Saturday, November 28, 2020
Home राजनीति 'वोटर को लिबरल वैल्यू की कद्र नहीं, इसलिए...' - कॉन्ग्रेसी सलमान खुर्शीद का बिहारियों...

‘वोटर को लिबरल वैल्यू की कद्र नहीं, इसलिए…’ – कॉन्ग्रेसी सलमान खुर्शीद का बिहारियों पर निशाना, पहले कहा गया गरीब-लालची

"अगर मतदाता का मूड उन लिबरल वैल्यू को स्वीकारने का नहीं है, जिनका हम समर्थन करते हैं या जिन्हें हम पोषित करते हैं तो हमें सत्ता में लौटने के लिए छोटे रास्तों पर फोकस करने की बजाए लंबा संघर्ष करना होगा।"

कॉन्ग्रेस नेता सलमान खुर्शीद ने बिहार में हुई पार्टी की हार का ठीकरा मतदाताओं के सिर पर फोड़ा है। अपने फेसबुक पोस्ट में खुर्शीद ने कहा है कि अगर मतदाता उदारवादी मूल्यों के प्रतिरोधी हैं तो फिर उन्हें (कॉन्ग्रेस) सत्ता में लौटने के लिए लंबे संघर्षों के लिए तैयार रहना चाहिए।

3600 करोड़ रुपए के अगस्ता वेस्टलैंड घोटाले में नाम सामने आने के बाद सलमान खुर्शीद ने बिहार की जनता पर आरोप लगाया है कि उन्हें उदारवादी मूल्यों की कदर नहीं है। उन्होंने अपने फेसबुक पोस्ट में लिखा, “अगर मतदाता का मूड उन लिबरल वैल्यू को स्वीकारने का नहीं है, जिनका हम समर्थन करते हैं या जिन्हें हम पोषित करते हैं तो हमें सत्ता में लौटने के लिए छोटे रास्तों पर फोकस करने की बजाए लंबा संघर्ष करना होगा।”

अपने पोस्ट में खुर्शीद ने आखिरी मुगल सम्राट की प्रशंसा की और साथ ही कपिल सिब्बल जैसे उन कॉन्ग्रेसी नेताओं पर भी अप्रत्यक्ष रूप से निशाना साधा, जो चुनाव के बाद से पार्टी नेतृत्व की आलोचना कर रहे हैं। उन्होंने अपने पोस्ट में कहा, 

 “जब हम अच्छा करते हैं तो निश्चित रूप से उसे बहुत हद तक बहुत आसान समझ लिया जाता है। मगर जब हम बुरा भी नहीं, बस थोड़ा कमजोर प्रदर्शन करते हैं, वह फौरन कमियाँ निकालने लगते हैं। ऐसा लगता है कि इससे भावी निराशाओं के लिए कम कमियाँ बचेंगी। क्या यह ऐसा मामला है, जहाँ एक खराब कर्मी अपना गुस्सा अपने उपकरणों पर निकाले?”

अपने पोस्ट में सलमान खुर्शीद ने पार्टी के साथियों को पार्टी की आलोचना करने से बचने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि ये बात और है कि उनकी (कॉन्ग्रेस) राजसी राजनीति के समेकन में किसी भी वजह की तरह, समय-समय पर पुन: मूल्यांकन और रणनीति व लॉजिस्टिक में पुन: लेखन की आवश्यकता है।

आत्मनिरीक्षण की जगह कॉन्ग्रेस लगा रही इल्जाम

उल्लेखनीय है कि कॉन्ग्रेस को जिस समय में चुनावों में अपनी हार को लेकर आत्मनिरीक्षण करना चाहिए, उस समय कॉन्ग्रेस अब भी बाहरी तत्वों को अपनी हार का कारण बता रही है। ऐसा लगता है जैसे विपक्षी पार्टियों के लिए यह एक नियम बन गया है कि वो चुनाव में हारने के बाद या तो ईवीएम को दोषी ठहराएँगे या फिर वोटर्स की समझ पर सवाल खड़े कर देंगे।

