Sunday, June 16, 2024
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‘बंगाल हिंसा में 4 लाख विस्थापित, विदेश से लाकर बसाए जा रहे रोहिंग्या’: MP लॉकेट चटर्जी ने बताया – BJP में शामिल होने पर फिल्म इंडस्ट्री ने किया बॉयकॉट

"मेरा करियर जब पीक पर था, तब मैंने राजनीति में एंट्री ली थी। तब मुझे इसका बिलकुल भी अंदाज़ा नहीं था कि मेरा काम चला जाएगा। मेरा भी एक परिवार है, सबको परिवार की जिम्मेदारी उठानी पड़ती है। उस समय सबने सब कुछ जीरो कर दिया। जो भाजपा में शामिल हो गया, उसे पेट से मारने की कोशिश होती है, ताकि वो पार्टी छोड़ दे। 4-5 वर्षों तक मेरा बॉयकॉट कर दिया गया।"

पश्चिम बंगाल के हुगली से भाजपा की सांसद लॉकेट चटर्जी राज्य में तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) के गुंडों द्वारा की जाने वाली हिंसा को लेकर मुखर रहती हैं। 2019 में सांसद बनने से पहले वो बंगाली सिनेमा में भी सक्रिय थीं। उन्होंने कई नृत्य शैलियों में भी दक्षता हासिल है। फ़िलहाल बंगाल भाजपा के महासचिव के पद पर सेवा दे रहीं लॉकेट चटर्जी राज्य में पार्टी की महिला प्रकोष्ठ की कमान भी सँभाल चुकी हैं। ऑपइंडिया से बात करते हुए उन्होंने राज्य के ताज़ा हालात और वहाँ चुनाव बाद हुई हिंसा को लेकर अपनी राय रखी।

सवाल: पश्चिम बंगाल में 2021 में हुए विधानसभा चुनाव से पहले हिंसा की कई खबरें आती थीं और भाजपा कार्यकर्ताओं की लाशें मिलती थीं। लेकिन, क्या पार्टी को इसका अंदाज़ा था कि चुनाव परिणाम सामने आने के बाद भी इसी तरह हिंसा का दौर कायम रहेगा?

जवाब: चुनाव में जीत-हार तो होते ही रहते हैं। ऐसा नहीं है कि हम लोग 3 सीटों से शून्य पर आ गए। हमारी सीटें 3 से 77 पर पहुँच गईं। ये हमारे लिए एक बड़ी उपलब्धि थी और हम एक बड़ी पार्टी बन कर राज्य में उभरे। इसके बाद पूरा परिदृश्य ऐसे दिखाया गया जैसे TMC की एकतरफा जीत हुई है। चुनाव के बाद जो हिंसा हुई राज्य भर में, उसके कारण 4 लाख लोगों को विस्थापित होना पड़ा। असम और ओडिशा से लेकर दिल्ली तक लोगों को भागना पड़ा। वो डर से वापस नहीं लौट रहे हैं, क्योंकि उन पर इतने मामले दर्ज कर दिए गए हैं कि लौटने पर उन्हें जेल में डाल दिया जाएगा। आखिर उनके भी परिवार है, बाल-बच्चे हैं। पढ़ाई-लिखाई करना है उनके बच्चों को, लेकिन वो परीक्षाएँ तक नहीं दे सकते हैं। महिलाओं को अपने बर्तन-रुपए, जो भी पास में थे सब लेकर बच्चों के साथ भागना पड़ा। कुछ महिलाएँ तो ऐसी थीं, जो गर्भवती थीं। ऐसी स्थिति में उन्हें बाहर जाना पड़ा। हमारे कैम्प में उन्हें रखा गया। महीनों बाद इनमें से कुछ महिलाएँ घर वापस आईं। एक महिला मुख्यमंत्री के शासनकाल में महिलाओं की इस तरह की दुर्दशा दुर्भाग्यपूर्ण है।

