Sunday, July 12, 2020
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हम मर जाएँगे पर कभी पाकिस्तान नहीं जाएँगे: कहानी उन हिन्दू शरणार्थियों की जो भारत में रहने के लिए सब छोड़ आए

"भारत में हिन्दू-मुस्लिम के बीच कोई भेदभाव नहीं है। लेकिन पाकिस्तान में तो हमको मुसलमान साथ खाने भी नहीं देते। होटलों में बर्तन-प्लेट में खाना नहीं देते। पॉलिथिन में देकर बाहर बैठकर खाने को कहते। टूटे-फूटे कप में चाय देते। हमसे कुत्तों से भी ख़राब व्यवहार करते हैं वहाँ। हिन्दुओं की वहाँ कोई इज्जत नहीं।"

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रवि अग्रहरि
तबियत से मस्त-मौला, तरबियत से बनारसी हूँ, बस यूँ समझिए कि ज़िन्दगी के नाटक का अहम किरदार हूँ मैं.... राजनीति, कला, इतिहास, संस्कृति, फ़िल्म, मनोविज्ञान से लेकर ज्ञान-विज्ञान की किसी भी परम्परा का विशेषज्ञ नहीं....

“बच्चे जाते हैं पढ़ने के लिए तो पहले कलमा पढ़ाते हैं। मंदिर जाना तो कब का छोड़ चुके हैं वहाँ बचे ही कितने हैं सब तोड़ देते हैं। जमीनों पर कब्ज़ा कर लेते हैं। बहन-बेटियाँ सुरक्षित नहीं। कुत्तों से भी बद्तर व्यवहार। न दुकाने खोल सकते हैं न कोई काम, कोई आएगा ही नहीं लेने, मर जाएँगे लेकिन लौट के नहीं जाएँगे, हमने भारत आने के लिए बहुत कुर्बानी दी है…” ये तो बस बानगी है, ये कहानी है पाकिस्तान से आए उन हिन्दू शरणार्थियों की, जो ऑपइंडिया से वहाँ के मुस्लिमों द्वारा ढाए जा रहे अत्याचार की भयावह हालात को बयाँ कर रहे हैं।

नागरिकता संशोधन विधेयक राज्यसभा से भी लम्बी बहस के बाद पास हो गया है। अब इस कानून के तहत पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान के गैर मुस्लिम प्रवासियों को भारतीय नागरिकता प्रदान करने का मार्ग प्रशस्त हो चुका है। जब संसद में बहस जारी था तो मैं उन शरणार्थियों से बात कर रहा था कि क्यों वे सभी भारत की नागरिकता चाहते हैं और क्यों उन्हें देना ज़रूरी है। इस बातचीत के दौरान उन लोगों ने ऐसा बहुत कुछ बताया जो आपको बेचैन कर सकता है।

हालाँकि, विपक्ष अंत तक लगा रहा कि बिल रुक जाए क्योंकि इसमें मुस्लिम शामिल नहीं हैं। और वामपंथी तो अब भी फर्जी मातम मना रहे हैं जबकि अमित शाह ने संसद के पटल पर कहा, “हम 6 धर्मों के लोगों को इस बिल में ला रहे हैं, तो कोई प्रशंसा नहीं है। मगर हमने मुस्लिमों को शामिल नहीं किया तो आप सवाल उठाए जा रहे हैं। इस बिल की वजह से कई धर्म के प्रताड़ित लोगों को भारत की नागरिकता मिलेगी लेकिन विपक्ष का ध्यान सिर्फ इस बात पर कि मुस्लिम को क्यों नहीं लेकर आ रहे हैं।”

मजनू टीला स्थित पाकिस्तान से आए हिन्दुओं का शरणार्थी कैंप

‘क्यों नहीं ला रहे हैं, उन्हें क्यों नहीं शामिल कर रहे’ इसका एक कारण तो गृहमंत्री अमित शाह बता चुके हैं। चलिए अब उन हिन्दू शरणार्थियों से मिलवाते हैं, जो पाकिस्तान के सिंध, कराची, हैदराबाद, मीरपुर आदि से जीने की आखिरी उम्मीद लेकर भारत आए हैं। और जानते हैं ‘वो कारण’ उन लोगों से, जो सही मायने में दहशत और खौफ की जिंदगी जी कर आए हैं यहाँ… एक खुशहाल, इज्जत भरी जिंदगी की उम्मीद लिए! विधेयक के पारित होने की सम्भावना ने ही मजनू टीला के पाकिस्तान से आए हिन्दू शरणार्थियों में कितनी ख़ुशी भर दी है।

