Wednesday, October 21, 2020
Home रिपोर्ट मीडिया बंगाल में पत्रकारों की पिटाई पर चुप्पी Editors Guild के 'गुप्त' रोग का परिचायक

बंगाल में पत्रकारों की पिटाई पर चुप्पी Editors Guild के ‘गुप्त’ रोग का परिचायक

एडिटर्स गिल्ड के ट्विटर पेज पर केवल न्यूज़लॉन्ड्री और 'द प्रिंट' जैसे ख़ास मीडिया पोर्टल्स के लिंक्स शेयर किए जाते हैं। उनका पिछला बयान 7 मार्च को आया था। उससे पहले उन्होंने उन पत्रकारों के बचाव में बयान दिया था, जो पहले से ही VIP स्टेटस रखते हैं।

भारत में ग़रीब ऑटो वालों से लेकर करोड़ों कमाने वाले सुप्रीम कोर्ट के वकीलों तक, सभी की अपनी एक अलग यूनियन है। इस एकता का प्रभाव यह होता है कि उनमें से अगर किसी एक को भी कोई दिक्कत आती है तो पूरा समूह उसके साथ खड़ा हो जाता है। ऐसे ही भारत में डिजाइनर पत्रकारों का भी एक प्रतिनिधिमंडल है, समूह है, दल है या यूँ कहिए गिरोह है। यह एडिटर्स गिल्ड है। एडिटर्स गिल्ड भी एक प्रकार के ‘गुप्त’ रोग से ग्रसित है, जिसे सीधी भाषा में ‘गुप्ता’ रोग भी कहा जा सकता है। आख़िर शेखर गुप्ता जैसे ‘निष्पक्ष’ पत्रकार जिस गिरोह के अध्यक्ष हों, उसके बारे में और कहा भी क्या जा सकता है? चाहे मोदी सरकार के ख़िलाफ़ जजों की प्रेस कॉन्फ्रेंस हो या फिर आईआईटी के हॉस्टलों में मिल रहे खाने की भी जाति बता देना, इन सब में शेखर बढ़-चढ़ कर हिस्सा लेते रहते हैं या यूँ कहिए कि वो ऐसे कार्यक्रमों के योजनाकार होते हैं।

एडिटर्स गिल्ड इतना हिम्मती है कि ये मेघालय हाईकोर्ट के किसी निर्णय पर तो अफ़सोस जता सकता है लेकिन इतना कुटिल भी है कि बंगाल में पत्रकारों के पीटे जाने पर चुप्पी साध सकता है। एडिटर्स गिल्ड राहुल गाँधी द्वारा किसी पत्रकार पर की गई टिप्पणी को लेकर भाजपा नेताओं की आलोचना कर सकता है। जी हाँ, आपने बिलकुल सही पढ़ा। जैसा कि हमें पिछले कुछ दिनों में पता चला है, प्रधानमंत्री का इंटरव्यू लेना अब इस देश में पाप हो गया है। अगर प्रधानमंत्री गिरोह विशेष को इंटरव्यू नहीं देते तो सिर्फ़ वही नहीं बल्कि उनका इंटरव्यू लेने वाले पत्रकार भी ख़राब हो जाते हैं। कॉन्ग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी ने इसी तरह एएनआई की सम्पादक स्मिता प्रकाश पर टिप्पणी की थी। उनकी भी गलती यही थी- प्रधानमंत्री का इंटरव्यू लेना।

