Sunday, July 21, 2024
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‘सलाखों के पीछे होंगे केजरीवाल, कानून घसीट कर लाएगा नीचे’: दिल्ली BJP के नए अध्यक्ष ने बताई पार्टी की रणनीति, बोले – राहुल ने चुराया गाँधी सरनेम

"मैं कहना चाहता हूँ कि आप सावरकर बन भी नहीं सकते। उसके लिए त्याग, समर्पण और धैर्य चाहिए। देश के प्रति निष्ठा चाहिए, जो राहुल गाँधी और उनके परिवार में नहीं है। वीर सावरकर पर कुछ भी टिप्पणी करने से पहले राहुल गाँधी को खुद के परिवार की जन्मकुंडली देखनी चाहिए।"

दिल्ली में हाल ही में हुए MCD के चुनावों में भाजपा को 104 सीटें मिलीं, जबकि 134 सीटें जीत कर AAP ने अपना मेयर बनाया। भाजपा पिछले 25 वर्षों में दिल्ली की सत्ता से बाहर है, अब MCD में भी उसे हार का सामना करना पड़ा। ऐसे में पार्टी ने आदेश गुप्ता की छुट्टी कर के वीरेंद्र सचदेवा को कार्यकारी अध्यक्ष बनाया। अब उन्हें पूर्णकालिक अध्यक्ष की जिम्मेदारी दे दी गई है। ऑपइंडिया ने उनसे कई मुद्दों पर बातचीत की और जानने की कोशिश की कि दिल्ली में भाजपा अब कैसे आगे बढ़ेगी?

आप RSS से जुड़े रहे हैं और भाजपा में भी आपने जमीनी काम किया है। ऐसे में आप अपने शुरुआती राजनीतिक करियर के बारे में बताएँ।
संघ के विचार से तो मेरा पूरा परिवार जुड़ा हुआ है। मेरे पिताजी भी स्वयंसेवक रहे हैं। मैं भी स्वयंसेवक हूँ। मेरी जो पहली राजनीतिक जिम्मेदारी थी, वो मुझे 1989 में मिली थी। तब मुझे सीतारमैय्या मंडल में 78 नंबर समिति का अध्यक्ष बनाया गया था। लोकसभा का चुनाव आया, जो हम जीत नहीं पाए थे। लेकिन, मेरे काम को देखते हुए पार्टी ने मुझे जिम्मेदारी दी थी। उस समय जो यात्रा शुरू हुई, वो अब तक अनवरत जारी है। पार्टी जो काम देती है, वो मैं करता हूँ। मेरे लिए पद महत्वपूर्ण नहीं है, पार्टी कौन सा कार्य सौंप रही है ये महत्वपूर्ण है।

क्या आपको नहीं लगता कि इस बार पार्टी ने आपको काँटों का ताज पहना दिया है? भाजपा पिछले 25 वर्षों से दिल्ली की सत्ता से बाहर है, अब MCD भी पार्टी के हाथ में नहीं रही। ऐसे में आपको नहीं लगता कि मुश्किल समय में एक चुनौतीपूर्ण जिम्मेदारी आपको दी गई है?
सबसे पहली बात तो ये कि मैं इसे ताज नहीं मानता। हम सब कार्यकर्ता हैं और कार्यकर्ता को जो कार्य दिया जाता है वो करते हैं। आपने कहा कि MCD में हम चुनाव हारे हैं। 15 वर्ष हमने दिल्ली की सेवा की, कुछ कारण रहे होंगे कि हमारी सीटें कम हुईं। लेकिन, इस चुनाव में एक बात साफ़ कर दी कि भले ही दिल्ली में हम सरकार बनाने में कामयाब नहीं रहे लेकिन दिल्ली की जनता का दिल हमने जीता। हमारी विरोधी पार्टी हमें 30-40 पर खत्म कर रही थी, लेकिन हम आज 106 पर हैं और उनसे ज्यादा दूर नहीं हैं। इसीलिए मैं कहता हूँ कि कुछ कारण रहे हैं जिन पर हमने समीक्षा भी की है। हमें लगता है कि हमें और बेहतर परिणाम की उम्मीद थी। क्योंकि, 10 सीटें ऐसी थीं जिन पर हम 500 से भी कम वोटों से हारे हैं। 14 सीटें ऐसी हैं, जिन पर हम 500-1000 के बीच वोटों से हारे हैं। अगर ये 24 सीटें हमारे पक्ष में होतीं तो परिणाम कुछ और होता। मैं इस चुनाव को हारा हुआ नहीं मानता। परिणाम हमारे अनुकूल नहीं आए, लेकिन भाजपा की हार नहीं हुई।

जैसा कि भाजपा के संगठन के कामकाज का तरीका रहा है, MCD में सीटें कम होने के बाद इस पर मंथन तो हुआ होगा, समीक्षा हुई होगी। इसमें क्या कुछ सामने आया?
हमारे हर चुनाव के बाद, चाहे उसका परिणाम कुछ भी हो, पक्ष में हो या विपक्ष में हो – हम उसकी समीक्षा ज़रूर करते हैं। इन्हीं समीक्षा बिंदुओं के ऊपर हमारी रणनीति तैयार की जाती है और हम आगे का काम करते हैं।

हाल ही में दिल्ली के उप-मुख्यमंत्री शराब घोटाला में जेल गए। दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री रहे सत्येंद्र जैन भी मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों में जेल में हैं। इन मुद्दों को जनता तक ले जाने के लिए भाजपा क्या कर रही है?
देखिए, अगर आप थोड़ा पीछे जाएँगे तो पाएँगे कि भाजपा संगठन पिछले 1 साल से दिल्ली की शराब एवं आबकारी नीति के खिलाफ सड़क पर प्रदर्शन कर रहा है। इसी का परिणाम है कि दोनों भ्रष्टाचारी आज जेल में हैं। वरना, दिल्ली के ये जो फ्रॉड चीफ मिनिस्टर हैं, जिन्हें मैं नकली मुख्यमंत्री कहता हूँ, ये तो सत्येंद्र जैन को भारत रत्न देने की बात कर रहे थे। अब कहाँ हैं सत्येंद्र जैन? आप जिनके बारे में कह रहे हैं कि हम आरोप लगा रहे हैं, असल में वो आरोपित नहीं बल्कि दोषी हैं। तभी उन्हें जमानत नहीं मिली। मनीष सिसोदिया ने फीडबैक के मामले में भी भ्रष्टाचार किया है। हम दिल्ली की जनता की लड़ाई लड़ रहे हैं और आने वाले दिनों में आप देखेंगे कि अरविंद केजरीवाल भी सलाखों के पीछे होंगे। ये दिल्ली के पहले मुख्यमंत्री हैं, जिनके दो-दो मंत्री जेल में हैं। फीडबैक यूनिट की रिपोर्ट आप देख लीजिए, इनके जो स्पेशल एडवाइजर सिन्हा थे – उन्होंने बताया है कि उन्हें इंस्ट्रक्शंस मिले थे कि सारी रिपोर्ट्स अरविंद केजरीवाल को दी जाए। इसका मतलब है कि सारे निर्देश वहीं से आ रहे थे। शराब घोटाले में इसी अरविंद केजरीवाल के बारे में IAS अधिकारी ने बताया है कि उन्हें CM आवास बुला कर शराब नीति में क्या-क्या बदलाव करना है ये बताया गया, सीएम के सामने। अरविंद केजरीवाल अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकते। मनीष सिसोदिया का साथ देने के लिए उन्हें जाना होगा।

लेकिन, अरविंद केजरीवाल अपने पास कोई मंत्रालय रखते ही नहीं हैं, फाइलों पर उनके हस्ताक्षर होते नहीं। भाजपा इस चीज को कैसे देखती है?
अरविंद केजरीवाल को लगता है कि वो ये कह कर बच सकते हैं कि फाइलों पर उनके हस्ताक्षर नहीं हैं, लेकिन जिस मंत्रिपरिषद ने निर्णय लिया उसके मुखिया वही हैं। और, मुखिया होने के नाते वो जिम्मेदारियों से बच नहीं सकते। उन्हें ये जिम्मेदारी स्वीकार करनी पड़ेगी। अगर वो ऐसा नहीं करेंगे, तो भाजपा दिल्ली की जनता के साथ संघर्ष कर रही है और इसका परिणाम जल्द ही देखने को मिलेगा।

अरविंद केजरीवाल के मुकाबले दिल्ली भाजपा का चेहरा कौन है? वो अक्सर सुर्ख़ियों में रहते हैं, ऐसे में किसके नेतृत्व में भाजपा आगे बढ़ेगी? चेहरा कौन है? क्या आप ही पार्टी का चेहरा हैं?
मैंने व्यक्तव्य दे दिया है कि 2025 तक मैं कोई चुनाव नहीं लड़ूँगा। विधानसभा चुनाव 2025 में होने हैं। मेरा लक्ष्य है कि भाजपा को चुनाव जिता कर किसी भाजपा कार्यकर्ता को मुख्यमंत्री बनाना। भाजपा का हर कार्यकर्ता सीएम बनने में सक्षम है, यहाँ चेहरों की कमी नहीं है। जो नकली चेहरे हैं, जो नकाब ओढ़े चेहरे हैं, जो भ्रष्टाचार में डूबे चेहरे हैं, उनका नकाब हम हटाएँगे ये तय है। हमारे यहाँ सामूहिक नेतृत्व होता है। भाजपा का हर कार्यकर्ता मिल कर इस सरकार को उखाड़ फेंकेगा।

