उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने राज्य की माध्यमिक शिक्षा व्यवस्था में आमूलचूल परिवर्तन करते हुए वर्षों से चले आ रहे भर्ती संकट को पूरी तरह समाप्त कर दिया है। प्रदेश में एक समय ऐसा था जब माध्यमिक शिक्षा के क्षेत्र में नियुक्तियाँ पूरी तरह से ठप पड़ी थीं, जिससे न केवल शिक्षण कार्य प्रभावित हो रहा था बल्कि युवाओं का सरकारी तंत्र से भरोसा भी उठने लगा था। लेकिन साल 2017 में सत्ता की कमान संभालते ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस पूरी व्यवस्था को सुधारने का बीड़ा उठाया और ठप पड़ी चयन प्रक्रिया को रफ्तार दी।
ऐतिहासिक आँकड़ों पर नजर डालें तो उत्तर प्रदेश में वर्ष 2012 से लेकर 2017 तक माध्यमिक शिक्षा विभाग में भर्ती प्रक्रिया पूरी तरह से ठहराव का शिकार रही। पूर्ववर्ती सरकार के पाँच सालों के कार्यकाल के दौरान विद्यालयों में शिक्षकों की सेवानिवृत्ति तो होती रही, लेकिन नए पदों पर भर्ती के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए। इसका सीधा खामियाजा प्रदेश के लाखों छात्र-छात्राओं को भुगतना पड़ा, जो बिना विषय विशेषज्ञ शिक्षकों के पढ़ाई करने को मजबूर थे। विद्यालयों में प्रशासनिक नेतृत्व का भी अकाल पड़ चुका था क्योंकि प्रधानाचार्यों के पद भी सालों से खाली पड़े थे।
साल 2017 में सूबे में योगी सरकार के गठन के बाद स्थिति में अभूतपूर्व और तेज बदलाव देखा गया। मुख्यमंत्री ने माध्यमिक शिक्षा को अपनी प्राथमिकताओं में शामिल करते हुए रिक्त पदों को भरने के लिए सख्त निर्देश जारी किए। सरकार ने पुरानी सुस्त कार्यप्रणाली को दरकिनार करते हुए पूरी चयन प्रक्रिया को ‘मिशन मोड’ में आगे बढ़ाया। इस नई कार्ययोजना के तहत किसी भी स्तर पर भाई-भतीजावाद या भ्रष्टाचार की गुंजाइश को खत्म कर पूरी तरह से पारदर्शिता, सुशासन और मेरिट (योग्यता) को चयन का मुख्य आधार बनाया गया।
इसी पारदर्शी व्यवस्था का सुखद परिणाम आज उत्तर प्रदेश के सामने है, जहाँ अप्रैल 2017 के बाद से कुल 33,401 पदों पर योग्य उम्मीदवारों का सफल चयन किया जा चुका है। उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड द्वारा जारी किए गए आधिकारिक और प्रामाणिक आँकड़ों के मुताबिक, अप्रैल 2017 से लेकर वर्ष 2022 की अवधि के भीतर ही रिकॉर्ड स्तर पर नियुक्तियाँ की गईं। इसमें प्रशासनिक ढाँचे को मजबूत करने के लिए 783 प्रधानाचार्यों, उच्च शिक्षण स्तर को सुधारने के लिए 5,321 प्रवक्ताओं (पीजीटी) तथा जमीनी स्तर पर कक्षाओं को संभालने के लिए 27,297 प्रशिक्षित स्नातक शिक्षकों (टीजीटी) की चयन प्रक्रिया को सफलतापूर्वक संपन्न कराया गया।
माध्यमिक शिक्षा विभाग के उच्च अधिकारियों और सरकार के नीति निर्धारकों ने इस प्रशासनिक और शैक्षिक क्रांति पर प्रसन्नता व्यक्त की है। सरकार की इस ऐतिहासिक उपलब्धि और दूरगामी विजन को स्पष्ट करते हुए विभागीय अधिकारियों ने आधिकारिक रूप से अपना संयुक्त बयान जारी किया है।
