Homeराजनीति'ओवैसी मुस्लिमों के ठेकेदार नहीं, 20 करोड़ मुस्लिमों की तरफ से 5 एकड़ जमीन...

‘ओवैसी मुस्लिमों के ठेकेदार नहीं, 20 करोड़ मुस्लिमों की तरफ से 5 एकड़ जमीन कैसे मना कर दिए?’

"20 करोड़ मुलिमों के ओवैसी ठेकेदार नहीं हैं। निजामी ने मुस्लिमों से 5 एकड़ ज़मीन स्वीकार कर उस पर एक मस्जिद और एक दोनों मज़हबों के छात्रों के लिए शिक्षा केन्द्र बनाने की बात की है।"

कॉन्ग्रेस नेता और कश्मीरी मुस्लिम सलमान निज़ामी ने अयोध्या फैसले में मुस्लिमों को बाबरी के एवज में मिली 5 एकड़ ज़मीन ख़ारिज कर कर देने के लिए अकबरुद्दीन ‘अच्छा वाला’ ओवैसी को आड़े हाथों लिया है। निज़ामी ने कहा कि 20 करोड़ मुलिमों के ओवैसी ठेकेदार नहीं हैं। उन्होंने मुस्लिमों से 5 एकड़ ज़मीन स्वीकार कर उस पर एक मस्जिद और एक दोनों मज़हबों के छात्रों के लिए शिक्षा केन्द्र बनाने की बात की है।

ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लमिन (एआईएमआईएम) के अध्यक्ष और हैदराबाद से सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने अदालत के फैसले को लेकर अपनी नाखुशी जाहिर की है। उन्होंने कहा कि वो इस फैसले से संतुष्ट नहीं हैं। उनका कहना है कि उन्हें खैरात में पाँच एकड़ जमीन नहीं चाहिए।

ओवैसी ने कहा, “मैं फैसले से खुश नहीं हूँ। सुप्रीम कोर्ट सुप्रीम (सर्वोच्च) जरूर है, लेकिन वह अचूक नहीं है। हमें संविधान पर पूरा भरोसा है। हम अपने अधिकार के लिए लड़ रहे थे। हमें दान के रूप में पाँच एकड़ की जमीन नहीं चाहिए। हमें इस 5 एकड़ भूमि के प्रस्ताव को अस्वीकार करना चाहिए, हमें संरक्षण नहीं चाहिए।”

असदुद्दीन ओवैसी ने कॉन्ग्रेस को निशाने पर लेते हुए कहा कि कॉन्ग्रेस पार्टी ने भी आज अपना असली रंग दिखा दिया। कॉन्ग्रेस पार्टी पाखंडी और धोखेबाजों की पार्टी है। उनका कहना है कि अगर 1949 में मूर्तियों को नहीं रखा गया होता और तत्‍कालीन प्रधानमंत्री राजीव गाँधी ने ताले नहीं खुलवाए होते तो मस्‍जिद अभी भी होती। वहीं नरसिम्‍हा राव ने अपने कर्तव्यों का निर्वहन किया होता तो मस्‍जिद अभी भी होती।

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

विवादों में ‘कॉकरोचों’ का 6 जून का प्रदर्शन, दिपके ने माना- ‘नहीं ली प्रोटेस्ट की परमिशन’: समझें- SC का फैसला, 7 दिन वाला नियम...

CJP के प्रस्तावित प्रदर्शन के बहाने समझिए जंतर-मंतर पर धरना देने की पूरी प्रक्रिया, दिल्ली पुलिस के नियम और सुप्रीम कोर्ट का रुख।

‘पहले मंदिर में नमाज पढ़ेंगे, फिर कहेंगे मस्जिद थी’: बुलंदशहर से भोजशाला तक, हिंदू पवित्र स्थलों पर दावों का कट्टरपंथियों का पैटर्न और लिबरल...

हिंदुओं के पवित्र स्थानों पर नमाज अदा करना भूल नहीं, सोची-समझी साजिश है। यदि कट्टरपंथियों का मन इतना ही साफ होता तो मंदिरों पर कब्जा नहीं करते।
- विज्ञापन -