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राहुल गाँधी ने फिर की GenZ को भड़काने की कोशिश, लोकतंत्र-संविधान की रक्षा की आड़ में PM मोदी का घर घेरने की भी कर चुके हैं अपील: युवराज जी- युवा जागरूक है

कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी GenZ को भड़काने का कोई मौका नहीं छोड़ते। कभी कहते हैं कि 'वोट चोरी' कर बीजेपी हरियाणा, महराष्ट्र समेत सारे चुनाव जीती। कथित 'वोट चोरी' के लिए उन्होंने GenZ को उकसाने का काम किया है। पहले भी लोकतंत्र बचाने और संविधान की रक्षा करने की अपील करते हुए पीएम मोदी के घर तक पहुँचने की अपील वे कर चुके हैं।

हरियाणा से लेकर बिहार तक हर मुद्दे पर कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी देश के GenZ को भड़काने का कोई मौका नहीं छोड़ते। ताजा मामला हरियाणा विधानसभा चुनाव में कथित ‘वोट चोरी’ के आरोप का है। विपक्ष के नेता राहुल गाँधी ने GenZ को बताने की कोशिश की, कि कैसे हरियाणा चुनाव में ‘वोट चोरी’ की गई।

उन्होंने इस दौरान सीएम सैनी की मुस्कुराहट और व्यवस्था जैसे शब्द को आधार बनाया और आरोप जड़ दिए। ये तब उन्होंने किया है जब हरियाणा के लोगों ने कॉन्ग्रेस पार्टी को चुनाव में मात दे दी। जाहिर है वोटिंग करने वालों में बड़ी संख्या में GenZ थे। ऐसे में राहुल गाँधी चुनाव नतीजों को ‘वोट चोरी’ का नाम देकर राज्य के वोटरों का अपमान कर रहे हैं। इनमें GenZ भी शामिल हैं।

राहुल गाँधी ने कहा, “मैं चाहता हूँ कि भारत के युवा, GenZ इसे स्पष्ट रूप से समझें, क्योंकि यह आपके भविष्य के बारे में है…मैं भारत में चुनाव आयोग, लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर सवाल उठा रहा हूँ, इसलिए मैं इसे 100% सबूत के साथ कर रहा हूँ। हमें पूरा यकीन है कि कॉन्ग्रेस की भारी जीत को हार में बदलने की योजना बनाई गई थी। “

बिहार चुनाव में पीएम मोदी के घर पहुँचने के लिए GenZ को उकसाया

ये पहला मौका नहीं है, जब राहुल गाँधी ने GenZ को भड़काया हो। 29 अक्टूबर 2025 को बिहार विधानसभा चुनाव में दरभंगा की रैली में उन्होंने GenZ को उकसाया कि वो मोदीजी के घर तक पहुँच जाएँ।

राहुल गाँधी ने कहा कि “अगर बेरोजगारों को इंस्टाग्राम और फेसबुक में ‘बिजी’ नहीं रखोगे, तो ये मोदीजी के घर पहुँच जाएँगे” उन्होंने GenZ से बेरोजगारी पर बात करते हुए कहा कि ” युवा 24 घंटे इंस्टा पर इसलिए हैं क्योंकि आपने नौकरी नहीं दी। आप जितना चाहे इंस्टा पर रह सकते हो… अगर आप फेसबुक, इंस्टाग्राम पर नहीं रहोगे, तो रोजगार के लिए मोदीजी के घर पहुँच जाओगे। रील में कुछ नहीं है आपके लिए, एक दो लोग इंफ्लुएंसर बनेंगे और एक दो साल बाद बेरोजगारी में डूब जाएँगे।”

चुनाव आयोग पर सवाल उठा कर युवाओं को भड़काया

हर चुनाव के पहले वे उन्होंने पहले भी चुनाव आयोग पर आरोप लगाया है। 18 सितंबर 2025 को उन्होंने कर्नाटक में लोगों के नाम वोटर लिस्ट से काटे जाने का आरोप आयोग पर लगाया था। हालाँकि कर्नाटक में कॉन्ग्रेस की सरकार है। फिर भी राहुल गांधी ने कर्नाटक के अलंद विधानसभा क्षेत्र का उदाहरण देते हुए आरोप लगाया कि उनकी पार्टी के गढ़ रहे क्षेत्रों में 6,000 से ज्यादा मतदाताओं के नाम सूची से हटा दिए गए। ये तब कहा जब अलंद में भी कॉन्ग्रेस का ही विधायक है। इस दौरान राहुल गाँधी ने देश के युवा से ‘लोकतंत्र को बचाने’ की अपील की।

एक्स पर उन्होंने लिखा, “देश के युवा, GenZ संविधान की रक्षा करेंगे, लोकतंत्र की रक्षा करेंगे और वोट चोरी से बचाएँगे”

18 सितंबर को राहुल गाँधी ने ये भी कहा था कि संस्थानों को बचाने का काम उनका नहीं है, बल्कि ये जेनजी का है। नेता प्रतिपक्ष राहुल गाँधी ने कहा, “सच कहूँ तो, मैं यहाँ जो कर रहा हूँ वह मेरा काम नहीं है। मेरा काम लोकतांत्रिक व्यवस्था में भाग लेना है। मेरा काम लोकतांत्रिक व्यवस्था की रक्षा करना नहीं है।”