पत्रकारों के हितों की बात करने वाले एडिटर्स गिल्ड से जनता ने राहुल के उस बयान के ख़िलाफ़ बयान जारी करने की माँग की थी, जिसमें उन्होंने स्मिता के बारे में कहा था कि वो सवाल भी ख़ुद पूछ रही थीं और जवाब भी ख़ुद दे रही थीं। लोगों द्वारा लगातार आवाज़ उठाने के बाद एडिटर्स गिल्ड ने चुप्पी तोड़ते हुए एक बयान तो जारी किया था, लेकिन उसमें राहुल गाँधी द्वारा स्मिता प्रकाश पर की गई टिप्पणी को लेकर आपत्ति जताने से ज्यादा पुराने घिसे-पिटे मुद्दों पर भाजपा नेताओं को निशाना बनाया गया था। यही एडिटर्स गिल्ड आज एक बार फिर सवालों के घेरे में है। उस दौरान केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली सहित कई बड़े नेताओं ने एडिटर्स गिल्ड पर निशाना साधा था। लेकिन एडिटर्स गिल्ड के मुखिया गुप्ता जी हैं। गुप्ता जी उन बातों को गुप्त ही रखते हैं, जिनसे ममता और राहुल जैसे नेताओं की छवि को चोट पहुँचे।

आइए सबसे पहले जानते हैं कि पश्चिम बंगाल में ऐसा हुआ क्या, जिसके कारण एडिटर्स गिल्ड की आलोचना की जानी चाहिए। पश्चिम बंगाल स्थित आसनसोल में सत्ताधारी पार्टी तृणमूल कॉन्ग्रेस के गुंडों ने रिपब्लिक टीवी के पत्रकारों पर हमले किए। लाठी-डंडों से लैस तृणमूल के गुंडों ने सजीव और निर्जीव वस्तुओं के बीच फ़र्क़ को नज़रअंदाज़ करते हुए गाड़ियों के टुकड़े-टुकड़े कर दिए और रास्ते में आए लोगों की पिटाई की। इसी जद में रिपब्लिक टीवी के पत्रकार भी आ गए। क्या महिला और क्या पुरुष, तृणमूल के गुंडों ने कोई फ़र्क़ नहीं किया। इतना ही नहीं, सरकार द्वारा पोषित गुंडों ने वहाँ चुनाव कवर कर रहे पत्रकारों को खदेड़ दिया और कैमरामैन से लेकर क्रू में शामिल अन्य लोगों पर भी हमले किए।

बंगाल में हिंसा को लेकर न सिर्फ़ एडिटर्स गिल्ड बल्कि बुद्धिजीवियों के हर खेमे में चुप्पी है। भाजपा और संघ कार्यकर्ता केरल और बंगाल में मरने के लिए ही होता है, ऐसा मानकर चलने वाले बुद्धिजीवियों के समूह को उस वक़्त गहरा धक्का लगता है जब अदालत की कार्यवाही को रिपोर्ट करने से हाईकोर्ट किसी पत्रकार को रोक देता है। इन्हें तब और ज्यादा गहरा धक्का लगता है जब किसी भाजपा शासित राज्य में किसी पत्रकार पर अन्य कारणों से एकाध हज़ार का अर्थदंड लगाया जाता है। लेकिन, जब कर्नाटक में एक-एक कर पत्रकारों को गिरफ़्तार किया जाने लगता है तो फिर एडिटर्स गिल्ड उसी ‘गुप्त’ रोग से ग्रसित हो जाता है, जिसमें नियम है कि भाजपा-विरोधी शासित राज्यों में पत्रकारों पर ज़ुल्म भी हो तो उस पर कुछ नहीं बोलना है और भाजपा शासित राज्य में किसी पत्रकार की सीढ़ियों से गिरकर ऊँगली में चोट भी लगती है तो एक ‘Condemnation Letter’ जारी कर दिया जाता है।

