Monday, September 21, 2020
Home देश-समाज इस उन्माद, मजहबी नारों के पीछे साजिश गहरी... क्योंकि CAA से न जयंती का...

इस उन्माद, मजहबी नारों के पीछे साजिश गहरी… क्योंकि CAA से न जयंती का लेना है और न जोया का देना

विरोधियों का कहना है कि यह कानून मुसलमानों का मानवाधिकार छीन लेगा। यह भारत को हिंदू राष्ट्र बना देगा। इसे आरएसएस का एजेंडा थोपने की साजिश भी बता रहे। क्या सच में?

विपक्षी नेताओं के जहर बुझे बयान। हिन्दुओं से आजादी के नारे। उन मजहबी और उन्मादी नारों की गूॅंज जो कश्मीर में आतंकी पाकिस्तान के समर्थन में लगाते रहे हैं। पत्थरबाजी। आगजनी। तरह-तरह की अफवाहें। उन अफवाहों को सोशल मीडिया में आग दिखाता एक वर्ग। उकसाने वाली बयानबाजी। आखिर, जिस कानून से किसी भारतीय नागरिक का कोई लेना-देना नहीं है, उस पर एक समुदाय विशेष क्यों उबाल खा रहा है? एक गिरोह क्यों उन्हें हिंसक बनाने पर आमादा है? इन सारे सवालों का जवाब तलाशने से पहले यह जानते हैं कि नागरिकता संशोधन कानून क्या है? किसी व्यक्ति को नागरिकता मिलती कैसे है। उसकी नागरिकता किन हालातों में छीनी जा सकती है।

नागरिकता संशोधन बिल यानी गुरुवार को राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद कानून यानी बना। इसके बाद से ही, खासकर जुमे की नमाज के बाद से दिल्ली, अलीगढ़, मुर्शिदाबाद, पटना से विरोध के नाम पर हिंसा करने पर अमादा समूहों की खबरें लगातार सामने आ रही है।

विरोध कर रहे लोगों का मानना है कि ये कानून देश के हर मुसलमान के मानवाधिकार उनसे छीन लेगा और भारत को हिंदुत्व राष्ट्र बना देगा…अब ऐसे में इस बात में कितनी सच्चाई है, इसके लिए जानना जरूरी है कि आखिर नागरिकता कानून है क्या? और आखिर क्यों मुसलमान इसे अपने खिलाफ़ मान रहे हैं? आखिर क्यों देश की धर्मनिरपेक्षता पर सवाल खड़ा किया जा रहा है? और क्यों पढ़ा-लिखा तबका भ्रम फैलाकर इसपर अपना प्रोपगेंडा चला रहा है।

क्या है नागरिकता संशोधन कानून (CAA)

9 दिसंबर को लोकसभा, 11 दिसंबर को राज्यसभा और 12 दिसंबर को राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के बाद अस्तित्व में आए नागरिकता संशोधन कानून का मूल उद्देश्य केवल उन अल्पसंख्यक समुदाय (हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई) के लोगों नागरिकता प्रदान करना है, जिन्हें पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफ्गानिस्तान में धार्मिक कारणों से प्रताड़ित किया गया। इसके अलावा इस कानून का दूसरा उद्देश्य घुसपैठियों की पहचान कर उन्हें उनके मुल्क वापस भेजना भी है। इसके अलावा इस कानून का तीसरा कोई उद्देश्य नहीं है।

फिर विरोध के नाम पर हिंसा क्यों?

