Tuesday, May 18, 2021
Home विचार सामाजिक मुद्दे पटाखों पर रोक लेकिन कुर्बानी से 'प्यार' और क्रिसमस पर सब OK... नफरत सिर्फ...

पटाखों पर रोक लेकिन कुर्बानी से ‘प्यार’ और क्रिसमस पर सब OK… नफरत सिर्फ हिंदुओं के त्योहारों से क्यों?

“जिस तरह से दही-हांडी समेत बाकी हिंदू त्योहारों को बैन किया जा रहा है, उसे देखते हुए हिंदुओं के अंतिम संस्कार पर भी रोक लगा दी जाएगी या फिर कोई कोर्ट में याचिका डालकर प्रदूषण के मुद्दे पर शवों को जलाने से रोक लगाने की माँग करेगा। निश्चित तौर पर इसमें राजनीति है।"

90 के दशक में बच्चों की दिवाली धूम-धड़ाके वाली ही होती थी। आज भी आपको वो दिन याद आते होंगे जब मम्मी-पापा घर की सफाई और पूजा के सामान की चिंता में घुले जाते थे। लेकिन आपको दिन रात बस दिवाली में अपने पटाखों की चिंता रहती थी। शाम को बाजार जाना और आलू बम, चरखी, फूलझड़ी, अनार, लड़ी बम, रॉकेट जैसे जाने कितने पटाखे खरीद लाते।

दिवाली की रात का इंतजार कौन करे। बच्चों की दिवाली तो दो-तीन दिन पहले से ही शुरू हो जाती। वो बम को टूटे-फूटे टीन के डब्बों के नीचे रखकर जलाना। बम फूटने पर उस डब्बे को हवा में उड़ते देखना। हाथ में रखकर अनार जलाना और दोस्तों के सामने हेकड़ी झाड़ना। 100 बमों की लड़ी को मटके में रखकर जलाना और फिर उसकी आवाज का पूरे मुहल्ले तक में गूँजना। रॉकेट जलाना, जो पड़ोसी के घर में घुस जाया करती थी।

याद ही होगा न ये सब आप लोगों को? इन पंक्तियों को पढ़कर आपके चेहरे पर एक हल्की सी मुस्कान भी आ गई होगी। क्योंकि कमोबेश 90 के दशक के हर बच्चे का यही बचपन रहा होगा। सबने ऐसे ही दिवाली मनाई होगी। थोड़ी कम या थोड़ी ज्यादा।

अब दिल्ली में दिवाली से ठीक पहले दिल्ली सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया है। दिल्ली में पटाखों को 9 नवंबर से 30 नवंबर तक पूरी तरह से बैन कर दिया गया है। ग्रीन क्रैकर्स भी नहीं बिकेंगे। कहा गया कि दिल्ली को प्रदूषण से बचाने के लिए इस तरह की पाबंदी लगाई गई है। 

दिल्ली में कोरोना और पॉल्यूशन के कॉकटेल ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। दिवाली के पास पॉल्यूशन का ठीकरा पटाखों पर फोड़ा जा रहा है। दिल्ली समेत कुछ अन्य राज्यों ने पटाखे जलाने पर पूरी तरह से रोक लगा दी है। अब सवाल ये है कि प्रदूषण को लेकर सरकारें साल भर क्यों सोती रहती हैं? पॉल्यूशन का सॉल्यूशन चंद दिनों के बैन से निकलेगा? क्या पटाखा ही पॉल्यूशन का असली विलेन है? पराली जलाने पर बैन क्यों नहीं लगाती सरकारें? क्या पॉल्यूशन के बहाने हिंदू त्योहारों को टारगेट किया जा रहा है? पॉल्यूशन पर कब सख्त बनेगी पॉलिसी?

सवाल तो यह भी है कि पटाखों पर बैन केवल 30 नवंबर तक ही क्यों? यदि पटाखे हवा और स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हैं तो पूरे साल के लिए उन्हें बैन कर देना चाहिए। पटाखे उद्योग बंद कर देना चाहिए। पटाखा कारोबारियों को पुनर्वास पैकेज देना चाहिए और भारत को पटाखा मुक्त देश घोषित कर देना चाहिए। सिर्फ हिंदू त्योहारों को प्रदूषण के बहाने क्यों टारगेट किया जा रहा है?

क्या प्रदूषण कम करने नाम पर पटाखों की बिक्री पर पाबंदी लगाना उचित है? मैं इस बात से असहमत हूँ। दिवाली में पटाखे फोड़ने से रोकना हिंदू संस्कृति पर हमला है। आखिर तुम हमें हमारा ही त्योहार मनाने से कैसे रोक सकते हो? पहले तुमने होली के समय हमसे ये कहकर पानी छीन लिया कि इस त्योहार में पानी की बहुत बर्बादी होती है। अब दिवाली पर पटाखे भी?

