नेपाल में भारतीय सामानों पर टैक्स और MRP नियम को लेकर शुरू हुआ विवाद अब थोड़ा ठंडा पड़ता दिख रहा है। बालेन शाह के नेतृत्व वाली नेपाल सरकार ने हाल ही में एक नया नियम लागू किया था, जिसके तहत भारत से आने वाले लोगों को 100 नेपाली रुपए से ज्यादा का सामान लाने पर कस्टम ड्यूटी देनी पड़ रही थी। साथ ही हर सामान पर MRP लिखना भी जरूरी कर दिया गया था।
यह नियम लागू होते ही लोगों और व्यापारियों में नाराजगी बढ़ गई। सीमा पर रहने वाले आम लोग, जो रोजमर्रा का सामान भारत से लाते हैं, उन्हें सबसे ज्यादा परेशानी होने लगी। छोटे व्यापारी भी इससे प्रभावित हुए, क्योंकि कई सामान पर MRP लिखना व्यावहारिक नहीं था। इसका असर ये हुआ कि सीमा से मिलने वाला रेवेन्यू भी घटने लगा।
विरोध बढ़ने और समस्याएँ सामने आने के बाद सरकार को अपना फैसला नरम करना पड़ा। अब नई व्यवस्था में लोग कस्टम पॉइंट पर पहुँचकर खुद ही अपने सामान की कीमत (MRP) घोषित कर सकेंगे और उसी आधार पर क्लियरेंस मिलेगा।
सरकार ने भी माना कि इस नियम से कच्चा माल, मशीनरी और जल्दी खराब होने वाले सामान जैसे फल-सब्जियों के आयात में दिक्कतें आ रही थीं। फिलहाल, इन सामानों पर MRP नियम में ढील दे दी गई है। सरकार का कहना है कि अगले वित्तीय वर्ष के लिए नियमों को और स्पष्ट करके फिर से लागू किया जाएगा।