सब जानते हैं कि कॉन्ग्रेस ने सत्ता में लौटने के लिए महागठबंधन से हाथ मिलाया लेकिन तब भी यह युक्ति उन्हें जीत दिलाने में काम नहीं आई और उनके बेकार प्रदर्शन के कारण राजद सबसे ज्यादा सीटें लेने के बावजूद सत्ता से वंचित रही। इसी तरह गुजरात, मणिपुर, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के चुनाव में मिली हार में पार्टी के लिए चिंता का सबब थी। 

याद दिला दें कि कुछ समय पहले कॉन्ग्रेस के एक अन्य पदाधिकारी ने बिहारियों को गरीब और लालची करार दिया था क्योंकि उन्होंने पार्टी को वोट नहीं दिया था। वहीं कपिल सिब्बल ने यह स्वीकारा था कि अब लोग कॉन्ग्रेस को एक प्रभावशाली नेतृत्व के तौर पर नहीं देखते हैं।

एक इंटरव्यू में अपनी बात रखते हुए उन्होंने कहा कि बिहार चुनाव के अलावा कई उपचुनावों के नतीजों से यह स्फ्ष्ट है कि लोग कॉन्ग्रेस पार्टी को एक प्रभावी विकल्प नहीं मानते हैं। उन्होंने कहा कि यूपी के कुछ निर्वाचन क्षेत्रों में कॉन्ग्रेस के उम्मीदवारों को 2% से भी कम वोट डले। गुजरात में तो कॉन्ग्रेस के तीन उम्मीदवारों ने जमानत जब्त करवा दी।

  सहयोग करें  

एनडीटीवी हो या 'द वायर', इन्हें कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

कोरोना संक्रमण पर लगातार चेताते रहे, लेकिन दिल्ली सरकार ने कदम नहीं उठाए: सुप्रीम कोर्ट से केंद्र

दिल्ली में कोरोना क्यों बना काल? सुप्रीम कोर्ट को केंद्र सरकार ने बताया है कि रोकथाम के लिए केजरीवाल सरकार ने प्रभावी कदम नहीं उठाए।

क्या घुसपैठ करने वाले रोहिंग्या मुसलमानों को RAW में बहाल करने जा रही है भारत सरकार?

एक वायरल मैसेज में दावा किया जा रहा है कि सरकार रोहिंग्या मुसलमानों को रॉ में बहाल करने जा रही है। जानिए, क्या है इस दावे की सच्चाई?

‘नॉटी, दो टके के लोग’: कंगना पर फट पड़ीं मुंबई की मेयर, ऑफिस तोड़ने पर बॉम्बे हाईकोर्ट ने लगाई थी फटकार

मुंबई की मेयर किशोरी पेडनेकर ने कंगना रनौत के लिए 'नॉटी' का इस्तेमाल किया है। शिवसेना सांसद संजय राउत के लिए इस शब्द का अर्थ 'हरामखोर' है।

जहाँ ममता बनर्जी ने खोदी थी वामपंथ की कब्र, वहीं उनकी सियासत को दफनाने की तैयारी में शुभेंदु अधिकारी

सिंगूर और नंदीग्राम के आंदोलन से ममता बनर्जी को सत्ता मिली। अब नंदीग्राम के शुभेंदु अधिकारी के बागी तेवरों ने उन्हें मुश्किल में डाल दिया है।

कॉन्ग्रेस का कोढ़ है धर्मांतरण, रोकने को देर से बने कानून कितने दुरुस्त?

जिस विषय में संविधान निर्माताओं को 1949 से पता था, उस पर कानून बनाने में इतनी देर आखिर क्यों? नियम बनने शुरू भी हुए हैं तो क्या ये काफी हैं, या हमें बहुत देर से और बहुत थोड़ा देकर बहलाया जा रहा है?