सवाल: बीरभूम के रामपुरहाट में 8 लोगों को ज़िंदा जला कर मार डाला गया। वामपंथियों के शासनकाल में भी इस तरह की घटनाएँ हो चुकी हैं। तब भी भिक्षुओं को ज़िंदा जला दिया गया था। आप CPM और TMC के शासनकाल में क्या अंतर देखती हैं?
जवाब: ममता बनर्जी की सरकार हिंसा के मामले में कम्युनिस्टों से कई गुना आगे निकल गई हैं। दोनों समान ही हैं। CPM ने तीन दशक से भी अधिक समय तक शासन किया, उसके बाद एक दशक ममता बनर्जी के भी पूरे हो चुके हैं। अभी जो CPM के समय में होता था, उससे 3-4 गुना अत्याचार हो रहा है। उस जमाने में जो भी लोग सत्ता में हुआ करते थे, वही लोग अब TMC में शामिल हो गए हैं। हिंसा करने वाले वही लोग हैं।

सवाल: आजकल डेमोग्राफी चेन्ज की बात हो रही है। उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश में ऐसी घटनाएँ सामने आई हैं, जहाँ अवैध घुसपैठियों को जानबूझ कर बसाए जाने के आरोप लगे हैं। इसी तरह पश्चिम बंगाल में भी मुर्शिदाबाद जैसे इलाकों में हिन्दू घृणा बढ़ने की खबरें आती हैं। इसके पीछे आपको क्या कारण लगता है?
जवाब: हमने तो देखा है कि छोटे-छोटे पॉकेट में वो लोग रहते थे, लेकिन अब उन्हें उठा कर हर जगह स्थापित किया जा रहा है। म्यांमार से लेकर बांग्लादेश तक से लाकर उन्हें बसाया जा रहा है। रोहिंग्या मुस्लिमों को आधार कार्ड तक दे दिए गए हैं। उन्हें सिर्फ वोटर आईडी कार्ड से जैसे सरकारी दस्तावेज ही नहीं, बल्कि घर भी दिए जा रहे हैं। सीमा पार करा-करा कर ऐसे लोगों को लाया जा रहा है। कारण है – वोट बैंक की राजनीति। हिन्दुओं पर वो भरोसा नहीं सकते हैं, इसीलिए वो तुष्टिकरण की राजनीति करते हैं। उनका भरोसा मुस्लिम वोटरों पर है, इसीलिए बाहर से लेकर उन्हें बसाया जाता है। ऐसे लोग यहाँ अपराध कर-कर के वापस बांग्लादेश भाग जाते हैं। ये सब गौ-तस्करी और बालू-तस्करी में लिप्त हैं। नेपाल, बांग्लादेश और भूटान तक ये फैले हुए हैं। वहीं, हिन्दुओं पर अत्याचार हो रहे हैं। रामनवमी पर भी हिन्दुओं पर हमला हुआ। बाँकुड़ा में ऐसी ही घटना हुई।

सवाल: हावड़ा में हिन्दुओं के जुलूस पर हमला कर दिया गया। इसी तरह बाँकुड़ा में हिन्दुओं की सिर्फ इतनी गलती थी कि वो मस्जिद के सामने से निकल रहे थे। इस पर 17-18 हिन्दुओं को गिरफ्तार कर लिया गया। इसमें आप पुलिस-प्रशासन को कहाँ खड़ी देखती हैं?
जवाब: जब मस्जिद के सामने से मुहर्रम का जुलूस निकलता है, तब क्या मुस्लिमों को गिरफ्तार करने की हिम्मत होगी इनकी? इनकी हिम्मत ही नहीं होगी। पश्चिम बंगाल में तुष्टिकरण का ऐसा चक्र चल रहा है कि मुस्लिमों को सारी सुविधाएँ मिल रही हैं, अपराध करने पर गिरफ़्तारी तो दूर की बात है।

