Monday, June 14, 2021
Home राजनीति जहाँ ममता बनर्जी ने खोदी थी वामपंथ की कब्र, वहीं उनकी सियासत को दफनाने...

जहाँ ममता बनर्जी ने खोदी थी वामपंथ की कब्र, वहीं उनकी सियासत को दफनाने की तैयारी में शुभेंदु अधिकारी

नंदीग्राम आंदोलन का प्रमुख चेहरा शुभेंदु अधिकारी पार्टी से 2 बार सांसद रह चुके हैं। उन्होंने अपने कौशल से मिदनापुर इलाके को टीएमसी का गढ़ बनाया। ऐसे में हम अंदाजा लगा सकते हैं कि उनका पार्टी को छोड़ना ममता सरकार पर कितना बड़ा आघात होगा।

करीब एक दशक पहले सिंगूर और नंदीग्राम में हुए आंदोलन ने पश्चिम बंगाल की सियासत से वामपंथ को उखाड़ फेंका था और सत्ता के केंद्र में ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) को बिठा दिया। राज्य में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले एक बार फिर सिंगूर और नंदीग्राम चर्चा के केंद्र में हैं। 

अटकलें लगाई जा रही है कि इन दोनों जगहों पर टीएमसी के भीतर जो बगावत शुरू हुई है उसका ममता बनर्जी जल्द समाधान नहीं तलाश पाईं तो लगातार तीसरी बार सत्ता में लौटने का उनका सपना बिखर जाएगा।

यही कारण है कि नंदीग्राम के विधायक शुभेंदु अधिकारी के इस्तीफे की खबरें सामने आते ही उन्हें मनाने की कोशिशें भी शुरू हो गई हैं। पार्टी सांसद सौगत राय का कहना है:

“शुभेंदु ने पार्टी से या विधायक पद से इस्तीफा नहीं दिया है। मैं आपको आश्वस्त करता हूँ कि ये बिलकुल झूठ है कि शुभेंदु, दिल्ली में मोहन भागवत से मिलने जा रहे हैं।”

उधर, सिंगूर विधायक रबीन्द्रनाथ भट्टाचार्जी पहले ही पार्टी छोड़ने की धमकी दे चुके हैं। रबीन्द्रनाथ वही चेहरा हैं जिन्होंने नैनो कारखाने के ख़िलाफ टीएमसी के आंदोलन में उनका साथ दिया था। जानकारी के अनुसार, ब्लॉक अध्यक्ष के पद से अपने करीबी को हटाए जाने की वजह से भट्टाचार्जी नाराज हैं। उनका कहना था कि भ्रष्टाचार से जुड़े लोगों को पार्टी ने सिंगूर ब्लॉक तृणमूल कॉन्ग्रेस का अध्यक्ष बनाया है, जिसका हम लोग विरोध करते है। अगर पार्टी इस विषय पर कोई ठोस कदम नहीं उठाएगी तो हमलोग आगे की रणनीति अपनाएँगे।

सवाल है कि आखिर बंगाल में विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक समीकरण क्यों इतनी तेजी से बनते-बिगड़ते दिख रहे हैं। आखिर क्यों वह सब लोग ममता सरकार से दूरी बना रहे हैं, जिन्होंने बंगाल में वामपंथी शासन को उखाड़ फेंकने में न केवल टीएमसी की मदद की थी, बल्कि नंदीग्राम-सिंगूर के आंदोलनों में अहम भूमिका अदा की थी।

साल 2011 के चुनावों को यदि याद करें तो पता चलता है कि इन दोनों जगहों पर चुनाव से ठीक पहले हुए आंदोलन टीएमसी के लिए जैकपॉट बने थे। पार्टी ने सिंगूर और नंदीग्राम में औद्योगीकरण के ख़िलाफ मुहिम चलाई थी। तब चूँकि स्थानीय भी वाम शासन से त्रस्त थे और चिह्नित भूमि पर औद्योगिक परियोजना चालू करने के ख़िलाफ थे तो उन्हें टीएमसी समेत सभी आंदोलनकारियों का जमकर साथ दिया।

सिंगूर में चलाए गए नैनो परियोजना के ख़िलाफ अभियान में ममता सरकार का दावा था कि इस प्रोजेक्ट के लिए इस्तेमाल की जाने वाली जमीन काफी ऊपजाऊ है और वहाँ कई फसलें हो सकती हैं। इस अभियान में टीएमसी के साथ कई संगठन शामिल थे। धीरे-धीरे इसी अभियान की आग नंदीग्राम तक भड़की नजर आई थी और ‘कृषि जमीन बचाओ समिति’ की अगुवाई में नंदीग्राम ने जो आंदोलन देखा, उसमें लगभग दर्जनों लोगों की बलि चढ़ी थी। हैरानी इस बात की थी कि नंदीग्राम में केमिकल सेज के लिए केवल जमीन अधिग्रहण की सूचना देने भर से आंदोलन भड़क गया था।

