Homeराजनीतिदिग्विजय सिंह की हार के बाद पूर्व सरपंच को होना पड़ा टकला: भारी पड़ा...

दिग्विजय सिंह की हार के बाद पूर्व सरपंच को होना पड़ा टकला: भारी पड़ा कॉन्ग्रेस नेता की जीत को लेकर शर्त लगाना, पूरे गाँव के सामने मुँडवाने पड़े बाल

दिग्विजय सिंह को लेकर उनके समर्थक एकदम आश्वस्त नज़र आ रहे थे कि उनकी जीत होनी है। बैलास पंचायत के पूर्व सरपंच करण सिंह पँवार ने तो शर्त तक लगा ली थी।

लोकसभा चुनाव 2024 में मध्य प्रदेश में कॉन्ग्रेस की दुर्गति हुई है। भाजपा ने यहाँ क्लीन स्वीप किया और 29 में से 29 सीटें अपने नाम की। यहाँ तक कि जो छिंदवाड़ा पिछले 5 दशक से कमलनाथ का गढ़ बना हुआ था, वहाँ भी कॉन्ग्रेस को हार मिली। वहीं राजगढ़ से कॉन्ग्रेस के लोकसभा उम्मीदवार दिग्विजय सिंह भी हार गए। दिग्विजय सिंह 10 वर्षों तक राज्य के CM रहे हैं। रोचक खबर ये है कि दिग्विजय सिंह की हार के कारण एक सरपंच को मुंडन कराना पड़ा।

राजगढ़ से दिग्विजय सिंह को 6.12 लाख वोट मिले, वहीं उनके प्रतिद्वंद्वी भाजपा के रोडमल नागर को 7.58 लाख मत प्राप्त हुए। इस तरह से दिग्विजय सिंह को 1.46 लाख वोटों के अंतर से हार मिली। रोडमल नागर लगातार तीसरी बार सांसद बने हैं, उन्होंने जीत की हैट्रिक लगाई है। दिग्विजय सिंह को लेकर उनके समर्थक एकदम आश्वस्त नज़र आ रहे थे कि उनकी जीत होनी है। बैलास पंचायत के पूर्व सरपंच करण सिंह पँवार ने तो शर्त तक लगा ली थी।

पँवार ने शर्त लगाई थी कि दिग्विजय सिंह सिंह अगर चुनाव है गए तो वो अपने सिर का मुंडन करा लेंगे। वहीं जिससे उन्होंने शर्त लगाई थी, उस ग्रामीण ने कहा था कि अगर रोडमल नागर की हार हो जाती है तो वो हमेशा के लिए गाँव छोड़ कर चला जाएगा। सब पूर्व सरपंच को हार के बाद पूरे गाँव के सामने अपना सिर मुँड़वाना पड़ा। माता मंदिर पर उनके मुंडन करने का वीडियो सोशल मीडिया में भी मजाकिया चर्चा का विषय बन रहा है।

जहाँ एक तरफ उत्तर प्रदेश में भाजपा 62 से सीधे 33 पर आ गई, वहीं मध्य प्रदेश ने उसकी लाज रखते हुए पूरी सीटें भगवा पार्टी की झोली में डाल दी। वहीं मध्य प्रदेश में एकमात्र सीट छिंदवाड़ा 2019 के लोकसभा सीट में कॉन्ग्रेस के खाते में गई थी, अबकी उनका गढ़ भी ढह गया। ग्वालियर से ज्योतिरादित्य सिंधिया और विदिशा से शिवराज सिंह चौहान केंद्रीय मंत्री भी बनने जा रहे हैं। वहीं इंदौर से शंकर लालवानी ने ने 10 लाख से भी अधिक वोटों से जीत दर्ज की।

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

मैन्युफैक्चरिंग से सॉफ्ट पावर तक… क्या है ‘शक्ति की सप्तधारा’? PM मोदी ने लाल किले से दिया विकसित भारत का नया विजन, जानें- 7...

‘शक्ति की सप्तधारा’ क्या है? PM मोदी के इस विजन में भारत की मैन्युफैक्चरिंग, खेती, AI, 6G, रक्षा, ग्रीन इकॉनमी और सॉफ्ट पावर को लेकर क्या लक्ष्य हैं, समझिए।

भारत में नदी जोड़ो परियोजना का भविष्य Part III: दुनिया में किन देशों ने सफलतापूर्वक किया रिवर लिंक प्रोजेक्ट का इस्तेमाल

भारत की नदी जोड़ो महा-योजना के तहत पूरे देश में कुल 30 अंतर-बेसिन जल स्थानांतरण (Inter-basin Water Transfer) लिंक प्रस्तावित किए गए हैं।
- विज्ञापन -