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नेताजी को काबू नहीं कर पा रहे थे गाँधी, नेहरू का पक्ष लिया: सुभाष चंद्र बोस की बेटी अनीता बोस बोलीं- कॉन्ग्रेस ने उनके साथ अन्याय किया

अनीता बोस ने कहा कि इस देश में उनके पिता की विरासत और पिता के साथ काफी गलत किया गया। वो कहती हैं कि नेताजी एक धर्मनिष्ठ हिंदू थे और वो धर्म के नाम पर लोगों की हत्या नहीं कर सकते थे, जैसा कि देश के बँटवारे के बाद हुआ था।

देश के महान स्वतंत्रता सेनानी और आजाद हिंद फौज के संस्थापक नेताजी सुभाषचंद्र बोस (Netaji Subhash Chandra Bose) की 125वीं जयंती के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) इंडिया गेट पर उनकी होलोग्राम प्रतिमा का अनावरण करेंगे। ये प्रतिमा ठीक उसी छतरी के नीचे स्थापित की जाएगी, जहाँ इस बीच नेताजी की बेटी जॉर्ज पंचम की प्रतिमा स्थापित है। सरकार के इस कदम का नेताजी की बेटी अनीता बोस ने स्वागत किया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कॉन्ग्रेस (Congress) के एक वर्ग ने उनके पिता के साथ अन्याय किया।

जी न्यूज की एंकर अदिति त्यागी को दिए एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में अनीता बोस (Anita bose) ने वो अनकही बातें साझा की, जिन पर बात करने से अक्सर सियासी बखेड़ा खड़ा हो जाता है। अनीता बोस ने कहा कि इस देश में उनके पिता की विरासत और पिता के साथ काफी गलत किया गया। वो कहती हैं कि नेताजी एक धर्मनिष्ठ हिंदू थे और वो धर्म के नाम पर लोगों की हत्या नहीं कर सकते थे, जैसा कि देश के बँटवारे के बाद हुआ था। बता दें कि विभाजन के दौरान लाखों हिंदुओं की हत्याएँ हुई थीं।

देश को आजाद कराना ही नेताजी का एकमात्र उद्देश्य था

अनीता बताती हैं कि उनके पिता नेताजी का एकमात्र उद्येश्य किसी भी तरह से देश को गुलामी की जंजीरों से आजाद कराना था। इसी मकसद को पूरा करने के लिए वो हिटलर से मिले थे। साथ ही वो ये भी चाहते थे कि जर्मनी, जापान और इटली भारत की स्वतंत्रता के प्रस्ताव पर हस्ताक्षर करें। इसके लिए उन्होंने इटली के तानाशाह रहे मुसोलिनी से भी मुलाकात की थी। उन्होंने कहा कि इसका अर्थ ये कदापि अर्थ नहीं है कि वो फासीवाद के समर्थक थे।

नेताजी को काबू नहीं कर पा रहे थे गाँधी

नेताजी की बेटी के मुताबिक, उनके पिता विद्रोही स्वभाव के थे, जिस कारण महात्मा गाँधी उन्हें अपने बस में नहीं कर पा रहे थे। गाँधी ने नेहरू का पक्ष लिया। कॉन्ग्रेस के एक धड़े ने नेताजी के साथ गलत किया, उनके साथियों की निंदा की गई। नेताजी के सहयोगियों को वो लाभ भी नहीं मिला, जो कि अंग्रेजों के लिए लड़ने वालों को मिला। नेताजी की मौत के बारे में अनीता मानती हैं कि विमान दुर्घटना में उनकी मौत के सबूत हैं और गुमनामी बाबा वाली कहानी हास्यास्पद है।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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