गहलोत ने राष्ट्रपति की जाति पर की टिप्पणी, घटिया राजनीति करने में और नीचे गिरी कॉन्ग्रेस

भाजपा ने चुनाव आयोग से अपील करते हुए कहा कि देश के राष्ट्रपति पर इस तरह का बयान देने के मामले पर वह संज्ञान ले और अशोक गहलोत को नोटिस देकर उन्हें माफ़ी माँगने के लिए कहा जाए।

कॉन्ग्रेस पार्टी ने रामनाथ कोविंद को राष्ट्रपति चुने जाने के पीछे की वजह उनकी जाति बताया है। देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद पर बैठे श्री रामनाथ कोविंद पर टिप्पणी से आहत भाजपा ने चुनाव आयोग से शिकायत की है। दरअसल, राजस्थान के मुख्यमंत्री व वरिष्ठ कॉन्ग्रेस नेता अशोक गहलोत ने कहा कि रामनाथ कोविंद इसीलिए राष्ट्रपति बने क्योंकि वो दलित हैं। गहलोत ने कहा:

“क्योंकि गुजरात के चुनाव आ रहे थे, वो इस बात से घबरा चुके थे कि उनकी सरकार गुजरात में नहीं बनने जा रही है। मेरा ऐसा मानना है कि रामनाथ कोविंद जी को जातीय समीकरण बैठाने और कोली समुदाय को लुभाने के लिए राष्ट्रपति बनाया गया और आडवाणी साहब छूट गए।”

अशोक गहलोत के इस बयान पर पलटवार करते हुए भाजपा ने कहा कि कॉन्ग्रेस ने राष्ट्रपति का अपमान किया है। भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता और राज्यसभा सांसद जीवीएल नरसिम्हा राव ने कहा:

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“आज हम बहुत दुःख के साथ ये बात पूरे देश के सामने रखना चाहते हैं कि आज कॉन्ग्रेस पार्टी ने बहुत ही निचले स्तर पर जाकर चुनावी मर्यादा का उल्लंघन किया है। भारत के राष्ट्रपति, जो देश में सर्वोच्च पद पर है, उन पर भी कॉन्ग्रेस ने राजनीति करने की कोशिश की है। राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत देश के राष्ट्रपति जी को लेकर गलत बयानबाजी कर रहे हैं। कॉन्ग्रेस क्या ग़रीब तबके, दलित समाज से आने वाले राष्ट्रपति जी के ख़िलाफ़ है। एक काबिल व्यक्ति और ज्ञानी व्यक्ति होने के बावजूद केवल समाज का नाम लेकर कॉन्ग्रेस राष्ट्रपति जी के साथ पूरे समाज और देश को बदनाम कर कर रही है।”

भाजपा ने चुनाव आयोग से अपील करते हुए कहा कि देश के राष्ट्रपति पर इस तरह का बयान देने के मामले पर वह संज्ञान ले और अशोक गहलोत को नोटिस देकर उन्हें माफ़ी माँगने के लिए कहा जाए। पार्टी ने पूछा कि क्या कॉन्ग्रेस सभी दलित, पिछड़े और ग़रीब राजनेताओं को जलील करके केवल एक परिवार को ही राज करने लायक समझती है?

इससे पहले 2017 में जब रामनाथ कोविंद की राष्ट्रपति उम्मीदवारी की घोषणा की गई थी, तब पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा था कि भाजपा के दलित मोर्चा का अध्यक्ष होने के कारण उन्हें राष्ट्रपति उम्मीदवार बनाया गया है। कोविंद इससे पहले बिहार के राज्यपाल भी रह चुके हैं।

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