Thursday, April 2, 2026
Homeविचारराजनैतिक मुद्देवही व्यवस्था टिकेगी जो जमीन से उठी हो, संगठन में तपी हो, जिसके केंद्र...

वही व्यवस्था टिकेगी जो जमीन से उठी हो, संगठन में तपी हो, जिसके केंद्र में राष्ट्र हो: BJP के ‘नवीन’ प्रयोग के निहितार्थ

इस तरह के निर्णय उन दलों के लिए चेतावनी हैं, जो यह मानकर चल रहे हैं कि राजनीति उनकी खानदानी जागीर है। समय ने इस सोच वाली राजनीति को पूरी तरह बदल दिया है। अब चेहरा नहीं, चरित्र महत्वपूर्ण है। उपनाम नहीं, उपयोगिता मायने रखती है।

राजनीतिक निर्णय मोटे तौर पर पर दो प्रकार के होते हैं। एक, तुरंत शोर मचाते हैं। सुर्खियाँ बटोरते हैं। दूसरे, बिना शोर किए राजनीति की दिशा बदल देते हैं। नितिन नवीन (Nitin Nabin) का भारतीय जनता पार्टी (BJP) का राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष चुना जाना दूसरे प्रकार का निर्णय है।

नितिन नवीन को यह दायित्व न तो भावनात्मक लहर से मिली है। न ही यह किसी तात्कालिक चुनावी मजबूरी का प्रतिफल है, भले कुछ लोगों को पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव और नवीन की जाति (कायस्थ) में कनेक्शन दिखता हो।

यह एक सुनियोजित संगठनात्मक निर्णय है। इसका अर्थ आज से कहीं अधिक, आने वाले वर्षों में समझ आएगा। यह फैसला बीजेपी की उस राजनीतिक प्रक्रिया की उपज है, जिसे पार्टी दशकों से धैर्य के साथ गढ़ती आई है। इस प्रक्रिया में कोई भी पहले कार्यकर्ता बनता है और फिर नेता। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि आप पार्टी के संस्थापक सदस्यों में से एक के पुत्र हैं।

यह प्रक्रिया वंशवाद के स्तर पर भी दूसरे दलों से बीजेपी को अलग करती है। सुनिश्चित करती है कि राजा का बेटा ही राजा नहीं बनेगा। उसे भी संगठन के अन्य बेटों की तरह जमीन पर खुद को खपाना होगा। बार-बार खुद को साबित करना होगा। उसे जो कुछ भी प्राप्त होगा, वह उसके पिता के कार्य या नाम के आधार पर नहीं होगा। उसे अपने सामर्थ्य से उसे लेना होगा।

नितिन नवीन का यह उभार आकस्मिक नहीं। इस निर्णय ने फिर से यह स्पष्ट कर दिया है बीजेपी में नेतृत्व का रास्ता ड्राइंग रूम या मम्मी की कोठरी से नहीं निकलता। वह संगठन की धूल भरी पगडंडियों से होकर गुजरता है।

राहुल गाँधी, अखिलेश यादव, तेजस्वी यादव जैसे लोग जिन्हें राजनीतिक कद विरासत में मिली है, उनके महिमामंडन के लिए ‘युवा’ शब्द का भारतीय राजनीति में इतना दुरुपयोग हो चुका है कि अब किसी नेतृत्व को युवा बताना उसे कमतर आँकने जैसा लगता है। फिर भी नितिन नवीन को केवल युवा चेहरा कहकर निपटा देना भारी भूल होगी, क्योंकि भाजपा में युवा होना केवल महिमामंडन के लिए ही उपयोगी नहीं है। इसका अर्थ होता है उनकी राजनीति में युवाओं जैसी बेचैनी, जोखिम और संघर्ष का दिखना।

