Sunday, January 17, 2021
Home विचार सामाजिक मुद्दे लॉकडाउन की 3 बड़ी उपलब्धियाँ, आगे की योजनाएँ ताकि बेहतर तरीके से हो सके...

लॉकडाउन की 3 बड़ी उपलब्धियाँ, आगे की योजनाएँ ताकि बेहतर तरीके से हो सके चुनौती का सामना

इतने लम्बे इस लॉकडाउन के 3 सबसे बड़े प्राप्य ये हैं कि इस बीच सरकार ने इस महामारी से निपटने के लिए आवश्यक स्वास्थ्य-सेवा ढाँचे को विकसित और उससे सम्बंधित प्रबंधों को चुस्त-दुरुस्त कर लिया है। यानी कि इस महामारी से निपटने के लिए सरकार को तैयारी का पर्याप्त समय मिल गया है।

विश्वव्यापी कोरोना संकट ने अब तक 2 लाख से अधिक लोगों की जीवन-लीला समाप्त कर दी है। विश्व के बड़े-छोटे सभी देश इस अदृश्य और अति सूक्ष्म शत्रु के सामने विवश नज़र आ रहे हैं। अभी तक के अनुभव के आधार पर बचाव ही इसका सबसे कारगर उपचार है। इसी मूलमंत्र का अनुसरण करते हुए भारत में 25 मार्च से 14 अप्रैल तक लॉकडाउन किया गया। इस लाइलाज महामारी से लड़ने में लॉकडाउन की प्रभावी भूमिका और सकारात्मक परिणामों को दृष्टिगत रखते हुए इसे 3 मई तक के लिए और बढ़ा दिया गया।

40 दिन लम्बे इस लॉकडाउन का निर्णय सरकार ने इसके नफ़ा-नुकसान का समुचित आकलन करके ही लिया था। तमाम अर्थशास्त्रियों ने इस लॉकडाउन के आर्थिक दुष्परिणामों के प्रति सरकार को आगाह करते हुए कहा था कि इतना लम्बा लॉकडाउन न सिर्फ भारतीय अर्थव्यवस्था को धराशायी कर देगा, बल्कि देश की जनसंख्या के एक बड़े हिस्से को भूख और बेकारी से पूरी तरह तबाह करके जन-हानि को कोरोना से कई गुना अधिक कर देगा।

महामारी और रोजी-रोटी के दो पथरीले पाटों के बीच पिसने वालों में मजदूर, रेहड़ी-ठेला-रिक्शा वाले, सीमान्त किसान, छोटे दुकानदार आदि प्रमुख हैं। ये भारत की जनसंख्या का 40 प्रतिशत से अधिक हैं। सरकार ने अर्थव्यवस्था की सेहत की जगह देशवासियों की सेहत को प्राथमिकता देते हुए इतने लम्बे लॉकडाउन का दूरदर्शी और साहसिक निर्णय लिया। साथ ही, उसने इतने लम्बे लॉकडाउन के नकारात्मक परिणामों और प्रभावों से निपटने की भी अत्यंत मानवीय पहल करते हुए सबके लिए भोजन, दवाई आदि का समुचित प्रबंध किया। सरकार के इन प्रयासों में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ जैसे तमाम स्वयंसेवी संगठनों और नागरिक समाज ने भी अभूतपूर्व सहयोग किया। इस आपदा ने ‘राष्ट्रभाव’ का पुनर्भव करके राष्ट्रीय चरित्र के निर्माण और एकात्म संस्कृति की संभावना का संकेत दिया है।

लेकिन यह भी सत्य है कि लॉकडाउन एक अस्थायी व्यवस्था या अंतरिम इलाज ही है। इसे अनिश्चित काल तक लागू नहीं किया जा सकता है। इसलिए अब आवश्यकता इस बात की है कि इस दिशा में गंभीरतापूर्वक विचार किया जाए कि लॉकडाउन को कब और कैसे समाप्त किया जाए और वर्तमान महामारी से आगे कैसे निपटा जाए! साथ ही, इस आपदाकाल के अनुभवों का आत्मसातीकरण किया जाए। निःसंदेह, ये अनुभव राष्ट्रीय आत्मा के भावी दिशा-निर्देशक हैं।

40 दिन लम्बे इस लॉकडाउन के तीन सबसे बड़े प्राप्य ये हैं कि इस बीच सरकार ने इस महामारी से निपटने के लिए आवश्यक स्वास्थ्य-सेवा ढाँचे को विकसित और उससे सम्बंधित प्रबंधों को चुस्त-दुरुस्त कर लिया है। यानी कि इस महामारी से निपटने के लिए सरकार को तैयारी का पर्याप्त समय मिल गया है। दूसरे, भारत में यह संक्रमण तीसरे चरण अर्थात् सामुदायिक संक्रमण स्तर पर नहीं पहुँच सका है।

यूरोप के देशों का अनुभव बताता है कि सामुदायिक संक्रमण स्तर पर पहुँचकर यह महामारी अनियंत्रित हो जा रही है और परिणामस्वरूप जन-हानि कई गुना बढ़ जाती है। इस अर्थ में यह विशेष उपलब्धि है कि भारत जैसे देश में, जहाँ जनसंख्या बेहिसाब है और उसके अनुपात में स्वास्थ्य-सेवाओं और जागरूकता का चिंताजनक अभाव है, इस भयावह संक्रमण को सामुदायिक स्तर पर फैलने से पहले ही रोक लिया गया है। हालाँकि, दिल्ली के निज़ामुद्दीन में हुए तबलीगी जमात के जमावड़े और संक्रमित जमातियों द्वारा देश भर में इस संक्रमण का पैगम्बर (ब्रांड एम्बेसैडर) बन जाने और शासन तथा स्वास्थ्यकर्मियों के साथ पूर्ण असहयोग और अभद्रता करने के कारण स्थिति जैसे-तैसे नियंत्रित हो सकी है।

लॉकडाउन की तीसरी और बड़ी उपलब्धि लोगों के बीच इस महामारी को लेकर पैदा हुई जागरूकता है। तमाम तरह की सांस्कृतिक-भौगोलिक विविधता, धार्मिक संकीर्णता और शैक्षणिक-आर्थिक पिछड़ेपन के बावजूद प्रत्येक देशवासी इस महामारी की गंभीरता से परिचित हो गया है और मुट्ठीभर अपवादों के अलावा सभी देशवासी एक राष्ट्र के रूप में संगठित होकर मनसा, वाचा, कर्मणा मनुष्यता के इस सबसे बड़े शत्रु से निपटने में एकमत और एकजुट हैं।

कोरोना के खिलाफ जारी इस लड़ाई में राष्ट्र-रक्षकों- जिनमें कि स्वास्थ्यकर्मी, पुलिसकर्मी, मीडियाकर्मी, सफाईकर्मी और रोजमर्रा की वस्तुएँ उपलब्ध कराने वाले शामिल हैं, की भूमिका निर्णायक रही है। उन्होंने अपने घर की चारदीवारी की सुरक्षा से बाहर निकलकर और अपनी जान जोखिम में डालकर लॉकडाउन की उपरोक्त उपलब्धियों को संभव किया है। केंद्र सरकार की तरह पहल करते हुए प्रत्येक राज्य सरकार को भी कोरोना से लड़ने वाले सभी स्वास्थ्य-कर्मियों (डॉक्टर से लेकर आशा कार्यकर्ता और सफाई कर्मी तक) के लिए 50 लाख रुपए के जीवन बीमे का अतिरिक्त प्रावधान करना चाहिए।

यह मानवीय निर्णय न सिर्फ कोरोना योद्धाओं के परिवार को सामाजिक सुरक्षा कवच प्रदान करेगा, बल्कि उनके मनोबल को बढ़ाकर इस अभूतपूर्व युद्ध में उनकी मनोयोगपूर्ण भागीदारी सुनिश्चित करके विजयश्री दिलाएगा। स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा और सम्मान के मद्देनजर केंद्र सरकार द्वारा बनाए गए ताजा कानून से वे बिना किसी बाधा या व्यवधान के अपना काम कर सकेंगे। इस कानून में स्वास्थ्यकर्मियों पर हमला करने वालों या उनके काम में बाधा उत्पन्न करने वालों के लिए 7 साल की सजा का प्रावधान किया गया है।

