Tuesday, September 29, 2020
Home बड़ी ख़बर मनोहर पर्रिकर के निधन पर 'हँसने' वाले इस्लामोफोबिया को बढ़ाते हैं

मनोहर पर्रिकर के निधन पर ‘हँसने’ वाले इस्लामोफोबिया को बढ़ाते हैं

फिर तो, बाकी दुनिया भी किसी दाढ़ी वाले व्यक्ति को किसी अमेरिकी महिला द्वारा ट्रेन की ट्रैक पर ढकेल देने पर यही कहेगी कि वो 'अच्छी ईसाई' नहीं थी। न्यूज़ीलैंड के मस्जिदों पर गोली बरसाने वाला भी 'अच्छा आदमी' नहीं था।

एक प्रयोग कर लीजिए अभी आप लोग। जिस किसी भी न्यूज़ चैनल/साइट/पोर्टल को आप फॉलो करते हैं उनके पेज पर जाइए और मनोहर पर्रिकर की मृत्यु की खबर पर ‘रिएक्शन्स’ पर क्लिक करके ‘हा-हा’ के नीचे के नाम पढ़ लीजिए। इस बार मैं स्क्रीनशॉट्स नहीं लगा रहा, क्योंकि आपकी जब इच्छा हो खुद जाकर देख सकते हैं। इसके साथ ही, यह कहना भी ज़रूरी है कि एक ख़ास तरह के नामों के अलावा इस तरह की संवेदनहीनता दिखाने में कई और लोग भी थे, जो दूसरी विचारधारा के थे। फिर भी, ऐसे हर मौके पर एक ही तरह के नाम का आना उन लोगों को प्रभावित करता है जिन्हें यह समझ में नहीं आता कि किसी की मौत पर कोई खुश कैसे हो सकता है।

कुछ लोग कहेंगे क्या साबित होता है इससे। ये लोग वो लोग हैं जो दिन भर ‘गरिमा’, ‘नैतिकता’, ‘लोक व्यवहार’ आदि के नाम पर फेसबुक पेज से लेकर नेता, व्यक्ति या संस्थानों को गरियाते दिखते हैं। 

इससे साबित इतना ही होता है कि समाज में एक सम्प्रदाय के कुछ लोगों की सामूहिक संवेदनहीनता हर ऐसे मौके पर दिख जाती है। इस्लामोफोबिया का भाव आकाश से नहीं टपकता। यही वो मौके हैं जब वैसे लोग सोचने लगते हैं कि ये किस तरह के लोग हैं?

कुछ लोगों के संवेदनहीनता के आधार पर सबको जज करना गैरज़रूरी है, लेकिन वास्तविकता यही है कि ऐसे लोग ही इस्लामोफोबिया के बड़े कारण हैं। इस्लामी आतंकवाद तो एक कारण है ही, लेकिन पुलवामा हमले के बाद सैनिकों के बलिदान होने की खबर पर ‘हा-हा’ करने वालों का भी रिलिजन था, पर्रिकर की मृत्यु की खबर पर हँसने वालों का भी और पुलवामा में आत्मघाती हमला करने वालों का भी।

किसी भी समाज या सम्प्रदाय से सामूहिक रूप से घृणा करना सही नहीं, लेकिन उसकी वजहें होती हैं। हो सकता है कि आप उन लोगों के ऐसे कार्यों से सीधे तौर पर प्रभावित न हो रहे हों, आपको पूरे जीवन उनसे कोई काम न पड़े, लेकिन मानवीय संवेदनाएँ निजी तौर पर ही हमें प्रभावित नहीं करती। अगर कोई चालीस जवानों के बलिदान पर ‘हँस’ रहा है, तो ज़ाहिर है कि उसकी संवेदना जवानों के साथ, उनके परिवारों के साथ तो नहीं ही है। 

ऐसे लोगों की संवेदना पर चर्चा करना भी अजीब ही है क्योंकि ऐसे लोग हर ऐसी घटना पर सामने आ जाते हैं। मनोहर पर्रिकर की मृत्यु पर ‘हा-हा’ करता हुआ मजहबी नाम वाला व्यक्ति इस ख़बर से किस स्तर पर प्रभावित हो रहा है, ये हम या आप नहीं समझ सकते। उसे बस एक विरोधी (शायद) विचारधारा या पार्टी के नेता की मृत्यु की खुशी है। उसे उस सरकार के कार्यकाल में वीरगति को प्राप्त हुए भारतीय सैनिकों की मृत्यु की खुशी है। खुशी का कारण यह भी हो सकता है कि जिसने आत्मघाती हमला किया वो भी उसी धर्म का हो।

