Saturday, January 23, 2021
Home राजनीति जंगलराज का डर ऐसा कि लालू से अपने भी काट रहे कन्नी, 'मोदी के...

जंगलराज का डर ऐसा कि लालू से अपने भी काट रहे कन्नी, ‘मोदी के हनुमान’ कहीं चुस्त तो कहीं सुस्त

लालू यादव इस बार सीन से पूरी तरह गायब हैं। न उनके कथित सामाजिक न्याय की चर्चा हो रही, न विपक्ष उनकी तरह बीजेपी और संघ का 'डर' बेच रहा है।

बिहार का इस बार का विधानसभा चुनाव कई मामलों में अलग दिख रहा है। मसलन, 90 के बाद यह पहला चुनाव है जिसकी चर्चा के केंद्र में लालू प्रसाद यादव नहीं हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जो 23 अक्टूबर को राज्य में पहली चुनावी रैली करने वाले हैं, उन पर विपक्ष सीधे हमले से बच रहा है।

राजद के नेतृत्व वाले गठबंधन के उम्मीदवार भी सार्वजनिक रूप से बेरोजगारी, पलायन और विकास की बात कर रहे हैं। वे उस कथित सांप्रदायिकता का डर भी वोटरों को नहीं दिखा रहे हैं, जिसे लालू पहले आडवाणी और बाद में मोदी का ‘डर’ दिखाकर बेचा करते थे। न ही लालू के कथित सामाजिक न्याय की कोई चर्चा हो रही है।

विपक्ष के निशाने पर नीतीश कुमार हैं और एनडीए से अलग होकर चुनाव लड़ रही चिराग पासवान की लोजपा के निशाने पर भी। पर चीजें इतनी भी सुलझी नहीं हुई है। एक सीट पर जो किसी उम्मीदवार की ताकत दिखती है, दूसरी सीट पर उसका लाभ नहीं दिख रहा। मसलन –

  • चकाई से सुमित सिंह बतौर निर्दलीय मैदान में हैं। चकाई ही नहीं आसपास की सीटों पर भी आप उनका नाम सुनेंगे। लोगबाग बताते हैं कि पिछला चुनाव हारने के बाद भी वे लगातार सक्रिय रहे। उनकी चुनावी संभावनाएँ बेहतर बताई जाती है। पर जमुई से रालोसपा के टिकट पर मैदान में उतरे अजय प्रकाश को पिछले चुनाव में हार के बाद भी इलाके में लगातार सक्रिय होते रहने का लाभ नहीं दिखता है। इस सीट पर यह चर्चा है कि उनको वोट देने से बीजेपी को नुकसान हो जाएगा। दिलचस्प यह है कि सुमित और अजय भाई हैं। लेकिन, चकाई के जदयू के खाते में होने की वजह से सुमित के पक्ष में यह काम करता दिख रहा है।
  • लखीसराय से मंत्री विजय कुमार सिन्हा को लेकर बीजेपी के भीतर भी नाराजगी थी। लेकिन उनकी उम्मीदवारी के ऐलान के बाद यह चर्चा आम है कि उनको वोट नहीं देने का नुकसान बीजेपी को हो सकता है।
  • झाझा की सीट पर पिछला चुनाव हार चुके दामोदर रावत को बढ़त दिखती है। चुनाव हारने से पहले रावत नीतीश सरकार में मंत्री हुआ करते थे। उस समय इलाके में कुछ काम हुए थे। उसकी चर्चा लोग करते हैं। हारने के बावजूद जदयू के सरकार में होने का लाभ भी रावत को मिला। यहाँ माई समीकरण प्रभावी है, लेकिन कई मजबूत यादव उम्मीदवारों के कारण उनका वोट बँटने से रावत को फायदा मिलने की बात कही जा रही है।
  • उम्मीदवारों का चेहरा कितना महत्वपूर्ण है यह जमुई में श्रेयसी सिंह का होना बताता है। अरसे से यहाँ की राजनीति जय प्रकाश यादव और नरेंद्र सिंह के बीच बँटी रही है। इस राजनीति से निकलने के लिए मतदाता श्रेयसी को अवसर के तौर पर देख रहे हैं। खासकर, महिलाओं और युवाओं के बीच उनका होना काफी असर डाल रहा है।
  • इसी तरह बीजेपी से लोजपा में आए रवींद्र यादव को वैसा लाभ झाझा में नहीं है, जैसा दिनारा में राजेंद्र सिंह के लिए दिखता है। यादव को दबंग छवि का नुकसान दिख रहा है। बीजेपी और संघ के कैडर भी खुलकर उनके साथ नहीं हैं। लेकिन, राजेंद्र सिंह को जमीन पर बीजेपी और संघ के कार्यकर्ताओं का खुलकर सम​र्थन मिल रहा है।