सवाल: पश्चिम बंगाल उपचुनाव से पहले ख़बरें फैलाई जा रही थीं कि लॉकेट चटर्जी और भाजपा में अनबन चल रही है। आपको चुनाव प्रचार करने वालों की सूची में नहीं डाला गया, ऐसा भी कहा जा रहा था। इस पर आप चीजें स्पष्ट कर दीजिए।
जवाब
: ये सभी चीजें फेक हैं। ये लोग जानते हैं कि भाजपा एक परिवार है और सबसे बड़ा परिवार हमलोगों का है। मुझे जो काम दिया गया है, वो मैं कर रही हूँ। मैं इस परिवार की एक सदस्य हूँ। भवानीपुर उपचुनाव में जब ममता बनर्जी लड़ी थी और बाबुल सुप्रियो भाजपा छोड़ कर गए थे, तब भी ऐसी बातें की गई थीं। हमारे यहाँ पार्टी जो काम देती है, वो करना पड़ता है। मैंने 6 महीने उत्तराखंड में काम किया, क्योंकि मुझे वहाँ की जिम्मेदारी दी गई थी। हमें ऐसी ही शिक्षा दी गई है। ये TMC की रणनीति है कि वोट लेने के लिए वो लोग ऐसा बोलते हैं। हमलोग अपने मिशन की तरफ चलते हैं और कौन क्या बोलता है, इसे हम नज़रअंदाज़ ही करते हैं।

सवाल: आपके राजनीतिक करियर के अलावा फिल्मों में भी आपका अच्छा करियर रहा है। दक्षिण की फ़िल्में आजकल हजारों करोड़ रुपए कमा रही हैं। ‘RRR’ में राष्ट्रवाद दिखाया गया था। इसी तरह पश्चिम बंगाल का भी अपना स्थानीय सिनेमा है। वहाँ जो हिंसा हुई है, उस पर वहाँ की मनोरंजन इंडस्ट्री से किसी ने कोई आवाज़ नहीं उठाई, अगर हम भाजपा में आए मिथुन चक्रवर्ती और यश दासगुप्ता को छोड़ दें तो। ऐसा क्यों?
जवाब: पश्चिम बंगाल की फिल्म इंडस्ट्री पूरी तरह तृणमूल कॉन्ग्रेस के नियंत्रण में है। मैं भी इसका हिस्सा हुआ करती थी। मेरा करियर जब पीक पर था, तब मैंने राजनीति में एंट्री ली थी। तब मुझे इसका बिलकुल भी अंदाज़ा नहीं था कि मेरा काम चला जाएगा। मेरा भी एक परिवार है, सबको परिवार की जिम्मेदारी उठानी पड़ती है। उस समय सबने सब कुछ जीरो कर दिया। जो भाजपा में शामिल हो गया, उसे पेट से मारने की कोशिश होती है, ताकि वो पार्टी छोड़ दे। 4-5 वर्षों तक मेरा बॉयकॉट कर दिया गया। अभी भी मुझे काम नहीं मिलता। खैर, मेरे पास अब समय ही नहीं है। एकदम ममता बनर्जी की सरकार का कंट्रोल है वहाँ। कोई सरकार की तारीफ करेगा, तो उसे काम मिलेगा। विरोधियों को हटा दिया जाता है। इसीलिए, बंगाली फिल्म इंडस्ट्री आगे नहीं बढ़ रही है। जब लोकतांत्रिक अधिकार ही नहीं रहेंगे, तक कैसे अच्छी फ़िल्में बनेंगी? बंगाल में हिंसा हो रही है और ये दिखाएँगे कि ऐसा कुछ नहीं है, फिर उस फिल्म को कौन देखेगा?

सवाल: उत्तर प्रदेश में किसी एक जिले में छोटी सी भी घटना हो जाए तो मीडिया में खूब हो-हल्ला मचाया जाता है। भाजपा शासित राज्यों में राहुल गाँधी पहुँच जाते हैं। जबकि पश्चिम बंगाल में इतनी हिंसा होने के बावजूद राष्ट्रीय मीडिया में उस स्तर की कवरेज देखने को नहीं मिलती। ऐसा क्यों?
जवाब: हमलोग हमेशा पश्चिम बंगाल में हिंसा के मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर उठाते रहते हैं। संसद में भी हमने आवाज़ उठाया है। वहाँ भी TMC के सांसद हमारी आवाज़ दबाने की कोशिश करते हैं। वहाँ से राष्ट्रीय मीडिया में चीजें आती हैं। लेकिन, और भी आनी चाहिए। पश्चिम बंगाल में एक के बाद एक घटनाएँ हो रही हैं, लेकिन इसे छिपाने और दबाने के लिए लगातार काम किया जाता रहा है। यही कारण है कि राष्ट्रीय मीडिया में ये चीजें नहीं आती हैं।

