Sunday, April 21, 2024
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आतंकी हमला, 8 पर्यटकों की हत्या… और राज्य सभा में रोने लगे PM मोदी: किया गुलाम नबी आजाद को भी याद

"सबसे पहले गुलाम नबी आज़ाद का फोन कॉल आया। वो फोन सिर्फ सूचना देने के लिए नहीं किया गया था बल्कि उनके आँसू भी रुक नहीं रहे थे फोन पर। डेड बॉडीज को वापस लाने के लिए भारतीय वायुसेना के जहाज की मदद माँगी थी।"

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार (फ़रवरी 9, 2021) को राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष गुलाम नबी आज़ाद की विदाई में सम्बोधन दिया, जिनका कार्यकाल पूरा हो रहा है। उन्होंने आज़ाद सहित कार्यकाल पूरा कर रहे चार सांसदों को सदन की शोभा बढ़ाने वाला, सदन में जीवंतता लाने वाला और सदन के माध्यम से जनसेवा में रत नेता बताया। इनमें शमशेर सिंह, मीर मोहम्मद और नजीर अहमद का भी कार्यकाल पूरा हो रहा है।

प्रधानमंत्री ने चारों को अपने-अपने अनुभव और ज्ञान का सदन को लाभ देने व क्षेत्र की समस्याओं को रख कर देश के प्रति योगदान करने के लिए धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि मीर मोहम्मद और नजीर अहमद पर लोगों का बहुत कम ध्यान गया होगा, लेकिन सदन का कोई भी ऐसा सत्र नहीं है, जब इनके साथ अलग-अलग विषयों पर उन्हें मिल-बैठ कर चर्चा करने का अवसर न मिला हो। कश्मीर की बारीकियों के मुद्दे पर अक्सर चर्चा होती थी।

उन्होंने कहा कि ये दोनों कभी-कभी परिवार के साथ भी आते थे। पीएम मोदी ने कहा कि इन दोनों ने उन्हें कई जानकारियाँ दी, जिससे उनका उन सबके साथ व्यक्तिगत रिश्ते बन गए थे। उन्होंने कहा कि इन दोनों की प्रतिबद्धता और क्षमता देश व जम्मू-कश्मीर के काम आएगी। शमशेर सिंह के बारे में उन्होंने कहा कि उन्हें याद भी नहीं है कि कई वर्षों तक वो उनके साथ काम कर रहे हैं। उन्होंने शमशेर को अपना पुराना साथी बताया।

उन्होंने बताया कि दोनों पुराने दिनों में स्कूटर पर साथ घूमते थे और आपातकाल के दौरान साथ ही जेल गए थे। पीएम मोदी ने कहा कि सदन में उनकी उपस्थिति 96% है, जो बताती है कि मृदुभाषी और सरल शमशेर सिंह ने जनता के दिए दायित्व को शत प्रतिशत निभाया। उन्होंने विश्वास जताया कि जम्मू कश्मीर के ये चारों अपने जीवन के सबसे उत्तम कार्यकाल में रहे हैं, क्योंकि वो एक बड़े ऐतिहासिक बदलाव के साक्षी बने हैं।

उन्होंने चिंता जताई कि गुलाम नबी आज़ाद के बाद इस पद को जो भी नेता संभालेंगे, उन्हें उनसे मैच करने में काफी दिक्कत होगी। उन्होंने कहा कि आज़ाद अपने दल के साथ-साथ अपने देश और सदन की भी चिंता करते थे। उन्होंने कहा कि नेता प्रतिपक्ष के रूप में अपना दबदबा कायम रखने का मोह कइयों को होता है, लेकिन आज़ाद भी शरद पवार की तरह देश को प्राथमिकता देने वाले नेता हैं।

उन्होंने कहा कि गुलाम नबी आज़ाद ने हर काम को बखूबी निभाया है और कोरोना काल में जब वो नेताओं के साथ बैठक कर रहे थे, तभी आज़ाद ने उन्हें फोन कर के सर्वदलीय बैठक बुलाने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि उनकी बात मान कर बैठक हुई भी। पीएम मोदी ने कहा कि 28 वर्ष का कार्यकाल बहुत बड़ा होता है, जिसमें आज़ाद को सत्ता और विपक्ष, दोनों का हिस्सा बनने का अवसर मिला। उन्होंने कहा:

“ये बहुत पहले की बात है। मैं तब चुनावी राजनीति में नहीं था, संगठन का कार्य करता था। शायद अटल जी की सरकार रही होगी। तब मैं संसद में किसी कार्य से आया था तो गुलाम नबी आज़ाद के साथ खूब बातें हुई। पत्रकारों की नजर पड़ी तो वो सोचने लगे कि इन दोनों का मेल कैसे हो सकता है। पत्रकारों के पूछने पर आज़ाद ने जवाब दिया कि अख़बारों, टीवी और बैठकों में हमें भले ही आप लड़ते-झगड़ते देखते हो, लेकिन इस सदन की छत के नीचे हम परिवार हैं। यहाँ हम सब एक-दूसरे के सुख-दुःख बाँटते हैं।”

इस दौरान उन्होंने गुलाम नबी आज़ाद के एक शौक के बारे में बात की। उन्होंने कहा कि सरकारी बँगले में रहने वालों का दिमाग अंदर रखे सोफे सेट और दीवारों तक रहता है, लेकिन आज़ाद ने ऐसा बगीचा बनाया है, जो आपको कश्मीर की घाटी की याद दिला देगा। प्रधानमंत्री ने आगे कहा कि आज़ाद को इसका गर्व है। वो नई-नई चीजें जोड़ते हैं और उनका बँगला हर साल प्रतिस्पर्धा में नंबर एक आता है।

नरेंद्र मोदी ने बताया कि जब गुलाम नबी आज़ाद जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री थे, तब वो गुजरात के सीएम हुआ करते हैं और दोनों में काफी निकटता भी थी। उन्होंने कहा कि हर घटना के समय दोनों के बीच संपर्क बना रहता था। उन्होंने एक वाकया सुनाते हुए कहा कि गुजरात के कई पर्यटक जम्मू कश्मीर जाते हैं और ऐसे ही एक पर्यटन दल पर आतंकियों ने हमला कर दिया था। उसमें 8 लोगों की मौत हो गई।

प्रधानमंत्री इस आतंकी वारदात को याद कर के भावुक हो उठे और बताया कि इस घटना के बाद उन्हें सबसे पहले गुलाम नबी आज़ाद का फोन कॉल आया। बकौल पीएम मोदी, वो फोन सिर्फ सूचना देने के लिए नहीं किया गया था बल्कि उनके आँसू भी रुक नहीं रहे थे फोन पर। उस समय प्रणव मुखर्जी देश के रक्षा मंत्री हुआ करते थे। पीएम मोदी ने बताया कि उन्होंने मुखर्जी को फोन कर के डेड बॉडीज को वापस लाने के लिए भारतीय वायुसेना के जहाज की मदद माँगी थी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुलाम नबी आज़ाद को राज्यसभा में दी विदाई

मुखर्जी ने उन्हें आश्वासन दिया कि व्यवस्था की जा रही है। लेकिन, रात में फिर आज़ाद का एयरपोर्ट से ही फोन आया और जैसे अपने परिवार के सदस्य की चिंता की जाती है, ठीक वैसी ही चिंता उन्हें भी थी। प्रधानमंत्री इस घटना के बारे में बताते-बताते अचानक से रो पड़े और उन्होंने ग्लास में रखा पानी पीकर फिर अपनी बात शुरू की। हालाँकि, इस दौरान सदन के सदस्यों ने मेज थपथपा कर उनका हौसला बढ़ाया।

पीएम मोदी ने आगे बताया कि पद और सत्ता जीवन में आते रहते हैं लेकिन उन्हें कैसे पचाना है, ये मायने रखता है। प्रधानमंत्री ने बताया कि इस घटना के दौरान जो कुछ भी हुआ, वो उनके लिए बड़ा भावुक था। उन्होंने बताया कि दूसरे दिन फिर फोन कॉल आया और आज़ाद ने पूछा कि सारे डेड बॉडीज पहुँच गए? पीएम ने कहा कि एक मित्र के रूप में वो घटनाओं और अनुभवों के आधार पर सभ्य और नम्र गुलाम नबी आज़ाद का आदर करते हैं और उन्हें विश्वास है कि देश के लिए कुछ कर गुजरने की इच्छा उन्हें चैन से बैठे नहीं देगी।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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