शासन और शिक्षा विभाग के उच्चाधिकारियों ने अपने साझा बयान में कहा, “उत्तर प्रदेश की माध्यमिक शिक्षा में 33 हजार से अधिक पदों पर की गई यह बंपर भर्ती केवल एक प्रशासनिक आँकड़ा या सामान्य उपलब्धि मात्र नहीं है। यह असल में राज्य के भीतर उस बड़े व्यवस्था परिवर्तन और नीतिगत बदलाव की जीवंत कहानी है, जिसमें सालों से ठप पड़ी चयन प्रक्रिया को न सिर्फ गति मिली, बल्कि प्रदेश के मेधावी युवाओं को उनकी योग्यता के आधार पर आगे बढ़ने का उचित अवसर भी प्राप्त हुआ।”
बयान में आगे कहा गया, “राज्य सरकार की नीति हमेशा से साफ रही है कि विद्यालयों में शिक्षकों की किसी भी प्रकार की कमी को तुरंत दूर किया जाए। हमारी नीयत पूरी तरह से पारदर्शी, निष्पक्ष और भ्रष्टाचार मुक्त चयन प्रक्रिया सुनिश्चित करने की रही, जिसके सुखद नतीजे आज सबके सामने हैं। राजनीतिक इच्छाशक्ति और प्रभावी प्रशासनिक क्रियान्वयन के बल पर ही हमने इस पांच साल पुराने ठहराव को तोड़कर शिक्षा जगत को एक नई और सकारात्मक ऊर्जा प्रदान की है।”
इस बड़े भर्ती अभियान का सबसे सकारात्मक असर स्कूलों में विषय विशेषज्ञ शिक्षकों की कमी दूर होने के रूप में सामने आया है। लंबे समय से गणित, विज्ञान, अंग्रेजी और कंप्यूटर जैसे महत्वपूर्ण विषयों के शिक्षकों के पद खाली होने से ग्रामीण और कस्बाई क्षेत्रों के सरकारी स्कूल गंभीर चुनौतियों से जूझ रहे थे। विषय विशेषज्ञों की तैनाती होने से अब छात्रों की पढ़ाई की गुणवत्ता में भारी सुधार दर्ज किया गया है। इसके अलावा स्कूलों में स्थायी प्रधानाचार्यों की नियुक्ति होने से विद्यालयों का प्रशासनिक नियंत्रण मजबूत हुआ है, जिससे दैनिक शैक्षणिक माहौल और अनुशासन दोनों में गुणात्मक सुधार हुआ है।
शिक्षकों की इस बड़े पैमाने पर हुई नियुक्तियों ने उत्तर प्रदेश सरकार के व्यापक शिक्षा सुधार एजेंडे को एक बेहद मजबूत और ठोस आधार प्रदान कर दिया है। वर्तमान में राज्य के माध्यमिक विद्यालयों का कायाकल्प करने के लिए ‘ऑपरेशन अलंकार’ जैसी महत्वाकांक्षी योजनाएं चलाई जा रही हैं, जिसके तहत जर्जर भवनों को आधुनिक रूप दिया जा रहा है। इसके साथ ही स्कूलों में स्मार्ट क्लासेस की स्थापना, अत्याधुनिक आईसीटी लैब्स (इन्फॉर्मेशन एंड कम्युनिकेशन टेक्नोलॉजी), विज्ञान एवँ कंप्यूटर प्रयोगशालाओं का सुदृढ़ीकरण और डिजिटल लर्निंग को बढ़ावा दिया जा रहा है।
इन सभी भौतिक संसाधनों की उपयोगिता तभी संभव थी, जब इन्हें संचालित करने के लिए पर्याप्त संख्या में शिक्षक मौजूद हों। अब जबकि प्रदेश के विद्यालयों को पारदर्शी तरीके से चुने गए ऊर्जावान और योग्य शिक्षक मिल चुके हैं, तो राज्य की नकलविहीन परीक्षा प्रणाली और इन डिजिटल सुधारों का लाभ सीधे तौर पर राज्य के अंतिम पायदान पर खड़े छात्र तक पहुँच रहा है।
ऐसे में पारदर्शी और मेरिट आधारित इस पूरी प्रक्रिया ने न केवल उत्तर प्रदेश के युवाओं के भीतर सरकारी भर्ती प्रणालियों के प्रति खोए हुए विश्वास को दोबारा बहाल किया है, बल्कि राज्य के सरकारी स्कूलों को एक नई पहचान और वैश्विक प्रतिस्पर्धा के योग्य बनने की नई ऊर्जा भी प्रदान की है।


