Monday, September 21, 2020
Home बड़ी ख़बर नेशनल वॉर मेमोरियल पर सिब्बल की घटिया राजनीति: भूल गए देश व कॉन्ग्रेस का...

नेशनल वॉर मेमोरियल पर सिब्बल की घटिया राजनीति: भूल गए देश व कॉन्ग्रेस का इतिहास

क्या कपिल सिब्बल के घर में उनके स्वर्गीय पिता की तस्वीर नहीं है? क्या देश में हर दूसरे-तीसरे चौराहे पर नेहरू, इंदिरा की मूर्तियाँ नहीं हैं? क्या याद किए जाने का सर्टिफिकेट सिर्फ़ नेताओं के पास ही है, बलिदान देने वाले सैनिकों का कोई मोल नहीं?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज सोमवार (फरवरी 25, 2019) को नेशनल वॉर मेमोरियल का उद्घाटन करेंगे। 40 एकड़ के क्षेत्र में फैले इस वॉर मेमोरियल में हमारे 25,942 बलिदानी जवानों के नाम अंकित होंगे। यह पूरे देश के लिए गर्व का क्षण है क्योंकि देश के लिए वीरगति को प्राप्त होने वाले जवानों को सम्मान मिलने जा रहा है। यह सर्वविदित है कि जो हमे छोड़ कर चले गए, हम उन्हें वापस नहीं ला सकते। लेकिन हाँ, हम उन्हें याद कर और उनका उचित सम्मान कर आने वाली पीढ़ी को प्रेरणा ज़रूर दे सकते हैं। नेशनल वॉर मेमोरियल एक ऐसा ही प्रयास है। चक्रव्यूह की तर्ज पर बने इस मेमोरियल में चार वृत्ताकार परिसर होंगे। इसमें 21 परमवीर चक्र विजेताओं की मूर्तियाँ भी होंगी।

राष्ट्रीय युद्ध स्मारक (NWM)

अब देश की सबसे पुरानी पार्टी ने इस वॉर मेमोरियल को लेकर राजनीति शुरू कर दी है। कपिल सिब्बल ने पूछा है कि क्या वॉर मेमोरियल से सैनिकों की ज़िंदगियाँ बच जाएँगी? साथ ही उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी पर सवाल दागा कि उनकी सरकार ने पिछले 4 वर्षों में जवानों के लिए क्या किया है? कपिल सिब्बल शायद अपनी ही पार्टी का इतिहास भूल गए हैं क्योंकि वॉर मेमोरियल बनाने की माँग आज से नहीं बल्कि 60 वर्षों से चली आ रही है। उनकी सरकार ने इसे तभी से ठंडे बस्ते में डाल रखा था। कपिल सिब्बल के बेतुकी बातों का जवाब देने से पहले ज़रूरी है कि हम पहले वॉर मेमोरियल के इतिहास को देखें ताकि कॉन्ग्रेसीयों के दोहरे रवैये पर से पर्दा उठ सके।

नेशनल वॉर मेमोरियल और कॉन्ग्रेस: जवानों के साथ 6 दशक का अन्याय

सबसे पहले सशस्त्र बलों ने 1960 में नेशनल वॉर मेमोरियल बनाने की माँग की थी, जिसे तत्कालीन नेहरू सरकार ने तवज्जोह नहीं दिया। आख़िर क्या कारण है कि जवाहरलाल नेहरू के नेतृत्व वाली कॉन्ग्रेस सरकार ने वॉर मेमोरियल का निर्माण कराना उचित नहीं समझा? चाहे वह ‘वन रैंक वन पेंशन (OROP)’ हो या ‘नेशनल वॉर मेमोरियल (NWM)’, सशस्त्र बलों के जवानों की माँगों को नज़रअंदाज़ करना कॉन्ग्रेस की फ़ितरत रही है। अब जब 60 वर्षों बाद जवानों की इस माँग पर ध्यान देते हुए मेमोरियल का निर्माण कराया गया है, कॉन्ग्रेस पार्टी को खुजली हो रही है।

2009 में 49 वर्षों बाद कॉन्ग्रेस की तंद्रा टूटी और तत्कालीन यूपीए सरकार ने प्रणब मुखर्जी (उनके राष्ट्रपति बनने से पहले) की अध्यक्षता में एक मंत्रिमंडलीय समीति का गठन किया। इसके बाद इंडिया गेट के पास वॉर मेमोरियल बनाने की बात शुरू हुई और कॉन्ग्रेस सरकार के मंत्रालय आपस में ही लड़ बैठे। शहरी विकास मंत्रालय ने इंडिया गेट के पास वॉर मेमोरियल बनाने का विरोध किया। हेरिटेज कमेटी और केंद्रीय विस्टा कमेटी ने सरकार के इस प्रस्ताव का विरोध करते हुए कहा कि विरासतों के साथ किसी भी प्रकार की छेड़-छाड़ नहीं होनी चाहिए।

- विज्ञापन -

यह सब इसीलिए हो रहा था क्योंकि सरकार के पास इच्छाशक्ति का अभाव था। अगर सरकार सच में गंभीर होती तो शायद 2010 तक यह मेमोरियल बन कर तैयार हो गया रहता। लेकिन विडम्बना देखिए कि 2012 राष्ट्र भारत-चीन युद्ध की 50वीं वर्षगाँठ मनाते हुए वीर सैनिकों के बलिदान को याद कर रहा था, तब तक सरकार के पास वॉर मेमोरियल के लिए कोई रूप-रेखा तय नहीं थी। अव्वल तो यह कि 2012 से पहले कभी भी भारत सरकार ने 1962 के बलिदानियों को श्रद्धांजलि अर्पित करने की ज़रूरत तक महसूस नहीं की। 2012 में जब पहली बार ऐसा हुआ, तब तत्कालीन रक्षा मंत्री एके एंटोनी ने इंडिया गेट के पास वॉर मेमोरियल बनाने का ऐलान किया।

आज कपिल सिब्बल जिस वॉर मेमोरियल को कोसने चले हैं, उसके निर्माण का ऐलान उनके ही मंत्रिमंडल साथी ने किया था। क्या कपिल सिब्बल एके एंटोनी से यह पूछने की ताक़त रखते हैं कि उन्होंने अक्टूबर 2012 में नेशनल वॉर मेमोरियल बनाने की बात क्यों कही थी? जिस सिब्बल की सरकार ने सुरक्षाबलों की 50 वर्ष से चली आ रही माँग के सामने अंततः झुकते हुए वॉर मेमोरियल का अनुमोदान किया था, आज वही पार्टी उसे कोस रही है। इसीलिए कपिल सिब्बल से बार-बार कहा जाता है- येक पे रहने का, या तो घोड़ा बोलो या चतुर।

कॉन्ग्रेस पार्टी में कपिल सिब्बल अकेले ऐसे नेता नहीं हैं जिन्होंने वॉर मेमोरियल का विरोध किया हो। जब एके एंटोनी ने नेश्ननल वॉर मेमोरियल का ऐलान किया था, तब दिल्ली की तत्कालीन मुख्यमंत्री शीला दीक्षित ने इसका विरोध किया था। तीन केंद्रीय मंत्रियों (कमलनाथ, शिंदे, एंटोनी) को अलग-अलग पत्र लिख कर उन्होंने इंडिया गेट के पास प्रस्तावित इस मेमोरियल का विरोध किया था। उन्होंने कहा था कि शहर के लोगों के लिए इंडिया गेट एकमात्र प्रसिद्ध ‘हैंगआउट प्लेस’ है और मेमोरियल के बनने से लोग यहाँ आना कम कर देंगे।

मोदी ने 2014 लोकसभा चुनाव से पहले ही कर दिया था ऐलान

जनवरी 2014 का समय था। अवसर था कालजयी गीत ‘ऐ मेरे वतन के लोगों’ की स्वर्ण जयंती (50 वर्ष) का। मुंबई के रेसकोर्स में आयोजित इस समारोह में भारत रत्न लता मंगेशकर और तब भाजपा के प्रधानमंत्री उम्मीदवार रहे मोदी के अलावा कई पूर्व सैनिक उपस्थित थे। इससे पहले लता मंगेशकर ने मोदी के प्रधानमंत्री बनने की कामना कर चुकीं थीं, जिसके बाद कुछ कॉन्ग्रेसी नेताओं ने उनका भारत रत्न वापस लेने की बात कह दी थी। लाखों लोगों की उपस्थिति के बीच उसी मंच से बोलते हुए मोदी ने कहा था:

“भारत ही एकमात्र ऐसा देश है, जहाँ अपने ‘जवानों के बलिदान’ के सम्मान में कोई युद्ध स्मारक नहीं बनाया गया। मुझे लगता है कि मेरे करने के लिए कुछ अच्छे काम छोड़ दिए गए हैं। भारत ने कई लड़ाइयाँ लड़ीं। इसमें हमारे हजारों जवान शहीद हुए, लेकिन उनकी शहादत को सम्मान देने के लिए कोई स्मारक नहीं है। क्या हमें युद्ध में शहीद हुए जवानों को याद नहीं करना चाहिए? क्या यहाँ एक युद्ध स्मारक नहीं होना चाहिए?”

इस से यह पता चलता है कि कॉन्ग्रेस भले ही जवानों की इस माँग को पूरा करने में विफल रही हो लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दिमाग में यह चीज तब से थी, जब वो पीएम नहीं बने थे। इस मंच से उन्होंने किया था कि सत्ता में आते ही देश के सैनिकों की याद में युद्ध स्मारक का निर्माण कराया जाएगा। आज वह समय आ गया है जब देश को अपना युद्ध स्मारक मिलने जा रहा है। इसका राजनीतिकरण की कोशिश वही लोग कर रहे हैं, जो न तो इसका क्रेडिट लूटने लायक बचे हैं और न ही खुल कर इसकी आलोचना कर पा रहे हैं।

मोदी के सत्ता सँभालने के कुछ ही महीनों बाद 2015 में एक कैबिनेट बैठक में राष्ट्रीय युद्ध स्मारक के लिए बजट का प्रावधान किया गया। इसके लिए ₹176 करोड़ तत्काल जारी किए गए। अगस्त 2016 में भारत सरकार की वेबसाइट पर इसके निर्माण के लिए एक ‘ग्लोबल डिज़ाइन कम्पटीशन’ आयोजित किया गया। जनवरी 2019 को इसका निर्माण पूरा हुआ और आज प्रधानमंत्री स्वयं इसका उद्घाटन कर रहे हैं। यह सब समय-निष्ठा के साथ संभव हो पाया क्योंकि शासन के पास इच्छाशक्ति थी, जवानों के प्रति श्रद्धा है। कॉन्ग्रेस सरकार के पास शायद यह इच्छाशक्ति नहीं थी जिसके कारण यह प्रस्ताव घोषणाओं और वास्तविकता के बीच फँस कर 60 सालों तक लटका रहा।

युद्ध स्मारक प्राचीन भारत सहित अन्य महाशक्तियों की परम्परा रहे हैं

भारतीय संस्कृति, गर्व और इतिहास की पहचान रहा है युद्ध स्मारक। प्राचीन राजा-महाराजाओं ने जब भी कोई युद्ध जीता या आक्रांताओं पर विजय पाई, उन्होंने उसकी याद में एक युद्ध स्मारक बनवाया। वे युद्ध स्मारक सैनिकों के बलिदान का प्रतीक होने के साथ-साथ उनकी वीरता की गाथा कहते थे। कई चित्रकलाओं से उनकी बहादुरी को दर्शाया जाता था। क्या सिब्बल और कॉन्ग्रेस आज अपने ही इतिहास और संस्कृति को भूल कर राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर सवाल खड़ी कर रही है?

युद्ध स्मारक हमारी परम्परा है, संस्कृति है (विजय स्तम्भ, चित्तौड़)

15वीं शताब्दी के मध्य में जब इस्लामी आक्रांताओं ने भारत पर क़हर बरपाना शुरू किया तब एक ऐसे योद्धा का उदय हुआ, जिसने सिर्फ़ राजस्थान ही नहीं बल्कि समस्त भारतवर्ष को राह दिखाने का कार्य किया। सुल्तान महमूद ख़िलजी के नेतृत्व वाली मालवा और गुजरात में बैठे इस्लामी आक्रांताओं को धूल चटाने और सुल्तान को मांडू की तरफ भागने को मजबूर करने के बाद चित्तौड़ के राजा महाराणा कुम्भा ने विजय स्तम्भ (कीर्ति स्तम्भ) का निर्माण कराया। यह आज भी हमे अपने गौरवपूर्ण इतिहास की याद दिलाता है। मुस्लिम, जैन व हिन्दू प्रतीक चिह्नों से अंकित इस स्तम्भ पर इसे बनाने वाले कारीगरों तक के नाम जुड़े हुए हैं।

कौटिल्य ने कहा था कि राष्ट्र और उसके सैनिकों के बीच एक पवित्र अनुबंध होता है और राष्ट्र अगर सैनिकों के साथ उस अनुबंध का सम्मान करने में विफल होता है तो सरकार के पास ऐसे सैनिक रह जाएँगे जो राष्ट्र का सम्मान नहीं करेंगे। वर्षों से सुरक्षाबलों की माँगें न मान कर कॉन्ग्रेस चाणक्य के इस वचन के विपरीत कार्य कर रही थी जिसके परिणामस्वरूप हमारे जवानों को वो उचित सम्मान नहीं दिया गया, जिसके वो हक़दार हैं।

विश्व के तमाम देशों में युद्ध स्मारक हैं जो बलिदानी सैनिकों की याद में बनाए गए हैं। इज़राइल और ब्रिटेन से लेकर हमारे बहुत बाद आज़ाद हुए बांग्लादेश तक- सभी ने अपने बलिदानी सैनिकों को उचित सम्मान देते हुए उनकी याद में स्मारक बनवाए। लेकिन, भारत में अब तक बलिदानियों को उसी इंडिया गेट पर श्रद्धांजलि दी जाती रही है, जिसे अँग्रेजों द्वारा विश्व युद्ध में वीरगति को प्राप्त हुए भारतीय सैनिकों की याद में बनवाया गया था। अर्थात यह, कि आज़ादी के बाद वीरगति को प्राप्त हुए भारतीय जवानों को श्रद्धांजलि देने के लिए कोई अलग स्थल अब तक नहीं था।

सिब्बल की युद्ध स्मारक पर घटिया राजनीति

कपिल सिब्बल का राष्ट्रीय युद्ध स्मारक को लेकर जो बयान आया है, वह बेतुका है। ऐसा इसीलिए, क्योंकि भारत का इतिहास रहा है कि जिन्होंने भी मातृभूमि के लिए त्याग किया है, उन्हें भुलाया नहीं जाता। क्या कपिल सिब्बल के घर में उनके स्वर्गीय पिता की तस्वीर नहीं है? क्या देश में हर दूसरे-तीसरे चौराहे पर नेहरू, इंदिरा की मूर्तियाँ नहीं हैं? क्या याद किए जाने का सर्टिफिकेट सिर्फ़ नेताओं के पास ही है, बलिदान देने वाले सैनिकों का कोई मोल नहीं? कॉन्ग्रेस को इस मानसिकता से बाहर निकलना पड़ेगा। स्मारक, प्रतिमाएँ और तस्वीरें सिर्फ़ नेताओं की नहीं बल्कि मातृभूमि को प्राण अर्पण करने वाले वीरों की भी बननी चाहिए।

नेशनल वॉर मेमोरियल की शानदार झलकियाँ (साभार: PIB)

कपिल सिब्बल को समझना चाहिए कि अगर कोई अपने किसी मृत रिश्तेदार की तस्वीर लगाता है तो ऐसा नहीं है कि उसके दूसरे रिश्तेदार अमर हो जाएँगे या फिर मृत लोग वापस आ जाएँगे। यह सम्मान का प्रतीक होता है उनका, वो हमारा साथ छोड़ गए। और, ये वीर जवानों ने तो हमारे लिए अपने प्राणों की बलि दी है, देश के लिए दी है। उनकी स्मृति तो सहेज कर रखी ही जानी चाहिए ताकि आने वाली पीढ़ियाँ इनके त्याग का माहात्म्य समझें और इन्हे सम्मान देना सीखें। जिस दिन सिब्बल को इन जवानों के प्रति श्रद्धा हो जाएगी, उस दिन वह भी युद्ध समारक पर राजनीतिक कींचड़ उछालना बंद कर देंगे।

  सहयोग करें  

एनडीटीवी हो या 'द वायर', इन्हें कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

अनुपम कुमार सिंहhttp://anupamkrsin.wordpress.com
चम्पारण से. हमेशा राइट. भारतीय इतिहास, राजनीति और संस्कृति की समझ. बीआईटी मेसरा से कंप्यूटर साइंस में स्नातक.

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

8.5% कमीशन तीन हिस्सों में… किसान से उसके उपज को ऐसे लूटा जाता, फिर भी घड़ियाली आँसू बहा रो रहा विपक्ष

इन तीनों विधेयकों की सही और पूरी जानकारी किसानों तक पहुँच नहीं पाई है। यह सरकार की विफलता ही मानी जाएगी। इतने महत्वपूर्ण और दूरगामी...