हमने मजनू टीला में रहने वाले कई शरणार्थियों से बात की। उन सभी बिंदुओं पर जैसे पाकिस्तान से आप भारत क्यों आए हैं? वहाँ ऐसा क्या हुआ, जो यहाँ आना पड़ा? आपके परिवार के सब लोग यहीं हैं, या कुछ पीछे रह गए? क्या आपके पास कोई वीजा है, या आप किसी भी तरह भाग कर यहाँ आए हैं? यहाँ पर रहते हुए आपको क्या समस्या आ रही है? आप पूजा-पाठ कहाँ करते हैं? आपके कैंप में कोई मंदिर है? ये जो बिल पास होने वाला है, उसको ले कर आपकी क्या उम्मीदें हैं?

वहाँ रह रहे शरणार्थियों में जिनमें से लगभग सभी पाकिस्तान में मुस्लिमों द्वारा भयंकर रूप से प्रताणित हैं और किसी भी तरह से अपने मूल देश भारत में वैध तरीके से रहने के लिए आखिरी उम्मीद लेकर यहाँ पहुँचे हैं। सबसे पहले हमारी मुलाकात हुई उनसे, जो खुद के रहने के लिए ठौर बनाने को पत्थर तोड़ रहे थे। उन्होंने बताया कि आप हमारी समस्याओं पर बात करने आए हैं तो पहले मिल लीजिए उसी ‘नागरिकता’ से, जिसके लिए हम सब मोदी जी के ज़िन्दगी भर आभारी रहेंगे।

‘नागरिकता’ से मिला तो वहाँ उसकी माँ और दादी ने तो ‘भारत’ ‘भारती’ और ‘नागरिकता’ की एक अनोखी कहानी सुनाई। परिचय करते वक़्त जैसे ही मैंने ‘पाकिस्तानी हिन्दू’ कहा, वहीं उन्होंने मुझे टोक दिया कि नाम मत लीजिए उस देश का, ‘वो देश नहीं नरक’ है। ‘नागरिकता’ दरअसल इस कैंप के एक बच्ची का नाम है। उसकी दादी ने ऑपइंडिया को बताया कि उन्होंने अपने बेटे का नाम ‘भारत’ रखा था, तभी से उनके मन में था कि एक दिन वो भारत जरूर जाएँगी। उन्होंने अपनी बेटी का नाम ‘भारती’ रखा और अब अपनी पोती का नाम ‘नागरिकता’ रखा है। नागरिकता की माँ आरती से जब मैंने पूछा कि पाकिस्तान में रहने के दौरान उन्हें किस प्रकार की समस्याओं और परिस्थितियों का सामना करना पड़ा तो उन्होंने कहा कि उन्हें वहाँ पर कोई इज्जत नहीं मिलती थी। प्यास लगने पर उनके ग्लास में पानी नहीं दिया जाता था। वहाँ हिंदुओं की कोई इज्जत नहीं है।

नागरिकता ‘ अपनी दादी के साथ, रात को खाना बनाते शरणार्थी

कैंप के कई और लोगों से भी मुलाकात हुई। कुछ ने नाम बताया तो कुछ बचते रहे कि वीडियो पाकिस्तान पहुँच गया तो उनके परिजनों को, जिन्हें वो पाकिस्तान में ही छोड़ आए हैं, उनकी जान पर बन आएगी। भारत में आए हुए ज़्यादातर शरणार्थी किसान हैं, कुछ छोटे-मोटे दूकानदार जो फल वगैरह बेचते हैं। उनके परिजनों की सुरक्षा के लिए हमने कई नाम बदल दिए हैं।

