Wednesday, August 12, 2020
Home विचार सामाजिक मुद्दे 'हिंदू-मुस्लिम' का झगड़ा नहीं था दिल्ली का हिन्दू विरोधी दंगा, ये नक्सली-जिहादी गठजोड़ का...

‘हिंदू-मुस्लिम’ का झगड़ा नहीं था दिल्ली का हिन्दू विरोधी दंगा, ये नक्सली-जिहादी गठजोड़ का एक प्रयोग था

एक रणनीति के तहत दिल्ली के मुस्लिम बहुल इलाके के लोगों को इस्तेमाल किया गया और सही दिन चुनकर हिंसा कराई गई, जब अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप दिल्ली में थे। दंगों के दौरान मीडिया और सोशल मीडिया पर प्रयोग की गई शब्दावली भी शहरी नक्सलियों वाली थी। हमलावर होने के बावजूद खुद को पीड़ित की तरह दिखाने में नक्सली माहिर होते हैं।

दिल्ली में इस साल के शुरू में हुए दंगों की चार्जशीट का काम अब लगभग पूरा हो चुका है। जाँच में जो बातें मोटे तौर पर सामने आई हैं, उनसे स्पष्ट है कि यह कोई आम सांप्रदायिक दंगा नहीं था। वास्तव में ये अपनी तरह का पहला दंगा था। जिसकी साजिश रचने वालों को हिंदू या मुसलमान के खाँचे में नहीं डाला जा सकता। वास्तव में शहरी नक्सली (Urban Naxal) इन दंगों के मास्टरमाइंड थे।

आम तौर पर सांप्रदायिक दंगों के पीछे कोई स्थानीय कारण जिम्मेदार होता है। जो षड़यंत्र होते हैं वो भी बहुत तात्कालिक होते हैं। लेकिन यह संभवत: पहली बार हुआ कि कोई बड़ा स्थानीय कारण दिखाई नहीं देता है। अगर नागरिकता कानून को कारण मान भी लें तो जहाँ दंगे हो रहे थे और जो दंगाई पकड़े गए हैं उनमें से किसी की भी नागरिकता संकट में नहीं थी। नागरिकता कानून बहाना जरूर था, लेकिन निशाना कुछ और था।

दिल्ली दंगों के आरोप पत्रों में बार-बार उन तत्वों की झलक मिलती है जो इसकी भूमिका तैयार कर रहे थे। उन्हें विदेशी शक्तियों से पैसे भी मिल रहे थे। देसी-विदेशी मीडिया का एक जाना-पहचाना वर्ग उनके मनमुताबिक माहौल बना रहा था।

एक रणनीति के तहत दिल्ली के मुस्लिम बहुल इलाके के लोगों को इस्तेमाल किया गया और सही दिन चुनकर हिंसा कराई गई, जब अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप दिल्ली में थे। दंगों के दौरान मीडिया और सोशल मीडिया पर प्रयोग की गई शब्दावली भी शहरी नक्सलियों वाली थी। हमलावर होने के बावजूद खुद को पीड़ित की तरह दिखाने में नक्सली माहिर होते हैं।

- विज्ञापन -

शहरी नक्सलियों की खूबी होती है कि वो किसी जगह कुछ समय के लिए अराजकता का माहौल बना सकते हैं। लोगों का ध्यान अपनी तरफ़ खींच सकते हैं, लेकिन व्यापक जनसमर्थन न होने के कारण वो कोई बड़ा आंदोलन खड़ा नहीं कर पाते। हालाँकि, षड्यंत्र रचने में उनका कोई तोड़ नहीं होता। उन्हें हमेशा कुछ ऐसे लोगों की आवश्यकता होती है जिन्हें मोहरा बनाया जा सके।

दिल्ली के मामले में मुस्लिम समुदाय का एक बड़ा वर्ग इसके लिए ख़ुशी-खुशी तैयार हो गया। बिना यह सोचे कि मुद्दा क्या है और क्या इससे उनके जीवन पर कोई फ़र्क़ पड़ने वाला है। इस तरह एक गठजोड़ बन गया जो नागरिकता क़ानून के नाम पर न सिर्फ़ मज़हबी नारे लगा रहा था बल्कि देश तोड़ने की बातें भी बड़े सहज रूप से बोली जा रही थीं।

