लड़कियों को जो कभी याकूब मेमन से लेकर जिहाद का खुला आह्वान कर चुकी हैं, जिनके नेतृत्व में पुलिस और पत्रकारों पर हमले भी हुए हैं, उन्हें ‘शीरोज’ बनाकर ये क्यों प्रस्तुत करते हैं। इनका तरीका बहुत सिंपल है – जो बात जिस तक पहुँचानी थी, वो पहुँच गई, अब जब सारा सच सामने आ गया तो चुप्पी साध लो। झूठ को सच की तरह परोस दो। सच को झूठ कहना है क्योंकि सत्ता के खिलाफ नैरेटिव बिल्डिंग में इस तरह का मैनेजमेंट जरूरी है। यह गिरोह इस वर्किंग कल्चर को ठीक से जानता है।

ऑपइंडिया ने BHU के विभिन्न छात्रों से इस पूरे मुद्दे पर बात की। कई छात्रों से हमने पूछा कि CAA में ऐसा क्या है, जिसका विरोध किया जाए? इस सवाल पर ज़्यादातर छात्रों का कहना था कि वे तो समर्थन में हैं। देश के साथ हैं। जो छात्र इसके विरोध में दिखे, उनसे भी हमने बात की। उनसे पता चला कि ज़्यादातर एक प्रचलित प्राइम टाइम से फैलाए गए अफवाहों के शिकार हुए हैं। यह वही प्राइम टाइम है, जो स्टूडियो से देश विरोधी प्रोग्राम के लिए जाना जाता है। जहाँ से झूठ को भविष्य और उसके काल्पनिक डर की खोल में लपेटकर छात्रों को ही नहीं बल्कि पूरे देश को बहकाया जाता है। इस बात को कई छात्रों ने भी स्वीकारा।

प्रोपेगेंडा में फँस गए छात्रों ने बताया कि मुस्लिमों को मोदी सरकार देश से बाहर कर रही है और उनकी नागरिकता छीन रही है। जबकि इस कानून में ऐसा कुछ भी नहीं है। लेकिन सच से किसे वास्ता! गिरोह का प्रोपेगेंडा प्रचार तंत्र इतना मजबूत है कि बहुत कम समय में झूठ को देश का सच बनाने में माहिर है। कुछ पूछने पर वही हिटलर की बात करते मिलेंगे और उसके नाम पर डर फैलाते कि ऐसा भारत में भी होने जा रहा है। जबकि उन्हें पता है कि ये डर उन्होंने ही पैदा किया है और इस डर के बल पर ही हर तरह की हिंसा को जायज ठहराया है।

कल BHU के सिंहद्वार पर ही CAA के समर्थन कर रहे छात्रों ने माइक मीटिंग के दौरान ही, इस पूरे अफवाह तंत्र और देश विरोधी गतिविधि की पोल खोल दी। पतंजलि पांडेय, अरुण चौबे, अक्षय, देवेश ठाकुर, आनंद मोहन, शशिकांत जैसे BHU के सोशल साइंस और कला संकाय, विज्ञान संकाय, SVDV के कई छात्रों ने बताया कि वे कौन-कौन लोग हैं, जो BHU के नाम पर भ्रम फैला रहे हैं। इन छात्रों ने बताया कि जॉइंट एक्शन कमिटी के कई लोग BHU के बाहर के हैं और इनका BHU से कोई लेना देना नहीं है। जबकि मीडिया गिरोह ने जिस तरह से इन्हें कवर किया, वो आपको इस तंत्र के फैले हुए विस्तृत जाल के बारे में बताता है।

BHU के मुख्यद्वार पर CAA के समर्थन में माइक मीटिंग करते BHU के छात्र

चंद छात्रों को छोड़कर ज़्यादातर BHU के छात्र CAA के समर्थन में हैं। आज भी छात्रों ने CAA के समर्थन में जुलुस निकाला, जिसे प्रशासन ने मुख्य द्वार बंद कर रोक दिया लेकिन छात्रों ने कैंपस में ही महिला महाविद्यालय से मुख्य द्वार तक समर्थन रैली की। यह जुलुस कैंपस में ही महिला महाविद्यालय से छात्र संघ भवन होते हुए चंद्रशेखर आजाद की प्रतिमा के सामने आकर रुकी और यहीं पर एक सभा के साथ कार्यक्रम संपन्न किया गया।

मीडिया गिरोह ने इसे आज भी रिपोर्ट नहीं किया क्योंकि ये उनके नैरेटिव को शूट नहीं करता। छात्रों ने बताया, “BHU कभी भी देश विरोधी गतिविधियों का अड्डा नहीं रहा और न आज है।” वहाँ के ज़्यादातर छात्रों से बातचीत में हमने पाया कि उन्होंने इस कानून को पढ़ा है, न ये किसी विशेष मजहब के खिलाफ है और न ही देश के नागरिकों के खिलाफ। जो भी ऐसा कह रहे हैं वो झूठ फैला रहे हैं और वो ऐसे वामपंथी और कॉन्ग्रेसी संगठनों के विरोध में तथा देश एवं संविधान के साथ हैं। उनका कहना है कि वे किसी भी तरह की हिंसा का समर्थन नहीं करते और न करेंगे बल्कि कैंपस में अगर कोई ऐसा करने की कोशिश भी करता है तो उसे कामयाब नहीं होने देंगे।

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