भले चिराग पासवान खुद को ‘मोदी का हनुमान’ बताए और बीजेपी का केंद्रीय नेतृत्व उनके दावों को खारिज कर रहा है, पर जमीन पर बीजेपी के उम्मीदवार भी मानते हैं कि लोजपा के उम्मीदवार नहीं उतारने का लाभ उन्हें है। लेकिन यह भी सच है कि हर सीट पर जदयू को लोजपा के उम्मीदवार का होना नुकसान भी नहीं पहुँचा रहा।

अब फिर से लौटकर उस सवाल पर आते हैं कि लालू चर्चा से क्यों गायब हैं? रिटायर्ड डॉक्टर और जमुई जिले में महादलितों तथा आदिवासियों के बीच काम करने वाले एसएन झा ने आपइंडिया को बताया, “इसका बड़ा कारण यह है कि लालू यादव की चर्चा होते ही बहस सिमट कर 1990 से 2005 के समय पर आ जाती है। इसमें कोई दो मत नहीं है कि उनके आने के बाद ओबीसी वर्ग का उभर हुआ था। लेकिन तब विकास का कोई काम नहीं हुआ और गुंडई बहुत बढ़ गई थी। कोई लौटकर फिर से उसी समय में नहीं जाना चाहता है। पर लालू यादव का नाम आते ही जंगलराज की चर्चा होने लगती है। इसलिए इस बार विपक्ष चुनाव नीतीश कुमार के खिलाफ केंद्रित करने की कोशिश में है। नीतीश कुमार के टाइम में काम हुआ है। लेकिन अब लोग विकल्प भी खोजने लगे हैं, क्योंकि उनका ये टर्म बहुत अच्छा नहीं रहा है।”

झाझा के 45 साल के अशोक यादव ने बताया, “नीतीश कुमार ने काम तो किया है। सड़क सब बढ़िया कर दिए हैं। बिजली भी 18-20 घंटे रहता है। पहले रोड चलने लायक नहीं था। शाम होने के बाद झाझा बाजार से कोई अपने गाँव तरफ जाने का हिम्मत नहीं कर पाता था। अब 12 बजे, 1 बजे रात तक आराम से लोग चला जाता है। कोई डर नहीं होता। नल जल वाला पानी भी आना शुरू हो गया है। बहुत काम हुआ है।”

वैसे तो कई चुनावों से यह लग रहा है कि लालू के माई (मुस्लिम+यादव) समीकरण में दरार पड़ चुकी है। तो क्या यह दरार और गहरी हुई है? लखीसराय के सुधांशु श्रीवास्तव कहते हैं, “देखिए मुस्लिम लोग तो आज भी उसी को वोट देगा जो बीजेपी के खिलाफ मजबूत है। लेकिन, यादव भी बाइ एंड लार्ज अभी राजद के साथ ही है। ये लोग भले नीतीश कुमार का प्रशंसा कर दे पर अंत में वोट लालटेन को ही देगा।”