यहाँ घृणा एक स्तर पर ही नहीं है। यहाँ घृणा, एक समूह के द्वारा, जिनकी पहचान उनके नामों से खुलकर सामने आती है, और वो ऐसा करने से छुपते नहीं, कहीं नाम छुपाकर ऐसी बातें नहीं करते, जो हर ऐसे मौक़े पर सरकार या दूसरे धर्म से संबंधित लोगों की मृत्यु पर हँसते हैं। ये एक बुनियादी मानवीय गुण है कि किसी की मृत्यु पर अगर अच्छी बातें नहीं बोल सकते, तो चुप रहना पसंद कर सकते हैं। 

लेकिन कुछ लोगों की घृणा का स्तर इतना ज़्यादा होता है कि वो अपनी भावनाओं को छुपा नहीं पाते। यही कारण है कि ऐसे कुछ लोगों की बेहूदगी के कारण इस्लामोफोबिया, या इस्लाम मज़हब से नफ़रत, को हवा मिलती है। ये कट्टरपंथी वैसे कट्टरपंथी हैं जो चाहते हैं कि लोग उनसे घृणा करें। वरना आज के समाज में, जहाँ करुणा और दया की बात करते हुए दीवाली पर पटाखों के शोर से परेशान होने वाले जानवरों की हालत पर चर्चाएँ होती हैं, वहाँ ऐसे लोग इस तरह के काम भला क्यों करते हैं! 

मेरी अपील है इस मज़हब के बेहतर लोगों से कि वो सामने आएँ और ऐसे लोगों को धिक्कारें। वो अगर पचास हैं, तो आप में से सौ को आगे आकर इस पर लिखना और बोलना चाहिए कि ये गलत है। आप यह कहकर बच नहीं सकते कि ये लोग ‘अच्छे मजहबी’ नहीं हैं। फिर तो, बाकी दुनिया भी किसी दाढ़ी वाले व्यक्ति को किसी अमेरिकी महिला द्वारा ट्रेन की ट्रैक पर ढकेल देने पर यही कहेगी कि वो ‘अच्छी ईसाई’ नहीं थी

ये ‘अच्छा मजहबी’ और ‘हमारा मज़हब यह नहीं सिखाता’ की नकारी सोच से ऊपर उठकर, एक बेहतर समाज के लिए अपने भीतर से ही सफ़ाई जरूरी है। अगर पूरा समुदाय ऐसे समय पर भर्त्सना नहीं करता, जैसा कि कई लोगों ने न्यूज़ीलैंड हमले के बाद ‘खुश होने वाले’ लोगों के साथ किया था, तब तक कट्टरपंथियों से घृणा की हवा और तेज ही बहेगी। और यही नफ़रत किसी युवक को मस्जिदों में पंद्रह मिनट तक गोली चलाने तक पहुँचा देती है। 

इस नफ़रत को फेसबुक जैसी जगहों से ही रोकना ज़रूरी है क्योंकि अगर वहाँ आप उस पर कड़ा रुख़ नहीं रख पा रहे, तो वहाँ उन नामों को भी वह रास्ता चुनने में सहजता होगी जो अभी तक इस तरह की घृणा पान की दुकान पर, सड़क के किनारे या चाय पीते हुए चार लोगों के बीच फैलाते थे।

  सहयोग करें  

एनडीटीवी हो या 'द वायर', इन्हें कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

अजीत भारतीhttp://www.ajeetbharti.com
सम्पादक (ऑपइंडिया) | लेखक (बकर पुराण, घर वापसी, There Will Be No Love)

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

तिलक लगा, भगवा पहन एंकरिंग करना अपराध है? सुदर्शन न्यूज ने केंद्र के शो-कॉज नोटिस का दिया जवाब

‘यूपीएससी जिहाद’ कार्यक्रम को लेकर सूचना प्रसारण मंत्रालय की ओर से जारी शो-कॉज नोटिस का सुदर्शन न्यूज ने जवाब दे दिया है।

16 दिसंबर को बस फूँका, 17 को हिंदुओं पर पथराव: दिल्ली दंगों में ताहिर हुसैन के बयान से नए खुलासे

