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यौन शोषण के आरोपित रहे पी ससी बने केरल के सीएम पी विजयन के राजनीतिक सचिव, 11 साल पहले CPIM ने किया था पार्टी से बाहर

“ससी पर पार्टी के भीतर से यौन शोषण के आरोप का सामना करना पड़ा। उनकी नियुक्ति से पता चलता है कि कैसे सीपीआईएम महिलाओं को सशक्त बना रहा है।"

केरल (Kerala) की सियासत में नया मोड़ आया है, जहाँ CPM की स्टेट कमेटी के मेंबर पी ससी (P sasi) को मुख्यमंत्री पिनराई विजयन (Pinarayi Vijayan) का राजनीतिक सचिव चुना गया है। ये वही पी ससी हैं, जिन्हें 11 साल पहले वर्ष 2011 में यौन शोषण के आरोप में फँसने के बाद पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया था। वहीं सीएम के मौजूदा राजनीतिक सचिव पुथलथ दिनेशन अब सीपीएम के मुखपत्र देशभिमानी के संपादक होंगे। जबकि पूर्व वित्त मंत्री टी एम थॉमस इसाक को चिंता वीकली का मुख्य संपादक बनाया गया है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, ऐसा दूसरी बार हो रहा है जब पी ससी को मुख्यमंत्री का राजनीतिक सचिव बनाया जा रहा है। इससे पहले 1996 से 2001 तक राज्य के सीएम रहे ईके नयनार के भी वो राजनीतिक सचिव रह चुके हैं। उस दौरान आइसक्रीम पार्लर मामले में इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) के नेता पीके कुन्हालीकुट्टी को कथित रूप से बचाने के लिए उनकी पार्टी के ही लोग उनके विरोध में उतर आए थे।

पी ससी वर्ष 2010 में जब CPM के कन्नूर जिला सचिव थे तो उनपर अपनी ही पार्टी की नेता के यौन शोषण का आरोप लगा था। डीवाईएफआई की महिला नेत्री ने ससी पर उनके यौन शोषण करने का आरोप लगाया था। पीड़िता की शिकायत के बाद ससी के खिलाफ पार्टी ने एक्शन लेते हुए उनके पद को जिला सचिव से घटाकर शाखा समिति कर दिया। बाद में वर्ष 2011 में केरल के तत्कालीन मुख्यमंत्री वीएस अच्युतानंदन ने ससी को पार्टी से बाहर कर दिया।

हालाँकि, यौन शोषण के आरोपों के बाद पार्टी से निकाले जाने पर भी वो पार्टी से जुड़े रहे और इसका फायदा उन्हें मिला। उस घटना के सात साल बाद मामले में फैसला सुनाते हुए अदालत ने उन्हें क्लीन चिट दे दिया। इसी के साथ आधिकारिक तौर पर वो फिर से सीपीएम में लौट आए। वहीं जिस डीवाईएफआई नेता ने ससी पर यौन शोषण का आऱोप लगाया था, उसे पार्टी में किनारे कर दिया गया और आखिरकार उसे पार्टी छोड़ने के लिए मजबूर कर दिया गया।

कॉन्ग्रेस और CPIM ने पी ससी की नियुक्ति की आलोचना की

हालाँकि, घटनाओं पर नजर रखा जाए तो ससी की नियुक्ति से केरल में सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है। माकपा के नेताओं का कहना है कि ये फैसला बिना किसी विचार-विमर्श से लिया गया है। पार्टी के ही सीनियर लीडर पी जयराजन ने पी ससि के मामले में पार्टी को वो गलती करने से बचने की हिदायद दी है, जो वो पहले कर चुकी है।

वहीं केरल महिला कॉन्ग्रेस अध्यक्ष ने इस नियुक्ति की आलोचना करते हुए कहा, “ससी पर पार्टी के भीतर से यौन शोषण के आरोप का सामना करना पड़ा। उनकी नियुक्ति से पता चलता है कि कैसे सीपीआईएम महिलाओं को सशक्त बना रहा है।”

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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