FIR में अर्णब पर लगाए आरोप साबित नहीं कर पाई मुंबई पुलिस: SC ने बॉम्बे हाई कोर्ट को भी लगाई फटकार

सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए यह भी कहा कि आपराधिक कानून, उत्पीड़न का औजार नहीं बनना चाहिए, जमानत मानवता की अभिव्यक्ति है।

प्रचलित ख़बरें

‘उसे मत मारो, वही तो सबूत है’: हिंदुओं संजय गोविलकर का एहसान मानो वरना 26/11 तुम्हारे सिर डाला जाता

जब कसाब ने तुकाराम को गोलियों से छलनी कर दिया तो साथी पुलिसकर्मी आवेश में आ गए। वे कसाब को मार गिराना चाहते थे। लेकिन, इंस्पेक्टर गोविलकर ने ऐसा नहीं करने की सलाह दी। यदि गोविलकर ने उस दिन ऐसा नहीं किया होता तो दुनिया कसाब को समीर चौधरी के नाम से जानती।

फैक्टचेक: क्या आरफा खानम घंटे भर में फोटो वाली बकरी मार कर खा गई?

आरफा के पाँच बज कर दस मिनट वाले ट्वीट के साथ एक ट्वीट छः बज कर दस मिनट का था, जिसके स्क्रीनशॉट को कई लोगों ने एक दूसरे को व्हाट्सएप्प पर भेजना शुरु किया। किसी ने यह लिखा कि देखो जिस बकरी को सीने से चिपका कर फोटो खिंचा रही थी, घंटे भर में उसे मार कर खा गई।

हाथ में कलावा, समीर चौधरी नाम की ID: ‘हिंदू आतंकी’ की तरह मरना था कसाब को – पूर्व कमिश्नर ने खोला राज

"सभी 10 हमलावरों के पास फर्जी हिंदू नाम वाले आईकार्ड थे। कसाब को जिंदा रखना पहली प्राथमिकता थी। क्योंकि वो 26/11 मुंबई हमले का सबसे बड़ा और एकलौता सबूत था। उसे मारने के लिए ISI, लश्कर-ए-तैयबा और दाऊद इब्राहिम गैंग ने..."

‘कबीर असली अल्लाह, रामपाल अंतिम पैगंबर और मुस्लिम असल इस्लाम से अनजान’: फॉलोवरों के अजीब दावों से पटा सोशल मीडिया

साल 2006 में रामपाल के भक्तों और पुलिसकर्मियों के बीच हिंसक झड़प हुई थी जिसमें 5 महिलाओं और 1 बच्चे की मृत्यु हुई थी और लगभग 200 लोग घायल हुए थे। इसके बाद नवंबर 2014 में उसे गिरफ्तार किया गया था।

जहाँ बहाया था खून, वहीं की मिट्टी पर सर रगड़ बोला भारत माता की जय: मुर्दों को देख कसाब को आई थी उल्टी

पुलिस कमिश्नर राकेश मारिया सुबह साढ़े चार बजे कसाब से कहते हैं कि वो अपना माथा ज़मीन से लगाए... और उसने ऐसा ही किया। इसके बाद जब कसाब खड़ा हुआ तो मारिया ने कहा, “भारत माता की जय बोल” कसाब ने फिर ऐसा ही किया। मारिया दोबारा भारत माता की जय बोलने के लिए कहते हैं तो...

मैं नपुंसक नहीं.. हिंदुत्व का मतलब पूजा-पाठ या मंदिर का घंटा बजाना नहीं, फ़ोर्स किया तो हाथ धोकर पीछे पड़ जाऊँगा: उद्धव ठाकरे

साक्षत्कार में उद्धव ठाकरे ने कहा कि उन्हें विरोधियों के पीछे पड़ने को मजबूर ना किया जाए। इसके साथ ही ठाकरे ने कहा कि हिंदुत्व का मतलब मंदिर का घंटा बजाना नहीं है।

कोरोना संक्रमण पर लगातार चेताते रहे, लेकिन दिल्ली सरकार ने कदम नहीं उठाए: सुप्रीम कोर्ट से केंद्र

दिल्ली में कोरोना क्यों बना काल? सुप्रीम कोर्ट को केंद्र सरकार ने बताया है कि रोकथाम के लिए केजरीवाल सरकार ने प्रभावी कदम नहीं उठाए।

क्या घुसपैठ करने वाले रोहिंग्या मुसलमानों को RAW में बहाल करने जा रही है भारत सरकार?

