Monday, June 21, 2021
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मसूद अज़हर पर ‘दिग्गी राजा’ और ‘गोभक्त’ कमलनाथ ‘परेशान’, कॉन्ग्रेस से लेकर वोटर तक हैरान!

काश इन्हें कोई यह समझा पाता कि हाथ पर हाथ धरे बैठे रहने से देश नहीं चलता, लेकिन कोई समझाए भी तो कैसे क्योंकि हाल ही में ‘दिग्गी’ ने यह बयान देकर सबको चकित कर दिया था कि नेहरू जी के बाद कॉन्ग्रेस ने लिखने-पढ़ने पर बहुत ज़्यादा ध्यान नहीं दिया।

कॉन्ग्रेस और उनके नेता आए दिन अपने बयानों से विवादों में घिरे रहते हैं। दिग्विजय सिंह इन दिनों अपने बयानों से सुर्खियाँ बटोरते नज़र आ रहे हैं। वहीं, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री गोभक्त कमलनाथ भी पीछे नहीं हैं। कॉन्ग्रेस के इन दोनों नेताओं ने अब केंद्र सरकार को ऐसे मुद्दे पर घेरने का प्रयास किया है, जिससे उनकी दिमागी स्थिति और स्पष्ट होती है।

दरअसल, पुलवामा आतंकी हमले की जिम्मेदारी लेने वाले आतंकवादी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के प्रमुख मसूद अज़हर को संयुक्त राष्ट्र ने अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी घोषित कर दिया है। संयुक्त राष्ट्र का यह फैसला भारत के लिए किसी बड़ी उपलब्धि से कम नहीं है। यह बात सर्वविदित है कि आतंकी मसूद अज़हर को वैश्विक आतंकवादी घोषित करने में भारत सरकार ने कोई कोर कसर बाकी नहीं छोड़ी थी, बावजूद इसके कि चीन, भारत की तमाम कोशिशों पर पानी फेरते हुए उसे (मसूद अज़हर) अब तक बचाता आया था।

जैश प्रमुख को अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी घोषित करवाने के प्रयासों पर विपक्ष ने हमेशा ही हमलावर रुख़ अपनाए रखा था। अब जब संयुक्त राष्ट्र (UN) द्वारा आतंकी मसूद को वैश्विक आतंकवादी घोषित किया जा चुका है, तब भी विपक्ष शांत नहीं है।

हमेशा कुछ न कुछ कह देने की अपनी आदत से मजबूर कॉन्ग्रेस के नेता दिग्विजय सिंह ने पीएम मोदी पर निशाना साधते हुए कहा है कि मसूद को आतंकवादी घोषित करने से क्या होगा? जब पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान, मोदी जी के साथ दोस्ती निभा रहे हैं, तो उन्हें अब दाऊद इब्राहिम, मसूद अज़हर और हाफ़िज़ सईद को भी भारत को सौंप देना चाहिए।  

भोपाल लोकसभा सीट से चुनाव लड़ने वाले दिग्विजय सिंह ने कहा है कि सरकार को आतंकी मसूद अज़हर पर इनाम की घोषणा करनी चाहिए, जैसा कि यूपीए के समय में लश्कर-ए-तैयबा के प्रमुख हाफ़िज़ सईद पर किया गया था।

बता दें कि पिछले महीने, पाक पीएम इमरान खान ने कहा था कि अगर पीएम मोदी लोकसभा चुनाव के बाद एक बार फिर से भारत के प्रधानमंत्री बनते हैं तो दोनों देशों के बीच बातचीत का रास्ता खुल सकता है। इसके साथ ही इमरान खान ने यह भी कहा था कि भारत में अगर कॉन्ग्रेस पार्टी की सरकार बनती है, तो वह राइट विंग वाली पार्टी, बीजेपी से डर कर कश्मीर मुद्दे को पाकिस्तान के साथ बातचीत के ज़रिए हल करने से पीछे हट सकती है।

अब बात करते हैं मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ की, जिन्होंने मसूद अज़हर को वैश्विक आंतकी घोषित किए जाने की टाइमिंग को लेकर सवाल खड़े किए हैं। उनका कहना है कि मसूद अज़हर को वैश्विक आंतकी घोषित करने की प्रक्रिया काफ़ी लंबे समय से अटकी हुई थी। अच्छा हुआ यह हो गया। लेकिन, यह चुनाव के समय हुआ, मुझे नहीं पता कि इसका चुनावों से कुछ लेना-देना है कि नहीं?