इस ‘गुप्त’ या ‘गुप्ता’ रोग की कुछ विशेषताएँ हैं। इसमें न सिर्फ़ बंगाल में पत्रकारों की पिटाई को लेकर आँख-नाक-कान बंद रखना होता है बल्कि विरोध प्रदर्शन करने उतरे सैंकड़ों पत्रकारों की आवाज़ को भी बड़ी चालाकी से नज़रअंदाज़ कर देना होता है। पिछले वर्ष बंगाल में हुए पंचायत चुनावों के दौरान भी पत्रकारों पर कम अत्याचार नहीं किए गए थे। लेकिन, एडिटर्स गिल्ड ने लोकसभा चुनाव से पहले बंगाल सरकार से पत्रकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने को लेकर कोई अपील नहीं की। अगर एडिटर्स गिल्ड चाहता तो पिछले चुनावों से सबक लेते हुए पहले से ही आवाज़ उठा सकता था ताकि इस चुनाव में तृणमूल और वाम के गुंडें ऐसा न करें, लेकिन अफ़सोस यह कि पत्रकारों का हितैषी होने का दावा करने वाले एडिटर्स गिल्ड ने ऐसा कुछ भी नहीं किया।

एडिटर्स गिल्ड अटॉर्नी जनरल द्वारा ‘द हिन्दू’ जैसे शक्तिशाली अख़बार की आलोचना करने पर उसके साथ खड़ा होकर अटॉर्नी जनरल के बयान की निंदा करता है लेकिन प्रेस और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के सैंकड़ों पत्रकार, कैमरामैन और टेक्निकल स्टाफ जब कोलकाता की सड़कों पर उतर अपने ख़िलाफ़ हो रही हिंसा का विरोध प्रदर्शन करते हैं, तब इस गिरोह के कानों में जूँ तक नहीं रेंगती। अगर आप एडिटर्स गिल्ड के ट्विटर पेज की पड़ताल करेंगे तो पाएँगे कि वहाँ केवल न्यूज़लॉन्ड्री और ‘द प्रिंट’ जैसे ख़ास मीडिया पोर्टल्स के लिंक्स शेयर किए जा रहे हैं और उनका पिछला बयान 7 मार्च को आया था, जो मेघालय हाई कोर्ट के निर्णय को लेकर था। उससे पहले उन्होंने उन पत्रकारों के बचाव में बयान दिया था, जो पहले से ही वीआईपी स्टेटस रखते हैं।

अगर राजदीप सरदेसाई और बरखा दत्त जैसे हाई प्रोफाइल, सक्षम, अमीर और पाँच सितारा पत्रकारों को कोई ट्विटर पर ‘रे’ भी बोल दे तो एडिटर्स गिल्ड इस चीज की निंदा में खड़ा होने में देर नहीं लगाता लेकिन जो निचले स्तर के पत्रकार हैं, ग्राउंड रिपोर्टिंग कर रहे हैं या गिरोह विशेष के ‘दुश्मन’ चैनलों में काम कर रहे हैं, अगर उन्हें बंगाल में नंगा कर के भी घुमाया जाता है तो एडिटर्स गिल्ड तो छोड़िए, गुप्ताजी या उनके किसी भी साथी की तरफ से चूँ की आवाज़ भी नहीं आती। ‘द प्रिंट’ की पत्रकार को इंटरव्यू के दौरान चिदंबरम खुली धमकी देते हैं लेकिन ‘अपने’ अगर बेइज्जत भी करते हैं तो चलेगा क्योंकि ‘अपने तो अपने होते हैं।’ यहाँ तक कि गुप्ताजी की अपनी वेबसाइट ‘द प्रिंट’ भी इसी ‘गुप्त’ रोग से ग्रसित है जिसमें बंगाल से जुड़ी ऐसी ख़बरों को प्राथमिकता नहीं दी जाती क्योंकि इससे ‘अपनों’ के ख़फ़ा होने का ख़तरा है।