- विज्ञापन -

CAA के विरोध में सड़कों पर उतरा देश का एक निश्चित तबका मान चुका है कि ये कानून मुसलमानों का भारत में अस्त है। वास्तविकता में ऐसा कुछ नहीं है। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने संसद में बार-बार दोहराया था कि इससे देश के मुसलमान को परेशान होने की कोई आवश्यकता नहीं है। परेशानी की बात सिर्फ़ उन लोगों के लिए है जो अवैध रूप से देश में दाखिल हुए।

हालाँकि, इसके बाद भी कुछ लोगों का कहना है कि जब अन्य समुदाय के लोगों को नागरिकता दी जा रही है तो इसमें मुस्लिमों का नाम क्यों नहीं शामिल है? खुद सोचिए…तीन ऐसे देश, जहाँ पर पहले ही मुसलमान बहुसंख्यक हैं और वहाँ उन्हें कोई दिक्कत नहीं हैं, उनके मजहब को सम्मान से स्वीकारा जाता है, उन्हें इबादत के लिए रोका नहीं जाता, उनके धार्मिक स्थलों पर किसी मजहब का खतरा नहीं मंडराता और उनकी बहन-बेटियों का जबरन धर्म परिवर्तन नहीं किया जाता, तो फिर आखिर उनको भारत में किस आधार पर जगह दी जाए। क्या सिर्फ़ इसलिए कि घुसपैठियों को भी नागरिक होने का वैधानिक दर्जा मिल जाए?

सोचिए! क्या वाकई हमारे देश का पढ़ा-लिखा तबका इतना मूढ़ हो चुका है कि उसे लगता है कि घुसपैठियों को वापस भेजने से उन पर या देश की धर्मनिरपेक्षता पर खतरा मंडराएगा। क्या वाकई ये विरोध में उतरी भीड़ चाहती है कि 1 अरब 30 करोड़ की आबादी वाले देश में ऐसे घुसपैठियों को जगह दी जाए, जो बिना मजबूरी के भारत में घुस आए हैं और जो अब शरणार्थियों के नाम पर अपराधों को अंजाम दे रहे हैं? या फिर ये मान लिया जाए कि वामपंथी गिरोह की तरह ये लोग भी केवल देश के अन्य लोगों में भ्रम फैलाने का काम कर रहे हैं? या ये समझा जाए कि ये भीड़ शायद इस कानून के मूल उद्देश्यों से सचेत ही नहीं है?

देश का मुसलमान क्यों नहीं है खतरे में…

देश का हर व्यक्ति जिसके पास भारत की नागरिकता है। उसे कानून रूप से कोई भी देश से अलग नहीं भेज सकता। फिर चाहे वो मोदी सरकार हो या फिर उनका लाया नागरिकता संशोधन कानून।

कौन है देश का नागरिक?

नागरिकता अधिनियम 1955 के तहत नागरिकता हासिल करने के चार तरीके हैं:

  • जन्म से नागरिकता  (धारा 3)
  • वंश द्वारा नागरिकता (धारा 4)
  • पंजीकरण द्वारा नागरिकता (धारा 5)
  • प्राकृतिकिकरण द्वारा नागरिकता। (धारा 6)

जन्म के आधार पर नागरिकता

अधिनियम की धारा 3 जन्म से संबंधित नागरिकता है। इस कानून को पहली बार 1955 में बनाया गया था। जिसके अनुसार 1 जनवरी 1950 को या उसके बाद भारत में पैदा हुए लोग भारतीय नागरिक होंगे। हालाँकि कुछ समय बाद इसमें एक संशोधन हुआ और इस प्रकार की नागरिकता को उन लोगों के लिए सीमित किया गया जो 1 जनवरी 1950 और 1 जनवरी 1987 के बीच भारत में पैदा हुए।  इसके बाद पैदा हुए लोगों के लिए अनिवार्य किया गया कि नागरिकता के लिए माता-पिता में से किसी एक का भारतीय होना जरूरी है। इसके बाद साल 2003 में इस प्रकार की नागरिकता देने वाले कानून को और कठोर किया गया और जिसमें कहा गया है कि 3 दिसंबर, 2004 के बाद पैदा हुए वो लोग, जिनके माता-पिता में से एक भारतीय हो और दूसरा अवैध प्रवासी न हो, वे भारतीय नागरिकता के पात्र होंगे।