यहाँ दायित्व कई परीक्षाओं को उतीर्ण करने के बाद प्राप्त होता है। यह ‘वंश वृक्ष’ से नहीं निकलता। संगठन की पाठशाला में तपकर आता है। नितिन नवीन इसी पाठशाला से निकले एक युवा नेतृत्व हैं। उन्होंने बूथ से लेकर बिहार की सड़कों पर राजनीति सीखी है। फाइलों और फैसलों से टकराकर खुद को सींचा है। फिर राष्ट्रीय भूमिका में प्रवेश किया है।

नितिन नवीन एकमात्र युवा नहीं हैं, जिन्हें बीजेपी में नेतृत्व उत्तराधिकार से नहीं, प्रदर्शन से मिला है। अनुराग ठाकुर, तेजस्वी सूर्या, पुष्कर सिंह धामी जैसे उदाहरण पार्टी में भरे पड़े हैं। ये सभी बताते हैं कि युवा नेतृत्व का अर्थ उम्र से ही नहीं है। यह अथक परिश्रम और अनुशासन से आता है। उत्तराधिकार और प्रदर्शन का यह अंतर नितिन नवीन या अनुराग ठाकुर के पिता का नाम उल्लेख करने से कमतर नहीं हो जाता है। यही अंतर आज भारतीय राजनीति की दिशा तय कर रही है। आगे करती रहेगी।

बीजेपी का युवा नेतृत्व मॉडल उन कार्यकर्ताओं के लिए उम्मीद बनता है, जो अन्य दलों में भैया/दीदी/भौजी का जिंदाबाद करते, पोस्टर लगाते और दरी बिछाते खत्म हो जाते हैं। बीजेपी का संदेश साफ है- संगठन में खुद को झोंककर रखोगे तो शीर्ष तक जाओगे।

दूसरी तरफ कॉन्ग्रेस, सपा या राजद जैसे दलों के कार्यकर्ताओं को पता होता है कि शीर्ष पर पहुँचने के लिए उन्हें अपना बाप बदलना पड़ेगा। इसलिए नितिन नवीन का राष्ट्रीय स्तर पर आना, राहुल-अखिलेश-तेजस्वी जैसों की राजनीति के लिए सीधी चुनौती है। बीजेपी यह चुनौती भाषणों से नहीं, संरचना से दे रही है।

वंशवादी राजनीति का सबसे बड़ा संकट यह है कि वह खुद को बदल नहीं सकती। कथित प्रयोगों के नाम पर भी वह​ हर बार ‘नई पैकिंग में पुराना माल’ ही परोसती है। इसके उलट बीजेपी पुराने ढाँचे में नए लोगों को जिम्मेदारी देती है। संगठन चलता रहता है, चेहरे बदलते रहते हैं। आज नितिन नवीन हैं। कल कोई और होगा। लेकिन इसे प्राप्त करने की पात्रता नहीं बदलेगी। यही वह बात है जो उसे इस देश के अन्य सभी राजनीतिक दलों से अलग करती है।

बीजेपी आज जो कुछ कर रही है, वह केवल सत्ता में बने रहने की राजनीतिक लड़ाई नहीं है। यह राजनीतिक संस्कृति गढ़ने की भी लड़ाई है। यही क्रम चलता रहा तो आने वाले कुछ वर्षों में भारतीय राजनीति की संस्कृति भी दो हिस्सों में साफ बँटी दिखेगी।

एक तरफ बीजेपी जैसी पार्टी होगी। जहाँ नेतृत्व तैयार किया मिलेगा। संगठन गतिमान रहेगा। दूसरी ओर वे वंशवादी दल होंगे, जहाँ नेतृत्व विरासत में मिला होगा। कार्यकर्ता हाशिए पर रहेंगे और संगठन मृत दिखेगा।

नितिन नवीन का राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष बनना कोई सामान्य संगठनात्मक फेरबदल ही नहीं है। यह एक स्पष्ट राजनीतिक घोषणा है कि बीजेपी भविष्य को संयोग के भरोसे नहीं छोड़ेगी। वह नेतृत्व तैयार कर रही है जो उसकी यात्रा को आगे लेकर जाएगी।