सब कुछ साफ़-साफ़ दिख रहा है लेकिन मीडिया में इसे लेकर शांति है। बंगाल में तृणमूल और केरल में वाम द्वारा संचालित हिंसा राजनीतिक हिंसा है, जिसमें दोनों पक्षों की ग़लती होती है जबकि अगर कोई पेशेवर अपराधी किसी पत्रकार की व्यक्तिगत दुश्मनी के कारण हत्या कर दे तो इसमें अपराधियों के तार भाजपा से जबरन जोड़ने की कोशिश की जाती है। आम लोगों पर हो रही हिंसा को गिरोह विशेष नज़रअंदाज़ करता है और अपने पेशे के लोगों पर हो रहे अत्याचार को भी छिपाता है। एडिटर्स गिल्ड को पता है कि किस मामले को उठाकर उसे बड़ा बना देना है और किस मामले को जनता तक पहुँचने से रोकना है। उसे पता है कि ‘अपनों’ को फ़ायदा कैसे पहुँचे और यह भी ध्यान रखना है कि उन्हीं ‘अपनों’ को नुकसान न हो। बाकि जो ‘दुश्मन’ हैं, उन्हें नुकसान पहुँचाने में कोई कसर नहीं छोड़नी है।

  सहयोग करें  

एनडीटीवी हो या 'द वायर', इन्हें कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

अनुपम कुमार सिंहhttp://anupamkrsin.wordpress.com
चम्पारण से. हमेशा राइट. भारतीय इतिहास, राजनीति और संस्कृति की समझ. बीआईटी मेसरा से कंप्यूटर साइंस में स्नातक.

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

कराची में हुए बम धमाके में 3 की मौत: फौज और पुलिस में ठनी, सिंध पुलिस के सभी अधिकारियों की छुट्टियाँ रद्द

सिंध पुलिस का कहना है कि उसके आला अधिकारियों का जिस तरह से अपमान किया गया, उनके साथ बुरा वर्ताव किया गया, उससे पुलिस महकमा शॉक में है।

सूरजभान सिंह: वो बाहुबली, जिसके जुर्म की तपिश से सिहर उठा था बिहार, परिवार हो गया खाक, शर्म से पिता और भाई ने की...

कामदेव सिंह का परिवार को जब पता चला कि सूरजभान ने उनके किसी रिश्तेदार को जान से मारने की धमकी दी है तो सूरजभान को उसी के अंदाज में संदेश भिजवाया गया- “हमने हथियार चलाना बंद किया है, हथियार रखना नहीं। हमारी बंदूकों से अब भी लोहा ही निकलेगा।”

#Tweet4Bharat: राष्ट्रीय महत्त्व के मुद्दों पर हिंदी श्रेणी में विजेताओं की सूची और उनको जीत दिलाने वाले ट्वीट थ्रेड्स यहाँ देखें

“#Tweet4Bharat” का उद्देश्य राष्ट्रीय महत्व के महत्वपूर्ण मुद्दों पर लिखने, चर्चा करने और विचार-विमर्श करने के लिए युवाओं को ‘ट्विटर थ्रेड्स’ का उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित और प्रेरित करना था।

क्या India Today का खेल खत्म? CBI ने TRP घोटाले में दर्ज की FIR: यूपी सरकार द्वारा की गई थी जाँच की सिफारिश

सीबीआई ने टीआरपी घोटाले की जाँच के लिए एक FIR दर्ज कर ली है। शुरुआत में इस मामले के संबंध में मुंबई पुलिस की FIR में इंडिया टुडे चैनल का नाम सामने आया था।

लॉकडाउन भले चला गया हो, मगर वायरस नहीं गया, थोड़ी सी लापरवाही हमारी खुशियों को धूमिल कर सकती है: PM मोदी

"हमें ये भूलना नहीं है कि लॉकडाउन भले चला गया हो, मगर वायरस नहीं गया है। बीते 7-8 महीनों में, प्रत्येक भारतीय के प्रयास से, भारत आज जिस संभली हुई स्थिति में हैं, हमें उसे बिगड़ने नहीं देना है और अधिक सुधार करना है।"

BJP का गया दुर्ग कितना मजबूत, क्या लगातार 8वीं बार कामयाब रहेंगे प्रेम कुमार?

गया देश का सबसे गंदा शहर है। जाम, संकरी सड़कें शहर की पहचान हैं। बावजूद बीजेपी का यह दुर्ग क्यों अभेद्य दिख रहा?

