Homeराजनीतिलोकसभा में 543 से बढ़कर 816 होगी सीट, महिलाओं को मिलेगा 33% आरक्षण: 2023...

लोकसभा में 543 से बढ़कर 816 होगी सीट, महिलाओं को मिलेगा 33% आरक्षण: 2023 के ‘नारी वंदन अधिनियम’ में होने जा रहा संशोधन, जानिए कैसे पूरी होगी प्रक्रिया

संसद के दोनों सदनों में महिला आरक्षण बिल पास होने और राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद ये भारतीय संविधान के मूलभूत ढाँचे में होने वाला सबसे बड़ा बदलाव होगा। ये बदलाव 2029 से लागू होगा। इसके बाद आंध्र प्रदेश, ओडिशा, अरुणाचल प्रदेश में होने वाले चुनाव में यह लागू होगा।

केन्द्र सरकार मौजूदा सत्र में ही महिला आरक्षण संशोधन बिल ला रही है। 2023 में ये बिल लाया गया था। इसे जनगणना कराए जाने के बाद परिसीमन प्रक्रिया पूरी कर लागू करने की बात थी। लेकिन अब 2011 जनगणना के आधार पर परिसीमन कर महिला आरक्षण लागू किया जाएगा। इसके तहत दो विधेयक लाए जाएँगे। इसमें सबसे पहले लोकसभा की कुल सीटों में 50 फीसदी की बढ़ोतरी की जाएगी। इसके बाद 33 फीसदी आरक्षण महिलाओं को दिया जाएगा।

महिलाओं के लिए 273 लोकसभा सीटें

लोकसभा में वर्तमान में 543 सीटें हैं। इसकी आधी सीटें यानी करीब 274 सीटें बढ़ जाएँगी। इसके बाद लोकसभा के सीटों की संख्या 816 हो जाएगी। इसके बाद महिलाओं को 33 फीसदी आरक्षण दी जाएगी अर्थात महिलाओं के लिए 273 सीटें लोकसभा में आरक्षित होंगी। महिला आरक्षण अधिनियम को नारी शक्ति वंदन अधिनियम भी कहा जाता है।

मोदी सरकार महिला सशक्तिकरण के तहत विधायिका में महिलाओं की उपस्थिति बढ़ाने के लिए इसी सत्र में प्रस्ताव लाने जा रही है। इसके लिए जनगणना कराने का इंतजार नहीं किया जाएगा। 2011 जनगणना के आधार पर परिसीमन की प्रक्रिया पूरी की जाएगी और 2029 लोकसभा चुनाव से पहले इसे लागू किया जाएगा।

लॉटरी से तय होंगी महिला सीटें

परिसीमन की प्रक्रिया पूरी करने के लिए ‘परिसीमन अधिनियम’ समेत मौजूदा कानूनों में कई बदलाव किए जाएँगे। जानकारों के मुताबिक, महिलाओं के लिए कौन सी सीट आरक्षित की जाएगी, इसको तय करने के लिए लॉटरी सिस्टम का इस्तेमाल किया जाएगा। इससे रोटेशन और निष्पक्षता बनी रहेगी। हालाँकि सिक्किम जैसे छोटे राज्यों में बदलाव नहीं किए जाने की बात सामने आ रही है।

महिला आरक्षण विधेयक 2023 में पारित हुई थी। उस वक्त नई जनगणना के बाद परिसीमन की प्रक्रिया पूरी करने की बात कही गई थी। इसके आधार पर महिला आरक्षण लागू करने की बात थी। अर्थात पहले का महिलाओं का आरक्षण परिसीमन नई जनगणना पर निर्भर था। लेकिन अब 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।

महिला आरक्षण संशोधन बिल को संसद की पटल पर रखा जाएगा। चूंकि यह संघीय ढाँचे (राज्य विधानसभाओं) को प्रभावित करता है, इसलिए इसे संसद में विशेष बहुमत (सदस्यों की कुल संख्या का बहुमत + 2/3 उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्य) से पारित किया जाएगा। इसे लोकसभा और राज्यसभा दोनों में पारित किया जाएगा। फिर, राष्ट्रपति के पास मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के बाद ये कानून बन जाएगा

एससी- एसटी की सीटें भी बढ़ेंगी

जानकारी के मुताबिक, अनुसूचित जाति और जनजाति श्रेणियों के लिए आरक्षित सीटों की संख्या भी बढ़ाई जाएगी। अभी एससी में 84 सीटें हैं जिसे बढ़ाकर 126 की जाएगी। अनुसूचित जनजाति की 47 सीटें लोकसभा की हैं, जिसे बढ़ाकर 70 किया जाएगा। इन सीटों में से एक-तिहाई सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी यानी आरक्षण में आरक्षण का प्रावधान लागू होगा।

विपक्षी दलों के साथ बैठक

केन्द्र सरकार महिला आरक्षण विधेयक को इस सत्र में ही लाने की मन बना चुकी है। इसलिए केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने विपक्षी दलों के साथ बातचीत की है। विपक्षी नेताओं ने भी आपस में सलाह मशविरा किया है। सोमवार (23 मार्च 2026) को एनडीए के घटक दलों के नेताओं और सांसदों की भी बैठक गृहमंत्री शाह ने बुलाई। इसमें महिला आरक्षण लागू करने को लेकर रणनीति बनाई गई।

संसद के दोनों सदनों में बिल के पास होने और राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद ये भारतीय संविधान के मूलभूत ढाँचे में होने वाला सबसे बड़ा बदलाव होगा। ये बदलाव 2029 से लागू होगा। इसके बाद आंध्र प्रदेश, ओडिशा, अरुणाचल प्रदेश में होने वाले चुनाव में यह लागू होगा।

कहा जा रहा है कि अगर महिला आरक्षण बिल विपक्ष की सहमति से पास हो जाता है तो सरकार इसे 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव में भी टेस्ट कर सकती है। ऐसे में 2027 में होने वाला यूपी, उत्तराखंड और पंजाब विधानसभा चुनाव ऐसा पहला चुनाव बन सकता है, जहाँ 33 फीसदी महिला आरक्षण लागू हो ।

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

विवादों में ‘कॉकरोचों’ का 6 जून का प्रदर्शन, दिपके ने माना- ‘नहीं ली प्रोटेस्ट की परमिशन’: समझें- SC का फैसला, 7 दिन वाला नियम...

CJP के प्रस्तावित प्रदर्शन के बहाने समझिए जंतर-मंतर पर धरना देने की पूरी प्रक्रिया, दिल्ली पुलिस के नियम और सुप्रीम कोर्ट का रुख।

‘पहले मंदिर में नमाज पढ़ेंगे, फिर कहेंगे मस्जिद थी’: बुलंदशहर से भोजशाला तक, हिंदू पवित्र स्थलों पर दावों का कट्टरपंथियों का पैटर्न और लिबरल...

हिंदुओं के पवित्र स्थानों पर नमाज अदा करना भूल नहीं, सोची-समझी साजिश है। यदि कट्टरपंथियों का मन इतना ही साफ होता तो मंदिरों पर कब्जा नहीं करते।
- विज्ञापन -