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केरल में सिरो मालाबार चर्च ने कॉन्ग्रेस को दिया सख्त निर्देश, कहा- उनके परामर्श के बिना नहीं तय होंगे उम्मीदवार

मेट्रोपॉलिटन आर्कबिशप ने निर्देश दिया है कि अल्पसंख्यक बहुल क्षेत्रों में अपने उम्मीदवारों का चयन करने से पहले कॉन्ग्रेस को अल्पसंख्यकों से परामर्श करना चाहिए। यह भी कहा कि पार्टी को राज्य में ईसाई क्षेत्रों के लिए उम्मीदवार तय करने से पहले चर्च से परामर्श करना चाहिए।

केरल विधानसभा चुनाव मई 2021 में होने वाला है। देश के लगभग सभी राज्यों में शर्मनाक हार झेल चुके कॉन्ग्रेस पार्टी के लिए यह चुनाव बेहद महत्वपूर्ण है। वहीं अब चुनाव को मद्देनजर रखते हुए केरल के सिरो मालाबार चर्च ने कॉन्ग्रेस पार्टी को एक सख्त निर्देश जारी किया है।

दरअसल, चंगनास्सेरी आर्कबिशप मार जोसेफ पेरुमोत्तम (Changanassery Archbishop Mar Joseph Perumthottam) ने चर्च के परामर्श के बिना आगामी विधानसभा चुनाव के लिए पार्टी उम्मीदवारों को तय करने के खिलाफ कॉन्ग्रेस पार्टी को चेतावनी दी है।

मेट्रोपॉलिटन आर्कबिशप ने निर्देश दिया है कि अल्पसंख्यक बहुल क्षेत्रों में अपने उम्मीदवारों का चयन करने से पहले कॉन्ग्रेस को अल्पसंख्यकों से परामर्श करना चाहिए। यह भी कहा कि पार्टी को राज्य में ईसाई क्षेत्रों के लिए उम्मीदवार तय करने से पहले चर्च से परामर्श करना चाहिए।

चर्च के आधिकारिक मुखपत्र दीपिका के एक संपादकीय में, मार जोसफ पेरुमोत्तम ने कहा कि कॉन्ग्रेस को समुदाय के बाहर के उम्मीदवारों को मैदान में नहीं उतारना चाहिए। संपादकीय के एक हिस्से में कहा गया है कि 1951 में, जवाहरलाल नेहरू ने पीसीसी अध्यक्षों को एक समान निर्देश जारी किया था।

आर्कबिशप ने लिखा कि उम्मीदवार केवल वही होने चाहिए जिन्होंने उस क्षेत्र में अल्पसंख्यकों का विश्वास जीता है जहाँ से उन्हें मैदान में उतारा जा रहा है। इसमें कहा गया है कि बाहरी लोग, जो विश्वास या जन्म से समुदाय के नहीं हैं, को अल्पसंख्यक ईसाई निर्वाचन क्षेत्रों में उम्मीदवार के रूप में नहीं उतारा जाना चाहिए।

गौरतलब है कि 2021 के केरल विधानसभा को मद्देनजर रखते हुए चुनावी भागदौड़ का समय है। जो लोग केरल की जनसांख्यिकी और राजनीति से परिचित हैं, उन्हें पता होगा कि राजनीतिक रूप से, केरल बाई पोलर रहा है, विधानसभा चुनावों में सीपीआई (एम) के नेतृत्व वाले वाम लोकतांत्रिक मोर्चा और कॉन्ग्रेस के नेतृत्व वाले यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट के बीच सत्ता बारी-बारी से आई है।

बता दें, कॉन्ग्रेस और मुस्लिम लीग सहित पिछले तीन दशकों से यूडीएफ अपने घटते प्रदर्शन से गुजर रहा है, कॉन्ग्रेस लगातार अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत करने की कोशिश में है। ऐसे में, यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या कॉन्ग्रेस सिरो-मालाबार चर्च की माँगों को मानेगी और उनके अनुसार चलेगी या नहीं।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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