Sunday, November 29, 2020
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‘हिजड़ों का शासन’ चलाने वालों के समर्थन से ‘माताश्री का काकभगोड़ा’ बनेंगे मातोश्री के उद्धव

जब बात मुख्यमंत्री पद की है तो उस सम्बन्ध में भी बाल ठाकरे का बयान याद किया ही जाएगा। बाल ठाकरे मानते थे कि कॉन्ग्रेस के जितने भी मुख्यमंत्री हैं, वो सभी सोनिया गाँधी के 'कुरियर सर्विस' हैं। बाल ठाकरे ने कॉन्ग्रेस के मुख्यमंत्रियों की तुलना 'काकभगोड़ों' से भी की थी।

वो नवम्बर 16, 2016 का दिन था। नोटबंदी के फ़ैसले को बस 1 सप्ताह ही हुए थे। विपक्ष लगातार मोदी सरकार को घेरने में लगा हुआ था। विरोध में तृणमूल कॉन्ग्रेस ने राष्ट्रपति भवन तक मार्च किया। उसका साथ भाजपा की सहयोगी शिवसेना भी दे रही थी। उस समय शिवसेना उसी डॉक्टर मनमोहन सिंह के समर्थन में उतर आई थी, जिन्हें ख़ुद उद्धव ने कभी हिजड़ा कहा था। इतना ही नहीं, उन्होंने तो डॉक्टर सिंह को ‘राजनीतिक रूप से नपुंसक’ भी करार दिया था। बाद में वही मनमोहन शिवसेना के लिए हीरो बन गए और दिन-प्रतिदिन शिवसेना ने भाजपा की आलोचना को धार देना शुरू कर दिया।

समय बीतता चला गया और अब स्थिति ये आ गई है कि भाजपा का साथ छोड़ कर शिवसेना ने कॉन्ग्रेस और एनसीपी के समर्थन से सरकार बनाने का फ़ैसला लिया है। ख़ुद को हिंदूवादी पार्टी कहने वाली शिवसेना उस पार्टी की शरण में जा पहुँची है, जिसने राम के अस्तित्व को ही नकार दिया था। मीडिया जिसे कट्टर हिंदूवादी पार्टी की संज्ञा देती थी, जो हिंदूवादी मामलों में भाजपा से भी दो क़दम आगे थी, आज वही पार्टी सीएम पद के लिए चिर-विरोधियों से जा मिली है। वो भी तब, जब भाजपा के साथ उसके चुनाव-पूर्व गठबंधन को पूर्ण बहुमत मिला, सरकार बनाने का जनादेश मिला। एनसीपी, कॉन्ग्रेस और शिवसेना के विधायकों ने उद्धव ठाकरे को अपना नेता चुन लिया है।

ये बाल ठाकरे की पार्टी है। उनके ख़ून-पसीने से सींची हुई पार्टी है, जिसके लिए उन्होंने कई मानक तैयार किए थे। ठाकरे जो कॉन्ग्रेस के सबसे बड़े विरोधियों में से एक रहे। भाजपा के साथ आने के बाद तो उन्होंने कॉन्ग्रेस पर इतने हमले किए कि कॉन्ग्रेस नेता उनका नाम भी सुनना पसंद नहीं करते थे। बाला साहब ने दशहरा की एक रैली के दौरान कहा था कि सोनिया के चरणों में तो हिजड़े झुकते हैं। उन्होंने कॉन्ग्रेस की सरकार को ‘हिजड़ों का शासन’ बताया था। आज कौन किसके चरणों में झुक कर शासन चलाने जा रहा है, ये बताने की ज़रूरत नहीं है। बाला साहब की परिभाषा वही है, बस किरदार बदल गए हैं। उनका बेटा शासन चलाने जा रहा है और वो भी ‘हिजड़ों का शासन’ चलाने वाली पार्टी के समर्थन से।

राहुल गाँधी और सोनिया गाँधी को लेकर बाला साहब ठाकरे ने पूछा था कि क्या प्रधानमंत्री पद भिंडी बाजार में रखी गई कोई कुर्सी है? आज फिर से भिंडी बाजार लगा है, बस कुर्सी बदल है। कॉन्ग्रेस और बाला साहब का बयान वही है, बस प्रधानमंत्री पद की जगह इस बार मुख्यमंत्री पद ने ले ली है। ठाकरे सोनिया को ‘इटालियन पार्टी’ कहते थे। ठाकरे का कहना था कि कॉन्ग्रेस द्वारा ‘इटालियन औरत’ को आगे लाना शर्मनाक है। बाल ठाकरे कहते थे कि कॉन्ग्रेस अब ‘इटालियन कॉन्ग्रेस’ बन गई है। बाल ठाकरे ने कॉन्ग्रेस को ‘2500 सिखों के क़त्ल का जिम्मेदार’ बताया था। बाल ठाकरे के बेटे आज उसी कॉन्ग्रेस के साथ शासन चलाएँगे।

