Sunday, September 20, 2020
Home विचार सामाजिक मुद्दे बौद्ध, जैन, सिख, यहूदी, पारसी: इन्हें कभी 'इनटॉलेरेंस' की पीड़ा क्यों नहीं होती?

बौद्ध, जैन, सिख, यहूदी, पारसी: इन्हें कभी ‘इनटॉलेरेंस’ की पीड़ा क्यों नहीं होती?

आखिर ऐसा क्यों है कि हिंदुस्तान में सारी दिक्कतें केवल दो पंथों इस्लाम और ईसाईयत को मानने वालों को ही हो रहीं हैं? क्या इसका कारण यह है कि हिंदुस्तान की बहुसंख्यक आबादी हिन्दुओं का इन दोनों मज़हबों से कोई खास बैर है? या फिर ये कि इन पंथों की विचारधारा या इनके.......

जिस अमेरिकी कमीशन ने हिंदुस्तान में ‘डरा हुआ मुस्लिम’ और ‘डर का माहौल’ के झूठे कथानक (नैरेटिव) पर अपनी अनिमंत्रित चौधराहट की मुहर लगाई, उसी कमीशन के चेयरपर्सन डॉ. तेंज़िन दोरजी ने कमीशन के बहुमत से अलग न केवल राय रखी बल्कि संख्याबल से दबाए जाने पर कमीशन की रिपोर्ट से अलग राय का असहमति-पत्र (डिसेंट नोट) लिखा। इस नोट में डॉ. दोरजी ने साफ-साफ लिखा कि कमीशन की रिपोर्ट ने हिंदुस्तान का जो चित्रण किया है, उनके व्यक्तिगत अनुभव उससे कतई मेल नहीं खाते। उन्होंने बताया कि एक तिब्बती बौद्ध होने के नाते वह हिंदुस्तान के सबसे कमज़ोर अल्पसंख्यक वर्ग के तौर पर 30 वर्ष रहे हैं। इस दौरान उन्होंने “पूर्ण धार्मिक स्वतंत्रता” का अनुभव किया है।

‘खुला समाज, सुदृढ़ लोकतंत्र और न्यायपालिका’

डॉ. दोरजी ने हिंदुस्तान को महान सभ्यता और प्राचीन समय से ही बहुपंथिक, बहुभाषी और बहुसांस्कृतिक समाज बताया। उन्होंने लिखा कि हालाँकि छिटपुट हिंसक घटनाएँ (जो दुर्भाग्यपूर्ण, गैरकानूनी और गलत हैं, इसमें कोई दोराय नहीं) होती रहतीं हैं, लेकिन हिंदुस्तान के बहुपंथिक और सेक्युलर (लिबरल गैंग के नीम-हकीमी अर्थ में नहीं, सही अर्थ में) होने में कोई शक नहीं। वह दलाई लामा को भी उद्धृत करते हुए कहते हैं कि हिंदुस्तान की भिन्नता, समरसता और आदर व करुणा के कायल दलाई लामा भी हैं।

डॉ. दोरजी अपने भारतीय ‘गृह-राज्यों’ कर्नाटक और हिमाचल का ज़िक्र करते हुए उनकी और समूचे हिंदुस्तान की तुलना तिब्बत पर कब्ज़ा किए हुए चीन से करते हैं। वह बताते हैं कि कैसे हिंदुस्तान में समृद्ध हो रही तिब्बती भाषा और संस्कृति खुद तिब्बत में चीनी बूटों तले दम तोड़ रहे हैं।

इतिहास भी करता है तस्दीक

डॉ. दोरजी के इन कथनों की तस्दीक हिंदुस्तान का समूचा इतिहास भी करता है- चाहे आप कितने हज़ार साल भी चले जाएँ। दुनिया के सबसे छोटे और प्राचीनतम धार्मिक समूहों में शामिल पारसियों से लेकर यहीं वैदिक समाज से विद्रोह कर उत्पन्न हुए बौद्धों, जैनों, सिखों और इस्लाम-ईसाईयत के पुरोधा यहूदियों तक हिंदुस्तान में विभिन्न ही नहीं, परस्पर विरोधी आस्था के लोग हज़ारों सालों से रहते आए हैं। यहूदी तो दुनिया की सबसे प्रताड़ित कौम हैं, और इतनी सदियों में इकलौता हिंदुस्तान है, जहाँ कभी उन्हें मज़हबी वजह से निशाना नहीं बनाया गया।

आखिर मुसलमानों-ईसाईयों में से ही क्यों आती है “इनटॉलेरेंस” की शिकायत?

- विज्ञापन -

अगर उपरोक्त बातें सही हैं, कि हिंदुस्तान की संस्कृति सर्व-समावेशी और शांतिपूर्ण सहअस्तित्व की है, तो सवाल यह है कि आखिर आज ‘इनटॉलेरेंस’ का इतना बाजा क्यों बज रहा है? तो जवाब जानने के लिए समकालीन हिन्दू समाज के साथ-साथ यह शोर जिस तबके से आ रहा है, उसकी ओर भी एक नज़र गहराई से डालना ज़रूरी हो जाता है।

आखिर ऐसा क्यों है कि हिंदुस्तान में सारी दिक्कतें केवल दो पंथों इस्लाम और ईसाईयत को मानने वालों को ही हो रहीं हैं? क्या इसका कारण यह है कि हिंदुस्तान की बहुसंख्यक आबादी हिन्दुओं का इन दोनों मज़हबों से कोई खास बैर है? या फिर ये कि इन पंथों की विचारधारा या इनके अनुयायियों के आचरण में कुछ ऐसा है जो इनके अन्य के साथ टकराव का कारण बन जाता है?

अगर खोट हिन्दुओं में है तो यहूदी क्यों नहीं शिकार?

अगर एकबारगी यह मान लिया जाए कि खोट हिन्दुओं में ही है, हिन्दुओं में इस्लाम और ईसाईयत के प्रति शत्रुता किसी बहाने ‘इनबिल्ट’ है, तो सवाल यह उठेगा कि इसी विचारधारा के पूर्ववर्ती यहूदियों को हिंदुस्तान में कोई दिक्क्त क्यों नहीं हुई? यहूदियों में भी ‘एक ही अदृश्य, अव्यक्त ईश्वर; मूर्तिपूजा/अन्य किसी शक्ति की उपासना अनंतकाल के नर्कभोग वाला पाप’ आदि अधिकांश वही सब बातें मान्य हैं जो इस्लाम और ईसाईयत में प्रचलित हैं। जहाँ तक मेरी जानकारी है, बड़ा अंतर खाली अंतिम नबी के सवाल पर है- यहूदी इंतजार में हैं, ईसाईयों के हिसाब से ईसा थे, मुसलमानों के हिसाब से हज़रत मोहम्मद। क्या इतने से ही हिन्दू भड़के हुए हैं?

या फिर जबरिया मतांतरण की ज़िद है ‘इनटॉलेरेंस’ की जड़ में?

अब दूसरी संभावना पर गौर करते हैं- कि हिन्दू विरोध इस्लाम और ईसाईयत की विचारधारा का नहीं करते, मुसलमान और ईसाई अपने दिमागों में क्या सोचते हैं इसका नहीं करते, बल्कि विरोध करते हैं कि अपनी सोच, अपना पंथिक आग्रह दूसरों पर थोपने की प्रवृत्ति का। विरोध करते हैं ईसाईयों के हिन्दुओं के पवित्र प्रतीक चिह्नों को ‘हड़प’ कर उन्हें हिंदुत्व से लोगों को काटने के प्रयोग का। विरोध करते हैं हिंसा और ज़ोर-ज़बर्दस्ती से लोगों के मतांतरण का, जो मुसलमानों द्वारा किए जाने की खबरें हम सुनते रहते हैं।

यहूदी इसी मामले में इस्लाम और ईसाईयत से अलग हैं- वे भले यह मानें कि हिन्दू ‘पापी’ हैं और नर्क के भागी होंगे मरने के बाद, लेकिन वे अपना मत, अपनी आस्था थोपते नहीं हैं। पारसियों में (जहाँ तक मेरी जानकारी है, जोकि शायद बहुत ज़्यादा नहीं है) ‘अहुरों’ की पूजा होती है और ‘दैवों’ की निंदा- सुनने में ऐसा लगता है (जोकि सम्भवतः सही न भी हो) मानो जिन असुरों के विरुद्ध हिन्दू देवता लड़ते थे, शायद पारसी उन्हीं के पूजक हैं। लेकिन तब भी कभी पारसी-विरोधी हिंसा क्यों नहीं हुई? क्योंकि उन्होंने कभी अपनी अहुर-पूजा को हिन्दुओं पर लादने की कोशिश नहीं की- न तलवार के दम पर, न पिछले दरवाज़ों से।

एक और बात, इस लेख में उठाना पढ़ रहा कोई छद्म-लिबरल उठाने को यह भी सवाल उठा सकता है कि हो सकता है ईसाईयों और मुसलमानों ने हिंदुत्व (हिन्दू धर्म) की ऐसी कोई विद्वत्तापूर्ण निंदा या आलोचना की हो जो और कोई पंथ न कर पाया हो, और यह ‘असहिष्णुता’ उस वजह से हो। हो “सकता” है, पर ऐसा है नहीं। है इसका उलट। इस्लामिक इतिहास हिंदुस्तान में अधिकाँश समय मंदिर-ध्वंस, बलात्कार और सामूहिक हत्याकांड, आदि का रहा है- और अब तो यह छद्म-लिबरल भी मानने को मजबूर हैं। और ईसाई ‘विद्वानों’ ने तर्कपूर्ण आलोचना तो दूर की बात, अनुवाद भी फ़र्ज़ी किए ताकि आर्यन आक्रमण थ्योरी की आड़ में हिन्दुओं को बाँटकर चर्च का साम्राज्य फैलाया जा सके।

वहीं बौद्धों ने वैदिक ऋचाओं से लेकर कर्मकांडों की, जैनों ने वैदिक यज्ञ-हिंसा से लेकर युद्ध में हिंसा करने वाले राम-कृष्ण जैसे अवतारों की आलोचना में ग्रंथ-के-ग्रंथ लिखे हैं, जिस पर सदियों हिन्दुओं ने बहस की है, शास्त्रार्थ हुए हैं, हिन्दुओं और अन्य ने एक-दूसरे के आगे सर मुड़ाया है, शिष्यत्व स्वीकार किया है। लेकिन मंदिर ढहाना, आर्य-द्रविड़ का कृत्रिम भेद खड़ा करने जैसे काम नहीं हुए हैं। हिन्दुओं ने तो किसी भी प्रकार की परा-शक्ति को नकारने वाली चार्वाक परम्परा को भी ऋषि-परम्पराओं में स्वीकार किया है। अतः डॉ. दोरजी के इस बयान के आलोक में मुसलमानों और ईसाईयों को आत्म-विवेचन करने की जरूरत है कि ‘इनटॉलेरेंस’ के लिए जिम्मेदार ‘भगवाकरण’ है, ‘हिन्दू राष्ट्रवाद’ है, या हिन्दुओं को आक्रामकता अख्तियार करने के लिए मजबूर करने वाले उनके आचरण।

  सहयोग करें  

एनडीटीवी हो या 'द वायर', इन्हें कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

‘जिप, लिंग, योनि’ मामले में अनुराग कश्यप ने किए 4 ट्वीट, राजनीति घुसा किया पायल घोष से खुद का बचाव

“अभी तो बहुत आक्रमण होने वाले हैं। बहुत फ़ोन आ चुके हैं कि नहीं मत बोल और चुप हो जा। यह भी पता है कि पता नहीं कहाँ-कहाँ से..."

‘बिचौलिया’ मदर इंडिया का लाला नहीं… अब वो कंट्रोल करता है पूरा मार्केट: कृषि विधेयक इनका फन कुचलने के लिए

'बिचौलिया' मतलब छोटी मछली नहीं, बड़े किलर शार्क। ये एक इशारे पर दर्जनों वेयरहाउस से आपूर्ति धीमी करवा, कई राज्यों में कीमतें बढ़ा सकते हैं।

बेंगलुरु दंगों में चुनकर हिंदुओं को किया गया था टारगेट, स्थानीय मुस्लिमों को थी इसकी पूरी जानकारी: फैक्ट फाइंडिंग रिपोर्ट में खुलासा

"बेंगलुरु में हुए दंगों के दिन हमले वाले स्थान पर एक भी मुस्लिम वाहन नहीं रखा गया था। वहीं सड़क पर भी उस दिन किसी मुस्लिम को आते-जाते नहीं देखा। कोई भी मुस्लिम घर या मुस्लिम वाहन क्षतिग्रस्त नहीं हुए।"

‘उसने अपने C**k को जबरन मेरी Vagina में डालने की कोशिश की’: पायल घोष ने अनुराग कश्यप पर लगाया यौन उत्पीड़न का आरोप

“अगले दिन उसने मुझे फिर से बुलाया। उन्होंने कहा कि वह मुझसे कुछ चर्चा करना चाहते हैं। मैं उसके यहाँ गई। वह व्हिस्की या स्कॉच पी रहा था। बहुत बदबू आ रही थी। हो सकता है कि वह चरस, गाँजा या ड्रग्स हो, मुझे इसके बारे में कुछ भी पता नहीं है लेकिन मैं बेवकूफ नही हूँ।”

SSR केस: 7 अक्टूबर को सलमान खान, करण जौहर समेत 8 टॉप सेलेब्रिटीज़ को मुज्जफरपुर कोर्ट में होना होगा पेश, भेजा गया नोटिस

मुजफ्फरपुर जिला न्यायालय ने सलमान खान और करण जौहर सहित आठ हस्तियों को कोर्ट में पेश होने का आदेश दिया है। 7 अक्टूबर, 2020 को इन सभी को कोर्ट में उपस्थित होना है।

दिल्ली दंगों के पीछे बड़ी साज़िश की तरफ इशारा करती है चार्जशीट-59: सफूरा ज़रगर से उमर खालिद तक 15 आरोपितों के नाम शामिल

दिल्ली पुलिस ने राजधानी में हुए हिन्दू विरोधी दंगों के मामले में 15 लोगों को मुख्य आरोपित बनाया है। इसमें आम आदमी पार्टी के पूर्व नेता ताहिर हुसैन, पूर्व कॉन्ग्रेस नेता इशरत जहाँ, खालिद सैफी, जेसीसी की सदस्य सफूरा ज़रगर और मीरान हैदर शामिल हैं।

प्रचलित ख़बरें

NCB ने करण जौहर द्वारा होस्ट की गई पार्टी की शुरू की जाँच- दीपिका, मलाइका, वरुण समेत कई बड़े चेहरे शक के घेरे में:...

ब्यूरो द्वारा इस बात की जाँच की जाएगी कि वीडियो असली है या फिर इसे डॉक्टरेड किया गया है। यदि वीडियो वास्तविक पाया जाता है, तो जाँच आगे बढ़ने की संभावना है।

‘उसने अपने C**k को जबरन मेरी Vagina में डालने की कोशिश की’: पायल घोष ने अनुराग कश्यप पर लगाया यौन उत्पीड़न का आरोप

“अगले दिन उसने मुझे फिर से बुलाया। उन्होंने कहा कि वह मुझसे कुछ चर्चा करना चाहते हैं। मैं उसके यहाँ गई। वह व्हिस्की या स्कॉच पी रहा था। बहुत बदबू आ रही थी। हो सकता है कि वह चरस, गाँजा या ड्रग्स हो, मुझे इसके बारे में कुछ भी पता नहीं है लेकिन मैं बेवकूफ नही हूँ।”

दिशा की पार्टी में था फिल्म स्टार का बेटा, रेप करने वालों में मंत्री का सिक्योरिटी गार्ड भी: मीडिया रिपोर्ट में दावा

चश्मदीद के मुताबिक तेज म्यूजिक की वजह से दिशा की चीख दबी रह गई। जब उसके साथ गैंगरेप हुआ तब उसका मंगेतर रोहन राय भी फ्लैट में मौजूद था। वह चुपचाप कमरे में बैठा रहा।

जया बच्चन का कुत्ता टॉमी, देश के आम लोगों का कुत्ता कुत्ता: बॉलीवुड सितारों की कहानी

जया बच्चन जी के घर में आइना भी होगा। कभी सजते-संवरते उसमें अपनी आँखों से आँखे मिला कर देखिएगा। हो सकता है कुछ शर्म बाकी हो तो वो आँखों में...

थालियाँ सजाते हैं यह अपने बच्चों के लिए, हम जैसों को फेंके जाते हैं सिर्फ़ टुकड़े: रणवीर शौरी का जया को जवाब और कंगना...

रणवीर शौरी ने भी इस मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कंगना को समर्थन देते हुए कहा है कि उनके जैसे कलाकार अपना टिफिन खुद पैक करके काम पर जाते हैं।

मौत वाली रात 4 लोगों ने दिशा सालियान से रेप किया था: चश्मदीद के हवाले से मीडिया रिपोर्ट में दावा

दावा किया गया है जिस रात दिशा सालियान की मौत हुई उस रात 4 लोगों ने उनके साथ रेप किया था। उस रात उनके घर पर पार्टी थी।

‘जिप, लिंग, योनि’ मामले में अनुराग कश्यप ने किए 4 ट्वीट, राजनीति घुसा किया पायल घोष से खुद का बचाव

“अभी तो बहुत आक्रमण होने वाले हैं। बहुत फ़ोन आ चुके हैं कि नहीं मत बोल और चुप हो जा। यह भी पता है कि पता नहीं कहाँ-कहाँ से..."

