Tuesday, August 3, 2021
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हिंदुत्व की शुरुआत 5000 साल पहले, अधिकांश धर्मों के अनुयायी हिंदुओं के वंशज: असम के CM हिमंत बिस्व सरमा

‘‘हिंदुत्व को ‘हटाया’ नहीं जा सकता, क्योंकि इसका मतलब होगा अपनी जड़ों और मातृभूमि से दूर जाना। हिंदुत्व जीवन का एक तरीका है।’’

असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने शनिवार (जुलाई 10, 2021) को कहा कि हिंदुत्व जीवन का एक तरीका है। उन्होंने दावा किया कि अधिकतर धर्मों के अनुयायी हिंदुओं के वंशज हैं। CM सरमा ने राज्य में उनकी सरकार के दूसरे महीने के पूरा होने के मौके पर आयोजित संवाददाता सम्मेलन में कहा कि हिंदुत्व की शुरुआत 5,000 साल पहले हुई थी और इसे रोका नहीं जा सकता। उन्होंने कहा, हिंदुत्व जीवन का एक तरीका है। मैं या कोई इसे कैसे रोक सकता है? लगभग हम सभी हिंदुओं के वंशज हैं।

सीएम के मुताबिक, ‘‘हिंदुत्व को ‘हटाया’ नहीं जा सकता, क्योंकि इसका मतलब होगा अपनी जड़ों और मातृभूमि से दूर जाना।’’ आगे ‘लव जिहाद’ के मुद्दे के बारे में पूछे जाने पर मुख्यमंत्री बोले, “मुझे इस शब्द को लेकर आपत्ति है।” हालाँकि, उन्होंने कहा कि किसी को भी महिला को धोखा देने की अनुमति नहीं दी जाएगी। उन्होंने कहा, ‘‘सरकार किसी भी महिला को किसी के द्वारा धोखा दिए जाने को बर्दाश्त नहीं करेगी। हमारी बहनों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ऐसे अपराधियों के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाएगी।’’

पड़ोसी राज्यों के साथ सीमा तनाव पर सरमा ने कहा, “असम-नागालैंड और असम-मिजोरम दोनों सीमाओं पर कुछ तनाव चल रहा है। हमारी संवैधानिक सीमा की रक्षा के लिए असम पुलिस को तैनात किया गया है। पूर्वोत्तर का प्रवेश द्वार होने के नाते, हम हमेशा चर्चा के लिए तैयार रहते हैं लेकिन अपनी जमीन पर अतिक्रमण मंजूर नहीं है।”

इससे पहले शनिवार को असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने राज्य मंत्रिमंडल में विभागों में फेरबदल किया। सरमा ने कहा कि राज्य में स्वदेशी आस्था और संस्कृति का एक नया स्वतंत्र विभाग होगा। वहीं मीडिया से बात करते हुए उन्होंने साफ किया कि सरकार ‘दो बच्चों की नीति’ को चरणबद्ध तरीके से लागू करेगी और राज्य सरकार की योजनाओं का लाभ लेने में इसे लागू किया जाएगा।

उन्होंने कहा, “हम सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने के लिए धीरे-धीरे दो बच्चों की नीति अपनाएँगे। आप इसे एक घोषणा मान सकते हैं। ऋण माफी हो या अन्य सरकारी योजनाएँ, जनसंख्या मानदंडों को ध्यान में रखा जाएगा। यह चाय बागान श्रमिकों/एससी-एसटी समुदाय पर लागू नहीं होगी। भविष्य में, जनसंख्या मानदंडों को सरकारी लाभों के लिए पात्रता के रूप में शामिल किया जाएगा। जनसंख्या नीति शुरू हो गई है। स्कूलों और कालेजों में मुफ्त नामांकन या प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत मकान देने में इसे लागू नहीं किया जा सकता।”

मुख्यमंत्री ने जनसंख्या नियंत्रण कानून को समय की आवश्यकता बताते हुए आठ अलग-अलग समितियों का गठन किया है। यह समितियाँ स्वास्थ्य, शिक्षा, जनसंख्या नियंत्रण, सांस्कृतिक पहचान, वित्तीय समावेशन, महिला सशक्तिकरण और कौशल विकास के मुद्दों से जुड़ी हुई हैं।

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ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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