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जवाब ममता बनर्जी को, निशाने पर हिंदू: इशारों में हिंदुओं को ‘बिकाऊ’ बता गए ओवैसी

ओवैसी भले ही अन्य नेताओं पर सांप्रदायिक होने का आरोप लगाते हों, किन्तु उनका यह बयान बताता है कि वे किसी भी अन्य नेता से कहीं अधिक सांप्रदायिक हैं।

बंगाल विधानसभा चुनाव में अब असदुद्दीन ओवैसी भी चर्चा में हैं। ममता बनर्जी को जवाब देते हुए ओवैसी ‘गोत्र’ के विषय में कुछ ऐसा कह गए, जिसे लेकर उनकी तीव्र आलोचना हो रही है। ममता ने ओवैसी के विषय में कहा कि भाजपा से पैसे लेकर हैदराबाद से एक आदमी मुस्लिम वोट काटने आया है। इसके जवाब में ओवैसी ने कहा कि आप उस व्यक्ति को नहीं खरीद सकते जिसका कोई गोत्र नहीं है।

कुछ समय से ममता बनर्जी लगातार अपने ऊपर लगाए जाने वाले मुस्लिम तुष्टिकरण के आरोपों को नकारने का प्रयास करती रही हैं। उन्हें अब अपनी ‘हिन्दू पहचान’ भी याद आ रही है। चुनावी लाभ लेने के इसी प्रयास में कूच बिहार में ममता बनर्जी ने असदुद्दीन ओवैसी पर निशाना साधते हुए कहा कि हैदराबाद से एक आदमी बंगाल आया है जिसने भाजपा से पैसे लिए हैं और वह बंगाल में मुस्लिम वोट काटने का काम करेगा।

ओवैसी ने ट्विटर के माध्यम से ममता बनर्जी को जवाब दिया। 2002 के गुजरात दंगों का जिक्र करते हुए ओवैसी ने कहा कि ममता ने गुजरात में ‘मुस्लिमों के नरसंहार’ के विरुद्ध लाए गए प्रस्ताव के विरुद्ध मतदान किया था। ओवैसी ने पूछा कि क्या ममता ने यह मुफ्त में किया था, इसके पैसे लिए थे अथवा मंत्री पद के लिए चुप रहीं थी?   

ओवैसी ने आगे कहा कि आप उस व्यक्ति को नहीं खरीद सकते जिसका कोई गोत्र नहीं है। ओवैसी ने यह बात ममता बनर्जी के उस बयान के जवाब में कही, जिसमें उन्होंने कहा था कि हालाँकि उनका गोत्र ‘शांडिल्य’ है किन्तु फिर भी एक मंदिर में पुजारी द्वारा गोत्र पूछे जाने पर उन्होंने ‘माँ-माटी-मानुष’ को ही अपना गोत्र बताया था। इस बयान पर भाजपा और ओवैसी दोनों ने ही ममता बनर्जी की आलोचना की। भाजपा ने जहाँ ममता को ‘सीजनल हिन्दू’ बताया वहीं ओवैसी ने कहा कि बंगाल में खुद को ज्यादा हिन्दू दिखाने की रेस लगी हुई है।

हालाँकि ओवैसी का यह बयान कि जिसका गोत्र नहीं होता उसे ‘खरीदा’ नहीं जा सकता है, कहीं अधिक सांप्रदायिक है, क्योंकि इसका मतलब यही है कि सभी हिन्दू (क्योंकि गोत्र तो हिंदुओं के ही होते हैं) खरीदे-बेचे जा सकते हैं, लेकिन मुसलमान नहीं। ओवैसी भले ही अन्य नेताओं पर सांप्रदायिक होने का आरोप लगाते हों, किन्तु उनका यह बयान बताता है कि वे किसी भी अन्य नेता से कहीं अधिक सांप्रदायिक हैं।

सोशल मीडिया में भी कई यूजर्स ने ओवैसी के इस बयान के बाद उनकी आलोचना की।

हिंदुओं के लिए ओवैसी और उनकी पार्टी AIMIM की घृणा किसी से भी छुपी नहीं है। कुछ ही दिनों पहले तेलंगाना के भैंसा में हुए हिन्दू-मुस्लिम दंगों के बाद पुलिस ने 22 लोगों को गिरफ्तार किया, जिसमें ओवैसी की पार्टी का एक काउन्सलर भी शामिल है। रिपोर्ट्स के अनुसार AIMIM का एक नेता पर हत्या के प्रयास का केस दर्ज हुआ है।

2020 में कर्नाटक के गुलबर्ग में एक सीएए विरोधी रैली में AIMIM के नेता वारिस पठान मुसलमानों से यह अपील करते पाए गए कि अब मुसलमानों के संगठित होने और ‘स्वतंत्रता’ प्राप्त करने का समय आ गया है। पठान ने यह भी कहा था कि भले ही हिन्दू संख्या मे 100 करोड़ हैं किन्तु 15 करोड़ मुसलमान उन पर भारी पड़ सकते हैं। इस रैली में AIMIM अध्यक्ष ओवैसी भी मौजूद थे।  

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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