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यूपी पशुपालन और नमक घोटाले का कॉन्ग्रेस कनेक्शन! आरोपित वही, जिसने भँवरी देवी की सेक्स CD सबसे पहले दिखाई थी

पशुपालन और नमक घोटाले में यूपी एसटीएफ की गिरफ्त में आया सुनील उर्फ मोंटी गुर्जर शातिर प्रवृत्ति का व्यक्ति है। पता चला है कि पशुपालन और नमक घोटाले में ठगी करने के लिए उसने अपने बेटे के उपनाम 'मोंटी' का इस्तेमाल किया था।

उत्तर प्रदेश में हुए पशुपालन और नमक घोटाले में कॉन्ग्रेस का कनेक्शन उजागर हुआ है। पशुपालन और नमक घोटाले में यूपी एसटीएफ की गिरफ्त में आया सुनील उर्फ मोंटी गुर्जर शातिर प्रवृत्ति का व्यक्ति है। पता चला है कि पशुपालन और नमक घोटाले में ठगी करने के लिए उसने अपने बेटे के उपनाम ‘मोंटी’ का इस्तेमाल किया था। सुनील गुर्जर पुडुचेरी के पूर्व उप-राज्यपाल और राजस्थान में कॉन्ग्रेस के दिग्गज नेता रहे स्व. गोविंद सिंह गुर्जर का दत्तक पुत्र है।

सुनील उर्फ मोंटी गुर्जर के पिता रामनारायण गुर्जर अजमेर जिले की नसीराबाद सीट से कॉन्ग्रेस के विधायक (2014 से 2019) रहे हैं। 2018 के विधानसभा चुनाव में भी उन्होंने कॉन्ग्रेस पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ा था, लेकिन हार गए। सुनील गुर्जर 2014 और 2018 में विधानसभा का चुनाव लड़ना चाहता था, लेकिन कॉन्ग्रेस ने उसके पिता रामनारायण गुर्जर को टिकट दिया। सुनील और उसके पिता सचिन पायलट गुट से हैं। अब कॉन्ग्रेस के बड़े नेताओं के करीबी सुनील गुर्जर का नाम पशुपालन-नमक घोटाले में आया है।

याद हो कि सुनील गुर्जर का नाम भँवरी देवी कांड में भी गूँजा था। इस मामले में जेल में बंद पूर्व मंत्री महिपाल मदेरणा ने गिरफ्तार होने से पहले मीडिया को यह बताया था कि सुनील गुर्जर ने ही उन्हें सबसे पहले सेक्स सीडी दिखाई थी। उस समय चर्चा यहाँ तक थी कि भँवरी देवी को सेक्स सीडी बनाने का आइडिया और संसाधन सुनील गुर्जर ने ही मुहैया करवाए थे। यह भी चर्चा थी कि सुनील गुर्जर ने इस काम के लिए अजमेर में एक मकान किराए पर लिया, जिसमें भँवरी देवी कई बार रुकी।

भँवरी देवी केस में सीबीआई ने सुनील गुर्जर की सरगर्मी से तलाश की थी। गिरफ्तारी से बचने के लिए सुनील गुर्जर कई महीने तक फरार रहा। बड़े नामों के गिरफ्तार होने के बाद सीबीआई ने सुनील की गिरफ्तारी टाल दी। कहा जाता है कि सुनील ने गिरफ्तारी से बचने के लिए पिता गोविंद सिंह गुर्जर के संपर्कों का इस्तेमाल किया। सुनील गुर्जर लंबे समय से ठगी में लिप्त है। नागमणि, जादुई काँच और एंटीक आइटम बेचने में करोड़ों रुपए डकारने के प्रकरण जगजाहिर हैं, लेकिन रसूखदार होने की वजह से मुकदमा दर्ज करवाने की हिम्मत किसी की नहीं हुई।

आईजी एसटीएफ अमिताभ यश ने जानकारी दी थी कि सुनील गुर्जर पशुपालन विभाग के नाम पर ठगी के मुख्य आरोपित आशीष राय का सहयोगी है। जिस तरह आशीष ने एसके मित्तल बनकर पशुपालन विभाग में ठेका दिलाने के नाम पर ठगी की थी, उसी तरह नमक की सप्लाई का काम दिलाने के लिए गुजरात के दो कारोबारियों के साथ भी इस गिरोह ने ठगी की थी। मोंटी पर 50 हजार रुपए के इनाम के साथ-साथ उसके खिलाफ लुकआउट नोटिस भी जारी किया गया था।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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