Wednesday, May 22, 2024
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रायबरेली के अँधेरे में जुगनू की तरह प्रियंका गाँधी को चमकाने आया, गाँधी परिवार की ही बेइज्जती करवा गया: पत्रकार/फिल्म डायरेक्टर की ‘दलाली’ को नेटिजन्स ने किया नंगा

लोगों ने अविनाश दास की वीडियो देख पूछा कि प्रियंका गाँधी का भाषण को कविता जैसा बताने वाले दास को दलाली छोड़ ये सवाल करना चाहिए था कि आखिर प्रियंका गाँधी को उस क्षेत्र में अंधेरे में भाषण क्यों देना पड़ा, जहाँ सालों से उनके परिवार का राज रहा है।

कॉन्ग्रेस के प्रचार को अद्भुत बनाने के लिए नए-नए हथकंडे इस्तेमाल हो रहे हैं। पार्टी के नेताओं और गाँधी परिवार को जमीन से जुड़ा साबित करने के लिए अलग-अलग तस्वीरें दिखाई जा रही हैं। इसी क्रम में प्रियंका गाँधी की एक वीडियो भी सामने आई है। इसमें प्रियंका अंधेरे में खड़े होकर रायबरेली में भाषण दे रही हैं और जनता टॉर्च जलाए हुए हैं। उनका यह ट्वीट देखने के बाद पत्रकार से फिल्म डायरेक्टर बने अविनाश दास भी उनकी चापलूसी में लग गए और प्रियंका गाँधी द्वारा अंधेरे में व बिन माइक के दिए गए भाषण को ‘कविता’ बताने लगे।

अविनाश दास को शायद लगा कि इस ट्वीट से लोगों में प्रियंका गाँधी की क्रांतिकारी छवि बनेगी, लेकिन हो इसका उलटा गया। दरअसल, प्रियंका गाँधी की वीडियो शेयर करके अविनाश दास ने लिखा था- “रायबरेली की बछरावां विधानसभा। कोई एक चौराहा। रात थी और दूर दूर तक अंधेरा। भीड़ ने अपने हाथों में रोशनी की ज़िम्मेदारी ली और जुगनू की तरह टिमटिमाती हुई प्रियंका गाँधी बिना माइक के चमक उठीं, गरज उठीं। जब मैं इस दृश्य को देख रहा था, तब मेरे लिए ये महज़ एक दृश्य नहीं, पूरी की पूरी कविता थी।”

उनके इस ट्वीट के बाद सोशल मीडिया यूजर्स ने अनिवाश दास का मजाक तो उड़ाया ही, साथ ही कॉन्ग्रेस पर भी निशाना साध दिया। लोगों ने पूछा कि प्रियंका गाँधी का भाषण को कविता जैसा बताने वाले दास को दलाली छोड़ ये सवाल करना चाहिए था कि आखिर प्रियंका गाँधी को उस क्षेत्र में अंधेरे में भाषण क्यों देना पड़ा, जहाँ सालों से उनके परिवार का राज रहा है।

पत्रकार ऋचा अनिरुद्ध ने अविनाश दास के ट्वीट पर पूछा, “लेकिन दूर दूर तक अंधेरा था ही क्यों? इतने साल बाद भी देश के सबसे ताकतवर परिवार के क्षेत्र की ऐसी हालत? दुख हुआ जान कर, कम से कम पिछले 10 साल में सोलर लाइट्स ही लगवा देते यहाँ के विधायक/सांसद…।”

राहुल गुप्ता ने लिखा, कॉन्ग्रेस की खानदानी सीट होने के बावजूद ऐसी क्या मजबूरी आ पड़ी कि अंधेरे में मोबाइल फ्लैश का उपयोग करके भाषण देना पड़ रहा है। चमचे जिसे प्रियंका गाँधी का स्वैग बता रहे हैं। दरअसल वह कॉन्ग्रेस के खानदानी सीट की शर्मनाक हकीकत है। चमचे इस वीडियो को दिखाकर वाहवाही लूटने की सोच रहे हैं… जैसे उसकी मालकिन वैसे उसके चमचे…।

एक यूजर ने कहा, “तुम जैसे मूर्ख कविता लिखते रह गए और गाँधी खानदान पिछले कई दशकों तक रायबरेली और अमेठी में राज करता रहा। फिर भी बिजली, पानी जैसी आवश्यकता की चीजें नहीं दे पाए, जिसका उदाहरण तुम्हारे सामने है। ये देखकर तुम्हें शर्म नहीं आ रही। तुम उनके चरण चाटने में लगे हो।”

यूजर्स ने कहा कि 70 साल तक जहाँ गाँधी परिवार जमा रहा। वहाँ अगर सड़क पर स्ट्रीट लाइट नहीं है तो इसमें महिमामंडन करने वाली बात होनी चाहिए या फिर शर्म करने की।

रोहित नाम के यूजर ने कहा, “जब कोई दर्ज़ी फटे हुए लंगोट में अपनी दरिद्रता पर गर्व करता पहलवानी करने आए तो लोगों के मन में ये हास्यभाव स्वतः ही उठ जाता है की भई पहले अपना लंगोट तो सिल ले। यही भाव अंधेरे में खड़ी उस स्त्री को देखकर आ रहा है जो उस वंश से ही जिसने यहाँ 50 वर्ष सत्ता भोग किया।”

बता दें कि प्रियंका गाँधी 8 मई को रायबरेली में जनसभा को संबोधित करने गईं थीं। उन्होंने इसकी क्लिप शेयर करते हुए कहा था कि पिछले सौ साल का इतिहास कहता है कि रायबरेली हमेशा लोकतंत्र के साथ खड़ा रहा है। आजादी से पहले यहाँ के किसानों ने ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ आंदोलन किया और उसके बाद भी हमेशा राजनीति को दिशा दिखाई है।

उनकी इस क्लिप पर भी नेटिजन्स ने काफी मजाक बनाया था। उन्हें कहा गया था कि आजादी के बाद 17 बार उनकी पार्टी के लोग जिस जगह से सांसद रहे, 65 साल तक राज किया। फिर भी क्या कारण है टोर्च की रौशनी में जनता को संबोधित करना पड़।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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