अब भारत को दो तरह की योजना बनाकर काम करने की महती आवश्यकता है- एक ओर, तात्कालिक योजनाएँ बनाते हुए इस महामारी से निपटते हुए लॉकडाउन की क्रमिक समाप्ति की जाए। और दूसरी ओर, दूरगामी योजनाएँ बनाकर भारत की अर्थनीति और भारतवासियों की जीवन-शैली में आमूल-चूल परिवर्तन की दिशा में काम किया जाए।

भारत को विकास की वैकल्पिक परिभाषा गढ़ने की आवश्यकता है। एक ग्रामोन्मुखी और विकेन्द्रीकृत विकास मॉडल ही “सर्वे भवंतु सुखिनः, सर्वे संतु निरामया। सर्वे भद्राणि पश्यन्तु, मा कश्चिददुखभागभवेत।।” जैसी सर्व-कल्याण कामना को सार्थक और संभव कर सकता है। भारत को पश्चिमोन्मुखी और पूँजीवादी विकास मॉडल को निरस्त करते हुए एक देशज और अधिक भारतीय विकास मॉडल दुनिया के सामने प्रस्तावित करना चाहिए। महात्मा गाँधी और पंडित दीनदयाल उपाध्याय की वैचारिक विरासत भारतवासियों की इस तलाश का पाथेय है।

3 मई के बाद लॉकडाउन को हटाने के लिए भी दो स्तरों पर काम करने की आवश्यकता है। अब भारत को कनाडा, रूस, जर्मनी जैसे देशों की तरह ‘सीमित लॉकडाउन’ और दक्षिण कोरिया जैसे देशों की तरह ‘असीमित परीक्षण’ का मिश्रित मॉडल अपनाने की आवश्यकता होगी। अभी तक कोरोना संक्रमण के ‘हॉट स्पॉट्स’ की पहचान कर ली गई है। अगले सप्ताह तक स्थिति और भी स्पष्ट हो जाएगी। चिह्नित किए गए सभी ‘हॉट स्पॉट्स’ को पूरी तरह सील कर दिया गया है। आगे भी पकड़ में आने वाले ‘हॉट स्पॉट्स’ के मामले में कोई ढील न देते हुए सील करने की कार्रवाई को पूरी सख्ती से जारी रखने की आवश्यकता है।

पूरे देश को कोरोना संक्रमण के फैलाव की संभावना के अनुसार रेड जोन, ऑरेंज जोन और ग्रीन जोन में बाँटा जा रहा है। इसी प्रकार ‘सोशल डिस्टेंसिंग’ और संक्रमण फैलने के खतरे के आधार पर सामाजिक/सार्वजनिक जीवन की तमाम गतिविधियों और कार्यालयी/औद्योगिक कामों को भी रेड केटेगरी, ऑरेंज केटेगरी और ग्रीन केटेगरी में बाँटा जाना चाहिए। यह वर्गीकरण अन्य देशों के साथ-साथ भारत के संक्रमण सम्बन्धी अनुभवों और सम्बंधित विशेषज्ञों से व्यापक विचार-विमर्श के आधार पर किया जाना चाहिए।

रेड जोन वाले क्षेत्रों और गतिविधियों को अभी लॉकडाउन में ही रखा जाना चाहिए। ऑरेंज जोन वाले क्षेत्रों और गतिविधियों को भारी एहतियात बरतते हुए लॉकडाउन मुक्त किया जा सकता है। इस जोन में असीमित परीक्षणों पर निरंतर ध्यान देने की आवश्यकता होगी। ग्रीन जोन वाले क्षेत्रों और गतिविधियों को सामान्य सुरक्षात्मक सावधानियों के साथ लॉकडाउन से मुक्त किया जा सकता है।

भीड़भाड़ वाली गतिविधियों और अपेक्षाकृत कम जरूरी धार्मिक-सामाजिक कार्यक्रमों और मेल-मिलाप को कम-से-कम 6 माह के लिए पूर्ण प्रतिबंधित रखा जाना चाहिए। सार्वजनिक परिवहन को भी अत्यंत नियंत्रित रखा जाना चाहिए और प्रवेश द्वार पर ही यात्रियों के संक्रमण-परीक्षण की समुचित व्यवस्था होनी चाहिए। सार्वजनिक वाहनों और सम्बंधित परिसरों का नियमित सैनिटाइजेशन भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए।

