Thursday, August 18, 2022
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कॉन्ग्रेस की ‘मुस्लिम तुष्टिकरण’ की भेंट चढ़े कन्हैया लाल, खतरा जान भी सोती रही राजस्थान पुलिस: टोंक से उदयपुर तक इसी मजहबी आग में झुलसे हैं हिंदू

राजस्थान सरकार ने मुस्लिम तुष्टीकरण की हदें पार करते हुए रमजान के महीने में मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्रों में बिजली कटौती नहीं करने का आदेश दिया। इसके विपरीत, हिंदू त्योहारों पर कई जिलों में धारा 144 लागू किया गया और रैली आदि निकालने के लिए पुलिस की अनुमति लेना अनिवार्य कर दिया गया।

राजस्थान के उदयपुर (Udaipur, Rajasthan) में मंगलवार (28 जून 2022) को कन्हैया लाल साहू नाम के हिंदू व्यक्ति की गला काटकर दिन-दहाड़े हत्या कर दी गई। इस्लामी आतंकियों ने न सिर्फ गला काटा, बल्कि बाद में वीडियो भी बनाया और उनके रसूल की गुस्ताखी पर लोगों को धमकाया।

इस तरह की घटनाएँ अफगानिस्तान में तालिबान और इराक एवं सीरिया में इस्लामिक स्टेट (IS या ISIS) के आतंकियों द्वारा अंजाम देते हुए हमने देखे हैं, लेकिन ये घटनाएँ अब हमारे पड़ोस में होने लगी हैं और हालात देखकर यही कहा जा सकता है कि अगर इस तरह की आतंकी घटना हमारे साथ हो जाए तो कोई बड़ी बात नहीं होगी।

किसी भी आतंकी घटना को रोकने में समाज और सरकार की भूमिका होती है। सरकार अगर दृढ़ निश्चयी हो तो समाज भी पूरे जोश के साथ लड़ता है, लेकिन उदयपुर की घटना देखने के बाद साफ लगता है कि इस्लामी आतंकवाद (Islamic Terrorism) की गंभीरता को देखने के बजाय मुख्यमंत्री अशोक गहलोत (CM Ashok Gehlot) की नेतृत्व वाली कॉन्ग्रेस (Congress) एक समुदाय विशेष की तुष्टिकरण की नीति पर चल रही है। इसका परिणाम ये हो रहा है कि राजस्थान जल रहा है।

कन्हैया लाल की सरेआम सिर कलम करने की घटना ने कॉन्ग्रेस सरकार और वहाँ के प्रशासन पर कई सवाल खड़े किए हैं। जब कन्हैया लाल को इस्लामी चरमपंथियों की धमकी मिल रही थी, तब पुलिस ने उन्हें सुरक्षा मुहैया क्यों नहीं कराई? धमकी देने वालों को गिरफ्तार क्यों नहीं किया? या फिर कार्रवाई नहीं करने वाले पुलिस अधिकारियों पर सरकार ने एक्शन क्यों नहीं लिया?

ये ऐसे सवाल हैं, जिनमें कन्हैया लाल की हत्या का राज छुपा हुआ है। नूपुर शर्मा का समर्थन करना अपराध नहीं है, क्योंकि शर्मा ने वही बात कही थी जो इस्लामी विद्वान अपने मुँह से खुद कहते आए हैं, उनकी किताबों में लिखी हैं और जो तकरीरों में अक्सर बताई जाती हैं।

जब नूपुर शर्मा का कन्हैया लाल ने समर्थन किया और इस्लामी चरमपंथियों ने उनके खिलाफ शिकायत की तो पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए उन्हें गिरफ्तार कर लिया। लेकिन, जमानत मिलने के बाद भी उन्हें हत्या की धमकी मिलती रही तो कन्हैया लाल 15 जून 2022 को थाने में शिकायत की। लेकिन, पुलिस ने इस्लामी चरमपंथियों पर कार्रवाई करने के बजाय उन्हें थाने में बुलाकर समझौता करा दिया और कन्हैया लाल को दो चार दिन छुपकर रहने का मुफ्त सलाह देकर अपने कर्तव्यों से इतिश्री कर ली।

इसका परिणाम ये हुआ कि थाने में समझौता करने के बाद भी चरमपंथियों ने कन्हैया लाल का सिर कलम कर दिया। स्पष्ट है कि कॉन्ग्रेस सरकार की मुस्लिम तुष्टीकरण की चरम ने पुलिसकर्मियों के हाथ बाँध रखे। हालाँकि, पुलिस यहाँ अपने संवैधानिक दायित्वों के निर्वहन में पूरी तरह विफल रही। कई बार सरकार की ऐसी नीतियाँ भ्रष्ट पुलिसकर्मियों ने सुनहरा अवसर के रूप में सामने आते हैं और वे इसका खूब लाभ उठाते हैं।

राजस्थान की कॉन्ग्रेस सरकार की मुस्लिम तुष्टिकरण पिछले कुछ दिनों की स्थितियों में साफ नजर आ रहा है। हिंदू नववर्ष पर 2 अप्रैल 2022 को करौली हिंसा में जिस तरह हिंदुओं की शोभायात्रा पर हमले किए गए और पुलिस की प्रतिक्रिया रही, उससे इन लोगों ने पैशाचिक आत्मविश्वास और बढ़ता गया।