वंश के आधार पर नागरिकता

भारत के बाहर पैदा हुआ ऐसे व्यक्ति जिसके माता-पिता उसके जन्म के समय भारत के नागरिक थे, तो वह वंश के आधार पर भारत का नागरिक होगा। हालाँकि इसमें एक शर्त है कि 1 वर्ष के भीतर भारतीय वाणिज्य दूतावास में उसके पंजीयन होना चाहिए, साथ ही एक घोषणा हो कि वह किसी अन्य देश का पासपोर्ट नहीं रखता है।

पंजीकरण द्वारा नागरिकता 

यह साधन उन विदेशी नागरिकों के लिए भारतीय नागरिकता का द्वार खोलता है, जो विवाह या कुल के माध्यम से भारतीय नागरिक के साथ संबंध रखते हैं। आवेदक को इसके लिए भारत में रहने की निर्धारित अवधि की शर्तों को पूरा करना होता है। कॉन्ग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने इसी तरीके से भारतीय नागरिकता प्राप्त की थी। 

प्राकृतिकिकरण द्वारा नागरिकता

इस तरह से उन व्यक्तियों को भारतीय नागरिकता मिलती है- जिनका रक्त, मिट्टी या विवाह के माध्यम से भारत के साथ कोई संबंध नहीं है। अधिनियम की तीसरी अनुसूची में प्राकृतिककरण की शर्तों का उल्लेख किया गया है। गौरतलब है इसी प्रकार से दलाई लामा और अदनान सामी ने भारतीय नागरिकता हासिल की है।

यहाँ स्पष्ट कर दे कि भारत किसी भी व्यक्ति को एक साथ दोहरी नागरिकता रखन का अधिकार नहीं देता है और न ही कुछ समय पहले तक अवैध प्रावसियों को भारत में टिकने का अधिकार देते था। लेकिन कुछ दिन पहले आए संशोधन कानून के बाद गैर-मुस्लिम प्रवासियों के लिए ये शर्त समाप्त कर दी गई। जिसके बाद अब हिंदू, सिख ,जैन, बौद्ध, पारसी, ईसाई अवैध प्रवासी नहीं माने जाएँगे।

अब इसके बाद जिन लोगों को ऐसा लग रहा है कि केंद्र सरकार इस कानून को लाकर उनपर हमलावर है, उन्हें ये जानने की आवश्यकता है कि सरकार के दबाव में या किसी ऐसे कानून के कारण कोई भी आपसे नागरिक होने का तमगा नहीं छीनता।

नागरिकता सिर्फ़ तीन कारणों से जाती है

त्याग (सेक्शन 8): जब तक देश का नागरिक किसी निर्धारित प्राधिकरण के पास ये घोषणा-पत्र न दें कि वो भारतीय नागरिकता का त्याग कर रहा है, तब तक उससे उसकी नागरिकता आधिकारिक रूप से नहीं छीनी जा सकती।

समाप्ति (धारा 9): ऊपर बताया कि भारत दोहरी नागरिकता को मान्यता नहीं देता हैं। इसलिए दूसरे देश की नागरिकता पाते ही उसके पास से भारत की नागरिकता समाप्त हो जाती है।

वंचन (धारा 9): पंजीकरण या प्राकृतिककरण के जरिए प्राप्त की गई नागरिकरता को ही भारत सरकार रद्द कर सकती है। वो भी केवल तब जब निम्नलिखित बिंदु परिस्थिति पर प्रभाव डालते हों। जैसे:

  • पंजीकरण या प्राकृतिककरण का प्रमाण-पत्र धोखाधड़ी, गलतबयानी या छिपाव के माध्यम से प्राप्त किया गया था।
  • नागरिकता लेने वाले शख्स ने भारत के संविधान के प्रति अरुचि या अप्रसन्नता दिखाई ।
  • व्यक्ति ने युद्ध के दौरान दुश्मन के साथ संवाद किया ।
  • उस व्यक्ति को भारत की नागरिकता प्राप्त करने के पांच साल के भीतर किसी देश में आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है।
  • व्यक्ति 7 वर्षों की निरंतर अवधि के लिए भारत के बाहर एक साधारण निवासी रहा है (जब तक कि निवास का उद्देश्य अकादमिक या सरकारी सेवा नहीं था)

नागरिकता संशोधन बिल यानी CAB गुरुवार को राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद कानून यानी CAA बना। इसके बाद से ही, खासकर जुमे की नमाज के बाद से दिल्ली, अलीगढ़, मुर्शिदाबाद, पटना… से विरोध के नाम पर हिंसा करने पर अमादा समूहों की खबरें लगातार सामने आ रही है। विरोधियों का कहना है कि यह कानून मुसलमानों का मानवाधिकार छीन लेगा। यह भारत को हिंदू राष्ट्र बना देगा। इसे आरएसएस का एजेंडा थोपने की साजिश भी बता रहे।

लेकिन, अब आप जान गए होंगे कि इस कानून का किसी भी सूरत में भारत के नागरिकों से कोई सरोकार नहीं है, चाहे उनका धर्म कुछ भी हो। यह कानून इस्लामी मुल्क पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश में प्रताड़ना झेलने वाले अल्पसंख्यकों को शरणार्थियों की पीड़ा से छुटकारा दिलाने का एक जरिया मात्र है। बावजूद इसके यह हंगामा बताता है कि नागरिकता संशोधन कानून तो महज बहाना है, इसके पीछे की साजिशें गहरी हैं। इन साजिशों का पता लगाया जाना वक्ती जरूरत है।

जामिया में मजहबी नारे ‘नारा-ए-तकबीर’, ‘ला इलाहा इल्लल्लाह’ क्यों लग रहे? विरोध तो सरकार का है न?

जिंदा है शाकिर! मीडिया गिरोह ने जामिया के 3 छात्रों के मरने की अफवाह फैलाई, कुलपति ने किया खंडन

जामिया और AMU में हिंसक प्रदर्शन पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, कहा- सुनेंगे पर पहले हिंसा रुकनी चाहिए

  सहयोग करें  

एनडीटीवी हो या 'द वायर', इन्हें कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

सपा-बसपा ने 10 साल में दी जितनी नौकरी, उससे ज्यादा योगी सरकार ने 3 साल में दिए

सपा और बसपा ने अपने 5 साल के कार्यकाल में जितनी नौकरियाँ दी, उससे ज्यादा योगी आदित्यनाथ की सरकार 3 साल में दे चुकी है।

सुदर्शन ‘UPSC जिहाद’ मामला: ऑपइंडिया, इंडिक कलेक्टिव ट्रस्ट और UpWord ने सुप्रीम कोर्ट में दायर की ‘हस्तक्षेप याचिका’

मजहब विशेष के दोषियों को बचाने के लिए मीडिया का एक बड़ा वर्ग कैसे उनके अपराध को कम कर दिखाता है, इसको लेकर ऑपइंडिया ने एक रिपोर्ट तैयार की है।

बिहार में कुछ अच्छा हो, कोई अच्छा काम करे… और वो मोदी से जुड़ा हो तो ‘चुड़ैल मीडिया’ भला क्यों दिखाए?

सुल्तानगंज-कहलगाँव के 60 km के क्षेत्र को “विक्रमशिला गांगेय डॉलफिन सैंक्चुअरी” घोषित किया जा चुका है। इस काम को और एक कदम आगे ले जा कर...

8.5% कमीशन तीन हिस्सों में… किसान से उसके उपज को ऐसे लूटा जाता, फिर भी घड़ियाली आँसू बहा रो रहा विपक्ष

इन तीनों विधेयकों की सही और पूरी जानकारी किसानों तक पहुँच नहीं पाई है। यह सरकार की विफलता ही मानी जाएगी। इतने महत्वपूर्ण और दूरगामी...

