भोपाल से प्रज्ञा ठाकुर ने नामांकन लिया वापस, भाजपा ने ली राहत की साँस

अभी भी वहाँ वोट काटने के लिए एक और प्रत्याशी मौजूद है, शहीद हेमंत करकरे पर दिए बयान से नाराज़ उनके जूनियर रहे रियाजुद्दीन ने भी भोपाल से नामांकन भरा है। मूल रूप से महाराष्ट्र के औरंगाबाद के रहने वाले रियाजुद्दीन ने भोपाल से लोकसभा चुनाव लड़ने के लिए नामांकन पत्र दाखिल किया है।

मध्य प्रदेश की भोपाल लोकसभा सीट से प्रज्ञा ठाकुर ने अपना नामांकन वापस ले लिया है, लेकिन ये बीजेपी प्रत्याशी साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर नहीं बल्कि निर्दलीय प्रत्याशी प्रज्ञा ठाकुर हैं। बता दें कि प्रज्ञा ठाकुर ने भोपाल लोकसभा सीट से साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर के समर्थन में अपना नामांकन वापस ले लिया है।

दरअसल, भोपाल लोकसभा सीट से बीजेपी ने साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर को अपना प्रत्याशी घोषित किया है। जो दिग्विजय सिंह के खिलाफ मुख्य प्रतिद्वंदी हैं। इसी सीट पर उनकी हमनाम प्रज्ञा ठाकुर ने भी नामांकन पत्र दाखिल किया था। एक ही नाम होने से बीजेपी को इस बात की आशंका थी कि मतदाता कहीं किसी गफलत में आकर साध्वी प्रज्ञा ठाकुर की बजाय प्रज्ञा ठाकुर के नाम के आगे वाला बटन ना दबा दें। जिससे वोट बँट जाएगा, इसलिए बीजेपी ने प्रज्ञा ठाकुर से आग्रह किया कि अपना नाम वापस ले लें।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, ऐसा करने के लिए साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर ने खुद प्रज्ञा ठाकुर को मनाने के लिए अपने घर बुलाया। मुलाकात के बाद साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर ने उनसे चुनाव न लड़ने की अपील की। जिसके बाद प्रज्ञा ठाकुर ने चुनाव ना लड़ने का फैसला किया। इसके बाद साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर ने प्रज्ञा ठाकुर के घर पहुँचकर उन्हें भगवा शॉल भेंट करके उनका सम्मान भी किया। कुछ भी हो, प्रज्ञा ठाकुर के चुनाव ना लड़ने के ऐलान के बाद अब बीजेपी और साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर ने राहत की साँस ली है।

- विज्ञापन - - लेख आगे पढ़ें -

अभी भी वहाँ वोट काटने के लिए एक और प्रत्याशी मौजूद है, शहीद हेमंत करकरे पर दिए बयान से नाराज़ उनके जूनियर रहे रियाजुद्दीन ने भी भोपाल से नामांकन भरा है। मूल रूप से महाराष्ट्र के औरंगाबाद के रहने वाले रियाजुद्दीन ने भोपाल से लोकसभा चुनाव लड़ने के लिए नामांकन पत्र दाखिल किया है। हालाँकि, अभी तक उन्होंने अपना नामांकन वापस नहीं लिया, लेकिन बीजेपी के वो उतने बड़े मुश्किल नहीं हैं।

शेयर करें, मदद करें:
Support OpIndia by making a monetary contribution

बड़ी ख़बर

शाहीन बाग़, शरजील इमाम
वे जितने ज्यादा जोर से 'इंकलाब ज़िंदाबाद' बोलेंगे, वामपंथी मीडिया उतना ही ज्यादा द्रवित होगा। कोई रवीश कुमार टीवी स्टूडियो में बैठ कर कहेगा- "क्या तिरंगा हाथ में लेकर राष्ट्रगान गाने वाले और संविधान का पाठ करने वाले देश के टुकड़े-टुकड़े गैंग के सदस्य हो सकते हैं? नहीं न।"

सबसे ज़्यादा पढ़ी गईं ख़बरें

ताज़ा ख़बरें

हमसे जुड़ें

144,546फैंसलाइक करें
36,423फॉलोवर्सफॉलो करें
164,000सब्सक्राइबर्ससब्सक्राइब करें

ज़रूर पढ़ें

Advertisements
शेयर करें, मदद करें: