Wednesday, April 8, 2020
होम बड़ी ख़बर वो ‘अच्छे लोग’ जिहादी आतंक के साए में नेरूदा और फ़ैज़ पढ़कर सो जाते...

वो ‘अच्छे लोग’ जिहादी आतंक के साए में नेरूदा और फ़ैज़ पढ़कर सो जाते हैं

अच्छे लोग ये तो बोल देते हैं कि सेना की इतनी फ़िक्र है तो सीमा पर लड़ने क्यों नहीं चले जाते, लेकिन कभी ये नहीं बोलते कि मैं सीमा पर शांति का सन्देश लेकर जाऊँगा।

ये भी पढ़ें

Rahul Raj
Poet. Engineer. Story Teller. Social Media Observer. Started Bhak Sala on facebook

सीमा पर तनाव का माहौल है। बॉर्डर पर पाकिस्तान की तरफ से बमबारी जारी है। दो-तीन दिनों पहले उस बमबारी में नौ महीने के एक बच्चे की मौत हो गई और उसी दिन श्रीनगर में कुछ आतंकवादियों ने अंधाधुंध गोली चलाकर पाँच जवानों और कुछ मासूमों को मार दिया। हर साल इसी तरह कई मासूम लोग आतंकवादियों द्वारा मारे जाते हैं। कुछ लोग ये मानते हैं कि इसे युद्ध से सुलझाया जा सकता है तो कुछ लोग ये मानते हैं कि हिंसा कभी भी किसी समस्या का समाधान नहीं होती। और कुछ लोग ये भी मानते हैं कि Nationalism, hyper-nationalism और jingoism के बहाने युद्ध की बातें करने वाले सारे लोग घिनौने, क्रूर और warmonger होते हैं।

हर मसले का बहुत सारा परिप्रेक्ष्य यानी कि perspective होता है। अक्सर हम ये मान लेते हैं कि हमारा परिप्रेक्ष्य ही सही है और दूसरों का ग़लत। पुलवामा हमले के बाद भी कई तरह के विपरीत विचार सामने आए हैं, लेकिन आज मैं पाकिस्तान को सबक सिखाने की बातें करने वाले लोगों के बारे में बोलना नहीं चाहता। आज मैं उन लोगों के बारे में बातें करना चाहता हूँ, जो ये मानते हैं कि उरी पर फिल्म बनाकर या पुलवामा हमले का बदला लेकर हमने अच्छा नहीं किया। आज मैं कुछ अच्छे लोगों के बारे में बातें करना चाहता हूँ।

अच्छे लोग हिंसा या हिंसा के किसी भी संवाद से दूर रहते हैं। अच्छे लोग आतंकवादी हमलों पर दुःख व्यक्त करते हैं, गाँधी के सन्देश लिखते हैं, फैज़ की नज़्म पढ़ते हैं, चैनल बदल कर गुस्सा कम करते हैं और फिर सो जाते हैं। अच्छे लोग मोदी की हँसी में भी युद्ध के विषैले गीत सुन लेते हैं और अच्छे लोग जैश-ए-मोहम्मद को पनाह देने वाले इमरान खान में statesmanship देख लेते हैं। अच्छे लोगों में अच्छा दिखने की इतनी होड़ लगी रहती है कि हिन्दुस्तान के सौ लोगों का पोस्ट पढ़कर उन्हें पूरा हिन्दुस्तान खून का प्यासा दिखने लगता है और पाकिस्तान के दो पोस्ट पढ़कर पूरा पाकिस्तान उन्हें शान्ति की जन्मभूमि दिखने लगती है।

आतंकवादी कैंपों पर हमला करना कब से ग़लत हो गया?

- विज्ञापन - - लेख आगे पढ़ें -

जब अमेरिका पाकिस्तान में घुस कर लादेन को मार रहा था, तब तो उसे युद्ध नहीं बोला गया था। उस दिन तो हमारे अच्छे लोग ये नहीं कह रहे थे कि ओबामा खून का प्यासा है और उसने वोट के लिए लादेन को मार दिया। उस दिन किसी ने ये नहीं कहा था कि पाकिस्तान की अवाम शांति चाहती है, लेकिन अमेरिकी लोग घिनौने हैं। मोदी ने बस ये कहा है कि पुलवामा का बदला लिया जाएगा और इतने में ही वो सबसे बुरा आदमी हो गया।

अच्छे लोगों का मानना है कि भारत को आतंकवादी कैम्पों पर हमला करने के बाद जश्न नहीं मनाना चाहिए था, क्योंकि इससे शान्ति की प्रक्रिया भंग होती है। अच्छे लोग ‘अच्छा सच’ सुनना चाहते हैं। उन्हें ‘बुरा सच’ उचित नहीं लगता। हर रोज़ जब हम शांति की अच्छी बातें लिखकर सो रहे होते हैं, तो सीमा पर आतंकवादी हमलों में कोई न कोई जवान शहीद होता रहता है। हर रोज़ जब हम फैज़ और नेरुदा की कविताएँ पढ़कर ख़ुद को अच्छा इंसान मानते रहते हैं तो उस समय कुछ निर्दोष लोग हमेशा के लिए शांत कर दिए जाते हैं। शान्ति और कविताएँ उन्हें भी पसंद होती हैं, लेकिन जब उनके सामने आतंकवादी बन्दूक लेकर खड़ा रहता है, तब उनके पास बड़ी-बड़ी philosophical बातें करने का convenience नहीं होता।

