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‘राम-कृष्ण पूर्वज हैं तो इतिहास में क्यों नहीं पढ़ाया जाता’ – AAP नेता की विवादित टिप्पणी

"राम और कृष्ण अगर पूर्वज हैं तो इतिहास में पढ़ाया क्यों नहीं जाता। पूर्वजों का कोई इतिहास होता है, जबकि इनका कोई प्रमाणिक इतिहास नहीं है। यह पौराणिक कथाएँ हैं, ऐतिहासिक नहीं।"

आम आदमी पार्टी के नेता राजेंद्र पाल गौतम ने भगवान राम और कृष्ण को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी की है। उन्होंने ट्वीट करते हुए कहा कि राम और कृष्ण अगर पूर्वज हैं तो इतिहास में पढ़ाया क्यों नहीं जाता। पूर्वजों का कोई इतिहास होता है, जबकि इनका कोई प्रमाणिक इतिहास नहीं है। केजरीवाल सरकार में मंत्री राजेंद्र पाल इतने पर ही नहीं रुके। इसके आगे उन्होंने कहा कि यह पौराणिक कथाएँ हैं, ऐतिहासिक नहीं। जबकि पेरियार का दृष्टिकोण प्रमाणिकता और तार्किकता के आधार पर था। बता दें कि उन्होंने यह सवाल योगगुरु बाबा रामदेव के एक ट्वीट के जवाब में पूछा।

हालाँकि, आम आदमी पार्टी नेता राजेंद्र पाल गौतम ने अपना यह ट्वीट डिलीट कर दिया है, और एक अन्य ट्वीट करते हुए बताया कि किसी ने उनके ट्विटर हैंडल का दुरुपयोग या हैक किया और चुनाव के समय पार्टी (आप) को नुक़सान पहुँचाने के लिए धार्मिक प्रतीकों पर कुछ ट्वीट किया है। उन्होंने कहा कि हमारे लिए सभी धर्म बराबर हैं, हम सभी धर्मों का सम्मान करते हैं।

इससे पहले एक ट्वीट में, योग गुरु रामदेव बाबा ने कहा था कि जो कोई भी अपने पूर्वजों भगवान राम और भगवान कृष्ण का सम्मान करेगा, वे उनका बचाव करेंगे। डॉ भीमराव अंबेडकर, ज्योतिबा फुले, सावित्रीबाई फुले और अन्य नेताओं का हवाला देते हुए उन्होंने कहा था कि वह उनका बहुत सम्मान करते हैं। लेकिन, प्रसिद्ध समाजवादी और ‘फादर ऑफ़ द द्रविड़ियन आंदोलन’ पेरियार की विचारधारा पौराणिक कथाओं के ख़िलाफ़ थी, जिससे कोई सहमत नहीं हो सकता।

जानकारी के अनुसार, पेरियार पर रामदेव बाबा के बयानों पर डीएमके प्रमुख एम के स्टालिन ने तीखा हमला किया। उन्होंने कहा कि वह ऐसी ताक़तों के ख़िलाफ़ द्रविड़ विचारधारा का बचाव करेंगे। तब रामदेव बाबा ने यह स्पष्ट किया कि उन्होंने प्रमुख दलित नेता बी आर अंबेडकर का अपमान नहीं किया बल्कि वो उनका सम्मान करते हैं।

वहीं, आप नेता राजेन्द्र पाल के बारे में बता दें कि वो केजरीवाल सरकार में समाज कल्याण, एससी/ एसटी, सहकारी गुरुद्वारा चुनाव मंत्रालय की ज़िम्मेदारी उठा चुके हैं। फ़िलहाल, वो दिल्ली की सीमापुरी विधानसभा से विधायक हैं। उनकी इस तरह की टिप्पणियाँ मुख्यमंत्री केजरीवाल के लिए एक नहीं बल्कि कई मुसीबतें खड़ी कर सकती हैं। 

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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