गाड़ी हिंदू या मुस्लिम की? जलाने से पहले ‘इ-वाहन’ पर चेक किया जाता: Tech के इस्तेमाल से दिल्ली दंगों के 2655 आरोपित धराए

दिल्ली दंगों की संवेदनशीलता के कारण जाँच के दौरान पुलिस द्वारा कॉल डिटेल्स विवरण के अलावा कई अन्य तरह की तकनीक का भी इस्तेमाल किया गया।

‘जेल’ से लालू यादव रोज करते हैं बात, मँगाते हैं फोटो: RJD नेता का खुलासा, तेज प्रताप ने खुद दिया है आशीर्वाद

स्वघोषित प्रत्याशी कमलेश शर्मा ने दावा किया कि राजद सुप्रीमो लालू यादव उनसे रोज फोन पर बात करते हैं और चुनावी तैयारियों का जायजा लेते हैं।

AAP वाले संजय सिंह, TMC के डेरेक ओ ब्रायन सहित 8 सांसद एक सप्ताह के लिए सस्पेंड: वेंकैया नायडू

वेंकैया नायडू ने जिन सांसदों को सस्पेंड किया, उसमें आम आदमी पार्टी के संजय सिंह और तृणमूल कॉन्ग्रेस के डेरेक ओ ब्रायन भी शामिल हैं।

‘अनुराग की उपस्थिति में पूरी सुरक्षित, हमेशा खुश रहती हूँ’ – तापसी के बाद अब राधिका भी कश्यप के बचाव में

अनुराग कश्यप ने यौन शोषण के आरोपों को मनगढंत बताते हुए अपने वकील के जरिए कहा कि 'Me Too' को 'कैरेक्टर एसेसिनेशन' का माध्यम बनाया जा रहा है।

केवल इसी को बेचो या अपनी मर्जी से कहीं भी बेचो… किसान के लिए क्या बेहतर?

तरह-तरह के जुमलों से किसानों को बरगलाने की कोशिश की जा रही है। MSP जो कि अभी भी लागू है, उसके ख़त्म किए जाने का डर बनाया जा रहा...

प्रचलित ख़बरें

‘उसने अपने C**k को जबरन मेरी Vagina में डालने की कोशिश की’: पायल घोष ने अनुराग कश्यप पर लगाया यौन उत्पीड़न का आरोप

“अगले दिन उसने मुझे फिर से बुलाया। उन्होंने कहा कि वह मुझसे कुछ चर्चा करना चाहते हैं। मैं उसके यहाँ गई। वह व्हिस्की या स्कॉच पी रहा था। बहुत बदबू आ रही थी। हो सकता है कि वह चरस, गाँजा या ड्रग्स हो, मुझे इसके बारे में कुछ भी पता नहीं है लेकिन मैं बेवकूफ नही हूँ।”

संघी पायल घोष ने जिस थाली में खाया उसी में छेद किया – जया बच्चन

जया बच्चन का कहना है कि अनुराग कश्यप पर यौन उत्पीड़न के आरोप लगाकर पायल घोष ने जिस थाली में खाया, उसी में छेद किया है।

व्हिस्की पिलाते हुए… 7 बार न्यूड सीन: अनुराग कश्यप ने कुबरा सैत को सेक्रेड गेम्स में ऐसे किया यूज

पक्के 'फेमिनिस्ट' अनुराग पर 2018 में भी यौन उत्पीड़न तो नहीं लेकिन बार-बार एक ही तरह का सीन (न्यूड सीन करवाने) करवाने का आरोप लग चुका है।

कहाँ गायब हुए अकाउंट्स? सोनू सूद की दरियादिली का उठाया फायदा या फिर था प्रोपेगेंडा का हिस्सा

सोशल मीडिया में एक नई चर्चा के तूल पकड़ने के बाद कई यूजर्स सोनू सूद की मंशा सवाल उठा रहे हैं। कुछ ट्विटर अकाउंट्स अचानक गायब होने पर विवाद है।

जया बच्चन का कुत्ता टॉमी, देश के आम लोगों का कुत्ता कुत्ता: बॉलीवुड सितारों की कहानी

जया बच्चन जी के घर में आइना भी होगा। कभी सजते-संवरते उसमें अपनी आँखों से आँखे मिला कर देखिएगा। हो सकता है कुछ शर्म बाकी हो तो वो आँखों में...

थालियाँ सजाते हैं यह अपने बच्चों के लिए, हम जैसों को फेंके जाते हैं सिर्फ़ टुकड़े: रणवीर शौरी का जया को जवाब और कंगना...