अच्छे लोग कहते हैं कि केवल प्रेम और संवाद से हिंसा रोकी जा सकती है। अच्छे लोग आपको ये नहीं सुनाना चाहते हैं कि कश्मीर को per-capita के मुताबिक़ सबसे ज्यादा फण्ड मिलता है। इसमें education और medical facilities पर बहुत ध्यान दिया जाता है। अच्छे लोग ये नहीं सुनना चाहते हैं कि जब कोई जवान आतंकवादी को घेरने जाता है तो उस पर पत्थर बरसाए जाते हैं। अच्छे लोग अच्छी बातें लिख कर समस्या हल कर लेते हैं।

जी बिलकुल, युद्ध से गरीबी और तबाही फैलती है। उससे आम आदमी परेशान होता है। आम आदमी के पास पहले से कम परेशानियाँ नहीं हैं, लेकिन इसका मतलब ये तो नहीं है कि आतंकवादी हमलों में सेना को शांति से मर जाना चाहिए, ताकि आम आदमी शांति की कविता लिख पाए। एक गंभीर समस्या को बस इसलिए तो नहीं भूल जाना चाहिए क्योंकि कुछ गंभीर समस्याएँ और भी हैं।

अच्छे लोग ये तो बोल देते हैं कि सेना की इतनी फ़िक्र है तो सीमा पर लड़ने क्यों नहीं चले जाते, लेकिन कभी ये नहीं बोलते कि मैं सीमा पर शांति का सन्देश लेकर जाऊँगा।

प्रश्न पूछना अच्छा है। आप पूछते रहिए, लेकिन जवाब यदि कड़वा हो तो कान बंद मत कीजिएगा।

- ऑपइंडिया की मदद करें -
Support OpIndia by making a monetary contribution

ख़ास ख़बरें

Rahul Raj
Poet. Engineer. Story Teller. Social Media Observer. Started Bhak Sala on facebook

ताज़ा ख़बरें

लॉकडाउन के बीच शिवलिंग किया गया क्षतिग्रस्त, राधा-कृष्ण मंदिर में फेंके माँस के टुकड़े, माहौल बिगड़ता देख गाँव में पुलिस फोर्स तैनात

कुछ लोगों ने गाँव में कोरोना की रोकथाम के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लगे पोस्टरों को फाड़ दिया। इसके बाद देर रात गाँव में स्थित एक शिव मंदिर में शिवलिंग को तोड़कर उसे पास के ही कुएँ में फेंक दिया। इतना ही नहीं आरोपितों ने गाँव के दूसरे राधा-कृष्ण मंदिर में भी माँस का टुकड़ा फेंक दिया।

हमारी इंडस्ट्री तबाह हो जाएगी, सोनिया अपनी सलाह वापस लें: NBA ने की कॉन्ग्रेस अध्यक्ष की सलाह की कड़ी निंदा

सरकारी और सार्वजनिक कंपनियों और संस्थाओं द्वारा किसी प्रिंट, टीवी या ऑनलाइन किसी भी प्रकार के एडवर्टाइजमेंट को प्रतिबंधित करने की सलाह की एनबीए ने निंदा की है। उसने कहा कि मीडिया के लोग इस परिस्थिति में भी जीवन संकट में डाल कर जनता के लिए काम कर रहे हैं और अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं।

कोरोना से संक्रमित एक आदमी 30 दिन में 406 लोगों को कर सकता है इन्फेक्ट, अब तक 1,07,006 टेस्‍ट किए गए: स्वास्थ्य मंत्रालय

ICMR के रमन गंगाखेडकर ने जानकारी देते हुए बताया कि पूरे देश में अब तक कोरोना वायरस के 1,07,006 टेस्‍ट किए गए हैं। वर्तमान में 136 सरकारी प्रयोगशालाएँ काम कर रही हैं। इनके साथ में 59 और निजी प्रयोगशालाओं को टेस्ट करने की अनुमति दी गई है, जिससे टेस्ट मरीज के लिए कोई समस्या न बन सके। वहीं 354 केस बीते सोमवार से आज तक सामने आ चुके हैं।

शाहीनबाग मीडिया संयोजक शोएब ने तबलीगी जमात पर कवरेज के लिए मीडिया को दी धमकी, कहा- बहुत हुआ, अब 25 करोड़ मुस्लिम…

अपने पहले ट्वीट के क़रीब 13 घंटा बाद उसने ट्वीट करते हुए बताया कि वो न्यूज़ चैनलों की उन बातों को हलके में नहीं ले सकता और ऐसा करने वालों को क़ानून का सामना करना पड़ेगा। उसने कहा कि अब बहुत हो गया है। शोएब ने साथ ही 25 करोड़ मुस्लिमों वाली बात की भी 'व्याख्या' की।