इन चर्चाओं के बीच आप कॉन्ग्रेस को कहाँ देखते हैं? हाल ही में राहुल गाँधी को 2 साल की सज़ा हुई, उनकी संसद सदस्यता खत्म हुई और अब उन्हें सरकारी आवास खाली करने को कह दिया गया है। आपको लगता है कि इसके खिलाफ आंदोलन खड़ा कर के कॉन्ग्रेस अपने लिए सहानुभूति लहर पैदा करेगी? क्या दिल्ली में कॉन्ग्रेस फिर से खड़ा हो जाएगी?
कॉन्ग्रेस का खड़ा होना या न होना, ये उनका विषय है। उस पर मैं टिप्पणी नहीं कर सकता। रही बात राहुल गाँधी को सज़ा होने की तो ये निर्णय कोर्ट ने दिया है, भाजपा ने इसमें कुछ नहीं किया है। रही बार घर खाली कराने की तो ये है तय प्रक्रिया है। अगर आप सांसद नहीं रहे तो आपको सरकारी सुविधाएँ छोड़नी पड़ेंगी। जहाँ तक बात माफ़ी की है, खुद गाँधी नाम उन्होंने चुराया हुआ है। उसे हम क्या उम्मीद कर सकते हैं। जहाँ तक उनका ये बयान है कि ‘मैं सावरकर नहीं हूँ’, इस पर मैं कहना चाहता हूँ कि आप सावरकर बन भी नहीं सकते। उसके लिए त्याग, समर्पण और धैर्य चाहिए। देश के प्रति निष्ठा चाहिए, जो राहुल गाँधी और उनके परिवार में नहीं है। वीर सावरकर पर कुछ भी टिप्पणी करने से पहले राहुल गाँधी को खुद के परिवार की जन्मकुंडली देखनी चाहिए। मैं कॉन्ग्रेस को शुभकामनाएँ देता हूँ कि वो अच्छा करे (इस सवाल पर कि उसका प्रदर्शन आगे कैसा रहेगा)।

दिल्ली की प्रदेश भाजपा में गुटबाजी को लेकर चचाएँ होती हैं और कहा जाता है कि सब किसी मुद्दे पर एक साथ नहीं आ पाते। इससे आप कैसे निपटेंगे?
मैं ये बताना चाहता हूँ कि भारतीय जनता पार्टी में सिर्फ एक ही गुट है और वो है हमारी विचारधारा का गुट। उस गुट में हम सभी शामिल हैं और हम सबका कार्य है कि हम उस विचारधारा पर चलें, जिसका नेतृत्व प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कर रहे हैं। गरीब कल्याण हमारा उद्देश्य है। दिल्ली में लोकसभा की सातों सीटें जीतना और इस भ्रष्ट AAP सरकार को उखाड़ फेंकना हमारा लक्ष्य है।

आप पंजाबी समुदाय से आते हैं। इससे पहले दिल्ली भाजपा का अध्यक्ष पद पूर्वांचल को जाता रहा है। आपके पास चुनौती है पंजाबियों और पूर्वांचलियों को एक साथ साधने की?
मुझे इस पर हैरानी होती है जब हम किसी व्यक्ति को जात-पात से जोड़ते हैं। इसमें मेरा क्या योगदान है, अगर मैं पंजाबी परिवार में पैदा हुआ? दिल्ली पूरे भारत का प्रतिनिधित्व करती है। ये ऐसा प्रदेश है, जहाँ देश का प्राण बसता है। यहाँ जितने भी लोग हैं, हम सब भाई हैं और मेरा कार्य है सभी को एक सूत्र में पिरो कर चलना। एक ही माला के मोती सब हैं – कोई पूर्वांचल का होगा, कोई पंजाबी होगा, कोई वैश्य होगा, कोई उत्तराखंड-हिमाचल से होगा – ये विषय नहीं है। हम सब मोती हैं और एक माला में पिरो कर इसे बनाना हमारा लक्ष्य हैं।