जमुई के ​निवर्तमान विधायक और राजद के उम्मीदवार विजय प्रकाश कहते हैं, “देखिए लालू जी हमेशा हमारे नेता रहेंगे। लेकिन, अभी तेजस्वी जी सब देख रहे हैं। वे भी युवा हैं और युवा लोगों का जमाना है। नीतीश कुमार 15 साल से हैं। लेकिन कोई फैक्ट्री नहीं खुला। नौकरी नहीं है। सबको कमाने के लिए बाहर जाना पड़ता है। युवा लोग ये सब देख रहा। रोड का इतना बात हो रहा आप देहात में जाकर देखिए क्या हाल है। खाली बाहर-बाहर सब चमक रहा है।”

एक चीज तो स्पष्ट है कि नीतीश कुमार की लोकप्रियता और असर पर इस बार काफी सवाल हैं। लेकिन मोदी की स्वीकार्यता और प्रभाव अब भी बनी हुई है। इसलिए विपक्ष भी इस लड़ाई को नीतीश कुमार के आसपास ही समेट कर रखना चाहता है।

वैसे जमीन के उपर फिलहाल लहर जैसी कोई चीज नहीं दिख रही। विकास की बातें भले हो रही हैं पर निर्णायक उम्मीदवार का चेहरा और जातिगत समीकरण ही हैं। यह चर्चा जमीन पर जोर-शोर से है कि लोजपा के कुछ कैंडिडेट जीतने में सफल रहे और सुमित जैसे कुछ निर्दलीय भी जीत गए तो बीजेपी नीतीश कुमार को छोड़ देगी। मतदाताओं के बीच गहरे तक पैठ कर चुकी इस चर्चा का ही असर है कि सरकार से नाराजगी का सीधा फायदा विपक्ष को मिलता नहीं दिख रहा।

  सहयोग करें  

एनडीटीवी हो या 'द वायर', इन्हें कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

अजीत झा
देसिल बयना सब जन मिट्ठा

 

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

ये पल भावुक करने वाला, नेताजी के नाम से मिलती है नई ऊर्जा: जानिए PM मोदी ने ‘पराक्रम दिवस’ पर क्या कहा

“मैं नेता जी की 125वीं जयंती पर कृतज्ञ राष्ट्र की ओर से उन्हें नमन करता हूँ। मैं आज बालक सुभाष को नेताजी बनाने वाली, उनके जीवन को तप, त्याग और तितिक्षा से गढ़ने वाली बंगाल की इस पुण्यभूमि को भी नमन करता हूँ।”

पुलिस को बदनाम करने के लिए रची गई थी साजिश, किसान नेताओं ने दी थी हत्या की धमकी: योगेश सिंह का खुलासा

साथ ही उन्होंने उसे बुरी तरह धमकाया कि अगर उसने उनका कहा नहीं माना तो उसे गंभीर परिणाम भुगतने पड़ेंगे। उसकी पिटाई की गई। ट्रॉली से उलटा लटका कर उसे मारा गया।

मुनव्वर फारूकी ने कोई ‘जोक क्रैक’ नहीं किया तो जैनब सच-सच बतलाना कमलेश तिवारी क्यों रेता गया

कितनी विचित्र विडंबना है, धार्मिक भावनाएँ आहत होती हैं और उनका विरोध होता है तो साम्प्रदायिकता! लेकिन मज़हबी जज़्बात आहत होते हैं तो...।

‘किसान’ नेताओं के मर्डर की कहानी को दमदार बनाने के लिए ‘नकाबपोश’ योगेश के मोबाइल में डाली 4 तस्वीरें

जिस नकाबपोश को शूटर बता किसान नेताओं ने देर रात मीडिया के सामने पेश किया था उसने चौंकाने वाले खुलासे किए हैं।

सेना राष्ट्रवादी क्यों, सरकार से लड़ती क्यों नहीं: AAP वाले रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल ने ‘द प्रिंट’ में छोड़ा नया शिगूफा

लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) HS पनाग पनाग चाहते हैं कि सेना को लेकर जम कर राजनीति हो, उसे बदनाम किया जाए, दुष्प्रचार हो, लेकिन सेना को इसका जवाब देने का हक़ नहीं हो क्योंकि ये राजनीतिक हो जाएगा।

असम में 1 लाख लोगों को मिले जमीन के पट्टे, PM मोदी ने कहा- राज्य में अब तक 2.5 लाख लोगों को मिली भूमि

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने असम के करीब 1 लाख जनजातीय लोगों को उनकी जमीन का पट्टा (स्वामित्व वाले दस्तावेज) सौंपा।

प्रचलित ख़बरें

मटन-चिकेन-मछली वाली थाली 1 घंटे में खाइए, FREE में ₹1.65 लाख की बुलेट ले जाइए: पुणे के होटल का शानदार ऑफर

पुणे के शिवराज होटल ने 'विन अ बुलेट बाइक' नामक प्रतियोगिता के जरिए निकाला ऑफर। 4 Kg की थाली को ख़त्म कीजिए और बुलेट बाइक घर लेकर जाइए।

शाहजहाँ: जिसने अपनी हवस के लिए बेटी का नहीं होने दिया निकाह, वामपंथियों ने बना दिया ‘महान’

असलियत में मुगल इस देश में धर्मान्तरण, लूट-खसोट और अय्याशी ही करते रहे परन्तु नेहरू के आदेश पर हमारे इतिहासकारों नें इन्हें जबरदस्ती महान बनाया और ये सब हुआ झूठी धर्मनिरपेक्षता के नाम पर।

नकाब हटा तो ‘शूटर’ ने खोले राज, बताया- किसान नेताओं ने टॉर्चर किया, फिर हत्या वाली बात कहवाई: देखें Video

"मेरी पिटाई की गई। मेरी पैंट उतार कर मुझे पीटा गया। उलटा लटका कर मारा गया। उन्होंने दबाव बनाया कि मुझे उनका कहा बोलना पड़ेगा। मैंने हामी भर दी।"

‘अल्लाह का मजाक उड़ाने की है हिम्मत’ – तांडव के डायरेक्टर अली से कंगना रनौत ने पूछा, राजू श्रीवास्तव ने बनाया वीडियो

कंगना रनौत ने सीरीज के मेकर्स से पूछा कि क्या उनमें 'अल्लाह' का मजाक बनाने की हिम्मत है? उन्होंने और राजू श्रीवास्तव ने अली अब्बास जफर को...

‘कोहली के बिना इनका क्या होगा… ऑस्ट्रेलिया 4-0 से जीतेगा’: 5 बड़बोले, जिनकी आश्विन ने लगाई क्लास

अब जब भारत ने ऑस्ट्रेलिया में जाकर ही ऑस्ट्रेलिया को धूल चटा दिया है, आइए हम 5 बड़बोलों की बात करते हैं। आश्विन ने इन सबकी क्लास ली है।

‘उसने पैंट से लिंग निकाला और मुझे फील करने को कहा’: साजिद खान पर शर्लिन चोपड़ा ने लगाया यौन उत्पीड़न का आरोप

अभिनेत्री-मॉडल शर्लिन चोपड़ा ने फिल्म मेकर फराह खान के भाई साजिद खान पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया है।
- विज्ञापन -

 

जय श्री राम के उद्घोष से भड़कीं ममता बनर्जी, PM मोदी से कहा- बुलाकर बेइज्जती करना ठीक नहीं

जैसे ही ममता बनर्जी मंच पर भाषण देने पहुँचीं बीजेपी कार्यकर्ता तुरंत जय श्री राम और भारत माता की जय के नारे लगाने लगे, जिससे वो खफा हो गईं।

ये पल भावुक करने वाला, नेताजी के नाम से मिलती है नई ऊर्जा: जानिए PM मोदी ने ‘पराक्रम दिवस’ पर क्या कहा