शिक्षा क्षेत्र भी लॉकडाउन से अप्रभावित नहीं रहा है। ज्यादातर विश्वविद्यालयों में इस सेमेस्टर की परीक्षाएँ नहीं हो सकी हैं। उच्च-स्तरीय नीति-निर्माताओं द्वारा ऑनलाइन परीक्षा लेने के विषय में गंभीरतापूर्वक विचार किया जा रहा है। लेकिन देश में ई-इन्फ्रास्ट्रक्चर की वर्तमान स्थिति और उपलब्धता को देखते हुए यह व्यावहारिक विकल्प नहीं है। इसलिए अभी सिर्फ अंतिम सेमेस्टर के विद्यार्थियों की परीक्षा लेने पर ही ध्यान दिया जाना चाहिए। स्थिति में थोड़ा और सुधार आते ही उनकी परीक्षा ‘सोशल डिस्टेन्सिंग’ का पालन करते हुए कराई जा सकती है।

लॉकडाउन समाप्त होने पर ज़ोन विशेष के संक्रमण स्तर के अनुसार इस विषय में निर्णय लिया जा सकता है। शेष विद्यार्थियों की परीक्षा या तो अगले सेमेस्टर के साथ कराई जा सकती है या फिर पिछले सभी सेमेस्टरों के परीक्षाफल का औसत निकालकर इस सेमेस्टर का परीक्षाफल तैयार किया जा सकता है। विद्यार्थी के पूर्ववर्ती परीक्षाफल पर आधारित होने के कारण इससे ‘गुणवत्ता’ भी प्रभावित नहीं होगी।

असाधारण स्थितियों में असाधारण निर्णय लेने होते हैं। यदि केंद्र सरकार से परामर्श करके विश्वविद्यालय अनुदान आयोग केन्द्रीय स्तर पर ऐसा कोई निर्णय करता है तो फिर विद्यार्थियों के करियर पर भविष्य में भी कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा। भविष्य में विश्वविद्यालयों में कक्षाएँ भी एकसाथ प्रारम्भ न करके तीन-चार चरणों (फेज) और दो पालियों (शिफ्ट) में शुरू की जानी चाहिए। इससे परिसर में एकसाथ बहुत ज्यादा भीड़भाड़ नहीं होगी और सोशल डिस्टेन्सिंग का सीमित अनुपालन करते हुए विद्यार्थियों का संक्रमण-परीक्षण आदि भी भली प्रकार किया जा सकेगा। ग्रीन जोन और ऑरेंज जोन क्षेत्र में आने वाले विश्वविद्यालयों और विद्यालयों में ग्रीष्मावकाश में से लॉकडाउन के दिनों को काटकर शिक्षण की भरपाई भी की जा सकती है।

लॉकडाउन के दौरान मानव संसाधन विकास मंत्रालय के निर्देश पर विभिन्न विश्वविद्यालयों और विद्यालयों में ‘ऑनलाइन शिक्षण’ किया गया है। हालाँकि, इस कार्य में शिक्षकों और शिक्षार्थियों को विविध और व्यापक समस्याओं का सामना करना पड़ा है। फिर भी, इस अनुभव ने भविष्य के लिए एक मार्ग सुझाया है- वह मार्ग है ऑनलाइन शिक्षण का। निश्चय ही, ऑनलाइन शिक्षण कक्षा-शिक्षण का स्थानापन्न नहीं हो सकता; किन्तु विद्यार्थियों के पाठ्यक्रम और शिक्षकों के वर्कलोड के एक चौथाई (25%) भाग को ऑनलाइन पढ़ाने के प्रावधान किए जाने चाहिए।