दीनानाथ ने हमें बताया, “हम यहाँ आने के लिए बहुत क़ुरबानी दिए हैं, परिवार के कई लोग पाकिस्तान में ही हैं। भगवान उनको सुरक्षित रखे। हम यहाँ सरकार को बताने आए थे कि वहाँ हिन्दुओं के साथ क्या-क्या हो रहा है। पाकिस्तान के सभी हिन्दू भारत आना चाहते हैं, वहाँ कोई नहीं रहना चाहता। जिसे जब भी मौका मिलेगा, यहीं आ जाएगा, जो आएगा मर जाएगा लेकिन वापस जाएगा नहीं। अगर यहाँ आकर वहाँ गया तो मुसलमानों द्वारा मार दिया जाएगा।”

एक और शरणार्थी मीराबाई और उनकी माँ मैगी से ऑपइंडिया ने पूछा तो उन्होंने बताया, “बहुत कम कपड़ों में हम भारत आए तीर्थयात्रा के बहाने ताकि किसी को शक न हो। हमारी तो वहाँ 100 ‘किले’ की जमीन थी, जिस पर मुसलमानों ने कब्ज़ा कर लिया। हमारी बेटियों को मुसलमान उठा ले जाते हैं। वहाँ हम पूजा-पाठ भी नहीं कर सकते। करते भी हैं तो घर में छिपकर बड़े मंदिर नहीं जाते वहाँ खतरा ज़्यादा है, मुसलमान पीछा करते हैं। मारते-पीटते हैं, लड़कियों को उठा ले जाते हैं। लड़कियाँ घर में भी सुरक्षित नहीं। बाहर भेजना तो बहुत मुश्किल है।”

ताराचंद, बलदेवी और जमुना जैसे कई अन्य शरणार्थियों से भी बात हुई। ज़्यादातर वैलिड वीजा लेकर ही भारत आए हैं। उनके परिवार के बाकी लोगों को नहीं मिला, तो वे वहीं हैं। भारत आने के लिए सबने किसी तरह पैसे का जुगाड़ किया, कुछ सामान बेचे, कुछ ने गहने तो कुछ ट्रैक्टर भी बेचकर आए हैं कि जब जमीने ही अपनी नहीं रहीं तो ट्रैक्टर किस काम का।

कई लोगों ने बताया कि भारत में हिन्दू-मुस्लिम के बीच कोई भेदभाव नहीं है। जैसे कोई कहीं भी जा सकता है, साथ खा सकता है। लेकिन पाकिस्तान में तो हमको मुसलमान साथ खाने भी नहीं देते। होटलों में अपने बर्तन-प्लेट में खाना नहीं देंगे। पॉलिथिन में देकर बाहर बैठकर खाने को कहेंगे। या किसी टूटे-फूटे कप में चाय देंगे। हमसे कुत्तों से भी ख़राब व्यवहार करते हैं। हिन्दुओं की वहाँ कोई इज्जत नहीं है।

महिलाओं-लड़कियों पर अत्याचार के बारे में पूछने पर बोला कि क्या-क्या बताएँ? पहले भी बहुत बोल चुके हैं, लड़कियों की इज्जत बिलकुल सुरक्षित नहीं, बच्चियों-महिलाओं को घरों से खींचकर उठा ले जाते हैं, रेप करते हैं। मार डालते हैं। न वहाँ हमारी कोई संपत्ति सुरक्षित है और न हम! कोई भी मुसलमान कभी भी कब्ज़ा कर सकता है। थाने जाओ तो पुलिस सुनती नहीं। वो हमारे लिए थोड़े हैं, इस्लामी मुल्क है तो मुसलमानों की ही सुनेंगे।

