EVM के खिलाफ विपक्ष एकजुट, मामले को लेकर SC जाने का एलान

"जिस पार्टी का बटन दबाया जा रहा है, वोट उस पार्टी को न जाकर किसी और पार्टी को जा रहा है और वीवीपैट में भी पर्ची 7 सेकंड की जगह केवल 3 सेकंड में ही दिख जाती है।"

लोकसभा चुनाव के पहले चरण के मतदान के बाद विपक्ष एक बार फिर से ईवीएम को लेकर हमलावर हो गया है। इस मुद्दे को लेकर विपक्षी दलों के नेताओं ने रविवार (अप्रैल 14, 2019) को एक बैठक की। इसमें तय हुआ कि 21 विपक्षी दल आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू के नेतृत्व में एक बार फिर से सुप्रीम कोर्ट जाएँगे। कोर्ट से आग्रह किया जाएगा कि चुनाव आयोग हर विधानसभा में कम से कम 50% मतों का ईवीएम-वीवीपैट से मिलान करे। इस बात को लेकर विपक्ष ने पूरे देश में अभियान चलाने की भी बात कही है।

नायडू ने बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि विपक्षी दल सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले से खुश नहीं हैं, जिसमें कोर्ट ने चुनाव आयोग को निर्देश दिया था कि लोकसभा सीट की प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र के पाँच बूथों पर ईवीएम और वीवीपैट का मिलान हो। बैठक में शामिल नेताओं का कहना है कि लोकतंत्र की रक्षा और मतदाता के अधिकार के हित के लिए फिर से सुप्रीम कोर्ट जाना चाहिए।

इस दौरान कॉन्ग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि पहले चरण के चुनाव के बाद से ही ईवीएम पर सवाल उठे हैं, उन्हें नहीं लगता कि चुनाव आयोग इस पर पर्याप्त ध्यान दे रहा है। उनका कहना है कि जिस पार्टी का बटन दबाया जा रहा है, वोट उस पार्टी को न जाकर किसी और पार्टी को जा रहा है और वीवीपैट में भी पर्ची 7 सेकंड की जगह केवल 3 सेकंड में ही दिख जाती है।

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दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल ने कहा कि मशीनों में कोई गड़बड़ी नहीं है, बल्कि उनके साथ छेड़छाड़ की गई है। केजरीवाल ने कहा कि ईवीएम को इस तरह से डिजाइन किया गया है कि बटन दबाने पर सिर्फ भाजपा को ही वोट जाता है। सीएम केजरीवाल ने कहा कि वे इंजीनियर हैं, ऐसे में वे इन चीजों को अच्छी तरह से समझते हैं। इसके साथ ही उन्होंने चुनाव आयोग पर ईवीएम के हेरफेर की शिकायतों पर ध्यान नहीं देने का भी आरोप लगाया है।

गौरतलब है कि इससे पहले चंद्रबाबू नायडू के साथ विपक्षी दलों के कई नेताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त सुनील अरोड़ा से मुलाकात की थी। इस दौरान उन्होंने 50% ईवीएम-वीवीपैट का मिलान करने की माँग की थी। 21 विपक्षी दलों ने सुप्रीम कोर्ट में भी इसके लिए याचिका दाखिल की थी। चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली बेंच, विपक्षी पार्टियों की 50% पर्चियों के मिलान की माँग पर सहमत नहीं हुई और कहा था कि इसके लिए बड़ी संख्या में लोगों की जरूरत पड़ेगी, बुनियादी ढाँचे को देखते हुए ये मुमकिन नहीं लगता। मगर सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को ईवीएम और वीवीपैट के मिलान का दायरा बढ़ाते हुए हर लोकसभा सीट के प्रत्येक विधान सभाओं के 5 बूथों पर ईवीएम और वीवीपैट का मिलान करने के निर्देश दिए थे।

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SC और अयोध्या मामला
"1985 में राम जन्मभूमि न्यास बना और 1989 में केस दाखिल किया गया। इसके बाद सोची समझी नीति के तहत कार सेवकों का आंदोलन चला। विश्व हिंदू परिषद ने माहौल बनाया जिसके कारण 1992 में बाबरी मस्जिद गिरा दी गई।"

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