Sunday, July 21, 2024
Homeराजनीतिनोटिस बोर्ड पर बताना होगा कंपनी में कितने कन्नड़ करते हैं काम: कर्नाटक की...

नोटिस बोर्ड पर बताना होगा कंपनी में कितने कन्नड़ करते हैं काम: कर्नाटक की कॉन्ग्रेस सरकार का फरमान, कहा- उल्लंघन पर रद्द करेंगे MNC का लाइसेंस

कर्नाटक सरकार ने कहा कि हर कम्पनी नोटिस बोर्ड पर यह दर्शाएगी कि उसके यहाँ कितने कन्नड़ लोग काम करते हैं। जो कम्पनियाँ इन नियमों को नहीं मानेंगी वो राज्य में काम नहीं कर पाएँगी और उनका लाइसेंस रद्द कर दिया जाएगा।

कर्नाटक में काम करने वाली बहुराष्ट्रीय कंपनियों (MNC) के लिए राज्य की कॉन्ग्रेस सरकार ने एक फरमान जारी किया है। राज्य में काम करने वाली MNCs को नोटिस बोर्ड पर यह जानकारी देनी होगी कि उनके यहाँ कितने कन्नड़ काम करते हैं। कर्नाटक सरकार के मंत्री ने कहा कि ऐसा नहीं करने वाली MNC कर्नाटक में काम नहीं कर पाएँगी और उनका लाइसेंस रद्द किया जाएगा।

कर्नाटक की कॉन्ग्रेस सरकार में संस्कृति मंत्री शिवराज तंगादगी ने विधान परिषद में बुधवार (21 फरवरी 2024) को यह ऐलान किया। तंगादगी ने कन्नड़ भाषा को बढ़ावा देने के लिए लाए गए विधेयक पर चर्चा के दौरान यह ऐलान किया। उन्होंने कहा कि इसके लिए राज्य में नियम बनाए जाएँगे और इसके लिए कमिटी बनाई जा चुकी है। हालाँकि, कुछ रिपोर्ट में कहा गया है कि इनमें टेक कंपनियों को अभी शामिल नहीं किया गया है।

उन्होंने कहा, “इस बात पर विचार हुआ है कि यहाँ (कर्नाटक में) काम करने वाली MNC अपने यहाँ काम करने वाले कन्नड़ लोगों की जानकारी नोटिस बोर्ड पर दर्शाएँ। हम इसके लिए नियम बनाएँगे। इसके लिए एक कमिटी बनाई गई है और मैं इसका चेयरमैन हूँ। इसमें कई विभागों के सचिव हैं। वे कई सुझाव दे रहे हैं। हम MNC और बाकी कम्पनियों के लिए कानूनों पर चर्चा करेंगे और फिर नियम बना देंगे।”

तंगादगी ने कहा कि जो कम्पनियाँ इन नियमों को नहीं मानेंगी, उनका लाइसेंस रद्द किया जाएगा। उन्होंने कहा कि कन्नड़ भाषा में न्यायिक काम हो, इसके लिए भी सरकार प्रयासरत है। उन्होंने वकीलों से अपील की कि वो कोर्ट में कन्नड़ में बहस करें। साथ ही निर्णय भी कन्नड़ में हों। मंत्री ने यह भी कहा कि एक एप बनाया जा रहा है, जिस पर कन्नड़ भाषा का अपमान होने पर शिकायत की जा सकती है।

गौरतलब है कि कर्नाटक विधानसभा इस समय एक ऐसे विधेयक पर चर्चा कर रही है जिसके अंतर्गत कर्नाटक में प्रतिष्ठानों को अपने नाम का 60% हिस्सा कन्नड़ भाषा में रखना होगा। यह विधेयक कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्दारमैया ने बजट पेश करते हुए सामने रखा था। यह बिल बीते दिनों हुए कुछ प्रदर्शनों के बाद आया है।

बीते दिनों कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में हुए कुछ प्रदर्शनों में कई बड़ी कम्पनियों के साइनबोर्ड तोड़ दिए गए थे क्योंकि उन पर कन्नड़ नहीं लिखी थी। इस प्रदर्शन के दौरान तोड़फोड़ करने वाले लोगों पर दर्ज केस रद्द करने की माँग भी की गई है।

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

एनडीटीवी हो या 'द वायर', इन्हें कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

आजादी के वक्त थे 3 मुस्लिम बहुल जिले, अब 9 हैं: बंगाल BJP प्रमुख ने कहा- असम और बंगाल में डेमोग्राफी बदलाव सोची-समझी रणनीति,...

बंगाल भाजपा अध्यक्ष सुकांत मजूमदार ने असम के सीएम हिमंता के उस बयान का समर्थन किया है, जिसमें उन्होंने डोमोग्राफी बदलाव की बात कही थी।

शुक्र है मीलॉर्ड ने भी माना कि वो इंसान हैं! चाइल्ड पोर्नोग्राफी देखने को मद्रास हाई कोर्ट ने नहीं माना था अपराध, अब बदला...

चाइल्ड पोर्नोग्राफी को अपराध नहीं बताने वाले फैसले को मद्रास हाई कोर्ट के जज एम. नागप्रसन्ना ने वापस लिया और कहा कि जज भी मानव होते हैं।

प्रचलित ख़बरें

- विज्ञापन -