जब मैंने पूछा कि पाकिस्तान की सरकार क्या कर रही है तो शरणार्थियों का कहना था हम तो नहीं जानते वहाँ कोई सरकार है, होगी भी लेकिन वहाँ हम हिन्दुओं की सुनवाई थोड़ी है? वो तो हमें वहाँ से मिटा देना चाहते हैं। जैसे भारत में सभी को अधिकार है, सबकी सुनवाई होती है, वहाँ ऐसा कुछ नहीं है। जब वो आपस में ही एक-दूसरे की मस्जिद बम से उड़ा देते हैं तो हमारे मंदिर कहाँ छोड़ेंगे। घर में ही पूजा कर लेते हैं लेकिन अपना धर्म कभी नहीं छोड़ा हमने। कई बार हमारे धर्म को नष्ट करने के लिए जब हम होटल खाना लेने गए तो गाय का मांस दे दिया। हमारे मवेशी खोल ले जाते हैं। गायों को ले जाकर काट कर खा जाते हैं। उनकी हत्या का पाप तो हमें भी लगता होगा कि हम गौमाता को बचा नहीं सके। जब हम खुद को ही नहीं बचा पा रहे तो गाय को कैसे बचाएँ! देखिए भारत में गौशाला बनाए हैं। गऊ माता की हम सेवा कर रहे हैं। भगवान भी सब देख ही रहा है, वहाँ के लिए हमें माफ़ कर देगा।

“हम तो कहते हैं कि हमें भारत की नागरिकता मिल जाए तो कम से कम हमारे बच्चे तो एक अच्छी ज़िन्दगी देख लें। वहाँ तो बच्चियों को हम पढ़ने भी नहीं भेजते, मुसलमान उठा ले जाएँगे। जो बच्चे जाते भी हैं तो उन्हें कलमा और कुरान पढ़ाते हैं ताकि इस्लाम कबूल कर ले, नहीं तो जबरदस्ती करते हैं। हम पाकिस्तान में होली-दीवाली क्या कोई भी त्यौहार नहीं मना सकते। मनाते भी हैं तो घरों में छिपकर या अपने मोहल्ले में ही, जहाँ मुसलमान नहीं होते वहाँ। शादीशुदा औरतें भी विधवा की तरह रहती हैं, सिन्दूर लगाने से उन्हें पता चल जाता है कि हिन्दू है तो भी उठा ले जाते हैं।”

लोग अपने घरों में भी मंदिर बना कर रोज पूजा-पाठ कर रहे हैं

कई महिलाओं ने बताया कि किसी तरह जान बचाकर भारत आए हैं। यहाँ पासपोर्ट से बेटा-बेटी दोनों को स्कूल भेज रही हूँ। यहाँ कुछ बन जाएगा तो इनका भविष्य अच्छा रहेगा। पाकिस्तान में तो हमारे बच्चे न कोई नौकरी पा सकते हैं और न ही कायदे से डॉक्टर या किसी बड़े पोस्ट पर जा सकते हैं। वहाँ तो जहाँ हम रहते हैं, कोई हिन्दू डॉक्टर भी नहीं है। इलाज में परेशानी होती है। महिलाओं को भी मजबूरी में मुस्लिम पुरुष डॉक्टर से ही इलाज कराना पड़ता है। भारत में तो कोई कुछ भी बन सकता है। लेकिन पाकिस्तान में ऐसा नहीं है।

ज़्यादातर शरणार्थी बस किसी तरह अपना सब कुछ छोड़कर थोड़े से पैसों और चंद कपड़ों में किसी तरह भारत आए और अब यहीं के होकर रह गए। सबकी उम्मीद यही है कि भारत की नागरिकता मिल जाए तो इज्जत की ज़िन्दगी क्या होती है, कम से कम यह तो जान जाएँ। एक ने तो यहाँ तक कहा कि भारत आकर हमें माता-पिता का प्यार मिल गया। ज़्यादातर हिन्दू शरणार्थी पाकिस्तान में पढ़-लिख नहीं पाए हैं। उनके अंदर भारत का नागरिक बनने की सम्भावना दिखने पर ख़ुशी भी थी लेकिन एक बड़ा दर्द अपने बिछड़े हुए उन परिजनों के लिए जो पाकिस्तान में छूट गए। जो भारत में हैं, वो चाहते हैं कि पाकिस्तान के उनके परिजन अपने पुरखों की गलती सुधारते हुए भारत आ जाएँ क्योंकि हम यहीं के हैं। वो अपना सब कुछ मुसलमानों को देकर भी यहाँ आने को तैयार हैं बस जान बच जाए और जो भारत में हैं उनका कहना है कि मर जाएँगे लेकिन पाकिस्तान नहीं जाएँगे।