आपने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पार्टी का चेहरा हैं, AAP अब सीधे उन पर हमला कर रही है। उन पर पोस्टर लगाए जा रहे हैं, कई भाषाओं में। इस पर FIR भी हुए। AAP की इस रणनीति को आप कैसे देखते हैं?
जिसे आप रणनीति बता रहे हैं, उसे मैं कमजोरी कहता हूँ। आपने जिस पोस्टर की बात की, दिल्ली में या पूरे भारत में पोस्टर लगाने की कोई पाबंदी नहीं है लेकिन आपको कानून का पालन करना पड़ेगा। दिल्ली के कानून के हिसाब से ये प्रावधान है कि पोस्टर पर अपना नाम, प्रिंटर का नाम और पता लिखा होना चाहिए। जिन पोस्टरों पर FIR दर्ज हुई है, उनमें इस कानून का उल्लंघन किया गया था। AAP पर पोस्टर के मामले पर नहीं, कानून के उल्लंघन पर मामला दर्ज हुआ। अरविंद केजरीवाल की मैं मानसिकता बताता हूँ, ये बड़े अच्छे भविष्यवक्ता हैं। इन्हें पता था कि सत्येंद्र जैन जेल जाने वाले हैं, उन्होंने सत्येंद्र जैन को भारत रत्न देने की माँग करते हुए पूरे मीडिया में माहौल बनाया। इन्हें पता था मनीष सिसोदिया जेल जाने वाले हैं, तो इन्होंने सिसोदिया को शिक्षा क्रांति का श्रेय देते हुए पद्मश्री देने की माँग की। आज मनीष सिसोदिया धार्मिक किताबें पढ़ रहे हैं। अरविंद केजरीवाल को भी पता है कि उन्हें कहाँ जाना है, इसीलिए वो सीधा-सीधा प्रधानमंत्री पर हमला कर रहे हैं। कल जब कानून अपना काम करेगा और अरविंद केजरीवाल को घसीट कर नीचे लाएगा, तब वो ये आरोप लगा सकें कि उन्होंने प्रधानमंत्री पर टिप्पणी की थी इसीलिए ऐसा किया गया – इसके लिए वो ग्राउंड तैयार कर रहे हैं। लेकिन, दिल्ली की जनता जानती है कि अरविंद केजरीवाल को अपना हश्र मालूम है।

भाजपा हमेशा से हिंदुत्व की पक्षधर रही है। आजकल खबरें चल रही हैं कि पार्टी मुस्लिमों के बीच अपनी पैठ बना रही है, खासकर पसमांदा समाज में। क्या इसके लिए कोई रणनीति बनी हुई है?
एक तो हिन्दू शब्द की अवधारणा समझने की ज़रूरत है। हिंदुस्तान में रहने वाला हर व्यक्ति हिन्दू है। उसका धर्म क्या है, ये विषय नहीं है। जहाँ तक बात है मुस्लिम समाज की, प्रधानमंत्री का एक ही मत है – सबका साथ, सबका विकास, सबका प्रयास। जब हम सबके साथ की बात करते हैं तो इसमें हिन्दू-मुस्लिम-सिख-ईसाई सब शामिल हैं। प्रधानमंत्री ने पसमांदा या बोहरा समाज की बात की, उससे उनका अभिप्राय समाज के हर उस वर्ग से है जो उपेक्षित है। वो मुस्लिम समाज में भी हो सकता है, हिन्दू या इसे में भी हो सकता है। सबको साथ लेकर उनका उत्थान करना हमारा लक्ष्य है। जो भी हमारे साथ जुड़ेगा, उनका स्वगात है। अगर आप दिल्ली नगर निगम के पिछले चुनाव के आँकड़े देखें, तो जिस मुस्लिम समाज को भाजपा के लिए अछूत माना जाता है, 70,000 से ज्यादा वोट हमें मुस्लिम समाज से मिला है। ये पहले के मुकाबले सुधार है और आगे और बढ़ेगा।

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अनुपम कुमार सिंह
अनुपम कुमार सिंहhttp://anupamkrsin.wordpress.com
भारत की सनातन परंपरा के पुनर्जागरण के अभियान में 'गिलहरी योगदान' दे रहा एक छोटा सा सिपाही, जिसे भारतीय इतिहास, संस्कृति, राजनीति और सिनेमा की समझ है। पढ़ाई कम्प्यूटर साइंस से हुई, लेकिन यात्रा मीडिया की चल रही है। अपने लेखों के जरिए समसामयिक विषयों के विश्लेषण के साथ-साथ वो चीजें आपके समक्ष लाने का प्रयास करता हूँ, जिन पर मुख्यधारा की मीडिया का एक बड़ा वर्ग पर्दा डालने की कोशिश में लगा रहता है।

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