हिंदुस्तान के लोकतंत्र को बचाने का काम उनका नहीं और वे इसकी रक्षा नहीं करेंगे। उसके बाद में ये कहना कि यह काम GenZ का है। यह साफ दिखा रहा है कि राहुल युवाओं को अपने ही देश, अपने ही लोकतंत्र के खिलाफ भड़काने का प्रयास कर रहें हैं। उनकी इस तरह की हरकत के पीछे उनकी क्या मंशा है? यह देश देख रहा है।

नेपाल में GenZ विरोध से हुआ सत्ता परिवर्तन

कॉन्ग्रेस नेता ने अपनी पोस्ट में ‘GenZ’ का जिक्र किया। यह कोई नया शब्द नहीं है, लेकिन इन दिनों यह काफी चर्चा में है। इसकी एक बड़ी वजह नेपाल में हाल ही में हुआ राजनीतिक बदलाव है। बीते दिनों नेपाल में बड़े पैमाने पर विरोध-प्रदर्शन हुए, जिनकी अगुवाई GenZ यानी आज की युवा पीढ़ी ने की। यहाँ हुए विरोध प्रदर्शनों को जेनजी आंदोलन कहा गया। इसकी वजह से पीएम ओली को इस्तीफा देना पड़ा।

जेनजी 1997 से 2012 के बीच पैदा हुए लोगों को जेनरेशन जूमर्स यानी जेन जी कहा जाता है। माना जाता है कि ये जेनरेशन बचपन से ही स्मार्टफोन, सोशल मीडिया, इंटरनेट की दुनिया में जी रहा है और ‘डिजिटली फिट’ है।

GenZ कौन हैं?

GenZ वे युवा हैं, जिनका जन्म 1997 से 2012 के बीच हुआ है। आज इनकी उम्र 12 से 27 साल के बीच है। भारत में इनकी संख्या करीब 37 करोड़ मानी जाती है, जो देश की आबादी का लगभग एक चौथाई हिस्सा है। यानी भारत का भविष्य GenZ के हाथों में ही है। कंपनियाँ, सरकारें और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स तक इन्हीं को ध्यान में रखकर अपनी नीतियाँ तय कर रहे हैं।

स्लैंग से मशहूर GenZ

भारत के GenZ की इंटरनेट पर अपनी भाषा है, जिसे स्लैंग के रूप में जाना जाता है। ये स्लैंग अब हर जगह छाए हुए हैं। अब ये स्लैंग सिर्फ व्हाट्सऐप के चैट्स तक सीमित नहीं है बल्कि बॉलीवुड के गानों और विज्ञापनों तक पहुँच गए हैं। कुछ स्लैंग का अर्थ समझते हैं

rizz – मतलब किसी को इम्प्रेस करने की कला।
delulu– जब इंसान हकीकत छोड़कर ख्वाबों में जीने लगे।
brat– थोड़ा बागी, थोड़ा नखरीला अंदाज।

इसले अलावा skibididelulu, और tradwife जैसे कुछ स्लैंग तो कैम्ब्रिज डिक्शनरी तक में भी शामिल किए गए हैं। यह पीढ़ी अपने अलग बोलचाल और अंदाज से बाकी सबको प्रभावित कर रही है।

भारत में GenZ हर साल ₹72 लाख करोड़ करते है खर्च

GenZ न सिर्फ इंटरनेट पर बल्कि अर्थव्यवस्था में भी अपनी पकड़ मजबूत कर चुके हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारत के GenZ हर साल 72 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा खर्च करते हैं। देश के कुल उपभोक्ता खर्च का करीब 43 प्रतिशत हिस्सा GenZ से ही आता है। वहीं अन्य रिपोर्ट बताती है कि GenZ अपनी कमाई का 30 प्रतिशत हिस्सा सेविंग में डालते हैं।

GenZ सबसे ज्यादा फैशन, डाइनिंग और मनोरंजन में खर्च कर रहे हैं। सर्वे के मुताबिक, उनका 50 प्रतिशत खर्च फुटवियर, 48 प्रतिशत डाइनिंग, 48 प्रतिशत बाहरी मनोरंजन और 47 प्रतिशत फैशन और लाफस्टाइल पर खर्च होता है। यही नहीं GenZ ट्रैवलर्स साल में दो से तीन बार ट्रिप पर भी जाते हैं, जिनमें 94 प्रतिशत युवा साल में एक बार तो जरूर ही ट्रैवल करते हैं।

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रुपम
रुपम
रुपम के पास 20 साल से ज्यादा का पत्रकारिता का अनुभव है। जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा। जी न्यूज से टेलीविज़न न्यूज चैनल में कामकाज की शुरुआत। सहारा न्यूज नेटवर्क के प्रादेशिक और नेशनल चैनल में टेलीविज़न की बारीकियाँ सीखीं। सहारा प्रोग्रामिंग टीम का हिस्सा बनकर सोशल मुद्दों पर कई पुरस्कार प्राप्त डॉक्यूमेंट्री का निर्माण किया। एडिटरजी डिजिटल हिन्दी चैनल में न्यूज एडिटर के तौर पर काम किया।

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