Monday, September 26, 2022
Homeराजनीतिदेश को मिला पहला लोकपाल, चुनाव से पहले विपक्ष का एक और मुद्दा ख़त्म

देश को मिला पहला लोकपाल, चुनाव से पहले विपक्ष का एक और मुद्दा ख़त्म

लोकसभा में विपक्ष के नेता और कॉन्ग्रेस पार्टी के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे भी चयन समिति का हिस्सा थे, लेकिन वह चयन प्रक्रिया में शामिल नहीं हुए थे।

देश को पहला लोकपाल मिल गया है। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज जस्टिस पिनाकी चंद्र घोष (Pinaki Chandra Ghose) को देश का पहला लोकपाल नियुक्त किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई, लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन, प्रख्यात कानूनविद मुकुल रोहतगी की चयन समिति ने शुक्रवार (मार्च 15, 2019) को उनके नाम की सिफारिश की थी।

लोकसभा में विपक्ष के नेता और कॉन्ग्रेस पार्टी के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे भी चयन समिति का हिस्सा थे, लेकिन वह चयन प्रक्रिया में शामिल नहीं हुए थे। इस कमेटी में एक चेयरमैन, एक न्यायिक सदस्य और एक गैर न्यायिक सदस्य होते हैं।

भारत के राष्ट्रपति न्यायमूर्ति ने दिलीप बी भोसले, न्यायमूर्ति पी के मोहंती, न्यायमूर्ति अभिलाषा कुमारी और न्यायमूर्ति एके त्रिपाठी को न्यायिक सदस्य नियुक्त किया गया है। इसके अलावा गैर न्यायिक सदस्यों में दिनेश कुमार जैन, अर्चना रामासुंदरम, महेन्द्र सिंह, और डॉ. आईपी गौतम को सदस्य नियुक्त किया गया। अधिसूचना के मुताबिक प्रभार लेने के साथ ही इन सदस्यों की नियुक्ति प्रभावी मानी जाएगी।

परिचय: पीसी घोष

पिनाकी चंद्र घोष का जन्म मई 28, 1952 को हुआ था और वह जस्टिस शंभू चंद्र घोष के बेटे हैं। वह सुप्रीम कोर्ट के जज रह चुके हैं और कई राज्य के मुख्य न्यायाधीश रह चुके हैं। वर्तमान में पीसी घोष, मानवाधिकार आयोग के सदस्य हैं। उन्होंने सेंट जेवियर्स कॉलेज से बीकॉम और कोलकाता यूनिवर्सिटी से LLB की पढ़ाई की है। घोष साल 1997 में कलकत्ता हाईकोर्ट के जज बने और उसके बाद दिसंबर 2012 में उन्होंने आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश बने। मई 2017 में घोष सुप्रीम कोर्ट से रिटायर हुए थे और वह 2013 से 2017 तक सुप्रीम कोर्ट के जज रहे। पीसी घोष तमिलनाडु की पूर्व मुख्यमंत्री जयललिता की सहयोगी रहीं शशिकला को आय से अधिक मामले में दोषी ठहरा चुके हैं।

देश के पहले लोकपाल की नियुक्ति लोकपाल अधिनियम-2013 के पारित होने के 5 साल बाद की गई है। देश के पहले लोकपाल के साथ ही कॉन्ग्रेस और तमाम विपक्षी दलों को अब फिलहाल आम चुनाव तक, इस मुद्दे पर बिना किसी आरोप के ही चुनाव लड़ना पड़ेगा। लोकपाल का मुद्दा एक अहम मुद्दा था जिसे विपक्ष भ्रष्टाचार से जोड़कर सरकार को घेरती थी। आज़ादी के बाद पीसी घोष इस देश के पहले लोकपाल हैं, जिन्हें मोदी सरकार ने अपने कार्यकाल रहते नियुक्त कर लिया है।


  सहयोग करें  

एनडीटीवी हो या 'द वायर', इन्हें कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

‘भारत माता की जय’ नारे के साथ गुलाम नबी ने बनाई नई पार्टी, ‘डेमोक्रेटिक आज़ाद पार्टी’ रखा नाम: कहा- वापस नहीं आ सकता अनुच्छेद-370

कॉन्ग्रेस से अलग होने वाले गुलाम नबी आजाद ने अपनी नई राजनीतिक पार्टी के नाम का ऐलान कर दिया है। इसका नाम डेमोक्रेटिक आजाद पार्टी है।

‘दुपट्टा तक सिर पर नहीं है, पाकिस्तान को लूटकर खा गई’ : लंदन में PAK मंत्री मरियम के पीछे पड़ी भीड़, लगे- ‘चोरनी-चोरनी’ के...

एक महिला कहती है, "ये मरियम औरंगजेब है, जो टीवी पर बैठ कर बड़े-बड़े दावे करती है, लेकिन इसके सिर पर दुपट्टा नहीं है। ये चोरों की सरदारनी है।"

प्रचलित ख़बरें

- विज्ञापन -

हमसे जुड़ें

295,307FansLike
224,319FollowersFollow
416,000SubscribersSubscribe