इसी प्रकार जिन सरकारी और गैर-सरकारी कार्यालयों में संभव हो, वहाँ भी कम-से-कम एक चौथाई (25%) काम ‘वर्क फ्रॉम होम’ कराने का नीतिगत निर्णय सरकार द्वारा लिया जाना चाहिए। इससे न सिर्फ भविष्य में ऐसी किसी आपदा के समय बड़ी सहायता मिलेगी, बल्कि ध्वनि एवं वायु प्रदूषण और ट्रैफिक जाम से भी बड़ी राहत मिलेगी। आवागमन में शिक्षकों और विद्यार्थियों के नियमित लगने वाले बहुमूल्य समय की भी कुछ बचत हो सकेगी। पेट्रोल-डीजल जैसे आयात किए जाने वाले ईंधन की खपत कम होने से अरब देशों पर भारत की निर्भरता भी कुछ कम होगी।

  सहयोग करें  

एनडीटीवी हो या 'द वायर', इन्हें कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

प्रो. रसाल सिंह
प्रोफेसर और अध्यक्ष के रूप में हिंदी एवं अन्य भारतीय भाषा विभाग, जम्मू केंद्रीय विश्वविद्यालय में कार्यरत हैं। साथ ही, विश्वविद्यालय के अधिष्ठाता, छात्र कल्याण का भी दायित्व निर्वहन कर रहे हैं। इससे पहले दिल्ली विश्वविद्यालय के किरोड़ीमल कॉलेज में पढ़ाते थे। दो कार्यावधि के लिए दिल्ली विश्वविद्यालय की अकादमिक परिषद के निर्वाचित सदस्य रहे हैं। विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में सामाजिक-राजनीतिक और साहित्यिक विषयों पर नियमित लेखन करते हैं। संपर्क-8800886847

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

#BanTandavNow: अमेज़ॉन प्राइम के हिंदूफोबिक प्रोपेगेंडा से भरे वेब-सीरीज़ तांडव के बहिष्कार की लोगों ने की अपील

अमेज़न प्राइम पर हालिया रिलीज सैफ अली खान स्टारर राजनीतिक ड्रामा सीरीज़ ‘तांडव’, जिसे निर्देशित किया है अली अब्बास ज़फ़र ने। अली की इस सीरीज में हिंदू देवी-देवताओं का अपमान किया गया है।

‘अगर तलोजा वापस गए तो मुझे मार डालेंगे, अर्नब का नाम लेने तक वे कर रहे हैं किसी को टॉर्चर के लिए भुगतान’: पूर्व...

पत्नी समरजनी कहती हैं कि पार्थो ने पुकारा, "मुझे छोड़कर मत जाओ... अगर वे मुझे तलोजा जेल वापस ले जाते हैं, तो वे मुझे मार डालेंगे। वे कहेंगे कि सब कुछ ठीक है और मुझे वापस ले जाएँगे और मार डालेंगे।”

राम मंदिर निर्माण की तारीख से क्यों अटकने लगी विपक्षियों की साँसें, बदलते चुनावी माहौल का किस पर कितना होगा असर?

अब जबकि राम मंदिर निर्माण के पूरा होने की तिथि सामने आ गई है तो उन्हीं भाजपा विरोधियों की साँस अटकने लगी है। विपक्षी दल यह मानकर बैठे हैं कि भाजपा मंदिर निर्माण 2024 के ठीक पहले पूरा करवाकर इसे आगामी लोकसभा चुनाव में मुद्दा बनाएगी।

वीडियो: ग्लास-कैरी बैग पर ‘अली’ लिखा होने से मुस्लिम भीड़ का हंगामा, कहा- ‘इस्लाम को लेकर ऐसी हरकतें, बर्दाश्त नहीं करेंगे’

“हम अपने बुजुर्गों की शान में की गई गुस्ताखी को कतई बर्दाश्त नहीं करेंगे। ये यहाँ पर रखा क्यों गया है? 10 लाख- 15 लाख, जितने भी रुपए का है ये, हम तत्काल देंगें, यहीं पर।"

पालघर नागा साधु मॉब लिंचिंग केस में कोर्ट ने गिरफ्तार 89 आरोपितों को दी जमानत: बताई ये वजह

पालघर भीड़ हिंसा (मॉब लिंचिंग) मामले में गिरफ्तार किए गए सभी 89 लोगों पर जमानत के लिए 15 हजार रुपए की राशि जमा कराने का निर्देश दिया है। अदालत ने इन्हें इस आधार पर जमानत दी कि ये लोग केवल घटनास्थल पर मौजूद थे।