“मैं नेता जी की 125वीं जयंती पर कृतज्ञ राष्ट्र की ओर से उन्हें नमन करता हूँ। मैं आज बालक सुभाष को नेताजी बनाने वाली, उनके जीवन को तप, त्याग और तितिक्षा से गढ़ने वाली बंगाल की इस पुण्यभूमि को भी नमन करता हूँ।”

पुलिस को बदनाम करने के लिए रची गई थी साजिश, किसान नेताओं ने दी थी हत्या की धमकी: योगेश सिंह का खुलासा

साथ ही उन्होंने उसे बुरी तरह धमकाया कि अगर उसने उनका कहा नहीं माना तो उसे गंभीर परिणाम भुगतने पड़ेंगे। उसकी पिटाई की गई। ट्रॉली से उलटा लटका कर उसे मारा गया।

‘खुले विचारों की हूँ मैं, गृहिणियाँ पसंद के पुरुषों के साथ रख सकती है एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर’: ममता बनर्जी का वायरल वीडियो

सोशल मीडिया पर ममता बनर्जी का एक पुराना वीडियो काफी वायरल हो रहा है। इस वीडियो में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी अपने खुले विचारों वाली मानसिकता का प्रदर्शन कर रही हैं।

मुनव्वर फारूकी ने कोई ‘जोक क्रैक’ नहीं किया तो जैनब सच-सच बतलाना कमलेश तिवारी क्यों रेता गया

कितनी विचित्र विडंबना है, धार्मिक भावनाएँ आहत होती हैं और उनका विरोध होता है तो साम्प्रदायिकता! लेकिन मज़हबी जज़्बात आहत होते हैं तो...।

भाई की हत्या के बाद पाकिस्तान के पहले सिख एंकर को जेल से कातिल दे रहा धमकी: देश छोड़ने को मजबूर

हरमीत सिंह का आरोप है कि उसे जेल से धमकी भरे फोन आ रहे हैं, जिसमें उसके भाई की हत्या के एक आरोपित बंद है। पुलिस की निष्क्रियता के साथ मिल रहे धमकी भरे कॉल ने सिंह को किसी अन्य देश में जाने के लिए मजबूर कर दिया है।

‘किसान’ नेताओं के मर्डर की कहानी को दमदार बनाने के लिए ‘नकाबपोश’ योगेश के मोबाइल में डाली 4 तस्वीरें

जिस नकाबपोश को शूटर बता किसान नेताओं ने देर रात मीडिया के सामने पेश किया था उसने चौंकाने वाले खुलासे किए हैं।

सेना राष्ट्रवादी क्यों, सरकार से लड़ती क्यों नहीं: AAP वाले रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल ने ‘द प्रिंट’ में छोड़ा नया शिगूफा

लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) HS पनाग पनाग चाहते हैं कि सेना को लेकर जम कर राजनीति हो, उसे बदनाम किया जाए, दुष्प्रचार हो, लेकिन सेना को इसका जवाब देने का हक़ नहीं हो क्योंकि ये राजनीतिक हो जाएगा।

मोदी के बंगाल पहुँचने से पहले BJP कार्यकर्ताओं पर हमला, TMC के गुंडों पर हिंसा का आरोप

"हमारे कार्यकर्ताओं पर आज हमला किया गया। अगर टीएमसी इस तरह की राजनीति करना चाहती है, तो उन्हें उसी भाषा में जवाब दिया जाएगा।"

वैक्सीन के लिए अमेरिका ने की भारत की तारीफ़: बाइडेन के शपथग्रहण में शामिल 150 से अधिक नेशनल गार्ड कोरोना पॉजिटिव

पिछले कुछ दिनों में भारत भूटान को 1.5 लाख, मालदीव को 1 लाख, बांग्लादेश को 20 लाख, म्यांमार को 15 लाख, नेपाल को 10 लाख और मारीशस को 1 लाख कोविड वैक्सीन की डोज़ प्रदान कर चुका है।

हमसे जुड़ें

272,571FansLike
80,695FollowersFollow
385,000SubscribersSubscribe