गाड़ी हिंदू या मुस्लिम की? जलाने से पहले ‘इ-वाहन’ पर चेक किया जाता: Tech के इस्तेमाल से दिल्ली दंगों के 2655 आरोपित धराए

दिल्ली दंगों की संवेदनशीलता के कारण जाँच के दौरान पुलिस द्वारा कॉल डिटेल्स विवरण के अलावा कई अन्य तरह की तकनीक का भी इस्तेमाल किया गया।

‘जेल’ से लालू यादव रोज करते हैं बात, मँगाते हैं फोटो: RJD नेता का खुलासा, तेज प्रताप ने खुद दिया है आशीर्वाद

स्वघोषित प्रत्याशी कमलेश शर्मा ने दावा किया कि राजद सुप्रीमो लालू यादव उनसे रोज फोन पर बात करते हैं और चुनावी तैयारियों का जायजा लेते हैं।

प्रचलित ख़बरें

‘उसने अपने C**k को जबरन मेरी Vagina में डालने की कोशिश की’: पायल घोष ने अनुराग कश्यप पर लगाया यौन उत्पीड़न का आरोप

“अगले दिन उसने मुझे फिर से बुलाया। उन्होंने कहा कि वह मुझसे कुछ चर्चा करना चाहते हैं। मैं उसके यहाँ गई। वह व्हिस्की या स्कॉच पी रहा था। बहुत बदबू आ रही थी। हो सकता है कि वह चरस, गाँजा या ड्रग्स हो, मुझे इसके बारे में कुछ भी पता नहीं है लेकिन मैं बेवकूफ नही हूँ।”

संघी पायल घोष ने जिस थाली में खाया उसी में छेद किया – जया बच्चन

जया बच्चन का कहना है कि अनुराग कश्यप पर यौन उत्पीड़न के आरोप लगाकर पायल घोष ने जिस थाली में खाया, उसी में छेद किया है।

व्हिस्की पिलाते हुए… 7 बार न्यूड सीन: अनुराग कश्यप ने कुबरा सैत को सेक्रेड गेम्स में ऐसे किया यूज

पक्के 'फेमिनिस्ट' अनुराग पर 2018 में भी यौन उत्पीड़न तो नहीं लेकिन बार-बार एक ही तरह का सीन (न्यूड सीन करवाने) करवाने का आरोप लग चुका है।

कहाँ गायब हुए अकाउंट्स? सोनू सूद की दरियादिली का उठाया फायदा या फिर था प्रोपेगेंडा का हिस्सा

सोशल मीडिया में एक नई चर्चा के तूल पकड़ने के बाद कई यूजर्स सोनू सूद की मंशा सवाल उठा रहे हैं। कुछ ट्विटर अकाउंट्स अचानक गायब होने पर विवाद है।

जया बच्चन का कुत्ता टॉमी, देश के आम लोगों का कुत्ता कुत्ता: बॉलीवुड सितारों की कहानी

जया बच्चन जी के घर में आइना भी होगा। कभी सजते-संवरते उसमें अपनी आँखों से आँखे मिला कर देखिएगा। हो सकता है कुछ शर्म बाकी हो तो वो आँखों में...

थालियाँ सजाते हैं यह अपने बच्चों के लिए, हम जैसों को फेंके जाते हैं सिर्फ़ टुकड़े: रणवीर शौरी का जया को जवाब और कंगना...

रणवीर शौरी ने भी इस मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कंगना को समर्थन देते हुए कहा है कि उनके जैसे कलाकार अपना टिफिन खुद पैक करके काम पर जाते हैं।

सपा-बसपा ने 10 साल में दी जितनी नौकरी, उससे ज्यादा योगी सरकार ने 3 साल में दिए

सपा और बसपा ने अपने 5 साल के कार्यकाल में जितनी नौकरियाँ दी, उससे ज्यादा योगी आदित्यनाथ की सरकार 3 साल में दे चुकी है।

सुदर्शन ‘UPSC जिहाद’ मामला: ऑपइंडिया, इंडिक कलेक्टिव ट्रस्ट और UpWord ने सुप्रीम कोर्ट में दायर की ‘हस्तक्षेप याचिका’