घोटालेबाज, खालिस्तान समर्थक, चीनी कंपनियों का पैरोकार: नवदीप बैंस के चेहरे कई

कनाडा के भारतीय मूल के हाई-प्रोफाइल सिख मंत्री नवदीप बैंस ने अपने पद से इस्तीफा देते हुए राजनीति छोड़ दी है।

प्रचलित ख़बरें

निधि राजदान की ‘प्रोफेसरी’ से संस्थानों ने भी झाड़ा पल्ला, हार्वर्ड ने कहा- हमारे यहाँ जर्नलिज्म डिपार्टमेंट नहीं

निधि राजदान द्वारा खुद को 'फिशिंग अटैक' का शिकार बताने के बाद हार्वर्ड ने कहा है कि उसके कैम्पस में न तो पत्रकारिता का कोई विभाग और न ही कोई कॉलेज है।

अब्बू करते हैं गंदा काम… मना करने पर चुभाते हैं सेफ्टी पिन: बच्चियों ने रो-रोकर माँ को सुनाई आपबीती, शिकायत दर्ज

माँ कहती हैं कि उन्होंने इस संबंध में अपने शौहर से बात की थी लेकिन जवाब में उसने कहा कि अगर ये सब किसी को पता चली तो वह जान से मार देगा।

मारपीट से रोका तो शाहबाज अंसारी ने भीम आर्मी के नेता रंजीत पासवान को चाकुओं से गोदा, मौत

शाहबाज अंसारी ने भीम आर्मी नेता रंजीत पासवान की चाकू घोंप कर हत्या कर दी, जिसके बाद गुस्साए ग्रामीणों ने आरोपित के घर को जला दिया।

मंच पर माँ सरस्वती की तस्वीर से भड़का मराठी कवि, हटाई नहीं तो ठुकराया अवॉर्ड

मराठी कवि यशवंत मनोहर का कहना था कि उन्होंने सम्मान समारोह के मंच पर रखी गई सरस्वती की तस्वीर पर आपत्ति जताई थी। फिर भी तस्वीर नहीं हटाई गई थी इसलिए उन्होंने पुरस्कार लेने से मना कर दिया।

केंद्रीय मंत्री को झूठा साबित करने के लिए रवीश ने फैलाई फेक न्यूज: NDTV की घटिया पत्रकारिता के लिए सरकार ने लगाई लताड़

पत्र में लिखा गया कि ऐसे संवेदनशील समय में जब किसान दिल्ली के पास विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं, उस समय रवीश कुमार ने महत्वपूर्ण तथ्यों को गलत तरीके से प्रस्तुत किया है, जो किसानों को भ्रमित करता है और समाज में नकारात्मक भावनाओं को उकसाता है।

‘अगर तलोजा वापस गए तो मुझे मार डालेंगे, अर्नब का नाम लेने तक वे कर रहे हैं किसी को टॉर्चर के लिए भुगतान’: पूर्व...

पत्नी समरजनी कहती हैं कि पार्थो ने पुकारा, "मुझे छोड़कर मत जाओ... अगर वे मुझे तलोजा जेल वापस ले जाते हैं, तो वे मुझे मार डालेंगे। वे कहेंगे कि सब कुछ ठीक है और मुझे वापस ले जाएँगे और मार डालेंगे।”

#BanTandavNow: अमेज़ॉन प्राइम के हिंदूफोबिक प्रोपेगेंडा से भरे वेब-सीरीज़ तांडव के बहिष्कार की लोगों ने की अपील

अमेज़न प्राइम पर हालिया रिलीज सैफ अली खान स्टारर राजनीतिक ड्रामा सीरीज़ ‘तांडव’, जिसे निर्देशित किया है अली अब्बास ज़फ़र ने। अली की इस सीरीज में हिंदू देवी-देवताओं का अपमान किया गया है।

‘अगर तलोजा वापस गए तो मुझे मार डालेंगे, अर्नब का नाम लेने तक वे कर रहे हैं किसी को टॉर्चर के लिए भुगतान’: पूर्व...