ताहिर हुसैन के बयान से दिल्ली के हिंदू विरोधी दंगों को लेकर कुछ चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। कुछ ऐसे तथ्य सामने आए हैं जिससे अब तक सब अनजान थे।

दीपिका, सारा, श्रद्धा और रकुल… सबने NCB को दिए एक जैसे जवाब, बताया- हैश ड्रग नहीं है

दीपिका, सारा, श्रद्धा और रकुल से एनसीबी ने पूछताछ भले अलग-अलग की हो, पर दिलचस्प यह है कि सवालों जवाब सबके एक जैसे ही थे।

कहीं देवी-देवताओं की मूर्ति पर हथौड़े से वार, कहीं आग में जलता रथ: आंध्र प्रदेश में मंदिरों पर हुए हालिया हमले

पिछले कुछ समय से लगातार आंध्र प्रदेश में हिंदू मंदिरों पर हमले की घटनाएँ सामने आ रही हैं। ऐसे 5 मामलों में क्या हुआ, जानें।

गायत्री मंत्र जपते थे भगत सिंह, आर्य समाजी था परिवार, सावरकर के थे प्रशंसक: स्वीकार करेंगे आज के वामपंथी?

भगत सिंह का वामपंथ टुकड़े-टुकड़े वाला नहीं था। न ही उन्होंने कभी ऐसा लिखा कि वे हिन्दू धर्म को नहीं मानते या फिर वे हिन्दू देवी-देवताओं से घृणा करते हैं।

हरामखोर का मतलब नॉटी है तो फिर नॉटी का मतलब क्या है? संजय राउत से बॉम्बे HC ने पूछा

वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए चल रही सुनवाई में बेंच ने कंगना को हरामखोर कहे जाने पर संजय राउत के भाषाई ज्ञान पर सवाल उठाया।

प्रचलित ख़बरें

बेच चुका हूँ सारे गहने, पत्नी और बेटे चला रहे हैं खर्चा-पानी: अनिल अंबानी ने लंदन हाईकोर्ट को बताया

मामला 2012 में रिलायंस कम्युनिकेशन को दिए गए 90 करोड़ डॉलर के ऋण से जुड़ा हुआ है, जिसके लिए अनिल अंबानी ने व्यक्तिगत गारंटी दी थी।

‘दीपिका के भीतर घुसे रणवीर’: गालियों पर हँसने वाले, यौन अपराध का मजाक बनाने वाले आज ऑफेंड क्यों हो रहे?

दीपिका पादुकोण महिलाओं को पड़ रही गालियों पर ठहाके लगा रही थीं। अनुष्का शर्मा के लिए यह 'गुड ह्यूमर' था। करण जौहर खुलेआम गालियाँ बक रहे थे। तब ऑफेंड नहीं हुए, तो अब क्यों?

एंबुलेंस से सप्लाई, गोवा में दीपिका की बॉडी डिटॉक्स: इनसाइडर ने खोल दिए बॉलीवुड ड्रग्स पार्टियों के सारे राज

दीपिका की फिल्म की शूटिंग के वक्त हुई पार्टी में क्या हुआ था? कौन सा बड़ा निर्माता-निर्देशक ड्रग्स पार्टी के लिए अपनी विला देता है? कौन सा स्टार पत्नी के साथ मिल ड्रग्स का धंधा करता है? जानें सब कुछ।

व्यंग्य: दीपिका के NCB पूछताछ की वीडियो हुई लीक, ऑपइंडिया ने पूरी ट्रांसक्रिप्ट कर दी पब्लिक

"अरे सर! कुछ ले-दे कर सेटल करो न सर। आपको तो पता ही है कि ये सब तो चलता ही है सर!" - दीपिका के साथ चोली-प्लाज्जो पहन कर आए रणवीर ने...

