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‘रामायण में भी कार्ल मार्क्स की झलक’: केरल की वामपंथी सरकार भगवान राम की शरण में, 7 दिन का प्रवचन

नायर ने कहा कि भगवान राम को विरोधाभासी शक्तियों के संगम के रूप में दिखाया गया है, लेकिन जब एक वामपंथी रामायण पर सूक्ष्मता से गौर करता है तो उसके दिमाग में इससे संबंधित जो विचार सबसे पहले आता है, वह है कार्ल मार्क्स का द्वंदात्मक भौतिकवाद का सिद्धांत।

वामपंथी भी अब भगवान राम की शरण में पहुँच गए हैं। केरल की सत्ताधारी कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (CPI) की मलप्पुरम जिला समिति ने 7 दिवसीय प्रवचन का आयोजन कराया, जहाँ रामायण और भगवान श्री राम पर चर्चा हुई। आज (शनिवार, 31 जुलाई 2021) समाप्त हुई इस ऑनलाइन संवाद सीरीज का शीर्षक था ‘रामायण एण्ड इंडियन हेरिटेज’।

केरल में CPI की मलप्पुरम जिला समिति ने अपने फेसबुक पेज पर रामायण पर आधारित 7 दिवसीय प्रवचन एवं संवाद श्रृंखला का आयोजन किया। CPI ने रामायण विचार सीरीज को 25 जुलाई से शुरू किया था, जो शनिवार (31 जुलाई 2021) को समाप्त हुई। इस संवाद कार्यक्रम में जिला एवं राज्य स्तर के भी कई कम्युनिस्ट नेताओं ने भाग लिया और रामायण पर चर्चा की।

हालाँकि, इन वामपंथी नेताओं द्वारा रामायण और भगवान श्री राम के जीवन पर चर्चा करना, केरल में आरएसएस के बढ़ते कद से प्रेरित माना जा रहा है और वामपंथी नेताओं ने इसे साबित भी किया। CPI की मलप्पुरम जिला समिति के सचिव पीके कृष्णदास ने कहा कि वर्तमान में कई सांप्रदायिक और फासीवादी तकतें हिन्दू धर्म से जुड़े हर मुद्दे पर अपना एकछत्र अधिकार मानती हैं। कृष्णदास ने कहा कि रामायण जैसे ग्रंथ देश की साझी विरासत और संस्कृति के अंग हैं और इस पर आधारित संवाद श्रृंखला का आयोजन वर्तमान समय में रामायण की प्रासंगिकता को परखने के लिए किया गया। इस संवाद सीरीज में भगवान राम और माता सीता के पोस्टर लगे हुए थे।

वामपंथी नेता एम केशवन नायर इस चर्चा में थोड़ा और आगे निकाल गए और उन्होंने कहा कि रामायण में व्याप्त राजनीति, संघ परिवार द्वारा की जा रही राजनीति से कहीं अलग है। नायर ने कहा कि भगवान राम को विरोधाभासी शक्तियों के संगम के रूप में दिखाया गया है, लेकिन जब एक वामपंथी रामायण पर विचार करता है तो उसके दिमाग जो पहला विचार आता है, वह है कार्ल मार्क्स का द्वंदात्मक भौतिकवाद का सिद्धांत। इस संवाद श्रृंखला में विचार रखने वाले लीलाकृष्णन ने कहा कि वो सब मिलकर रामायण के विभिन्न पहलुओं को सबके सामने लाकर उसकी फासीवादी व्याख्या को रोक सकते हैं।

हालाँकि, CPI इकलौती ऐसी पार्टी नहीं है जो श्री राम की शरण में पहुँची है। दशकों से लगातार राजनीतिक स्वार्थों से प्रेरित होकर हिन्दू हितों की बलि देने वाली पार्टियों के नेता भी आज मंदिरों में जा रहे हैं और हिन्दू मतदाताओं को लुभाने के पूरे प्रयास कर रहे हैं। CPI के नेताओं द्वारा रामायण पर परिचर्चा का आयोजन उसी बदलते राजनीतिक समीकरणों का परिणाम है, जहाँ अब हिन्दू भी अपने हितों के लिए जागरूक होता दिखाई दे रहा है। केरल में आरएसएस के सदस्यों के विरुद्ध लगातार होती रही हिंसा के बाद भी संगठन का विस्तार हो रहा है और हिन्दुत्व के प्रति संघ के सुदृढ़ विचारों के मद्देनजर वामपंथी नेताओं द्वारा श्री राम की स्तुति में प्रवचन का आयोजन करना, केरल में सरकती हुई अपनी राजनीतिक जमीन को बचाए रखने का एक उपाय ही है।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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