बकरीद के बारे में कोई कुछ नहीं कहता, जब लाखों मासूम जानवरों को मौत के घाट उतार दिया जाता है। क्या बकरीद के मौके पर बकरे कटने से नदियों का रंग लाल नहीं होता है। तब तो लोगों को प्रदूषण की फिक्र नहीं होती है। क्रिसमस के बारे में क्या कहेंगे जब हजारों पेड़ काट दिए जाते हैं?

दिल्ली में तो वैसे ही प्रदूषण रहता है, तो सिर्फ पटाखे पर बैन से क्या फर्क पड़ेगा? अजान के लिए मस्जिदों पर लाउडस्पीकर के इस्‍तेमाल पर क्‍या कहेंगे? क्‍या ये ध्‍वनि प्रदूषण ठीक है। ये अजीब है कि सारा जोर सिर्फ एक ही समुदाय पर चल रहा है। पटाखों की सेल पर जो बैन लगा, वह ‘हिंदू संस्कृति’ को लगा है, पटाखों को नहीं। ऐसा बैन न ईद पर लगता है न मुहर्रम और न ही क्रिसमस पर लगता है। सिर्फ दिवाली-होली पर लगता है, क्यों? 

इससे पहले पटाखों पर बैन का विरोध करते हुए त्रिपुरा के राज्यपाल ने यहाँ तक कह दिया था कि ऐसा लगता है कि प्रदूषण के नाम पर अंतिम संस्कार में शव जलाने पर भी कहीं रोक ना लगा दी जाए। राज्यपाल ने बाद में कहा,

“मैंने अपने ट्वीट में कोर्ट के फैसले पर कुछ नहीं कहा है। मैंने ये कहा है कि जिस तरह से दही हांडी समेत बाकी हिंदू त्योहारों को बैन किया जा रहा है, उसे देखते हुए हिंदुओं के अंतिम संस्कार पर भी रोक लगा दी जाएगी या फिर कोई कोर्ट में याचिका डालकर प्रदूषण के मुद्दे पर शवों को जलाने से रोक लगाने की माँग करेगा। निश्चित तौर पर इसमें राजनीति है। अवॉर्ड वापसी ग्रुप और बाकी लोग जो ऐसी याचिका दायर करते हैं, उनकी नजर हमेशा अल्पसंख्यक वोट बैंक पर होती है। मैं उस राजनीति में नहीं पड़ूँगा लेकिन इतना जरूर कहूँगा कि इसमें राजनीति है।”

बीजेपी नेता कपिल मिश्रा ने अरविंद केजरीवाल से पटाखा बैन को लेकर सवाल किया, “क्या हर साल दिवाली पर पटाखों को बैन करना उचित है? दिल्ली में आज तो पटाखे नहीं जल रहे हैं तो प्रदूषण का स्तर आज खराब क्यों है? करवा चौथ के दिन चाँद देखने के लिए एक-एक घंटे जद्दोजहद करनी पड़ी, प्रदूषण अपने चरम पर था, लेकिन तब तो पटाखे नहीं चल रहे थे?”

ज्वैलरी ब्रांड तनिष्क ने भी अपने लव जिहाद वाले विवादित विज्ञापन के बाद दिवाली के अवसर पर पटाखे को लेकर नया ऐड तैयार किया। इस ऐड में भी उन्होंने अपने प्रचार के नाम पर हिंदू विरोधी प्रोपेगेंडा परोसा है, जिसकी वजह से सोशल मीडिया पर एक बार फिर बॉयकॉट तनिष्क ट्रेंड करने लगा है।

ऐड शुरू होते ही एक महिला इसमें कहती है, “यकीनन कोई पटाखे नहीं। मुझे नहीं लगता किसी को पटाखे जलाने चाहिए।” इसके बाद दो-तीन महिलाएँ अपनी बातें रखती हैं और अंत में इकट्ठा होकर खिलखिलाती नजर आती हैं। बस ऐड खत्म।

सोचने वाली है बात है कि यह प्रचार दिवाली के लिए निर्मित हुआ है। यदि मान भी लिया जाए कि तनिष्क का प्रोपेगेंडा हिंदू विरोधी नहीं है तो फिर इसमें दीये, कैंडल्स, रंगोली, मिठाई, पूजा की थाली आदि चीजें कहाँ हैं? जो आमतौर पर दिवाली के मौके पर हर घर की शोभा बढ़ाते हैं। क्या दिवाली का मतलब सिर्फ़ तनिष्क का सोना पहनना होता है?