घटना दर घटना को अंजाम देने के बाद चरमपंथियों का बढ़ रहा मनोबल

करौली हिंसा के बाद सरकार ने अगर उचित कार्रवाई की होती तो चरमपंथियों के मन में कानून के प्रति खौफ पैदा होता। हालाँकि, राज्य की कॉन्ग्रेस सरकार ने राजनीतिक गोटी सेट करने के चक्कर में अपराधियों पर उचित और त्वरित कार्रवाई नहीं की। उस मामले के कई अपराधी आज भी खुलेआम घूम रहे हैं।

इसी तरह 2 मई 2022 को जालोरी गेट पर स्वतंंत्रता सेनानी बालमुकंद बिस्सा की प्रतिमा पर ईद की नमाज पढ़कर निकले दंगाइयों ने तोड़फोड़ की और इस्लामी झंडे फहरा दिए। सरकार यहाँ भी कार्रवाई करने में विफल रही या कहें कि जानबूझकर कार्रवाई नहीं की।

राजस्थान के कॉन्ग्रेस सरकार की अनदेखी और पुलिस-प्रशासन की लापरवाही के कारण टोंक जिले के मालपुरा प्रखंड के हिंदू पलायन करने को मजबूर हो रहे हैं। मालपुरा के हिंदुओं का कहना है कि इलाके में मुस्लिमों की संख्या अवैध रूप से बढ़ती जा रही है और वे हिंदुओं को तरह-तरह से प्रताड़ित कर रहे हैं। हालात से तंग आकर वहाँ के हिंदुओं ने अपने घरों पर मकान बिकाऊ है के पोस्टर लगाए, लेकिन सरकार सोई तो तब तो जगे। ये सरकार तो सोने का नाटक कर रही है।

राजस्थान कॉन्ग्रेस की मुस्लिम तुष्टिकरण कर रहा आग में घी का काम

राजस्थान की अशोक गहलोत सरकार के इस कार्यकाल के ऐसे तमाम काम हैं, जो उन्मादी भीड़ को हौसला देने का काम कर रहे हैं। मुस्लिम तुष्टीकरण की सरकारी नीति आतंकवाद को प्रश्रय, चरमपंथियों को हौसला और हिंदू समाज में भय का माहौल व्याप्त कर दिया है।

राजस्थान की कॉन्ग्रेस सरकार ने ऐसे कई कदम उठाए जो सीधा मुस्लिम तुष्टीकरण की इशारा करता है। अक्टूबर 2021 में राज्य में सरकारी स्कूलों की हालत खस्ता होने के बावजूद सरकार ने उसमें सुधार के लिए फंड जारी करने के बजाए हर मदरसे को 15 से 25 लाख रुपए तक देने का प्रावधान किया। यह सीधे तौर पर एक समुदाय विशेष को खुश करने की कवायद थी।

इसी तरह जनवरी 2022 में मुस्लिमों के परंपरागत हुनर के विकास, उन्हें रोजगार देने, वक्फ भूमि या सार्वजनिक भूमि पर बने कब्रिस्तान, मदरसों में चारदीवारी निर्माण के लिए 100 करोड़ रुपए का कोष जारी किया।

राजस्थान सरकार ने मुस्लिम तुष्टीकरण की हदें पार करते हुए रमजान के महीने में मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्रों में बिजली कटौती नहीं करने का आदेश जारी कर दिया। इसको लेकर विद्युत वितरण कंपनियों ने आदेश जारी किए गए। इस तरह का आदेश का हिंदू त्योहारों पर राज्य सरकार ने कभी नहीं दिया। इसके विपरीत, हिंदू त्योहारों पर कई जिलों में धारा 144 लागू किया गया और रैली आदि निकालने के लिए पुलिस की अनुमति लेना अनिवार्य कर दिया गया।

ऐसे बहुत जारी कारक हैं, जो विहिप के अधिकारी पर हमले, हिंदू व्यक्ति के साथ मारपीट के बाद सांप्रदायिक तनाव से होते हुए भगवा झंडा हटाकर इस्लामी झंडा फहराने तक और फिर करौली में शोभायात्रा पर भारी हिंसा तक बात पहुँच गई। अब ISIS की तरह खुलेआम गला काटने के बाद वीडियो बनाकर प्रधानमंत्री तक को मारने की धमकी देने की हिम्मत भी ये आतंकी करने लगे।

भाजपा के नेता राज्यवर्धन राठौड़ ने ठीक ही कहा कि राज्य सरकार की तुष्टीकरण वाली नीतियों के कारण इस तरह के आतंकी हमले हो रहे हैं और राज्य में आतंकी संगठनों के पनपने में प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से सरकार मदद कर रही है।

राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन अगर अपने रूख में बदलाव नहीं करता तो पाकिस्तान से सटा यह सीमावर्ती राज्य भारत के कश्मीर की तरह एक और नासूर बन जाएगा। इसके साथ ही आतंकियों संगठनों के स्लीपर सेल एवं भर्ती का पनाहगाह स्थल भी साबित होगा। लेकिन, कॉन्ग्रेस को देश से कब मतलब रहा है, उसे तो हर कीमत पर सत्ता चाहिए। आजादी के बाद से कॉन्ग्रेस की नीति और नीयत यही रही है, जिसका परिणाम आज दिख रहा है।

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सुधीर गहलोत
सुधीर गहलोत
पत्रकार और इतिहास प्रेमी

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