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द वायर, कारवाँ, स्क्रॉल में छपी यौन उत्पीड़न वाली ख़बर: रंजन गोगोई ने बताया इसके पीछे बड़ी ताकतें

गोगोई ने यह भी स्पष्ट किया कि उनका कार्यालय देश के दो सबसे स्वतंत्र कार्यालयों में से एक है। दूसरा उन्होंने प्रधनमंत्री कार्यालय को बताया।

सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई ने अपने खिलाफ यौन उत्पीड़न का दावा करते हुए दाखिल किए गए शपथपत्र को हास्यास्पद करार दिया है। उन्होंने यह भी दावा किया कि कुछ बड़ी ताकतें अगले हफ्ते सुनवाई होने वाले महत्वपूर्ण मुकदमों से पहले उन्हें असहज करके न्यायपालिका को अस्थिर बनाना चाहती हैं।

अवमानना, मोदी बायोपिक, चुनाव स्थगन हैं महत्वपूर्ण मुक़दमे   

न्यायमूर्ति गोगोई के समक्ष जो मुकदमे अगले सप्ताह सुनवाई के लिए सूचित हैं उनमें सबसे बड़े हैं राहुल गाँधी के खिलाफ अदालत की अवमानना (राफेल मुद्दे पर, भाजपा सांसद मीनाक्षी लेखी द्वारा दायर), प्रधानमंत्री मोदी की बायोपिक की चुनावों के दौरान रिलीज पर रोक (फिल्म निर्माताओं द्वारा निर्वाचन आयोग के आदेश के विरुद्ध दायर) और तमिलनाडु में भारी तादाद में मतदाताओं को रिश्वत दिए जाने का स्वतः संज्ञान ले वहाँ चुनाव स्थगित किए जाने की याचिका। इन सब पर सुनवाई से पहले ही इस मामले (यौन उत्पीड़न) पर सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता की याचिका पर मुख्य न्यायाधीश गोगोई की अध्यक्षता वाली विशेष पीठ एकत्र हुई थी। अपनी याचिका में तुषार मेहता ने 4 ऑनलाइन पोर्टलों द वायर, कारवाँ, स्क्रॉल और लीफलेट में छपी हुई ख़बरों का हवाला देते हुए मामले को सार्वजनिक महत्त्व का बताते हुए संज्ञान लेने की प्रार्थना की थी।

आर्थिक दाग लगा नहीं सकते थे, इसलिए चरित्र-हनन  

गोगोई ने यह भी कहा कि उनका आर्थिक पक्ष पूर्णतः स्वच्छ है और उन पर आर्थिक भ्रष्टाचार का मुकदमा कभी नहीं टिकता। इसलिए इस आरोप के जरिए उनकी छवि बिगाड़ने और न्यायपालिका को अस्थिर करने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि उपरोक्त पोर्टलों द्वारा उन्हें भेजे गए सवालों में समानता से उनके तार आपस में जुड़े नजर आते हैं।

मैं और PMO पूर्णतः स्वतंत्र, करता रहूँगा न्याय कार्यकाल के अंत तक

गोगोई ने साथ में यह भी जोड़ा कि उनका कार्यालय देश के दो सबसे स्वतंत्र कार्यालयों में से एक है (दूसरा उन्होंने प्रधनमंत्री कार्यालय को बताया) और आगामी चुनावी महीने में महत्वपूर्ण मुकदमों की सुनवाई के पहले यह उन्हें अस्थिर करने का प्रयास है।

उन्होंने न्यायिक स्वतंत्रता के भी गंभीर खतरे में होने के प्रति आगाह कराया। उन्होंने कहा, “अगर जजों को इस तरह खलनायक बना कर दिखाया जाएगा तो कौन भला इन्सान जज बनना चाहेगा? कौन जज बनकर महज ₹6.8 लाख के बैंक बैलेंस के साथ रिटायर होना चाहेगा?” गोगोई ने अपने दृढ़ निर्णय को भी दोहराया, “चाहे जो कुछ हो जाए, मैं अपने बचे हुए कार्यकाल के अगले सात महीनों तक मुकदमों का निपटारा करता रहूँगा। कोई मुझे रोक नहीं सकता।”

न्यायमूर्ति गोगोई से जुड़े इस मामले में हमारी पिछली कवरेज आप यहाँ पढ़ सकते हैं

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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