Saturday, June 12, 2021
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चीनी वायरस पर मोदी घृणा से सना लेफ्ट-लिबरल प्रोपेगेंडा: कोरोना से भी घातक है ये राजनीति

हमें ये समझने की आवश्यकता है कि हमारा एक संघीय ढाँचा है। इसी संवैधानिक व्यवस्था के तहत कामकाज होते हैं।

देश में कोरोना वायरस की दूसरी लहर जैसे-जैसे तेज होती गई इसके समानांतर एक और लहर भी उफान मारने लगी। यह लहर संक्रमण से भी घातक है। यह लहर पैदा होती है मीडिया, लिबरल-सेकुलर जमात और भारत के विपक्षी दलों की मोदी घृणा से।

जिस समय राजनीतिक और व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाओं से उपर उठकर चीनी वायरस से मुकाबला करने की जरूरत है, यह वर्ग अपनी राजनीति चमकाने की कोशिश कर रही है। राजनीति में हैं तो राजनीति करनी भी चाहिए। लेकिन ये आम जनमानस के खून से सनी नहीं होनी चाहिए।

लेफ्ट-लिबरल्स और कथित सेक्युलर कोरोना की दूसरी लहर की भयावहता के लिए केंद्र सरकार को जिम्मेदार ठहराने का एजेंडा चला रहे हैं। सोशल मीडिया के जरिए ये कभी केंद्र सरकार को कोरोना की दूसरी लहर के कोसते हैं तो कभी ऑक्सीजन और अन्य चीजों के लिए। हर बात के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को जिम्मेदार ठहराना तो फैशन सा बन गया है।

हमें इस बात को नहीं भूलना चाहिए कि भारत में कोरोना की स्थिति दूसरे देशों के मुकाबले इस साल की शुरुआत में काफी बेहतर थी। भारत में दुनिया का सबसे बड़ा वैक्सीनेशन अभियान शुरू हो चुका था। अब 18 साल से अधिक आयु वर्ग तक के लिए भी वैक्सीनेशन शुरू हो चुकी है। इसके अलावा प्रमुख बात ये कि कोरोना की पहली लहर के दौरान ही केंद्र सरकार ने देशभर के सभी राज्यों को अपने यहाँ ऑक्सीजन प्लांट लगाने के लिए करोड़ों रुपए का फंड दिया था।

रिपोर्ट के मुताबिक, पीएम केयर्स फंड से देशभर में वेंटिलेटर्स खरीदने के लिए 2000 करोड़ रुपए का फंड जारी किया गया था। इस फंड से 58 हजार 850 वेंटिलेटर्स खरीदे गए थे। कुछ राज्यों ने इसकी अहमियत को समझते हुए ऑक्सीजन प्लांट लगाया तो कुछ ने इसे ही ठंडे बस्ते में डाल दिया। इन्हीं राज्यों में से एक अरविंद केजरीवाल शासित दिल्ली है। केंद्र सरकार ने केजरीवाल सरकार को पीएम केयर्स फंड के तहत दिल्ली में 8 ऑक्सीजन प्लांट लगाने के लिए फंड जारी किया था, लेकिन दिसंबर 2020 तक केवल एक ऑक्सीजन प्लांट लगी।

कोरोना की दूसरी लहर से कराह रही दिल्ली के अस्पतालों में ऑक्सीजन की कमी से जब लोग दम तोड़ने लगे तो अपने अपेक्षित अंदाज में केजरीवाल ने दिल्ली में ऑक्सीजन की कमी के लिए केंद्र सरकार को जिम्मेदार ठहराना शुरू कर दिया। जबकि एक आरटीआई के जरिए पता चला है कि दिल्ली सरकार ने जनवरी, फरवरी और मार्च इन तीन महीनों में अपने प्रचार पर 150 करोड़ रुपए खर्च कर दिए।

जिस पीएम केयर्स को कोसा, उसी से मदद

जिस पीएम केयर्स फंड पर लेफ्ट-लिबरल्स और कथित सेक्युलर पानी पी-पीकर केंद्र सरकार को कोसते हैं, उसी फंड से केंद्र देशभर में 551 पीएसए ऑक्सीजन जेनरेशन प्लांट लगाने जा रहा है। ये प्लांट देशभर के जिला मुख्यालयों में स्थित सरकारी अस्पतालों में स्थापित किए जाएँगे। 25 अप्रैल 2021 को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इसकी घोषणा की थी।

इसके अलावा पीएम केयर्स फंड से इसी साल देशभर के जन स्वास्थ्य विभागों में पीएसए मेडिकल ऑक्सीजन जेनरेशन प्लांट की स्थापना के लिए केंद्र सरकार द्वारा 201.58 करोड़ रुपए का फंड जारी किया गया था। कोरोना की दूसरी लहर का प्रभाव गाँवों में अधिक देखने को मिल रहा है। ऐसे में ग्रामीण स्तर पर इससे जंग जीतने के लिए मोदी सरकार ने इसी वर्ष 9 मई 2021 को 25 राज्यों की ग्राम पंचायतों के लिए 8923.8 करोड़ रुपए की अनुदान जारी किया था। इस फंड से ग्राम पंचायत, ब्लॉक और जिला स्तर पर कोरोना से लड़ने के लिए सुविधाओं को विकसित किया जाएगा।

बावजूद इसके महामारी के इस दौर में जब देश को एकजुट होकर कोरोना से लड़ना चाहिए तो कॉन्ग्रेस समेत तमाम विपक्षी दल देश को ही अंतरर्राष्ट्रीय स्तर पर नीचा दिखाने की कोशिश कर रहे हैं। सोशल मीडिया के जरिए विपक्ष बार-बार ये सवाल कर रहा है कि जब दूसरी लहर से लड़ने के लिए विदेशों से मदद मिल रही है तो केंद्र सरकार आखिर क्या कर रही थी अब तक?

इस सवाल का जवाब बड़ा ही सीधा सा है। कोरोना से त्रस्त संपूर्ण विश्व को वैक्सीन मैत्री के जरिए भारत ने मदद की और अब जरूरत पड़ने पर वही देश हमारी मदद की आगे आ रहे। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसे ‘डिप्लोमेटिक टाइज’ कहा जाता है।

हमें ये समझने की आवश्यकता है कि हमारा एक संघीय ढाँचा है। इसी संवैधानिक व्यवस्था के तहत कामकाज होते हैं। इसके तहत कोई भी मदद राज्यों को देनी होती है तो पहले केंद्र सरकार उसे राज्यों को आवंटित कर देता है। इसके बाद राज्यों की ये जिम्मेदारी होती है कि वो उसे आम जनता तक पहुँचाएँ। ऐसे में हर चीज के लिए केंद्र सरकार को दोष नहीं दिया जा सकता है।

हम सभी ने देखा है कि कोरोना की पहली लहर के दौरान केंद्र सरकार की सक्रियता के कारण हम दुनिया की दूसरी सबसे अधिक आबादी वाला देश होते हुए भी सुरक्षित रहे थे। हालाँकि, दूसरी लहर को लेकर केंद्र सरकार और तमाम स्वास्थ्य एजेंसियों के आगाह करने के बावजूद राज्य सरकारों और आम लोगों के स्तर पर भी लापरवाही दिखी। इससे हमें सीख लेते हुए तीसरी लहर को लेकर सतर्क रहने की जरूरत है, जिसको लेकर केंद्र सरकार पहले ही आगाह कर चुकी है।

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