Friday, March 1, 2024
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बजट 2019 की कहानी, राधा मोहन सिंह की जुबानी

देश के किसान को वास्तविक अन्न-दाता मानते हुए सरकार ने उनके विकास और आय दोनों का ही पूरा ध्यान रखा है। खाद्यान्नों की बेहतर कीमतें तय करने के साथ उनके लिए आय सहायता भी तय...

केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री राधा मोहन सिंह ने बजट 2019 को किसानों का बजट बताया है। पढ़ें क्या है ताज़ा बजट को लेकर उनके विचार, ख़ुद उनके ही शब्दोें में।

बजट 2019 को लेकर राधा मोहन सिंह के विचार:

‘सबका साथ सबका विकास’ के मूलमंत्र पर सतत रूप से कार्यरत वर्तमान सरकार ने कृषि क्षेत्र के चहुमुखी विकास और किसानों की आय बढ़ाने की अपनी प्रतिबद्धता को 2019 के बजट के साथ एक बार पुन: उजागर कर दिया है। मैं आपको बता दूँ कि कृषि एवं किसान कल्‍याण मंत्रालय का बजटीय आवंटन वर्ष 2018-19 के 58,080 करोड़ रूपए से लगभग ढाई गुना की बढ़त के साथ 1,41,174.37 करोड़ रूपए हो गया है। मोदी सरकार का केवल एक वर्ष यानि 2019 का बजटीय प्रावधान यूपीए सरकार के 5 वर्षों (2009-14) के 1,21,082 करोड़ रूपए के बजटीय प्रावधान से भी 16.6% अधिक है।

इसीलिए ‘कृषि उत्पादों के भंडारों के साथ साथ किसान की जेब भी भरे एवं उनकी आय भी बढ़े’ वाली अपनी सोच के अनुरूप, सरकार ने भारतीय इतिहास पटल पर एक नया अध्याय रचते हुए बजट 2019 में किसानों के लिए इनकम सपोर्ट के प्रावधान के साथ अन्य कई प्रावधान करते हुए ग्रामीण भारत पर सबसे ज्यादा फोकस किया है।

पीएम-किसान योजना

मुझे यह बताते हुए बेहद खुशी हो रही है कि देश में छोटे और सीमांत किसानों को प्रत्‍यक्षता आय संबंधी सहायता दिए जाने के प्रयोजनार्थ एवं एक सुव्‍यवस्‍थित कार्य व्‍यवस्‍था कायम करने के लिए सरकार ने शत प्रतिशत केंद्रीय सहायता के साथ 75 हजार करोड़ रुपए के प्रस्तावित बजट से प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (पीएम-किसान) नामक योजना आरंभ करने का निर्णय लिया है ताकि छोटे और सीमांत किसान, जिनके पास राज्य तथा केंद्र शासित प्रदेशों के भू-अभिलेखों में सम्मिलित रूप से दो हेक्टेयर तक की कृषि योग्य भूमि का स्वामित्व है, को उनके निवेश और अन्य जरूरतों को पूरा करने के लिए एक सुनिश्चित आय सहायता प्रदान की जा सके, जिससे वो अपनी उभरती जरूरतों को तथा विशेष रूप से फसल चक्र के पश्चात तथा संभावित आय प्राप्त होने से पहले की स्तिथि में होने वाले व्ययों की आपूर्ति कर सके।

निर्धन किसानों को सरकार का तोहफ़ा।

इस योजना के अंतर्गत, लघु व सीमांत परिवारों को प्रति वर्ष 6000 रु. की सहायता सीधे चार-चार माह की तीन किश्तों में उपलब्ध कराई जाएगी ताकि किसानों को अपने छोटे छोटे खर्चों की आपूर्ति के लिए साहूकारों के चंगुल में पड़ने से भी बचाया जा सके और खेती के कार्यकलापों में उनकी निरंतरता भी सुनिश्चित की जा सके। इतना ही नहीं, यह योजना उन्हें अपनी कृषि पद्धतियों के आधुनिकीकरण के लिए भी सक्षम बनाएगी और वो इस समर्पित सहायता के साथ साथ अन्य योजनाओं का लाभ उठाते हुए एक सम्मानजनक जीवनयापन के मार्ग पर आगे बढ़ सकेंगे।

राधा मोहन सिंह Radha Mohan Singh ಅವರಿಂದ ಈ ದಿನದಂದು ಪೋಸ್ಟ್ ಮಾಡಲಾಗಿದೆ ಸೋಮವಾರ, ಫೆಬ್ರವರಿ 4, 2019