हालाँकि, जहाँ ये शरणार्थी रह रहे हैं, वहाँ भी कोई बहुत सुखद स्थिति नहीं है। लेकिन जो नरक भोग कर पाकिस्तान से ज़िंदा भारत आ गए हैं वो बेहद खुश हैं। सभी का कहना है यहाँ कैसे 5-10 साल बीत गए, पता ही नहीं चला। कई संस्थाओं ने हमारी थोड़ी मदद की। आरएसएस के लोग आते हैं, कभी-कभी मदद के लिए। हमें तो पता भी नहीं था कि कहाँ रहें। उन लोगों ने कहा कि यमुना किनारे जहाँ जगह मिले बस जाओ, तो यहीं मजनू के टीला के पास बस गए। पर ये जगह तो शायद कभी कब्रिस्तान रही होगी। क्योंकि जब हमने अपने आशियाने बनाने को जहाँ-जहाँ गड्ढा खोदा, हर जगह से कहीं कंकाल तो कहीं हड्डियाँ निकलती थे। लगभग हर दिन बड़े-बड़े सांप हमारे घरों-टेंटों में घुस आते हैं। हमने पूजा-पाठ करके भंडारा किया, तो सब भूत भाग गए। शायद उन्हें लगा होगा कि सताए हुए लोगों को और कितना सताएँ! पहले डर लगता था लेकिन अब खुश हैं कि नागरिकता मिलने वाली है हमारे दुःख दूर होंगे। हमें कहीं बसा दिया जाए, एक छोटा सा मकान मिल जाए तो हम बहुत मेहनती हैं, काम करके खा लेंगे, जी लेंगे।

कैंप में स्थापित मंदिर में विराजमान देवता

शरणार्थियों ने वहाँ पर एक छोटा सा मंदिर भी बना लिया है। जिसमें हनुमान जी की मुख्य प्रतिमा है, साथ ही दुर्गा जी, शिवलिंग आदि भी स्थापित है। पूछने पर बताया कि अब यही बेड़ा पार लगाएँगे। हम भगवान की शरण में हैं। कइयों ने तो नरेंद्र मोदी को ही भगवान कह दिया। पूछने पर बताया कि बस वही आखिरी उम्मीद हैं। जब हमने उनके बारे में सुना तो भारत आए, अब वो हमारे लिए ये बिल लाए हैं, जिससे हमें बहुत ख़ुशी है। हम उन्हें कभी नहीं भूल सकते। ज़्यादातर शरणार्थी आस-पास ही छोटे-मोटे कारोबार कर, मोबाइल कवर आदि बेच अपना गुजारा कर रहे हैं।

शरणार्थियों की दुकानें

शाम होते-होते आरती का समय हो चुका था। शरणार्थी अब अपने छोटे-छोटे मंदिरों में आरती में शामिल हो रहे थे। चलते-चलते उन्होंने एक निवेदन यह भी किया कि हमारा वीडियो पाकिस्तान पहुँच गया तो परिजनों को खतरा हो सकता है। लेकिन अभी तक छिपकर रह रहे थे, पर आज बोलने का दिन है, इसलिए अब जो होगा सो होगा। इतना कुछ झेला-क़ुरबानी दी तो अब क्या डरना। फिर भी कई शरणार्थी, जिनके ज़्यादातर परिजन पाकिस्तान ही छूट गए हैं, उनकी सलामती के लिए चिंतित दिखे, उनकी इच्छा का सम्मान करते हुए हमने कुछ बातों का यहाँ जिक्र भर किया है।

कुल मिलाकर पाकिस्तान जो एक इस्लामी देश है, वहाँ हिन्दुओं के हालात को बहुसंख्यक मुसलमानों ने बद से बद्तर कर दिया है। वे वहाँ नरक में हैं और उनकी बस एक आखिरी उम्मीद भारत ही है। और नागरिकता संशोधन बिल के माध्यम से उनकी आवाज अगर किसी ने सुनी है, तो वह मोदी सरकार है। जिसके नाम का जाप ये सभी शरणार्थी मन्त्र की तरह करते हैं।

देखें ग्राउंड रिपोर्ट का वीडियो:

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