पत्नी समरजनी कहती हैं कि पार्थो ने पुकारा, "मुझे छोड़कर मत जाओ... अगर वे मुझे तलोजा जेल वापस ले जाते हैं, तो वे मुझे मार डालेंगे। वे कहेंगे कि सब कुछ ठीक है और मुझे वापस ले जाएँगे और मार डालेंगे।”

राम मंदिर निर्माण की तारीख से क्यों अटकने लगी विपक्षियों की साँसें, बदलते चुनावी माहौल का किस पर कितना होगा असर?

अब जबकि राम मंदिर निर्माण के पूरा होने की तिथि सामने आ गई है तो उन्हीं भाजपा विरोधियों की साँस अटकने लगी है। विपक्षी दल यह मानकर बैठे हैं कि भाजपा मंदिर निर्माण 2024 के ठीक पहले पूरा करवाकर इसे आगामी लोकसभा चुनाव में मुद्दा बनाएगी।

वीडियो: ग्लास-कैरी बैग पर ‘अली’ लिखा होने से मुस्लिम भीड़ का हंगामा, कहा- ‘इस्लाम को लेकर ऐसी हरकतें, बर्दाश्त नहीं करेंगे’

“हम अपने बुजुर्गों की शान में की गई गुस्ताखी को कतई बर्दाश्त नहीं करेंगे। ये यहाँ पर रखा क्यों गया है? 10 लाख- 15 लाख, जितने भी रुपए का है ये, हम तत्काल देंगें, यहीं पर।"

रक्षा विशेषज्ञ के तिब्बत पर दिए सुझाव से बौखलाया चीन: सिक्किम और कश्मीर के मुद्दे पर दी भारत को ‘गीदड़भभकी’

अगर भारत ने तिब्बत को लेकर अपनी यथास्थिति में बदलाव किया, तो चीन सिक्किम को भारत का हिस्सा मानने से इंकार कर देगा। इसके अलावा चीन कश्मीर के मुद्दे पर भी अपना कथित तटस्थ रवैया बरकरार नहीं रखेगा।

जानिए कौन है जो बायडेन की टीम में इस्लामी संगठन से जुड़ी महिला और CIA का वो डायरेक्टर जिसे हिन्दुओं से है परेशानी

जो बायडेन द्वारा चुनी गई समीरा, कश्मीरी अलगाववाद को बढ़ावा देने वाले इस्लामी संगठन स्टैंड विथ कश्मीर (SWK) की कथित तौर पर सदस्य हैं।

पालघर नागा साधु मॉब लिंचिंग केस में कोर्ट ने गिरफ्तार 89 आरोपितों को दी जमानत: बताई ये वजह

पालघर भीड़ हिंसा (मॉब लिंचिंग) मामले में गिरफ्तार किए गए सभी 89 लोगों पर जमानत के लिए 15 हजार रुपए की राशि जमा कराने का निर्देश दिया है। अदालत ने इन्हें इस आधार पर जमानत दी कि ये लोग केवल घटनास्थल पर मौजूद थे।

तब अलर्ट हो जाती निधि राजदान तो आज हार्वर्ड पर नहीं पड़ता रोना

खुद को ‘फिशिंग अटैक’ की पीड़ित बता रहीं निधि राजदान ने 2018 में भी ऑनलाइन फर्जीवाड़े को लेकर ट्वीट किया था।

‘ICU में भर्ती मेरे पिता को बचा लीजिए, मुंबई पुलिस ने दी घोर प्रताड़ना’: पूर्व BARC सीईओ की बेटी ने PM से लगाई गुहार

"हम सब जब अस्पताल पहुँचे तो वो आधी बेहोशी की ही अवस्था में थे। मेरे पिता कुछ कहना चाहते थे और बातें करना चाहते थे, लेकिन वो कुछ बोल नहीं पा रहे थे।"

घोटालेबाज, खालिस्तान समर्थक, चीनी कंपनियों का पैरोकार: नवदीप बैंस के चेहरे कई

कनाडा के भारतीय मूल के हाई-प्रोफाइल सिख मंत्री नवदीप बैंस ने अपने पद से इस्तीफा देते हुए राजनीति छोड़ दी है।

हमसे जुड़ें

272,571FansLike
80,695FollowersFollow
381,000SubscribersSubscribe