इस सम्मानजनक जीवनयापन की शरुआत तुरन्त प्रभाव से होगी क्योंकि इस योजना को 01.12.2018 से ही लागू करने का ऐलान किया गया है तथा पात्र किसान परिवारों को यह लाभ इसी प्रभाव से देय होगा। इसी लिए वर्ष 2018-19 के पूरक माँगों में 20 हजार करोड़ रुपए का प्रस्ताव किया गया है। 01.12.2018 से 31.03.2019 की अवधि की प्रथम किश्त में पात्र परिवारों के चिन्हीकरण के तत्काल बाद इसी वित्तीय वर्ष में ही हस्तांतरित कर दी जाएगी। वर्ष 2019-20 से लाभ का हस्तांतरण आधार आधारित डेटाबेस के माध्यम से सीधे बैंक खातों में किया जाएगा

गौपालन एवं पशुपालन को बढ़ावा

मोदी सरकार द्वारा देश में पहली बार देशी गौपशु और भैंसपालन को बढ़ावा देने, उनके आनुवांशिक संसाधनों को वैज्ञानिक और समग्र रूप से संरक्षित करने तथा अद्यतन प्रौद्योगिकियों का उपयोग करते हुए भारतीय बोवाईनों की उत्‍पादकता में सतत् वृद्धि हेतु राष्‍ट्रीय गोकुल मिशन प्रारम्‍भ किया गया है। इसकी अहमीयतता के मध्यनज़र वर्ष 2018-19 के रु.250 करोड़ के बजट को बढ़ाकर रु. 750 करोड़ कर दिया गया है। अपने इस प्रयास को आगे बढ़ाते हुए सरकार ने अब “राष्‍ट्रीय कामधेनु आयोग” के निर्माण का फैसला लिया है जो एक स्‍वतंत्र निकाय होगा।

गौ संसाधनों के सतत् आनुवांशिक उनयन को बढ़ाने तथा गायों के उत्‍पादन और उत्‍पादकता को बढ़ाने हेतु, नीतिगत ढ़ांचा एवं कार्यकारी वातावरण प्रदान करते हुए यह आयोग दिशानिर्देश जारी करेगा जिससे फार्म आय की बढ़ोत्‍तरी, डेयरी किसानों की गुणवत्‍तापूर्ण जीवन और देशी गायों के उन्‍नत संरक्षण और प्रबंधन को बढ़ावा मिल सके। राष्‍ट्रीय कामधेनु आयोग देश में गायों और गौवंशों के कल्‍याण के कानून के प्रभावी कार्यान्‍वयन को भी देखेगा तथा गौवंशों की रक्षा में शामिल गौशालाओं, गौसदनों तथा नए संसाधनों के कार्य में सलाह देने के साथ-साथ देश में डेयरी सहकारिताओं, पशु विकास एजेंसियों, किसान उत्‍पादक कंपनियों और डेयरी उद्योगों के साथ समन्‍वय से डेयरी किसान के हितों को बढ़ावा देगा।

मत्स्यपालन को प्रोत्साहन

भारत विश्‍व में दूसरा सबसे बड़ा मछली उत्‍पादक देश है जो कि विश्‍व उत्‍पादन का 6.3% मछली उत्‍पादन करता है। मत्‍स्‍यपालन का जीडीपी में लगभग 1% का योगदान है तथा यह लगभग 1.5 करोड़ लोगों की आय का महत्‍वपूर्ण स्रोत है। मत्‍स्‍यपालन क्षेत्र के व्‍यापक योगदान और विकास की संभावनाओं को देखते हुए मोदी सरकार ने विद्यमान पशुपालन, डेयरी एवं मत्‍स्‍यपालन विभाग से स्‍वतंत्र ढांचे और स्‍टाफ के साथ एक नया एवं स्वतंत्र मत्‍स्‍यपालन विभाग बनाने का निर्णय लिया है। किसान क्रेडिट कार्ड के माध्‍यम से भारत सरकार कृषि प्रक्षेत्र से जुड़े किसानों को सस्‍ते दर पर संस्‍थागत ऋण उपलब्‍ध कराती हैं।