अगर 14 दिसंबर को रामलीला मैदान में सोनिया गाँधी और अगले दिन शाहीन बाग में आम आदमी पार्टी के विधायक अमानतुल्ला खान के भाषणों को सुनें तो दोनों में कमाल की समानता पाएँगे। लगता है मानो दोनों स्क्रिप्ट किसी एक ही व्यक्ति ने लिखी हैं। सोनिया गाँधी ने रैली के मंच से अपील की कि लोग देश की संसद में पास नागरिकता क़ानून के विरोध में सड़कों पर उतरें।

एक दिन बाद उसी बात को अमानतुल्लाह खान ने अपने तरीक़े से कहा। उसने बस यह विस्तार दे दिया कि “अगर सड़कों पर नहीं उतरे तो मस्जिदों से अजान नहीं होगी। मुसलमान औरतों को बुर्का पहनने पर रोक लग जाएगी”। पिछले कुछ समय से अर्बन नक्सली देशभर में अपनी छोटी-छोटी सभाओं, सेमिनारों और मीडिया के माध्यम से यही माहौल बनाने में जुटे थे। 15 दिसंबर की हिंसा, फिर शाहीन बाग़ का चक्का जाम और उसके बाद ट्रंप की यात्रा पर दंगे इसी सोच से संचालित थे।

पुलिस के आरोप पत्रों और निष्पक्ष संस्थाओं की रिपोर्टों से यह समझ में आता है कि एक-एक घटना और हर किरदार पहले से तय था। डोनाल्ड ट्रंप की यात्रा उनके लिए अवसर था। जब ‘कुछ बड़ा’ करके दुनिया का ध्यान अपनी तरफ़ खींचा जा सकता था। योजना अर्बन नक्सलियों ने बनाई और उस पर अमल की जिम्मेदारी कट्टरपंथियों को दी गई।

ग्रुप ऑफ इंटलेक्चुअल्स एंड एकेडमीशियन (GIA) ने दंगों की इसी प्लानिंग पर एक विस्तृत रिपोर्ट दी है। जिसमें साफ कहा गया है कि वामपंथी और जिहादी गठजोड़ ने मिलकर इसे अंजाम दिया। रिपोर्ट के मुताबिक दिल्ली के बाद पूरे देश को इसी तर्ज पर दंगों में झुलसाने की तैयारी थी। यही कारण है कि रिपोर्ट में दंगों की व्यापक साजिश को समझने के लिए एनआईए से जाँच कराने की सिफारिश की गई है। यह एक ऐसा पहलू है जिसे पुलिस की सामान्य कानूनी प्रक्रिया से पकड़ पाना बहुत कठिन है।

फ़िलहाल वही नक्सली-जिहादी गठजोड़ अब दिल्ली दंगों पर चल रही क़ानूनी कार्रवाई को हिंदू-मुस्लिम रंग देने में जुटा है। ताकि पुलिस की जाँच को संदिग्ध ठहरा दिया जाए। यह याद रखना होगा कि शहरी नक्सलियों की योजना हिंदू-मुस्लिम तक ही सीमित नहीं है। वो समाज की कई और दरारों को चौड़ा करने में दिन-रात जुटे हैं। अगड़ा-पिछड़ा, अमीर-गरीब, मालिक-मजदूर, काला-गोरा, स्त्री-पुरुष जैसी ढेरों दरारें उन्होंने खोज रखी हैं। दिल्ली का प्रयोग भले ही बहुत सफल नहीं रहा हो, लेकिन वो हार नहीं मानेंगे और अगला वार भी जल्द करेंगे।

नोट: इस लेख को लिखा है चन्द्रप्रकाश जी ने, जो पेशे से पत्रकार हैं।

  सहयोग करें  

एनडीटीवी हो या 'द वायर', इन्हें कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

पैगंबर मुहम्मद पर खबर, भड़के दंगे और 17 लोगों की मौत: घटना भारत की, जब दो मीडिया हाउस पर किया गया अटैक

वो 5 मौके, जब पैगंबर मुहम्मद के नाम पर इस्लामी कट्टरता का भयावह चेहरा देखने को मिला। मीडिया हाउस पर हमला भारत में हुआ था, लोग भूल गए होंगे!