दिल्ली सरकार के फैसले से पटाखा कारोबारियों की नींद उड़ गई है। पटाखा कारो​बारियों का कहना है कि दिल्ली में विक्रेताओं ने सरकार से दिवाली तक ग्रीन पटाखे बेचने की अनुमति दी जाए, नहीं तो भारी नुकसान झेलना होगा।

पटाखा कारोबारी के अनुसार “अचानक प्रतिबंध के कारण, हमें लगभग 15-20 लाख रुपए के नुकसान का सामना करना पड़ रहा है। पहले सरकार ने कहा कि ग्रीन पटाखे बेचे जा सकते हैं और हमें लाइसेंस दिया गया है। हमने पहले ही स्टॉक खरीद लिया था।” 

पटाखे बेचने वाले दुकानदारों का कहना है कि सरकार द्वारा सभी प्रकार के पटाखों पर प्रतिबंध लगाने से उन्हें भारी नुकसान होगा। एक विक्रेता का कहना है, “हमने सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद ग्रीन पटाखों का स्टॉक खरीद लिया, लेकिन अब सीएम ने उन पर भी प्रतिबंध लगा दिया। हम प्रतिबंध का विरोध करेंगे।” 

पटाखे बैन का सीधा असर व्यापारियों पर पड़ेगा, क्योंकि पहले सरकार ने खुद ग्रीन क्रैकर्स की इजाजत दी थी और अब प्रतिबंध लगा दिया। 2 महीने पहले सरकार ने लाइसेंस दिए और जब व्यापारियों ने पटाखे खरीद लिए तो उस पर बैन लगा दिया गया। इस कारण व्यापारियों को भारी नुकसान उठाना पड़ेगा। यह बेहद हास्यास्पद है और यह बताता है कि सरकार के पास कोई विजन नहीं है।

इस मामले में एक सवाल तो यह पूछा जा रहा है कि जब प्रदूषण के अन्य कई कारण हैं, तब फिर अकेले पटाखों की बिक्री पर रोक क्यों? ऐसे सवालों के साथ एक सवाल यह भी उठा है कि क्या सारे नियम-कायदे हिंदुओं के त्योहारों के लिए ही हैं? यह सवाल इसलिए उठा, क्योंकि अतीत में होली पर इस तरह की नसीहत बार-बार दी जाती रही है कि हानिकारक रंगों के इस्तेमाल से बचें। दीपावली के वक्त पटाखों पर अंकुश की चर्चा नई नहीं है। 

अरसा पहले कॉन्वेंट स्कूलों में बच्चों को पटाखों के चलते पर्यावरण पर पड़ने वाले दुष्प्रभाव के प्रति जागरूक करने की शुरुआत हुई थी, जो धीरे-धीरे पब्लिक स्कूलों तक भी पहुँची। तब भी यह चर्चा चली थी कि एक शहरी वर्ग हिंदुओं के त्योहारों के प्रति तिरस्कार का भाव रखता है। जब मूर्तियों के विसर्जन को लेकर नदियों के प्रदूषण की चिंता की गई, तब भी यह कहा गया कि आखिर सारी हिदायत हिंदुओं के त्योहारों के लिए क्यों?

  सहयोग करें  

एनडीटीवी हो या 'द वायर', इन्हें कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

हरियाणा की सोनिया भोपाल में कॉन्ग्रेस MLA के बंगले में लटकी मिली: दावा- गर्लफ्रेंड थी, जल्द शादी करने वाले थे

कमलनाथ सरकार में वन मंत्री रह चुके उमंग सिंघार और सोनिया की मुलाकात मेट्रोमोनियल वेबसाइट के जरिए हुई थी।

‘ये असाधारण परिस्थिति, भीड़तंत्र का राज़ नहीं चलेगा’: कलकत्ता HC ने चारों TMC नेताओं की जमानत रोकी, भेजे गए जेल

कलकत्ता हाईकोर्ट ने कहा कि अगले आदेश तक इन चारों आरोपित नेताओं को जुडिशल कस्टडी में रखा जाए।

क्यों पड़ा Cyclone का नाम Tauktae, क्यों तबाही मचाने आते हैं, जमीन पर क्यों नहीं बनते? जानिए चक्रवातों से जुड़ा सबकुछ

वर्तमान में अरब सागर से उठने वाले चक्रवाती तूफान Tauktae का नाम म्याँमार द्वारा दिया गया है। Tauktae, गेको छिपकली का बर्मीज नाम है। यह छिपकली बहुत तेज आवाज करती है।