आज दुखद यह है कि उस समय बड़े दावों के साथ जनता को अपने पक्ष में करने वाली टीएमसी सत्ता में आने के बाद उनकी उम्मीदों पर खरी नहीं उतर पाई। टीएमसी के 10 साल के कार्यकाल के बाद सिंगूर और नंदीग्राम का दोबारा केंद्र में आ जाना उन सभी बयानों को दोबारा ताजा कर देता है जिस पर तत्कालीन मुख्यमंत्री व मार्क्सवादी नेता बुद्धदेव चर्चा कर रहे थे। उन्होंने एनडीटीवी को दिए अपने इंटरव्यू में पार्टी की चरमराई स्थिति पर बात करते हुए नंदीग्राम और सिंगूर को अपनी सबसे बड़ी भूल कहा था।

क्या 10 साल बाद इन चुनावों में वही स्थिति ममता सरकार की होने वाली है? भाजपा नेता लॉकेट चटर्जी का तो कहना है कि सिंगूर से तृणमूल कॉन्ग्रेस का उत्थान हुआ था और सिंगूर से ही ममता बनर्जी का पतन होगा। सिंगूर के किसान 10 साल पहले जिस हाल में थे, आज भी उसी हाल में जी रहे हैं। 

आज शुभेंदु अधिकारी के इस्तीफे के बाद कयास लग रहे हैं कि इस हलचल के कारण ममता की करीब 20 सीटों पर प्रत्यक्ष प्रभाव पड़ेगा। उनकी नाराजगी पार्टी को बहुत बड़ा नुकसान पहुँचा सकती है। उनकी पहचान बंगाल में काफी ताकतवर के रूप होती है। वह एक सशक्त राजनीतिक परिवार से आते हैं। उनका प्रभाव न सिर्फ उनके क्षेत्र पर है, बल्कि पूर्वी मिदनापुर के आस-पास के जिलों में भी उनका राजनीतिक दबदबा है। 

नंदीग्राम आंदोलन का प्रमुख चेहरा शुभेंदु अधिकारी पार्टी से 2 बार सांसद रह चुके हैं। उन्होंने अपने कौशल से मिदनापुर इलाके को टीएमसी का गढ़ बनाया। ऐसे में हम अंदाजा लगा सकते हैं कि उनका पार्टी को छोड़ना ममता सरकार पर कितना बड़ा आघात होगा। यही कारण है कि उन्हें मनाने प्रशांत किशोर तक खुद उनके घर पहुँच गए थे। लेकिन प्रशांत की ये कोशिश बेकार गई और शुभेंदु ने उनसे मुलाकात नहीं की।

पिछले साल तक भाजपा खुद शुभेंदु को पार्टी से जुड़ने का ऑफर दे रही थी, लेकिन अब मीडिया में सूत्रों के हवाले से बताया जा रहा है कि शुभेंदु स्वयं ही भाजपा की ओर हाथ बढ़ाने वाले हैं। वे शनिवार को बीजेपी में शामिल हो सकते हैं। मेदिनीपुर, झारग्राम, पुरुलिया, बांकुरा और बीरभूम जैसे जिलों में टीएमसी के प्रभाव के पीछे उनका ही हाथ माना जाता है।

  सहयोग करें  

एनडीटीवी हो या 'द वायर', इन्हें कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

शमशेर अली ने हिंदू महिला को कमरे में बंद कर पीटा, पैसे लिए-अगरबत्ती से दागा: तांत्रिक बता रहा भास्कर

उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर में अंधविश्वास के एक मामले में 'दैनिक भास्कर' ने मौलवी को 'तांत्रिक' लिख कर भ्रम फैलाया है। शमशेर अली और उसका बेटा निन्हे किस हिसाब से 'तांत्रिक' हुआ?

राम मंदिर में अड़ंगा डालने में लगी AAP, ट्रस्ट को बदनाम करने की कोशिश: जानिए, ‘जमीन घोटाले’ की हकीकत

राम मंदिर जजमेंट और योगी सरकार द्वारा कई विकास परियोजनाओं की घोषणाओं के कारण 2 साल में अयोध्या में जमीन के दाम बढ़े हैं। जानिए क्यों निराधार हैं संजय सिंह के आरोप।

विराजमान भगवान विष्णु, प्रसिद्धि माता पार्वती और भगवान शिव को लेकर: त्रियुगीनारायण मंदिर की कहानी

मान्यता है कि रुद्रप्रयाग का त्रियुगीनारायण मंदिर वह जगह है जहाँ भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह संपन्न हुआ था।

क्या है UP सरकार का ‘प्रोजेक्ट एल्डरलाइन’, जिसके लिए PM मोदी ने की CM योगी आदित्यनाथ की सराहना

जनकल्याण के इसी क्रम में योगी सरकार ने राज्य के बेसहारा बुजुर्गों के लिए ‘एल्डरलाइन प्रोजेक्ट’ लॉन्च किया। इसके तहत बुजुर्गों की सहायता करने के लिए हेल्पलाइन नंबर जारी किया गया है।

क्या कॉन्ग्रेस A-370 फिर से बहाल करना चाहती है? दिग्विजय सिंह के बयान पर रविशंकर प्रसाद ने माँगा जवाब

नाम न छापने की शर्त पर कॉन्ग्रेस के कई नेताओं का मानना है कि दिग्विजय सिंह का यह बयान कॉन्ग्रेस को नुकसान पहुँचाने वाला है।

महाराष्ट्र कॉन्ग्रेस अध्यक्ष ने जताई थी मुख्यमंत्री बनने की इच्छा, भड़के संजय राउत ने कहा- उद्धव ही रहेंगे CM

महाराष्ट्र प्रदेश कॉन्ग्रेस कमेटी के अध्यक्ष नाना पटोले ने कहा था कि उनकी इच्छा मुख्यमंत्री बनने की है। इस पर अपनी राय रखते हुए संजय राउत ने कहा कि....

प्रचलित ख़बरें

इब्राहिम ने पड़ोसी गंगाधर की गाय चुराकर काट डाला, मांस बाजार में बेचा: CCTV फुटेज से हुआ खुलासा

इब्राहिम की गाय को जबरदस्ती घसीटने की घिनौनी हरकत सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई। गाय के मालिक ने मालपे पुलिस स्टेशन में आरोपित के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है।

राम मंदिर में अड़ंगा डालने में लगी AAP, ट्रस्ट को बदनाम करने की कोशिश: जानिए, ‘जमीन घोटाले’ की हकीकत

राम मंदिर जजमेंट और योगी सरकार द्वारा कई विकास परियोजनाओं की घोषणाओं के कारण 2 साल में अयोध्या में जमीन के दाम बढ़े हैं। जानिए क्यों निराधार हैं संजय सिंह के आरोप।

कीचड़ में लोटने वाला सूअर मीका सिंह, हवस का पुजारी… 17 साल की लड़की को भेजा गंदे मैसेज और अश्लील फोटो: KRK

"इसने राखी सावंत को सूअर के जैसे चूसा। सूअर की तरह किस किया। इस तरह किसी लड़की को जबरदस्ती किस करना किसी रेप से कम नहीं है।"

16 साल की लड़की से दिल्ली के NGO वाली 44 साल की महिला करती थी ‘जबरन सेक्स’, अश्लील वीडियो से देती थी धमकी

दिल्ली में 16 साल की नाबालिग लड़की के यौन शोषण के आरोप में 44 वर्षीय एक महिला को गिरफ्तार किया गया। आरोपित महिला एनजीओ चलाती हैं और...

दलित लड़की किडनैप, नमाज पढ़ता वीडियो… और धमकी कि ₹40-50 हजार लेके भूल जाओ: UP पुलिस ने किया केस दर्ज

उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा में सिलाई कंपनी में मुस्लिम समुदाय की महिलाओं के साथ काम करने वाली दलित समुदाय की लड़की का नमाज पढ़ता वीडियो...

मात्र 84 टिकट और ₹6,000 का कलेक्शन: महाराष्ट्र के सिनेमाघरों में सलमान की फिल्म ‘राधे’ को नहीं मिल रहे दर्शक

महाराष्ट्र में दो सिनेमाघरों ने खुलने के तुरंत बाद ही सलमान खान की फिल्म ‘राधे’ से अपनी शुरुआत करने का फैसला किया लेकिन उन्हें निराशा ही हाथ लगी।
- विज्ञापन -

 

हमसे जुड़ें

295,307FansLike
103,706FollowersFollow
393,000SubscribersSubscribe