Sunday, August 1, 2021
Homeराजनीतिकमल हासन की पार्टी के साथ गठबंधन कर सकती है ओवैसी की एआईएमआईएम, तमिलनाडु...

कमल हासन की पार्टी के साथ गठबंधन कर सकती है ओवैसी की एआईएमआईएम, तमिलनाडु में अगले साल हैं विधानसभा चुनाव

बिहार चुनाव में सफलता हासिल करने के बाद ओवैसी अप्रैल-मई 2021 में होने वाले तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के लिए तैयारियाँ शुरू कर चुके हैं। बिहार चुनाव में 5 सीट जीतने वाली ओवैसी की पार्टी तमिलनाडु के चुनावों में लगभग 25 सीट पर चुनाव लड़ सकती है।

तमिलनाडु में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं। उससे पहले सियासी हलचल तेज हो गई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक़ असदुद्दीन ओवैसी की ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लमीन (AIMIM) और कमल हासन की मक्कल नीधि मैयम (MNM) आगामी चुनावों के लिए गठबंधन कर सकती है।     

न्यूज़ 18 में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार बिहार चुनाव में सफलता हासिल करने के बाद ओवैसी अप्रैल-मई 2021 में होने वाले तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के लिए तैयारियाँ शुरू कर चुके हैं। बिहार चुनाव में 5 सीट जीतने वाली ओवैसी की पार्टी तमिलनाडु के चुनावों में लगभग 25 सीट पर चुनाव लड़ सकती है। 2019 आम चुनावों के दौरान कमल हासन के साथ ओवैसी सहमति बनाने में कामयाब नहीं हुए थे। लेकिन अब इसकी सम्भावनाएँ नज़र आ रही हैं।

ओवैसी सोमवार को एआईएमआईएम (तमिलनाडु) पदाधिकारियों के साथ बैठक भी करने वाले हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़ ओवैसी जनवरी के दौरान आगामी विधानसभा चुनावों की रणनीति को अंतिम स्वरूप देने के लिए चेन्नई और त्रिची में प्रेस वार्ता कर सकते हैं। कमल हासन ने भी सोमवार को कहा कि उनकी पार्टी आगामी तमिलनाडु विधानसभा चुनावों का हिस्सा बनेगी। सीटों को लेकर उनका कहना था, “उन सीटों की घोषणा बाद में करूँगा जिन पर मेरी पार्टी के उम्मीदवार चुनाव लड़ेंगे।“

एआईएमआईएम का बढ़ता प्रभाव

एआईएमआईएम को बिहार विधानसभा चुनावों में सफलता हासिल हुई थी। पार्टी ने 5 मुस्लिम बाहुल्य सीटों अमौर, कोचाधमन, बहादुरगंज, जोकीहाट और बायसी पर जीत दर्ज की थी। इसके अलावा एआईएमआईएम ने हैदराबाद के निकाय चुनावों में भी 44 सीटें हासिल की थीं।

मुस्लिम समुदाय के लोगों पर पार्टी का राजनीतिक प्रभाव बढ़ने की वजह से एआईएमआईएम मदुरै, वेल्लौर, रानीपेट, तिरुपत्तूर, कृष्णगिरी, रामनाथ, पुदुकोट्टई, त्रिची और तिरुनवेल्ली में भी बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद कर रही है, क्योंकि इन सभी सीटों पर पर्याप्त मुस्लिम वोट बैंक है। 2011 में आई जनगणना के मुताबिक़ तमिलनाडु में मुस्लिम आबादी 5.86 फ़ीसदी है।  

अभी तक वहाँ का मुस्लिम वोट परंपरागत रूप से डीएमके और एआईएडीएमके को जाता था, जबकि वहाँ पर तमाम मुसलमान केंद्रित राजनीतिक दल हैं। इसमें इंडियन नेशनल लीग, इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग, मणिथानेया मक्कल कात्ची, मणिथानेया जननायागा कात्ची, ऑल इंडिया मुस्लिम लीग और तमिलनाडु तौहीद जमात शामिल हैं। फ़िलहाल ओवैसी की पार्टी तमिलनाडु में बड़ी सफलता की उम्मीद देख रही है।

एआईएडीएमके को ना, डीएमके के जवाब का इंतज़ार

नवंबर 2020 के दौरान एआईएमआईएम के तमिलनाडु अध्यक्ष ने डीएमके को गठबंधन का प्रस्ताव भेजा था, फ़िलहाल उनकी तरफ से प्रतिक्रिया आना बाकी है। एआईएमआईएम ने एआईएडीएमके के साथ किसी भी तरह का गठबंधन करने से साफ़ इनकार कर दिया है, क्योंकि वह भाजपा के साथ चुनाव लड़ने वाली है। एक सूत्र के मुताबिक़, “ओवैसी प्रदेश के सभी राजनीतिक दलों को एक करके चुनाव लड़ने की योजना बना रहे हैं। एआईएमआईएम इन चुनावों में मक्कल नीधि मैयम (कमल हासन की पार्टी), नाम तमिलर और अन्य छोटे दलों के साथ गठबंधन कर सकते हैं.”

पश्चिम बंगाल में चुनाव लड़ेगी एआईएमआईएम

ओवैसी ने पहले ऐलान किया था कि उनकी पार्टी आगामी पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव भी लड़ेगी। चुनाव पर पार्टी का पक्ष रखते हुए ओवैसी ने कहा था, “बिहार की जीत उन लोगों के लिए जवाब है जिन्हें ऐसा लगता है कि एआईएमआईएम को अन्य राज्यों में चुनाव नहीं लड़ना चाहिए। क्या हम एनजीओ हैं जो अभी तक सिर्फ सेमिनार आयोजित कराएँगे और पेपर प्रेजेंट करेंगे। हम राजनीतिक दल हैं और हम चुनाव लड़ेंगे।“     

  सहयोग करें  

एनडीटीवी हो या 'द वायर', इन्हें कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

‘ममता बनर्जी महान महिला’ – CPI(M) के दिवंगत नेता की बेटी ने लिखा लेख, ‘शर्मिंदा’ पार्टी करेगी कार्रवाई

माकपा नेताओं ने कहा ​कि ममता बनर्जी पर अजंता बिस्वास का लेख छपने के बाद से वे लोग बेहद शर्मिंदा महसूस कर रहे हैं।

‘मस्जिद के सामने जुलूस निकलेगा, बाजा भी बजेगा’: जानिए कैसे बाल गंगाधर तिलक ने मुस्लिम दंगाइयों को सिखाया था सबक

हिन्दू-मुस्लिम दंगे 19वीं शताब्दी के अंत तक महाराष्ट्र में एकदम आम हो गए थे। लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक इससे कैसे निपटे, आइए बताते हैं।

प्रचलित ख़बरें

- विज्ञापन -

 

हमसे जुड़ें

295,307FansLike
112,404FollowersFollow
394,000SubscribersSubscribe