कॉन्ग्रेस नेता कमलनाथ ने, भले ही अपने इन लफ़्ज़ों में मात्र शक़ ज़ाहिर किया हो कि मसूद को वैश्विक आतंकी घोषित करने के लिए चुनाव के समय का ही चयन क्यों किया गया? लेकिन क्या इन्हें सच में नहीं मालूम है कि एक आंतकवादी को वैश्विक आंतकी घोषित करने की प्रक्रिया किसी व्यक्ति विशेष की मनमर्ज़ी पर निर्भर करती है, या इसके लिए किसी ठोस कार्रवाई की आवश्यकता भी होती है?

यह भी उल्लेखनीय है कि आतंकी मसूद को वैश्विक आतंकियों की सूची में शामिल करने का प्रस्ताव अमेरिका, ब्रिटेन और फ्रांस ने पेश किया था। लेकिन, चीन ने हमेशा की तरह ही अपनी दोहरी नीति का अनुसरण करते हुए, अपनी वीटो पावर का इस्तेमाल कर के मसूद को वैश्विक आंतकी घोषित करने से बचाने का काम किया था, वो भी एक बार नहीं बल्कि चार बार।

भारत में विपक्ष के नेता, जिनका कि एकमात्र लक्ष्य ही मोदी सरकार को घेरना भर है, वो इन हालातों को बख़ूबी जानते और समझते हैं। लेकिन, अपनी वोट की राजनीति के मंतव्य को साधने के लिए वो जनता को भरमाने का काम करते हैं और निरंतर यह प्रचारित करने में जुटे रहते हैं कि मोदी राज में आतंकी मसूद को वैश्विक आंतकी घोषित करने से क्या होगा? साथ ही, यह सन्देश देने का भरसक प्रयास करते हैं कि पाक पीएम इमरान खान से उनका दोस्ताना व्यवहार है।अब क्या बयानवीर ‘दिग्गी’ राजा ये बताएँगे कि मोदी सरकार करे तो क्या करे?

अच्छा होता कि इनकी पार्टी का ही कोई समझदार और पढ़ा-लिखा नेता इन्हें यह समझा पाता कि हाथ पर हाथ धरे बैठे रहने से देश नहीं चलता है, लेकिन कोई समझाए भी तो कैसे, क्योंकि हाल ही में ‘दिग्गी’ ने यह बयान देकर सबको चकित कर दिया था कि नेहरू जी के बाद कॉन्ग्रेस ने लिखने-पढ़ने पर बहुत ज़्यादा ध्यान नहीं दिया। उनके इस बयान से इस बात  का अंदाज़ा बख़ूबी लगाया जा सकता है कि वो जिस पार्टी के हैं, उन्हें वो ही नहीं भाती, क्योंकि वो पार्टी पढ़ने-लिखने की आदत से दूर हो चुकी है और उसमें विचारों का आदान-प्रदान नहीं होता है। इन हालातों में अगर कॉन्ग्रेस नेता अपना मानसिक संतुलन खो रहे हैं, जैसा कि उनके बयानों से झलकता भी है, तो ये कोई नई बात नहीं है। इसे गंभीरता से लेने की तनिक भी आवश्यकता नहीं है।

वहीं, मध्य प्रदेश के CM गोभक्त कमलनाथ की ‘टाइमिंग’ वाले बयान पर एक ही बात समझ में आती है कि उनका ख़ुद का समय ही अच्छा नहीं चल रहा है। उनके भतीजे पर 1350 करोड़ रुपए की टैक्स चोरी का आरोप लगने के साथ-साथ बेटे नकुल नाथ और पत्नी प्रिया नाथ की सम्पत्ति में बढ़ोत्तरी भी उनकी चिंता का विषय बना हुआ है। साथ ही, मध्य प्रदेश में 50 ठिकानों पर छापेमारी के दौरान 281 करोड़ रुपए की बेहिसाब नकदी के रैकेट का पता लगने से जो उनकी किरकिरी हुई वो अलग।

इन सभी बातों के निष्कर्ष से यह कहा जा सकता है कि कॉन्ग्रेसी खेमे के इन वरिष्ठ बयानवीर नेताओं की चिंता का विषय कुछ और ही है, जो खुलकर तो सामने नहीं आता है, लेकिन उनके बेतुके बयान उनकी मन:स्थिति को अक्सर उजागर कर ही देते हैं।

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