जमातियों के बचाव के लिए इस्कॉन का राग अलाप रहे हैं इस्लामी प्रोपेगंडाबाज: जानिए इस प्रोपेगंडा के पीछे का सच

भारत में तबलीगी जमात और यूनाइटेड किंगडम में इस्कॉन के आचरण की अगर बात करें तो तबलीगी जमात के विपरीत, इस्कॉन भक्त जानबूझकर संदिग्ध मामलों का पता लगाने से बचने के लिए कहीं भी छिप नहीं रहे, बल्कि सामने आकर सरकार का सहयोग और अपनी जाँच भी करा रहे हैं। उन्होंने तबलीगी जमात की तरह अपने कार्यक्रम में यह भी दावा नहीं किया कि उनके भगवान उन्हें इस महामारी से बचा लेंगे ।

वो 5 मौके, जब चीन से निकली आपदा ने पूरी दुनिया में मचाया तहलका: सिर्फ़ कोरोना का ही कारण नहीं है ड्रैगन

चीन तो हमेशा से दुनिया को ऐसी आपदा देने में अभ्यस्त रहा है। इससे पहले भी कई ऐसे रोग और वायरस रहे हैं, जो चीन से निकला और जिन्होंने पूरी दुनिया में कहर बरपाया। आइए, आज हम उन 5 चीनी आपदाओं के बारे में बात करते हैं, जिसने दुनिया भर में तहलका मचाया।

प्रचलित ख़बरें

फिनलैंड से रवीश कुमार को खुला पत्र: कभी थूकने वाले लोगों पर भी प्राइम टाइम कीजिए

प्राइम टाइम देखना फिर भी जारी रखूँगा, क्योंकि मुझे गर्व है आप पर कि आप लोगों की भलाई सोचते हैं। बीच में किसी दिन थूकने वालों और वार्ड में अभद्र व्यवहार करने वालों पर भी प्राइम टाइम कीजिएगा। और हाँ! इस काम के लिए निधि कुलपति जी या नग़मा जी को मत भेज दीजिएगा। आप आएँगे तो आपका देशप्रेम सामने आएगा, और उसे दिखाने में झिझक क्यूँ?

मधुबनी में दीप जलाने को लेकर विवाद: मुस्लिम परिवार ने 70 वर्षीय हिंदू महिला की गला दबाकर हत्या की

"सतलखा गाँव में जहाँ पर यह घटना हुई है, वहाँ पर कुछ घर इस्लाम धर्म को मानने वाले हैं। जब हिंदू परिवारों ने उनसे लाइट बंद कर दीप जलाने के लिए कहा, तो वो गाली-गलौज करने लगे। इसी बीच कैली देवी उनको मना करने गईं कि गाली-गलौज क्यों करते हो, ये सब मत करो। तभी उन लोगों उनका गला पकड़कर..."

हिन्दू बच कर जाएँगे कहाँ: ‘यूट्यूबर’ शाहरुख़ अदनान ने मुसलमानों द्वारा दलित की हत्या का मनाया जश्न

ये शाहरुख़ अदनान है। यूट्यब पर वो 'हैदराबाद डायरीज' सहित कई पेज चलाता है। उसने केरल, बंगाल, असम और हैदराबाद में हिन्दुओं को मार डालने की धमकी दी है। इसके बाद उसने अपने फेसबुक और ट्विटर हैंडल को हटा लिया। शाहरुख़ अदनान ने प्रयागराज में एक दलित की हत्या का भी जश्न मनाया। पूरी तहकीकात।

पाकिस्तान: हिन्दुओं के कई घर आग के हवाले, 3 बच्चों की जिंदा जलकर मौत, एक महिला झुलसी, झोपड़ियाँ खाक

जिन झोपड़ियों में आग लगी, और जिनका इससे नुकसान हुआ, वो हिंदू समुदाय के थे। झोपड़ियों में आग लगने से कम से कम तीन बच्चे जिंदा जल गए। जबकि एक महिला बुरी तरह से झुलस गई।

मरकज पर चलेगा बुलडोजर, अवैध है 7 मंजिला बिल्डिंग: जमात ने किया गैर-कानूनी निर्माण, टैक्स भी नहीं भरा

जहाँ मरकज बना हुआ है, वहाँ पहले एक छोटा सा मदरसा होता था। मदरसा भी नाममात्र जगह में ही था। यहाँ क्षेत्र के ही कुछ लोग नमाज पढ़ने आते थे। लेकिन 1992 में मदरसे को तोड़कर बिल्डिंग बना दी गई।

ऑपइंडिया के सारे लेख, आपके ई-मेल पे पाएं

दिन भर के सारे आर्टिकल्स की लिस्ट अब ई-मेल पे! सब्सक्राइब करने के बाद रोज़ सुबह आपको एक ई-मेल भेजा जाएगा

हमसे जुड़ें

174,238FansLike
53,799FollowersFollow
214,000SubscribersSubscribe
Advertisements