रणवीर शौरी ने भी इस मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कंगना को समर्थन देते हुए कहा है कि उनके जैसे कलाकार अपना टिफिन खुद पैक करके काम पर जाते हैं।

8.5% कमीशन तीन हिस्सों में… किसान से उसके उपज को ऐसे लूटा जाता, फिर भी घड़ियाली आँसू बहा रो रहा विपक्ष

इन तीनों विधेयकों की सही और पूरी जानकारी किसानों तक पहुँच नहीं पाई है। यह सरकार की विफलता ही मानी जाएगी। इतने महत्वपूर्ण और दूरगामी...

ड्रग्स मामले में श्रद्धा कपूर पर भी NCB की नजर, सारा अली के साथ इसी हफ्ते भेज सकती है समन

ड्रग्स मामले में एनसीबी इसी हफ्ते अभिनेत्री सारा अली खान और श्रद्धा कपूर को समन भेज सकती है। दोनों सुशांत के साथ फिल्में कर चुकी हैं।

क्या कंगना रनौत ने प्रदर्शनकारी किसानों को आतंकी कहा? TOI की खबर में किए गए दावे का सच

TOI ने लिखा कि अभिनेत्री कंगना रनौत ने राज्यसभा में पास हुए एग्री-मार्केटिंग बिल्स को लेकर विरोध प्रदर्शन कर रहे किसानों पर निशाना साधते हुए उन्हें 'आतंकी' कहा।

गुरुद्वारा श्री पंजा साहिब के ग्रंथी की 17 साल की बेटी का 2 मुस्लिम लड़कों ने किया अपहरण, 15 दिन से Pak प्रशासन सुस्त

बलबीर कौर के अपहरण के बाद अकाली दल नेता ने इस बाबत विदेश मंत्री को पत्र लिखा। उन्होंने कहा कि सिखों को अलग-थलग करने की...

गाड़ी हिंदू या मुस्लिम की? जलाने से पहले ‘इ-वाहन’ पर चेक किया जाता: Tech के इस्तेमाल से दिल्ली दंगों के 2655 आरोपित धराए

दिल्ली दंगों की संवेदनशीलता के कारण जाँच के दौरान पुलिस द्वारा कॉल डिटेल्स विवरण के अलावा कई अन्य तरह की तकनीक का भी इस्तेमाल किया गया।

‘जेल’ से लालू यादव रोज करते हैं बात, मँगाते हैं फोटो: RJD नेता का खुलासा, तेज प्रताप ने खुद दिया है आशीर्वाद

स्वघोषित प्रत्याशी कमलेश शर्मा ने दावा किया कि राजद सुप्रीमो लालू यादव उनसे रोज फोन पर बात करते हैं और चुनावी तैयारियों का जायजा लेते हैं।

एंबुलेंस ड्राइवर नौफल ने कोरोना संक्रमित लड़की का किया था रेप: पीड़िता ने लगाई फाँसी, गेट तोड़ बचाया गया

पीड़िता को सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। लेकिन मेंटल ट्रॉमा से गुजरने के कारण उसे काउंसलिंग की आवश्यकता थी इसलिए उसे...

AAP वाले संजय सिंह, TMC के डेरेक ओ ब्रायन सहित 8 सांसद एक सप्ताह के लिए सस्पेंड: वेंकैया नायडू

वेंकैया नायडू ने जिन सांसदों को सस्पेंड किया, उसमें आम आदमी पार्टी के संजय सिंह और तृणमूल कॉन्ग्रेस के डेरेक ओ ब्रायन भी शामिल हैं।

जावेद चिकना, साहेबजान, सैफ गिरफ्तार: दिल्ली में दोहरे हत्याकांड का पर्दाफाश, महिला की शादी इससे या उससे का मामला

दिल्ली के मुस्तफाबाद में हुए दोहरे हत्याकांड की परत अब जाकर खुली है, जब पुलिस ने 3 आरोपितों को गिरफ्तार कर के उनसे पूछताछ की।

अयोध्या मस्जिद का नाम नहीं होगा बाबरी, मक्का के काबा शरीफ जैसा (वर्गाकार, गुंबद या मीनारें नहीं) संभव: ट्रस्ट

इंडो इस्लामिक कल्चरल फाउंडेशन के सचिव एवं प्रवक्ता अतहर हुसैन ने बताया कि 15000 वर्ग फिट की मस्जिद बनाई जाएगी। इसका क्षेत्रफल बाबरी...

हमसे जुड़ें

263,159FansLike
77,971FollowersFollow
322,000SubscribersSubscribe
Advertisements