ऑपइंडिया एक्सक्लूसिव: 400 Gb/s की इंटरनेट स्पीड, इस समुद्री केबल से बदलेगी अंडमान-निकोबार की तस्वीर

अंडमान-निकोबार में कनेक्टिविटी से वहाँ अनगिनत अवसर पैदा होंगे। पीएम मोदी ने कहा कि 2300 KM पनडुब्बी केबल तय समय से पहले बिछा लिया गया।

पैगम्बर मुहम्मद पर FB पोस्ट लिखने वाला हुआ अरेस्ट: बेंगलुरु में मुस्लिम भीड़ द्वारा हिंसा में 150 दंगाई गिरफ्तार

बेंगलुरु में मुस्लिम भीड़ द्वारा दलित विधायक के घर पर हमले, दंगे, आगजनी और पत्थरबाजी के मामले में CM येदियुरप्पा ने कड़ा रुख अख्तियार किया।

वामपंथियों को दिल्ली दंगों की सच्चाई नहीं आ रही रास, 20 अगस्त को भेजेंगे ओपन लेटर, गुप्त सूचना हुई लीक

पुलिस जाँच कर रही है। लेकिन दिल्ली दंगों की जाँच में निकल कर आ रहे नाम और इलाके वामपंथियों के गले की हड्डी बनते जा रहे हैं। इसी कारण से...

पैगम्बर मुहम्मद पर FB पोस्ट, दलित कॉन्ग्रेस MLA के घर पर हमला: 1000+ मुस्लिम भीड़, बेंगलुरु में दंगे व आगजनी

बेंगलुरु में 1000 से भी अधिक की मुस्लिम भीड़ ने स्थानीय विधायक अखंड श्रीनिवास मूर्ति के घर को घेर लिया और तोड़फोड़ शुरू कर दी।

मौलाना ने 9 साल की अपनी ही स्टूडेंड का किया रेप, अब बच्ची से शादी कराने और केस वापस लेने की धमकी

जिस मौलाना पर रेप का आरोप, उसके परिवार वाले पीड़ित बच्ची के परिवार पर दबाव बना रहे कि वो 9 साल की बच्ची की शादी मौलाना से कर दे और...

प्रचलित ख़बरें

पैगम्बर मुहम्मद पर FB पोस्ट, दलित कॉन्ग्रेस MLA के घर पर हमला: 1000+ मुस्लिम भीड़, बेंगलुरु में दंगे व आगजनी

बेंगलुरु में 1000 से भी अधिक की मुस्लिम भीड़ ने स्थानीय विधायक अखंड श्रीनिवास मूर्ति के घर को घेर लिया और तोड़फोड़ शुरू कर दी।

गोधरा पर मुस्लिम भीड़ को क्लिन चिट, घुटनों को सेक्स में समेट वाजपेयी का मजाक: एक राहत इंदौरी यह भी

"रंग चेहरे का ज़र्द कैसा है, आईना गर्द-गर्द कैसा है, काम घुटनों से जब लिया ही नहीं...फिर ये घुटनों में दर्द कैसा है" - राहत इंदौरी ने यह...

महेश भट्ट की ‘सड़क-2’ में किया जाएगा हिन्दुओं को बदनाम: आश्रम के साधु के ‘असली चेहरे’ को एक्सपोज करेगी आलिया

21 साल बाद निर्देशन में लौट रहे महेश भट्ट की फिल्म सड़क-2 में एक साधु को बुरा दिखाया जाएगा, आलिया द्वारा उसके 'काले कृत्यों' का खुलासा...

मस्जिद के अवैध निर्माण के खिलाफ याचिका डालने वाले वकील पर फायरिंग, अतीक अहमद गैंग का हाथ होने का दावा

प्रयागराज में बदमाशों ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के वकील अभिषेक शुक्ला पर फायरिंग की। हमले में वे बाल-बाल बच गए।

बुर्के वाली औरतों की टीम तैयार की गई थी, DU के प्रोफेसर अपूर्वानंद ने दंगों का दिया था मैसेज: गुलफिशा ने उगले राज

"प्रोफेसर ने हमे दंगों के लिए मैसेज दिया था। पत्थर, खाली बोतलें, एसिड, छुरियाँ इकठ्ठा करने के लिए कहा गया था। सभी महिलाओं को लाल मिर्च पाउडर रखने के लिए बोला था।"

सुशांत के फ्लैटमेट सिद्धार्थ पिथानी का पकड़ा गया झूठ! चौकीदार ने कहा- सुशांत की बॉडी के बारे में नहीं बताया गया

सिद्धार्थ पिथानी ने पहले दावा किया था कि उन्होंने सुशांत की बॉडी देखने के बाद चौकीदार को सूचित किया था, मगर चौकीदार का कहना है कि उसे किसी ने कुछ भी नहीं बताया।