मजहब विशेष के दोषियों को बचाने के लिए मीडिया का एक बड़ा वर्ग कैसे उनके अपराध को कम कर दिखाता है, इसको लेकर ऑपइंडिया ने एक रिपोर्ट तैयार की है।

प्रेगनेंसी टेस्ट की तरह कोरोना जाँच: भारत का ₹500 वाला ‘फेलूदा’ 30 मिनट में बताएगा संक्रमण है या नहीं

दिल्ली की टाटा CSIR लैब ने भारत की सबसे सस्ती कोरोना टेस्ट किट विकसित की है। इसका नाम 'फेलूदा' रखा गया है। इससे मात्र 30 मिनट के भीतर संक्रमण का पता चल सकेगा।

बिहार में कुछ अच्छा हो, कोई अच्छा काम करे… और वो मोदी से जुड़ा हो तो ‘चुड़ैल मीडिया’ भला क्यों दिखाए?

सुल्तानगंज-कहलगाँव के 60 km के क्षेत्र को “विक्रमशिला गांगेय डॉलफिन सैंक्चुअरी” घोषित किया जा चुका है। इस काम को और एक कदम आगे ले जा कर...

8.5% कमीशन तीन हिस्सों में… किसान से उसके उपज को ऐसे लूटा जाता, फिर भी घड़ियाली आँसू बहा रो रहा विपक्ष

इन तीनों विधेयकों की सही और पूरी जानकारी किसानों तक पहुँच नहीं पाई है। यह सरकार की विफलता ही मानी जाएगी। इतने महत्वपूर्ण और दूरगामी...

ड्रग्स मामले में श्रद्धा कपूर पर भी NCB की नजर, सारा अली के साथ इसी हफ्ते भेज सकती है समन

ड्रग्स मामले में एनसीबी इसी हफ्ते अभिनेत्री सारा अली खान और श्रद्धा कपूर को समन भेज सकती है। दोनों सुशांत के साथ फिल्में कर चुकी हैं।

क्या कंगना रनौत ने प्रदर्शनकारी किसानों को आतंकी कहा? TOI की खबर में किए गए दावे का सच

TOI ने लिखा कि अभिनेत्री कंगना रनौत ने राज्यसभा में पास हुए एग्री-मार्केटिंग बिल्स को लेकर विरोध प्रदर्शन कर रहे किसानों पर निशाना साधते हुए उन्हें 'आतंकी' कहा।

गुरुद्वारा श्री पंजा साहिब के ग्रंथी की 17 साल की बेटी का 2 मुस्लिम लड़कों ने किया अपहरण, 15 दिन से Pak प्रशासन सुस्त

बलबीर कौर के अपहरण के बाद अकाली दल नेता ने इस बाबत विदेश मंत्री को पत्र लिखा। उन्होंने कहा कि सिखों को अलग-थलग करने की...

गाड़ी हिंदू या मुस्लिम की? जलाने से पहले ‘इ-वाहन’ पर चेक किया जाता: Tech के इस्तेमाल से दिल्ली दंगों के 2655 आरोपित धराए

दिल्ली दंगों की संवेदनशीलता के कारण जाँच के दौरान पुलिस द्वारा कॉल डिटेल्स विवरण के अलावा कई अन्य तरह की तकनीक का भी इस्तेमाल किया गया।

‘जेल’ से लालू यादव रोज करते हैं बात, मँगाते हैं फोटो: RJD नेता का खुलासा, तेज प्रताप ने खुद दिया है आशीर्वाद

स्वघोषित प्रत्याशी कमलेश शर्मा ने दावा किया कि राजद सुप्रीमो लालू यादव उनसे रोज फोन पर बात करते हैं और चुनावी तैयारियों का जायजा लेते हैं।

हमसे जुड़ें

263,159FansLike
77,972FollowersFollow
322,000SubscribersSubscribe
Advertisements