इससे न सिर्फ कृषि उत्‍पादों को बढ़ाने में मदद मिलती है वरन् कृषि उत्‍पादकता में भी वृद्धि होती है। अब पशुपालन एवं मत्स्यपालन की गतिविधियों से अधिक किसानों के जुड़ने के कारण वर्ष 2019 के बजट में किसान क्रेडिट कार्ड सुविधा की उपलब्धता को पशुपालन तथा मत्‍स्‍यपालन के लिए भी सुनिश्चित करने बारे निर्णय लिया गया है और इसी अनुरूप पूर्व से किसान क्रेडिट कार्ड धारकों को 4% ब्याज दर पर 3 लाख की ऋण सीमा के तहत पशुपालन तथा मत्‍स्‍यपालन गतिविधियों को भी शामिल किया गया है। जिन किसानों के पास खेती में उपयोगी संसाधनों के लिए क्रेडिट कार्ड नहीं है उनके लिए 2 लाख तक का नया किसान क्रेडिट कार्ड पशुपालन व मत्स्यपालन गतिविधियों के लिए बनाने का प्रावधान किया गया है।

अर्थात् अब पशुपालकों तथा मछुआरों को भी 4% की रियायती ब्‍याज दरों पर ऋण उपलब्‍ध हो सकेगा।वर्तमान में किसी प्राकृतिक आपदा से प्रभावित होने की परिस्‍थिति में किसानों को मात्र एक वर्ष की अवधि के लिए 2% ऋण छूट का लाभ मिलता है। प्राकृतिक आपदा में अधिकतम ऋण छूट लाभ देते हुए,किसान हित में मोदी सरकार द्वारा प्राकृतिक आपदा से प्रभावित किसानों के लिए अब कृषि ऋण को 3 से 5 वर्षों के लिए पुनर्गठन की अवधि के लिए न सिर्फ 2% ऋण छूट वरन् ससमय भुगतान (Timely Payment) करने पर 3% अतिरिक्त ऋण छूट का लाभ भी दिया जाएगा।

किसान क्रेडिट कार्ड

वर्तमान में लगभग 7 करोड़ सक्रिय किसान क्रेडिट कार्ड हैं जिसका अर्थ है कि लगभग 50% किसान आज भी संस्‍थागत ऋण प्रणाली से बाहर हैं। भारत सरकार इन सभी किसानों को संस्‍थागत ऋण प्रक्रिया के तहत लाने के लिए कटिबद्ध है। और इस उद्देश्‍य की प्राप्‍ति हेतु भारत सरकार, राज्‍य सरकार तथा सभी बैंकों के साथ मिलकर किसान क्रेडिट कार्ड के निर्माण हेतु सघन अभियान को प्रारम्‍भ करेगी। इस अभियान के अंतर्गत ऐसे सभी इच्छुक किसान जो कृषि साथ-साथ पशुपालन अथवा मत्स्यपालन के व्यवसाय से जुड़े हैं, एक सरलीकृत प्रार्थना-पत्र भरकर किसान क्रेडिट कार्ड का आवेदन बैंकों को दे सकेंगे।

प्रार्थना-पत्र के साथ फोटो के अतिरिक्त उन्हें मात्र तीन दस्तावेज- भौमिक अधिकारों संबंधित अभिलेख, पहचान-पत्र तथा निवास संबंधी प्रमाण पत्र ही देना होगा। इस संदर्भ में वित्तीय सेवाएं विभाग द्वारा उनके अधीन सभी वित्तीय संस्थाओं को पृथक से आदेश निर्गत कर दिए गए है। राज्य सरकारों को भी यह अनुरोध किया गया है कि वे एक रणनीति के तहत ग्रामवार अथवा बैंक शाखावार कैंप आयोजित करें जिसमें फील्ड स्तरीय कर्मचारी प्रार्थना-पत्र को भराने तथा आवश्यक अभिलेख उपलब्ध कराने में सहायता करेंगे।

अभी तक किसान क्रेडिट कार्ड को बनाने में किसानों को प्रक्रिया, दस्तावेज, निरीक्षण तथा खाता-बही से संबंधित विभिन्न प्रकार के शुल्क देने पड़ते थे। इंडियन बैंकर्स एशोसिएसन द्वारा भी किसान हित में यह निर्णय लिया है कि तीन लाख तक के ऋण सीमा तक उपरोक्त शुल्क नहीं लिए जाएंगें

इन सब प्रावधानों और 2019 के बजट से स्पष्ट है कि देश के किसान को वास्तविक अन्न-दाता मानते हुए सरकार ने उनके विकास और आय दोनों का ही पूरा ध्यान रखा है। खाद्यान्नों की बेहतर कीमतें तय करने के साथ उनके लिए आय सहायता भी तय की है, जो आर्थिक सुरक्षा एवं उनकी वास्तविक आय को वर्ष 2022 तक दोगुना करने में विशेष रूप से मददगार होगी।

-राधा मोहन सिंह, केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री (भारत सरकार)

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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