जब बात मुख्यमंत्री पद की हो रही है तो उस सम्बन्ध में भी बाल ठाकरे का बयान याद किया ही जाएगा। बाल ठाकरे मानते थे कि कॉन्ग्रेस के जितने भी मुख्यमंत्री हैं, वो सभी सोनिया गाँधी के ‘कुरियर सर्विस’ हैं। कॉन्ग्रेस के बाहर से समर्थन से सीएम बनने वाले के लिए उनका बयान क्या होता, ये तो उनकी अनुपस्थिति में सिर्फ़ अनुमान ही लगाया जा सकता है। बाल ठाकरे ने कॉन्ग्रेस के मुख्यमंत्रियों की तुलना ‘काकभगोड़ों’ से की थी। आपने भी पढ़ा होगा- “काकभगोड़ा-काकभगोड़ा, जितना लम्बा-उतना चौड़ा“। ये मानव आकर का अस्थायी ढाँचा भर होते हैं, कौवें खेतों में नहीं आते। वो इन्हें असली का आदमी समझ लेते हैं। आज काकभगोड़ा कौन है, यह तो बालासाहब ही बता पाते।

शिवसेना और बाला साहब के विरोध में कॉन्ग्रेस क्या करती थी? कॉन्ग्रेस तो उस अख़बार को ही जला डालती थी, जिसमें बाला साहब ठाकरे का इंटरव्यू छपा होता था। क्या अब वही कार्यकर्ता उद्धव को सीएम बनाने के पार्टी के फ़ैसले से ख़ुश होंगे? हाँ, शिवसेना ने ज़रूर 2012 के राष्ट्रपति चुनाव में कॉन्ग्रेस उम्मीदवार प्रणब मुखर्जी का समर्थन किया था और बाला साहब से उनकी मुलाक़ात भी हुई थी, लेकिन इस मुलाक़ात से सोनिया खफा थीं। ख़ुद मुखर्जी ने अपनी पुस्तक में इसका खुलासा किया है। राहुल की ‘माताश्री’ अपनी पार्टी के नेता के ‘मातोश्री’ जाने से ख़फ़ा थीं। अब सोनिया के समर्थन ने ‘मातोश्री’ से सीएम निकलेगा। ठाकरे ने तो जनता से कहा था कि आपने इन अयोग्य लोगों (कॉन्ग्रेस) को चुना है तो अब झेलिए। लगता है महाराष्ट्र को भी ‘झेलना’ ही पड़ेगा।

आज सारे समीकरण पलट गए हैं। बाल ठाकरे ने कहा था कि शरद पवार ने सोनिया गाँधी को ख़ुश करने के लिए एक सड़क का नाम राजीव गाँधी के नाम पर रख दिया। आज सोनिया गाँधी, उनको ‘ख़ुश करने वाले पवार के साथ बाल ठाकरे के बेटे उद्धव सरकार चलाएँगे। कितना अजीब संयोग है न? जिन शब्दों का प्रयोग शिवसेना के संस्थापक और वर्तमान अध्यक्ष, इन दोनों ने पूर्व में किया था, आज वही शब्द वापस आकर उद्धव को घेरेंगे ज़रूर। ख़ुद उद्धव ठाकरे के बेटे आदित्य ठाकरे कॉन्ग्रेस की तुलना रावण से कर चुके हैं। अब इस नए ‘रामायण’ में कौन राम है और कौन रावण, कुछ पता नहीं चल रहा। आदित्य की नज़र में कॉन्ग्रेस और एनसीपी, दोनों ही ‘महाराष्ट्र के लुटेरे’ हुआ करते थे। इतने कम दिनों में सबकुछ बदल गया।

नोट: किसी भी तरह के भेदभाव, कमजोरी या गाली के तौर पर हिजड़ा जैसे शब्दों के इस्तेमाल का ऑपइंडिया समर्थन नहीं करता है। यहाँ राजनीतिक स्थिति को समझाने के लिए हमने बाल ठाकरे के शब्दों का हू-ब-हू इस्तेमाल किया है।

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अनुपम कुमार सिंहhttp://anupamkrsin.wordpress.com
चम्पारण से. हमेशा राइट. भारतीय इतिहास, राजनीति और संस्कृति की समझ. बीआईटी मेसरा से कंप्यूटर साइंस में स्नातक.

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