जो बना CAA विरोधी उपद्रव का गढ़, जहाँ नसीरुद्दीन शाह ने उगला था जहर: बेंगलुरु में मुस्लिम भीड़ ने वहीं किया दंगा

भारत के लिबरल गैंग जिस भी चीज का हद से ज्यादा गुणगान करे, उसके बारे में समझ जाना चाहिए कि वो उतना ही ज्यादा खतरनाक है। उदाहरण के लिए दिल्ली के शाहीन बाग को ही ले लीजिए। इसी क्रम में बेंगलुरु के बिलाल बाग को भी प्रचारित किया गया।

पैगंबर मुहम्मद पर खबर, भड़के दंगे और 17 लोगों की मौत: घटना भारत की, जब दो मीडिया हाउस पर किया गया अटैक

वो 5 मौके, जब पैगंबर मुहम्मद के नाम पर इस्लामी कट्टरता का भयावह चेहरा देखने को मिला। मीडिया हाउस पर हमला भारत में हुआ था, लोग भूल गए होंगे!

बेंगलुरु दंगा के पीछे SDPI का हाथ: मुजम्मिल पाशा ने हिंसा भड़काने के लिए बाँटे थे रुपए, 165 हिरासत में

पूर्वी बेंगलुरु में हुई इस घटना के मामले में 'सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (SDPI)' के नेता मुजम्मिल पाशा को गिरफ्तार किया गया है। वो इन दंगों का मास्टरमाइंड है।

पैंगबर से ज्यादा तारीफ इंसान की, गाना लिख कर वायरल करने वाले संगीतकार को अब मौत की सजा

यहाया फिलहाल हिरासत में हैं। गाना कंपोज करने के बाद से वह छिपते फिर रहे थे। जिसके कारण प्रदर्शनकारियों ने उनके परिवार के घर को जला दिया।

रायबरेली में बने भव्य बाबरी मस्जिद, सुप्रीम कोर्ट ने नहीं माना कि राम मंदिर तोड़ कर मस्जिद बनी थी: मुनव्वर राना

मुनव्वर राना की बेटी सुमैया ने भी कहा कि अयोध्या के राम मंदिर परिसर में ही छोटी सी मस्जिद बनाने के लिए इजाजत दी जानी चाहिए थी।

भारत में नौकरी कर रहे चायनीज ने की ₹1000+ करोड़ की मनी लॉन्ड्रिंग, IT विभाग ने किया भंडाफोड़

IT विभाग को छानबीन में हवाला से जुड़े दस्तावेज मिले हैं। इसके साथ ही हॉन्ग कॉन्ग की करेंसी और अमेरिकी डॉलर भी हाथ लगे हैं।

ऑपइंडिया एक्सक्लूसिव: 400 Gb/s की इंटरनेट स्पीड, इस समुद्री केबल से बदलेगी अंडमान-निकोबार की तस्वीर

अंडमान-निकोबार में कनेक्टिविटी से वहाँ अनगिनत अवसर पैदा होंगे। पीएम मोदी ने कहा कि 2300 KM पनडुब्बी केबल तय समय से पहले बिछा लिया गया।

नाबालिग हिन्दू लड़कियों को नशे का आदी बना रहा था जावेद: इंस्टाग्राम पर दोस्ती कर ले जाता था हुक्का बार

मेरठ के जावेद खान (नाबालिग, इसीलिए बदला हुआ नाम) का पेशा प्रतिष्ठित हिन्दू कॉलनियों की लड़कियों को हुक्का बार ले जाकर नशे का आदी बनाना है।

पैगम्बर मुहम्मद पर FB पोस्ट लिखने वाला हुआ अरेस्ट: बेंगलुरु में मुस्लिम भीड़ द्वारा हिंसा में 150 दंगाई गिरफ्तार

बेंगलुरु में मुस्लिम भीड़ द्वारा दलित विधायक के घर पर हमले, दंगे, आगजनी और पत्थरबाजी के मामले में CM येदियुरप्पा ने कड़ा रुख अख्तियार किया।

गोधरा पर मुस्लिम भीड़ को क्लिन चिट, घुटनों को सेक्स में समेट वाजपेयी का मजाक: एक राहत इंदौरी यह भी

"रंग चेहरे का ज़र्द कैसा है, आईना गर्द-गर्द कैसा है, काम घुटनों से जब लिया ही नहीं...फिर ये घुटनों में दर्द कैसा है" - राहत इंदौरी ने यह...

हमसे जुड़ें

246,500FansLike
64,640FollowersFollow
295,000SubscribersSubscribe
Advertisements