Monday, July 22, 2024
Homeराजनीतिलद्दाख में नौकरी के लिए अब उर्दू अनिवार्य नहीं: राजस्व विभाग ने बहाली की...

लद्दाख में नौकरी के लिए अब उर्दू अनिवार्य नहीं: राजस्व विभाग ने बहाली की योग्यता बदली, BJP सांसद बोले- थोपी गई भाषा से मिली आजादी

लद्दाख के भाजपा सांसद जम्यांग सेरिंग नामग्याल ने पिछले साल गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर पटवारी और नायब तहसीलदार जैसे पदों पर बहाली के लिए राजस्व नियमों में बदलाव (उर्दू को हटाने) की माँग की थी।

लद्दाख प्रशासन ने राजस्व विभाग में होने वाली विभिन्न पदों पर बहाली के लिए योग्यता के तौर पर उर्दू की अनिवार्यता खत्म कर दी है। भाजपा सांसद जामयांग सेरिंग नामग्याल ने इसकी जानकारी दी है। उन्होंने आर्टिकल 370 के खत्म होने के बाद उर्दू की अनिवार्यता खत्म करने को सच्ची आजादी बताया है। नामग्याल ने इसके लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और लद्दाख के लेफ्टिनेंट गवर्नर राधाकृष्ण माथुर का शुक्रिया अदा किया है।

उन्होंने कहा, “केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख के लेफ्टिनेंट गवर्नर की तरफ से एक नोटिस जारी कर ये बताया गया है कि राजस्व विभाग में 7 तारीख के बाद जितने भी पटवारी और नायब तहसीलदार पद के लिए भर्ती होगी, उसमें उर्दू अनिवार्य नहीं होगा। किसी भी मान्यता प्राप्त विश्वविद्याल से अगर आपके पास ग्रेजुएशन की डिग्री है तो आप आवेदन कर सकते हैं। मैं समझता हूँ कि लद्दाख के अलग से केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद हमने रिफॉर्मेटिव स्टेप लिया है। जो लोग उर्दू नहीं जानते हैं, उनके लिए, यानी पूरे लद्दाख के लिए यह भेदभाव वाली नीति थी, क्योंकि उर्दू लद्दाख के किसी भी बाशिंदे की, किसी भी कम्युनिटी, किसी भी जनजाति की मातृभाषा नहीं है। इसलिए यह राजस्व विभाग का पहला कदम है कि यह सामान्य भाषा में चले, फ्रेंडली हो, लोगों की पहुँच हो। इस पहले कदम के लिए मैं भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, लद्दाख के लेफ्टिनेंट गवर्नर राधाकृष्ण माथुर का शुक्रिया अदा करता हूँ। इससे लद्दाख की पूरी आवाम खुश है। मुझे उम्मीद थी कि इससे लद्दाख को अपनी पहचान बनाने और उभारने का मौका मिलेगा।”

प्रधान सचिव डॉ. पवन कोटवाल की ओर जारी अधिसूचना के मुताबिक ‘उर्दू की जानकारी’ की जगह ‘किसी भी मान्यता प्राप्त विश्वविद्याल से स्नातक की डिग्री’ को अनिवार्य बनाया गया है। बता दें कि लद्दाख में लेह और कारगिल दो जिले हैं। भूमि एवं राजस्व अभिलेखों की भाषा उर्दू रही है। कोर्ट (निचली अदालतें) और एफआईआर भी उर्दू में ही लिखी जाती हैं। सरकारी स्कूलों में दी जाने वाली शिक्षा का माध्यम उर्दू है, खासकर कश्मीर, कारगिल और जम्मू के मुस्लिम बहुल इलाकों में। 

उल्लेखनीय है कि लद्दाख के भाजपा सांसद जम्यांग सेरिंग नामग्याल ने पिछले साल गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर पटवारी और नायब तहसीलदार जैसे पदों पर बहाली के लिए राजस्व नियमों में बदलाव (उर्दू को हटाने) की माँग की थी। उन्होंने कहा कि अनुच्छेद 370 को हटाने के बाद यह सबसे महत्वपूर्ण बदलाव है। दशकों तक थोपी गई भाषा से वास्तविक स्वतंत्रता मिली। 

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

एनडीटीवी हो या 'द वायर', इन्हें कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

‘कोई भी कार्रवाई हो तो हमारे पास आइए’: हाईकोर्ट ने 6 संपत्तियों को लेकर वक्फ बोर्ड को दी राहत, सेन्ट्रल विस्टा के तहत इन्हें...

दिसंबर 2021 में सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने हाईकोर्ट को आश्वासन दिया था कि वक्फ बोर्ड की संपत्तियों को कोई नुकसान नहीं पहुँचाया जाएगा।

‘कागज़ पर नहीं, UCC को जमीन पर उतारिए’: हाईकोर्ट ने ‘तीन तलाक’ को बताया अंधविश्वास, कहा – ऐसी रूढ़िवादी प्रथाओं पर लगे लगाम

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने कहा है कि समान नागरिक संहिता (UCC) को कागजों की जगह अब जमीन पर उतारने की जरूरत है।

प्रचलित ख़बरें

- विज्ञापन -