प्रचलित ख़बरें

मैथिली ठाकुर के गाने से समस्या तो होनी ही थी.. बिहार का नाम हो, ये हमसे कैसे बर्दाश्त होगा?

मैथिली ठाकुर के गाने पर विवाद तो होना ही था। लेकिन यही विवाद तब नहीं छिड़ा जब जनकवियों के लिखे गीतों को यूट्यूब पर रिलीज करने पर लोग उसके खिलाफ बोल पड़े थे।

37 वर्षीय रेहान बेग ने मुर्गियों को बनाया हवस का शिकार: पत्नी हलीमा रिकॉर्ड करती थी वीडियो, 3 साल की जेल

इन वीडियोज में वह अपनी पत्नी और मुर्गियों के साथ सेक्स करता दिखाई दे रहा था। ब्रिटेन की ब्रैडफोर्ड क्राउन कोर्ट ने सबूतों को देखने के बाद आरोपित को दोषी मानते हुए तीन साल की सजा सुनाई है।

हिन्दुओं की हत्या पर मौन रहने वाले हिन्दू ‘फ़्रांस की जनता’ होना कब सीखेंगे?

हमें वे तस्वीरें देखनी चाहिए जो फ्रांस की घटना के पश्चात विभिन्न शहरों में दिखती हैं। सैकड़ों की सँख्या में फ्रांसीसी नागरिक सड़कों पर उतरे यह कहते हुए - "हम भयभीत नहीं हैं।"

ऐसे मुस्लिमों के लिए किसी भी सेकुलर देश में जगह नहीं होनी चाहिए, वहीं जाओ जहाँ ऐसी बर्बरता सामान्य है

जिनके लिए शिया भी काफिर हो चुका हो, अहमदिया भी, उनके लिए ईसाई तो सबसे पहला दुश्मन सदियों से रहा है। ये तो वो युद्ध है जो ये बीच में हार गए थे, लेकिन कहा तो यही जाता है कि वो तब तक लड़ते रहेंगे जब तक जीतेंगे नहीं, चाहे सौ साल लगे या हजार।

‘कश्मीर टाइम्स’ अख़बार का श्रीनगर ऑफिस सील, सरकारी सम्पत्तियों पर कर रखा था कब्ज़ा

2 महीने पहले कश्मीर टाइम्स की एडिटर अनुराधा भसीन को भी उनका आधिकारिक निवास खाली करने को कहा गया था।

शिक्षक का गला रेतने के बाद इस्लामी कट्टरपंथियों के विरुद्ध फ्रांस का सख्त एक्शन: 231 कट्टरपंथी किए जाएँगे देश से बाहर

एफ़एसपीआरटी की रिपोर्ट के अनुसार 231 विदेशी नागरिकों में से 180 कारावास में कैद हैं। इसके अलावा बचे हुए 51 को अगले कुछ घंटों में गिरफ्तार किया जाना था।
- विज्ञापन -

कराची में हुए बम धमाके में 3 की मौत: फौज और पुलिस में ठनी, सिंध पुलिस के सभी अधिकारियों की छुट्टियाँ रद्द

सिंध पुलिस का कहना है कि उसके आला अधिकारियों का जिस तरह से अपमान किया गया, उनके साथ बुरा वर्ताव किया गया, उससे पुलिस महकमा शॉक में है।

‘बिलाल ने नाम बदला, टीका लगाता था, हमें लगा हिन्दू होगा’: 8 लाख लेकर भागी छात्रा, परिजनों ने लगाया ‘लव जिहाद’ का आरोप

लड़की के पिता ने बताया कि उनकी बेटी बीएससी की छात्रा है और कम्प्यूटर कोचिंग के लिए जाती है। अक्टूबर 17 को जब वो कोचिंग से वापस नहीं आई तो परिजनों ने खोजबीन शुरू की। फिर किसी ने बताया कि एक लड़का उसे ले गया है।

PAK में ‘गृहयुद्ध’: सेना के खिलाफ लगे सड़कों पर नारे, नवाज शरीफ के दामाद की गिरफ्तारी पर आर्मी चीफ को देने पड़े जाँच के...

पाकिस्तान में यह सारी हलचल ठीक तब शुरू हुई जब विपक्ष ने प्रधानमंत्री इमरान खान के प्रशासन के खिलाफ़ रैली हुई और नवाज शरीफ के दामाद गिरफ्तार कर लिए गए थे।

गोहत्या करने से मना करता था युवक, मुन्नू कुरैशी और कइल ने गला रेत कर मार डाला: माँ ने झारखण्ड सरकार से लगाई न्याय...

मृतक की माँ ने बताया कि उनका बेटा आसपास के लोगों को गोहत्या करने से मना करता था, जिसके कारण उसकी हत्या कर दी गई।

पूर्व IIT प्रोफेसर ने विदेश से लाए थे माओवादी साहित्य, उमर खालिद था ‘अर्बन पार्टी मेंबर’: ‘दलित आतंकवाद’ पर हो रहा था काम

दिल्ली में ऐसे दलित छात्रों को चिह्नित किया जाता था, जो पिछड़े परिवारों से आते हैं, इसके बाद उनके मन में माओवादी आंदोलन के लिए सहानुभूति बिठाई जाती थी।

सूरजभान सिंह: वो बाहुबली, जिसके जुर्म की तपिश से सिहर उठा था बिहार, परिवार हो गया खाक, शर्म से पिता और भाई ने की...

कामदेव सिंह का परिवार को जब पता चला कि सूरजभान ने उनके किसी रिश्तेदार को जान से मारने की धमकी दी है तो सूरजभान को उसी के अंदाज में संदेश भिजवाया गया- “हमने हथियार चलाना बंद किया है, हथियार रखना नहीं। हमारी बंदूकों से अब भी लोहा ही निकलेगा।”

37 वर्षीय रेहान बेग ने मुर्गियों को बनाया हवस का शिकार: पत्नी हलीमा रिकॉर्ड करती थी वीडियो, 3 साल की जेल

इन वीडियोज में वह अपनी पत्नी और मुर्गियों के साथ सेक्स करता दिखाई दे रहा था। ब्रिटेन की ब्रैडफोर्ड क्राउन कोर्ट ने सबूतों को देखने के बाद आरोपित को दोषी मानते हुए तीन साल की सजा सुनाई है।

#Tweet4Bharat: राष्ट्रीय महत्त्व के मुद्दों पर हिंदी श्रेणी में विजेताओं की सूची और उनको जीत दिलाने वाले ट्वीट थ्रेड्स यहाँ देखें

“#Tweet4Bharat” का उद्देश्य राष्ट्रीय महत्व के महत्वपूर्ण मुद्दों पर लिखने, चर्चा करने और विचार-विमर्श करने के लिए युवाओं को ‘ट्विटर थ्रेड्स’ का उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित और प्रेरित करना था।

क्या India Today का खेल खत्म? CBI ने TRP घोटाले में दर्ज की FIR: यूपी सरकार द्वारा की गई थी जाँच की सिफारिश

सीबीआई ने टीआरपी घोटाले की जाँच के लिए एक FIR दर्ज कर ली है। शुरुआत में इस मामले के संबंध में मुंबई पुलिस की FIR में इंडिया टुडे चैनल का नाम सामने आया था।

हाथरस कांड में CBI जाँच तेज: अलीगढ़ JNMC के डॉ. मो अजीमुद्दीन और डॉ. उबेद इम्तियाज टर्मिनेट, रेप सैंपल पर दी थी राय

अलीगढ़ के जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल में काम कर रहे दो डॉक्टरों को तत्काल प्रभाव से टर्मिनेट कर दिया गया है। हाथरस रेप पीड़िता को दिल्ली शिफ्ट किए जाने से पहले उसकी इसी अस्पताल में इलाज हुई थी।

हमसे जुड़ें

272,571FansLike
78,897FollowersFollow
335,000SubscribersSubscribe