क्या CM योगी आदित्यनाथ को ग्रामीणों ने गाँव में घुसने से रोका? कॉन्ग्रेस नेताओं, वामपंथी पत्रकारों के फर्जी दावे का फैक्ट चेक

मेरठ पुलिस ने सोशल मीडिया पर किए गए भ्रामक दावों का खंडन किया। उन्होंने कहा, “आपने सोशल मीडिया पर जो पोस्ट किया है वह निराधार और भ्रामक है। यह फेक न्यूज फैलाने के दायरे में आता है।"

मेवात के आसिफ की हत्या में सांप्रदायिक एंगल नहीं, पुरानी राजनीतिक दुश्मनी: हरियाणा पुलिस

आसिफ की मृत्यु की रिपोर्ट आने के तुरंत बाद, कुछ मीडिया हाउसों ने दावा किया कि उसे मारे जाने से पहले 'जय श्री राम' बोलने के लिए मजबूर किया गया था, जिसकी वजह से घटना ने सांप्रदायिक मोड़ ले लिया।

नारदा केस में विशेष CBI कोर्ट ने ममता बनर्जी के चारों मंत्रियों को दी जमानत, TMC कार्यकर्ताओं ने किया केंद्रीय बलों पर पथराव

नारदा स्टिंग मामले में सीबीआई की विशेष अदालत ने सोमवार (17 मई 2021) की शाम को ममता बनर्जी के चारों नेताओं को जमानत दे दी।

प्रचलित ख़बरें

जैश की साजिश, टारगेट महंत नरसिंहानंद: भगवा कपड़ा और पूजा सामग्री के साथ जहाँगीर गिरफ्तार, साधु बन मंदिर में घुसता

कश्मीर के रहने वाले जान मोहम्मद डार उर्फ़ जहाँगीर को साधु के वेश में मंदिर में घुस कर महंत यति नरसिंहानंद सरस्वती की हत्या करनी थी।

अल्लाह-हू-अकबर चिल्लाती भीड़ का हमला: यहूदी खून से लथपथ, बचाव में उतरी लड़की का यौन शोषण

कनाडा में फिलिस्तीन समर्थक भीड़ ने एक व्यक्ति पर हमला कर दिया जो एक अन्य यहूदी व्यक्ति को बचाने की कोशिश कर रहा था। हिंसक भीड़ अल्लाह-हू-अकबर का नारा लगाते हुए उसे लाठियों से पीटा।

विनोद दुआ की बेटी ने ‘भक्तों’ के मरने की माँगी थी दुआ, माँ के इलाज में एक ‘भक्त’ MP ने ही की मदद

मोदी समर्थकों को 'भक्त' बताते हुए मल्लिका उनके मरने की दुआ माँग चुकी हैं। लेकिन, जब वे मुश्किल में पड़ी तो एक 'भक्त' ने ही उनकी मदद की।

भारत में दूसरी लहर नहीं आने की भविष्यवाणी करने वाले वायरोलॉजिस्ट शाहिद जमील ने सरकारी पैनल से दिया इस्तीफा

वरिष्ठ वायरोलॉजिस्ट शाहिद जमील ने भारत में कोविड-19 के प्रकोप की गंभीरता की भविष्यवाणी करने में विफल रहने के बाद भारतीय SARS-CoV-2 जीनोम सीक्वेंसिंग कंसोर्टिया (INSACOG) के वैज्ञानिक सलाहकार समूह के अध्यक्ष के पद से इस्तीफा दे दिया।

ईसाई धर्मांतरण की पोल खोलने वाले MP राजू का आर्मी हॉस्पिटल में होगा मेडिकल टेस्ट, AP सीआईडी ने किया था टॉर्चर: SC का आदेश

याचिकाकर्ता (राजू) की मेडिकल जाँच सिकंदराबाद स्थित सैन्य अस्पताल के प्रमुख द्वारा गठित तीन सदस्यीय डॉक्टरों का बोर्ड करेगा।

ओडिशा के DM ने बिगाड़ा सोनू सूद का खेल: जिसके लिए बेड अरेंज करने का लूटा श्रेय, वो होम आइसोलेशन में

मदद के लिए अभिनेता सोनू सूद को किया गया ट्वीट तब से गायब है। सोनू सूद वास्तव में किसी की मदद किए बिना भी कोविड-19 रोगियों के लिए मदद की व्यवस्था करने के लिए क्रेडिट का झूठा दावा कर रहे थे।
- विज्ञापन -

 

हमसे जुड़ें

295,384FansLike
95,681FollowersFollow
394,000SubscribersSubscribe