सवाल: जब आप अपने क्षेत्र की जनता से मिलती हैं तो वो क्या कहते हैं?
जवाब: जनता बदलाव चाहती है, लेकिन डर के कारण आम लोग सार्वजनिक रूप से ये बात नहीं कह पाते। भाजपा के कार्यकर्ता भी डरे हुए हैं, क्योंकि उन्हें झूठे केस में फँसा दिया जाता है। उन्हें गिरफ्तार कर लिया जाता है। यहाँ तक कि भाजपा समर्थकों के लिए केंद्रीय योजनाओं (जैसे, प्रधानमंत्री आवास योजना) का लाभ भी रोक दिया जाता है और TMC वालों को सारे फायदे दे दिए जाते हैं। उन्हें कई-कई योजनाओं का लाभ एक साथ मिल जाता है। लोगों का अपना परिवार हैं, उन्हें उनकी भी देखभाल करनी है। लेकिन, 2024 में वो दिखाएँगे कि नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में बंगाल को आगे बढ़ना है।

सवाल: पश्चिम बंगाल के हिंसा पीड़ितों और विस्थापितों के लिए भाजपा एक संगठन के रूप में क्या-क्या कर रही है?
जवाब: हम उनके लिए काफी कुछ कर रहे हैं। जिनके घरों को तोड़फोड़ डाला गया, उन्हें पार्टी की तरफ से मदद दी जा रही है। काफी सारे ऐसे लोग हैं, जिन्हें असम में वहाँ की भाजपा सरकार और कार्यकर्ताओं ने शरण दी। उनकी कानूनी लड़ाई में भी हम मदद कर रहे हैं।

सवाल: कम्युनिस्टों में भी कई ऐसे हैं, जिन्हें TMC ने अपनी हिंसा का निशाना बनाया। कॉन्ग्रेस कार्यकर्ता भी पीड़ित हैं। लेकिन, प्रकाश करात या राहुल गाँधी जैसे बड़े नेता अपनी ही पार्टी के पीड़ित कार्यकर्ताओं के लिए आवाज़ नहीं उठा रहे। इसके पीछे आप क्या कारण देखती हैं?
जवाब: कॉन्ग्रेस और CPM वाले TMC के साथ एक प्लेटफॉर्म पर हैं। पश्चिम बंगाल में भी ये सब के सब एक साथ हैं। इनकी एक ही मंशा है – मोदी को हटाओ। जो लोग अच्छे कार्य करते हैं और आगे बढ़ते हैं, सब उनके पीछे पड़ जाते हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ भी ऐसा ही हो रहा है। कॉन्ग्रेस के काफी सरे घोटाले हुए थे, उन्हें सामने लाने के लिए नरेंद्र मोदी ही लड़े थे। उन्होंने नोटबंदी किया, जिससे कालाधन पर लगाम लगा। इन्हीं फैसलों के कारण उनके पीछे ये नेता पड़े हुए हैं। पीएम मोदी देश को आगे ले जा रहे हैं।

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अनुपम कुमार सिंह
अनुपम कुमार सिंहhttp://anupamkrsin.wordpress.com
भारत की सनातन परंपरा के पुनर्जागरण के अभियान में 'गिलहरी योगदान' दे रहा एक छोटा सा सिपाही, जिसे भारतीय इतिहास, संस्कृति, राजनीति और सिनेमा की समझ है। पढ़ाई कम्प्यूटर साइंस से हुई, लेकिन यात्रा मीडिया की चल रही है। अपने लेखों के जरिए समसामयिक विषयों के विश्लेषण के साथ-साथ वो चीजें आपके समक्ष लाने का प्रयास करता हूँ, जिन पर मुख्यधारा की मीडिया का एक बड़ा वर्ग पर्दा डालने की कोशिश में लगा रहता है।

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