एक वायरल मैसेज में दावा किया जा रहा है कि सरकार रोहिंग्या मुसलमानों को रॉ में बहाल करने जा रही है। जानिए, क्या है इस दावे की सच्चाई?

‘नॉटी, दो टके के लोग’: कंगना पर फट पड़ीं मुंबई की मेयर, ऑफिस तोड़ने पर बॉम्बे हाईकोर्ट ने लगाई थी फटकार

मुंबई की मेयर किशोरी पेडनेकर ने कंगना रनौत के लिए 'नॉटी' का इस्तेमाल किया है। शिवसेना सांसद संजय राउत के लिए इस शब्द का अर्थ 'हरामखोर' है।

गाजीपुर में सड़क पर पड़े मिले गायों के कटे सिर: लोगों का आरोप- पहले डेयरी फार्म से गायब होती हैं गायें, फिर काट कर...

गाजीपुर की सड़कों पर गायों के कटे हुए सिर मिलने के बाद स्थानीय लोग काफी गुस्से में हैं। उन्होंने पुलिस पर मिलीभगत का आरोप लगाया है।

बंगाल: ममता के MLA मिहिर गोस्वामी बीजेपी में शामिल, शनिवार को शुभेंदु अधिकारी के आने की अटकलें

TMC के असंतुष्ट विधायक मिहिर गोस्वामी बीजेपी में शामिल हो गए हैं। शुभेंदु अधिकारी के भी शनिवार को बीजेपी में शामिल होने की अटकलें लगाई जा रही है।

जहाँ ममता बनर्जी ने खोदी थी वामपंथ की कब्र, वहीं उनकी सियासत को दफनाने की तैयारी में शुभेंदु अधिकारी

सिंगूर और नंदीग्राम के आंदोलन से ममता बनर्जी को सत्ता मिली। अब नंदीग्राम के शुभेंदु अधिकारी के बागी तेवरों ने उन्हें मुश्किल में डाल दिया है।

गरीब कल्याण रोजगार अभियान: प्रवासी श्रमिकों को रोजगार देने में UP की योगी सरकार सबसे आगे

प्रवासी श्रमिकों को काम मुहैया कराने के लिए केंद्र सरकार ने गरीब कल्याण रोजगार अभियान शुरू किया था। उत्तर प्रदेश ने उल्लेखनीय प्रदर्शन किया है।

12वीं शताब्दी में विष्णुवर्धन के शासनकाल में बनी महाकाली की मूर्ति को मिला पुन: आकार, पिछले हफ्ते की गई थी खंडित

मंदिर में जब प्रतिमा को तोड़ा गया तब हालात देखकर ये अंदाजा लगाया गया था कि उपद्रवी मंदिर में छिपे खजाने की तलाश में आए थे और उन्होंने कम सुरक्षा व्यवस्था देखते हुए मूर्ति तोड़ डाली।

कॉन्ग्रेस का कोढ़ है धर्मांतरण, रोकने को देर से बने कानून कितने दुरुस्त?

जिस विषय में संविधान निर्माताओं को 1949 से पता था, उस पर कानून बनाने में इतनी देर आखिर क्यों? नियम बनने शुरू भी हुए हैं तो क्या ये काफी हैं, या हमें बहुत देर से और बहुत थोड़ा देकर बहलाया जा रहा है?

FIR में अर्णब पर लगाए आरोप साबित नहीं कर पाई मुंबई पुलिस: SC ने बॉम्बे हाई कोर्ट को भी लगाई फटकार

सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए यह भी कहा कि आपराधिक कानून, उत्पीड़न का औजार नहीं बनना चाहिए, जमानत मानवता की अभिव्यक्ति है।

हमसे जुड़ें

272,571FansLike
80,440FollowersFollow
358,000SubscribersSubscribe