‘बिचौलिया’ मदर इंडिया का लाला नहीं… अब वो कंट्रोल करता है पूरा मार्केट: कृषि विधेयक इनका फन कुचलने के लिए

'बिचौलिया' मतलब छोटी मछली नहीं, बड़े किलर शार्क। ये एक इशारे पर दर्जनों वेयरहाउस से आपूर्ति धीमी करवा, कई राज्यों में कीमतें बढ़ा सकते हैं।

बेंगलुरु दंगों में चुनकर हिंदुओं को किया गया था टारगेट, स्थानीय मुस्लिमों को थी इसकी पूरी जानकारी: फैक्ट फाइंडिंग रिपोर्ट में खुलासा

"बेंगलुरु में हुए दंगों के दिन हमले वाले स्थान पर एक भी मुस्लिम वाहन नहीं रखा गया था। वहीं सड़क पर भी उस दिन किसी मुस्लिम को आते-जाते नहीं देखा। कोई भी मुस्लिम घर या मुस्लिम वाहन क्षतिग्रस्त नहीं हुए।"

‘उसने अपने C**k को जबरन मेरी Vagina में डालने की कोशिश की’: पायल घोष ने अनुराग कश्यप पर लगाया यौन उत्पीड़न का आरोप

“अगले दिन उसने मुझे फिर से बुलाया। उन्होंने कहा कि वह मुझसे कुछ चर्चा करना चाहते हैं। मैं उसके यहाँ गई। वह व्हिस्की या स्कॉच पी रहा था। बहुत बदबू आ रही थी। हो सकता है कि वह चरस, गाँजा या ड्रग्स हो, मुझे इसके बारे में कुछ भी पता नहीं है लेकिन मैं बेवकूफ नही हूँ।”

कानपुर लव जिहाद: मुख्तार से राहुल विश्वकर्मा बन हिंदू लड़की को फँसाया, पहले भी एक और हिंदू लड़की को बना चुका है बेगम

जब लड़की से पूछताछ की गई तो उसने बताया कि मुख्तार ने उससे राहुल बनकर दोस्ती की थी। उसने इस तरह से मुझे अपने काबू में कर लिया था कि वह जो कहता मैं करती चली जाती। उसने फिर परिजनों से अपने मरियम फातिमा बनने को लेकर भी खुलासा किया।

अलवर: भांजे के साथ बाइक से जा रही विवाहिता से गैंगरेप, वीडियो वायरल होने के बाद आरोपित आसम, साहूद सहित 5 गिरफ्तार

“पुलिस ने दो आरोपितों आसम मेओ और साहूद मेओ को गिरफ्तार किया और एक 16 वर्षीय नाबालिग को हिरासत में लिया। बाकी आरोपितों को गिरफ्तार करने के लिए पुलिस की टीमें हरियाणा भेजी गई हैं।”

‘सभी संघियों को जेल में डालेंगे’: कॉन्ग्रेस समर्थक और AAP ट्रोल मोना अम्बेगाँवकर ने जारी किया ‘लिबरल डेमोक्रेसी’ का एजेंडा

मोना का कहना है कि वह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) पर प्रतिबंध लगाएँगी और अगले पीएम बनने का मौका मिलने पर सभी संघियों को जेल में डाल देगी।

अतीक अहमद के फरार चल रहे भाई अशरफ को जिस घर से पुलिस ने किया था गिरफ्तार, उसे योगी सरकार ने किया जमींदोज

प्रयागराज विकास प्राधिकरण ने अतीक अहमद के भाई अशरफ के साले मोहम्मद जैद के कौशांबी स्थित करोड़ों के आलीशान बिल्डिंग पर भी सरकारी बुलडोजर चलाकर उसे जमींदोज कर दिया है।

नेटफ्लिक्स: काबुलीवाला में हिंदू बच्ची से पढ़वाया नमाज, ‘सेक्युलरिज्म’ के नाम पर रवींद्रनाथ टैगोर की मूल कहानी से छेड़छाड़

सीरीज की कहानी के एक दृश्य में (मिनी) नाम की एक लड़की नमाज अदा करते हुए दिखाई देती है क्योंकि उसका दोस्त काबुलीवाला कुछ दिनों के लिए उससे मिलने नहीं आया था।

कंगना ने किया योगी सरकार के सबसे बड़ी फिल्म सिटी बनाने के ऐलान का समर्थन, कहा- फिल्म इंडस्ट्री में कई और बड़े सुधारों की...

“हमें अपनी बॉलीवुड इंडस्ट्री को कई प्रकार के आतंकवादियों से बचाना है, जिसमें भाई भतीजावाद, ड्रग माफ़िया का आतंक, सेक्सिज़म का आतंक, धार्मिक और क्षेत्रीय आतंक, विदेशी फिल्मों का आतंक, पायरेसी का आतंक प्रमुख हैं।"

हमसे जुड़ें

260,559FansLike
77,944FollowersFollow
322,000SubscribersSubscribe
Advertisements