यह निर्णय उन दलों के लिए चेतावनी भी है, जो अब भी यह मानकर चल रहे हैं कि राजनीति उनकी खानदानी जागीर है। समय ने इस सोच वाली राजनीति को पूरी तरह बदल दिया है। अब चेहरा नहीं, चरित्र महत्वपूर्ण है। उपनाम नहीं, उपयोगिता मायने रखती है।

इस बदलाव के कारण धीरे-धीरे हाशिए की ओर जा रही राहुल गाँधी, अखिलेश यादव और तेजस्वी यादव जैसों की पारिवारिक राजनीति को एक दिन उस पाताल में पहुँचा देगी, जहाँ से ऐसी राजनीति की वापसी संभव नहीं होगी। उस दिन यह पूरी तरह सुनिश्चित हो जाएगा कि भारतीय लोकतंत्र में वही राजनीतिक व्यवस्था टिकेगी

जो जमीन से उठी हो। संगठन में तपी हो। जिसके केंद्र में राष्ट्र हो।

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

Searched termsदक्षिणावर्त अजीत झा, Ajit Jha Dakshinavart OpIndia, Ajit Jha Columnist Dakshinavart Op India, दक्षिणावर्त अजीत झा का कॉलम, दक्षिणावर्त अजीत झा लिखते हैं, दक्षिणावर्त अजीत झा का राष्ट्रवादी दृष्टिकोण, Dakshinavart A Column by Ajit Jha, Dakshinavart Ajit Jha Writes, Dakshinavart Opinion by Ajit Jha, Op India Ajit Jha Dakshinavart, अजीत झा के लेख, दक्षिणावर्त, अजीत झा का कॉलम, नितिन नबीन, नितिन नबीन भाजपा, Nitin Nabin BJP, Nitin Nabin National Working President, BJP young leadership model, BJP vs dynastic politics, Ajit Jha OpIndia, Rahul Gandhi dynastic politics, Akhilesh Yadav political future, Tejashwi Yadav RJD, Future of Indian politics, BJP young leadership, OpIndia editorial, भाजपा राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष, भाजपा युवा नेतृत्व, वंशवादी राजनीति, राहुल गांधी वंशवाद, अखिलेश यादव राजनीति, तेजस्वी यादव राजनीति, भाजपा बनाम वंशवाद, OpIndia Ajit Jha, अजीत झा संपादकीय, How BJP’s young leadership challenges dynastic politics, Nitin Nabin appointment political significance, BJP leadership model vs Congress dynasty, नितिन नबीन की नियुक्ति के राजनीतिक मायने. भाजपा युवा नेतृत्व बनाम वंशवादी राजनीति, भाजपा में युवा नेताओं को आगे बढ़ाने की रणनीति
अजीत झा
अजीत झा
देसिल बयना सब जन मिट्ठा

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

होर्मुज स्ट्रेट बायपास करके मिडिल ईस्ट से लाया जा सकेगा तेल? इजरायल के PM नेतन्याहू ने सुझाया फॉर्मूला: समझें कैसे पाइपलाइन्स कर सकेंगी ईरान...

होर्मुज स्ट्रेट पर ईरानी कब्जे को लेकर इजरायली PM नेतन्याहू ने समाधान सुझाया है। ये समुद्र के साथ जमीनी भी है, जिससे ईरान की जरूरत खत्म होगी।

‘इस्लाम की रोशनी’ पर ज्ञान देने से नहीं चला ओझा ‘सर’ का काम, अब देश में क्रांति के नाम पर कर रहे ‘मारने-काटने’ की...

अवध ओझा सर ने US-इजरायल और ईरान के बीच जारी जंग का हवाला देते हुए भारत में 'मार-काट' होने की भविष्यवाणी कर दी। और बोला कि ऐसे में वह खुद चीन भाग जाएँगे।
- विज्ञापन -