आजतक के कैमरे से नहीं बच पाएगी दीपिका: रिपब्लिक को ज्ञान दे राजदीप के इंडिया टुडे पर वही ‘सनसनी’

'आजतक' का एक पत्रकार कहता दिखता है, "हमारे कैमरों से नहीं बच पाएँगी दीपिका पादुकोण"। इसके बाद वह उनके फेस मास्क से लेकर कपड़ों तक पर टिप्पणी करने लगा।

गैंगस्टर फिरोज अली की मौत, गाय को बचाने में UP पुलिस की गाड़ी पलटी: टोयोटा इनोवा से मुंबई से लखनऊ लाया जा रहा था

सभी घायलों का इलाज राजगढ़ अस्पताल में चल रहा है। आरोपित फिरोज अली को मुंबई से लखनऊ लाने के लिए ठाकुरगंज थाने की पुलिस को भेजा गया था।

‘केस वापस ले, वरना ठोक देंगे’: करण जौहर की ‘ड्रग्स पार्टी’ की शिकायत करने वाले सिरसा को पाकिस्तान से धमकी

करण जौहर के घर पर ड्रग्स पार्टी होने का दावा करने वाले सिरसा को पाकिस्तान से जान से मारने की धमकी मिली है।

तिलक लगा, भगवा पहन एंकरिंग करना अपराध है? सुदर्शन न्यूज ने केंद्र के शो-कॉज नोटिस का दिया जवाब

‘यूपीएससी जिहाद’ कार्यक्रम को लेकर सूचना प्रसारण मंत्रालय की ओर से जारी शो-कॉज नोटिस का सुदर्शन न्यूज ने जवाब दे दिया है।

16 दिसंबर को बस फूँका, 17 को हिंदुओं पर पथराव: दिल्ली दंगों में ताहिर हुसैन के बयान से नए खुलासे

ताहिर हुसैन के बयान से दिल्ली के हिंदू विरोधी दंगों को लेकर कुछ चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। कुछ ऐसे तथ्य सामने आए हैं जिससे अब तक सब अनजान थे।

सुब्हानी हाजा ने इराक में IS से ली जिहादी ट्रेनिंग, केरल में जमा किए रासायनिक विस्फोटक: NIA कोर्ट ने सुनाई उम्रकैद

केरल के कोच्चि स्थित एनआईए की विशेष अदालत ने सोमवार को ISIS आतंकी सुब्हानी हाजा मोइदीन को उम्रकैद की सज़ा सुनाई।

‘हाँ, मैंने माल के बारे में पूछा, हम सिगरेट को माल कहते हैं; वीड मतलब मोटी सिगरेट-हैश मतलब पतली’

मीडिया रिपोर्ट में बताया गया है कि एनसीबी के सामने पूछताछ में दीपिका पादुकोण ने कहा कि 'माल' सिगरेट का कोड वर्ड है।

दीपिका, सारा, श्रद्धा और रकुल… सबने NCB को दिए एक जैसे जवाब, बताया- हैश ड्रग नहीं है

दीपिका, सारा, श्रद्धा और रकुल से एनसीबी ने पूछताछ भले अलग-अलग की हो, पर दिलचस्प यह है कि सवालों जवाब सबके एक जैसे ही थे।

मथुरा: श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति को लेकर दाखिल याचिका पर 30 सितंबर को सुनवाई

मथुरा श्रीकृष्ण जन्मभूमि के मालिकाना हक को लेकर दाखिल याचिका पर सीनियर सिविल जज छाया शर्मा की अदालत ने सुनवाई के लिए 30 सितंबर की तारीख निर्धारित की है।

कहीं देवी-देवताओं की मूर्ति पर हथौड़े से वार, कहीं आग में जलता रथ: आंध्र प्रदेश में मंदिरों पर हुए हालिया हमले

पिछले कुछ समय से लगातार आंध्र प्रदेश में हिंदू मंदिरों पर हमले की घटनाएँ सामने आ रही हैं। ऐसे 5 मामलों में क्या हुआ, जानें।

‘अनुराग कश्यप को जेल भेजो’: गिरफ्तारी के लिए मुंबई पुलिस को आठवले ने दिया 7 दिन का अल्टीमेटम

पायल घोष का समर्थन करते हुए रामदास आठवले ने कहा है कि यदि अनुराग कश्यप की सात दिनों में गिरफ्तारी नहीं हुई तो वे धरने पर बैठेंगे।

गायत्री मंत्र जपते थे भगत सिंह, आर्य समाजी था परिवार, सावरकर के थे प्रशंसक: स्वीकार करेंगे आज के वामपंथी?

भगत सिंह का वामपंथ टुकड़े-टुकड़े वाला नहीं था। न ही उन्होंने कभी ऐसा लिखा कि वे हिन्दू धर्म को नहीं मानते या फिर वे हिन्दू देवी-देवताओं से घृणा करते हैं।

हमसे जुड़ें

264,935FansLike
78,073FollowersFollow
325,000SubscribersSubscribe