HomeराजनीतिCAA पर कॉन्ग्रेस में फूट, मुस्लिमों को गुमराह करने का आरोप लगा 4 बड़े...

CAA पर कॉन्ग्रेस में फूट, मुस्लिमों को गुमराह करने का आरोप लगा 4 बड़े नेताओं ने दिया इस्तीफा

पार्टी छोड़ने वाले नेताओं का कहना है कि विपक्ष में होने का मतलब यह नहीं होता कि सरकार के हर काम का विरोध किया जाना चाहिए। नागरिकता संशोधन कानून का स्वागत किया जाना चाहिए।

नागरिकता संशोधन कानून (CAA) और राष्ट्रीय नागरिक पंजी (NRC) को लेकर कॉन्ग्रेस के भीतर का मतभेद भी सामने आने लगा है। पार्टी स्टैंड के विरोध में गोवा के चार नेताओं ने इस्तीफा दे दिया है। इन्होंने पार्टी पर अल्पसंख्यकों खासकर, समुदाय विशेष को बरगलाने का आरोप लगाया है।

इस्तीफा देने वाले नेताओं में पणजी कॉन्ग्रेस ब्लॉक समिति के अध्यक्ष प्रसाद अमोनकर, उत्तर गोवा अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ प्रमुख जावेद शेख, ब्लॉक समिति सचिव दिनेश कुबल और नेता शिवराज तारकर शामिल हैं। पार्टी से इस्तीफा देने के बाद इन्होंने कहा कि वे सीएए का समर्थन करते हैं।

पत्रकारों से बात करते हुए अमोनकर ने कॉन्ग्रेस पर आरोप लगाया कि पार्टी नागरिकता कानून पर जनता को, खासकर समुदाय विशेष को बरगलाने का काम कर रही हैं। वे सीएए और एनआरसी पर पार्टी के गलत रुख का विरोध करते हैं। उन्होंने कहा कि विपक्ष में होने का मतलब यह नहीं होता कि सरकार के हर काम का विरोध किया जाना चाहिए। नागरिकता संशोधन कानून का स्वागत किया जाना चाहिए।

अमोनकर के अनुसार कॉन्ग्रेस को लोगों को बरगलाना और राजनैतिक फायदा पाने के लिए अल्पसंख्यकों के मन में डर भरने का काम बंद कर देना चाहिए।

कॉन्ग्रेस नेता ने बताया कि पिछले हफ्ते नागरिकता संशोधन कानून और एनआरसी के ख़िलाफ़ गोवा में आयोजित कार्यक्रम का वे सभी हिस्सा थे। लेकिन, वहाँ उन्होंने नेताओं के भाषण सुनकर महसूस किया कि वे अल्पसंख्यकों के दिमाग में डर भरना चाहते हैं। यह सरासर गलत है।

उनके अनुसार, गोवा एक शांतिपूर्ण राज्य है और कॉन्ग्रेस यहाँ अल्पसंख्यकों को भड़काने का प्रयास कर रही है। सरकार ने नागरिकता कानून को संवैधानिक प्रक्रिया के बाद पास किया है और वे केवल उन शरणार्थियों को नागरिकता देने का प्रयास कर रही है, जिनका सदियों से भारतीय संस्कृति से संबंध रहा है।

अमोनकर ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि सीएए में पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश के अल्पसंख्यकों को नागरिकता देने की बात है। बावजूद इसके, इन देशों के बहुसंख्यक आबादी भी भारतीय नागरिकता के लिए अप्लाई कर सकती है। इसके लिए काफी लंबे समय से प्रावधान है।

गौरतलब है कि कॉन्ग्रेस अलग-अलग राज्यों में अपनी राजनीति साधने के लिए मोदी सरकार द्वारा लाए नए कानून को असंवैधानिक करार दे रही हैं। साथ ही विरोध-प्रदर्शनों में शामिल होकर इसके प्रति जनता तो भड़काने का काम कर रही है। दिल्ली सहित कई जगहों पर हिंसा में उसके नेता नामजद भी हुए हैं।

…16 साल पुराना मनमोहन सिंह का वो वीडियो, CAA पर भ्रम फैलाने से पहले कॉन्ग्रेस को देखना चाहिए

CAA पर नेहरू का हवाला कॉन्ग्रेस को नहीं आया रास, केरल के गवर्नर को न्योता देकर कहा- अब मत आना

CAA: दंगाइयों के आकाओं को जनरल रावत ने फटकारा, CPI व कॉन्ग्रेस ने बताया असंवैधानिक बयान

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

हमें पितृसत्ता की अधूरी कहानी क्यों सुनाई गई? Patriarchy? Think Again

भारत की शुरुआती वैदिक सभ्यता में महिलाओं का समाज में बहुत सम्मानजनक स्थान था, जहाँ उन्हें शिक्षा और धार्मिक अनुष्ठानों का पूरा अधिकार था। वैदिक साहित्य में गार्गी और मैत्रेयी जैसी महिलाओं के उदाहरण मिलते हैं, जो दार्शनिक चर्चाओं और बौद्धिक विमर्श में सक्रिय थीं।

संभल की डेमोग्राफी: हिंदू 13 हजार से हुए 47 हजार, मुस्लिम 23 हजार से हो गए 1 लाख 71 हजार – मुस्लिम भीड़ की...

2011 की जनगणना के अनुसार संभल शहर की डेमोग्राफी 77.67% मुस्लिम आबादी जबकि हिंदू आबादी सिर्फ 22% वाली बताई गई है। वर्तमान में मुस्लिम 80% तक।
- विज्ञापन -